Sanjay Tiwari

रोटी पर रॉयल्टी खाना चाहती हैं कंपनियां

2 अक्टूबर को साबरमती से किसान स्वराज यात्रा की शुरूआत करनेवाले दल की प्रमुख और किसानों के लिए काम करनेवाली कविता कुरुगंटी कहीं से किसान नेता नहीं है, लेकिन वे भी महसूस करती हैं कि देश में किसानों के लिए आज राष्ट्रीय स्तर पर कोई नेता नहीं है जो किसानों के हित की बात मुख्यधारा की राजनीति में कर सके. 2 अक्टूबर 2010 से 11 दिसंबर 2010 के बीच सम्पन्न यह यात्रा देश के बीस राज्यों के 100 से अधिक जिलों में होकर गुजरी. पूरी यात्रा के दौरान कविता कुरुगंटी ने क्या अनुभव किया, उनसे बातचीत के जरिए हमने जानने की कोशिश की. ... Full story

हिन्दुत्व की चिल्लपो और भाई सुरेश चिपलूणकर
 

हिन्दुत्व की चिल्लपो और भाई सुरेश चिपलूणकर

इतनी जल्दी सुरेश चिपलूणकर नतीजे पर पहुंच जाएंगे इसकी उम्मीद मुझे भी नहीं थी. अभी जुमा जुमा चार छह रोज पहले उन्होंने अपने ब्लाग पर इच्छा व्यक्त की थी कि वे हिन्दुत्व को सूचना के स्तर पर मजबूती पहुंचाने के लिए एक वेबसाइट बनाने की तमन्ना रखते हैं, और यह काम वे लोगों के सहयोग से करना चाहते हैं. उनका कोई छह लाख साल का बजट है, अगर इतना पैसा इकट्ठा हो जाए तो वे समाचार विचार से जुड़ी एक ऐसी वेबसाइट शुरू कर सकते हैं. ... Full story

आमचुनाव की आहट
 

आमचुनाव की आहट

इस बार न गडकरी गश खाकर गिरे और न आडवाणी को रैली आधे रास्ते रोकनी पड़ी. दोपहर बाद दिल्ली के रामलीला मैदान के मंच पर आ रही गुनगुनी धूप में नितिन गडकरी को भी कोई दिक्कत नहीं थी और भाजपा के वे सभी मैनेजरनुमा नेता महासंग्राम का ऐलान करते नजर आ रहे थे जो आम आदमी की राजनीति के नाम पर खास लोगों के बीच जगह बनाने को ही अपना कौशल समझते हैं. हाल में ही दिल्ली के नये निजाम नियुक्त किये गये विजेन्दर गुप्ता के जिम्मे मंच संचालन का जिम्मा था जो बार बार "लाखों लोगों" भीड़ का संबोधन देकर यह साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि उनका प्रदेश में नेतृत्व कामयाब हो रहा है. ... Full story

4 दिसंबर 1926 से 17 दिसंबर 2010
 

निर्बल काया का सबल समाजवादी

सुरेन्द्र मोहन सदा सदा के लिए शांत हो गये हैं. देश में कभी समाजवादी चिंतन की धुरी पर आसीन रहे सुरेन्द्र मोहन की काया भले ही आज शांत हुई हो लेकिन समाजवाद के मद्धिम होने के साथ ही उनकी वाणी और विचार भी अप्रांसगिक होने लगे थे. जिस दौर ने समाजवाद को फैशन बनाया था उस दौर के नेताओं का धीरे धीरे होते अवसान ने शायद सुरेन्द्र मोहन को इतना अप्रांसगिक बना दिया था कि इंटरनेट पर उनका नाम खोजने पर उनसे ज्यादा सूचनाएं सुरेन्द्र मोहन पाठक के बारे में मिलती हैं. ... Full story

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Sanjay Tiwari Sanjay Tiwari आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com

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