Sanjay Tiwari
नया मीडिया: चुनौतियां और संभावनाएं
दिल्ली के एक छोटे से सभागार में, बहुत ही कम लोगों की उपस्थिति में, बहुत सीमित समय में, लघु पुस्तिका के लोकार्पण के बहाने नये मीडिया के बड़े बड़े संपने और संभावनाएं तलाशी जा रही थीं. नये मीडिया को न समझ पाने की तड़प ने देश में एक बड़े वर्ग को आंदोलित कर रखा है कि जितनी जल्दी हो सके इस मीडिया में प्रवेश हासिल कर लेना है. क्या व्यक्ति और क्या संस्था समूह. यह भी एक ऐसे ही समूह इंडिया पालिसी फाउण्डेशन की ओर से किया गया आयोजन था. इंडिया पालिसी फाउण्डेशन राष्ट्रवादी विचारों को पुष्ट करने के लिए गठित किया गया एक शोध संस्थान है जिसे हिन्दी में बहुत ही सुन्दर नाम दिया गया है- भारत नीति प्रतिष्ठान. ... Full story
गणतंत्र का उत्सव पर्व
तलवार पर तेज धार हथियार से हमला करके सबक सिखानेवाला युवक उत्सव शर्मा अब पुलिस हिरासत में है. बेटे को लेकर चिंतित बाप की गुहार है कि वह मानसिक रूप से संतुलित नहीं है इसलिए उसके साथ कोई बुरा बर्ताव न किया जाए. केएल शर्मा को डर है कि पुलिस उसके बेटे को हत्या के प्रयास में नामजद कर सकती है. ऐसा हुआ तो उनके बेटे की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी. उत्सव शर्मा बनारस के हैं. बिल्कुल ही नौजवान है. 20-22 की उम्र है. व्यवस्था से व्यथित उत्सव शर्मा न्याय और अन्याय के बीच उस पतली रेखा को पार कर गये हैं जिसे हमारे गणतंत्र ने पिछले साठ सालों में भरसक मोटा करने का काम किया है. इस लिहाज से देखें तो उनके बाप की अपील सही नजर आती है कि उत्सव शर्मा का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है. अगर वे मानसिक रूप से संतुलित होते तो निश्चित रूप से सबकुछ बर्दाश्त करके बहस करते रहते. ... Full story
मोंटेक और ब्रजेश भी पद्म विभूषण हो गये
इसे आप चाहें तो भाजपा को कांग्रेस का राजनीतिक जवाब समझ लीजिए या फिर फूट डालो राज करो वाली नीति का अनुसरण. लेकिन कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के कार्यकाल में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिन पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गयी है उसमें ब्रजेश मिश्र का भी नाम है. वह भी पद्म विभूषण की पदवी से विभूषित. यानी कांग्रेस की सरकार अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी और पूर्व राजनयिक ब्रजेश मिश्र को सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से नवाज रही है. ... Full story
खतरे की घंटी है नंबर पोर्टेबिलिटी
देश में मोबाइल सेवा प्रदाताओं की सेवा और गुणवत्ता सुधारने के लिए तीन साल पहले जिस नंबर पोर्टेबिलिटी को लागू करने की पहल की गयी थी आज वह पूरी हो गयी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिल्ली में एक साथ पूरे देश में इस सेवा को शुरू करने की घोषणा की. अब कोई भी मोबाइल ग्राहक अपना नंबर बरकरार रखते हुए मोबाइल आपरेटर को बदल सकता है. इसके लिए उसे 19 रूपये का एक कूपन खरीदना होगा जिसका इस्तेमाल करके वह अपने आपरेटर को बदल सकता हैं. ... Full story
पांचवां वेद है विकीपीडिया
मुक्त ज्ञान कोष। पिछले दो तीन सालों में भारत में भी ये तीन शब्द अच्छे से चर्चा में आ चुके हैं. इंटरनेट पर जमा होती जमात के लिए मुक्त ज्ञान कोष न तो ये तीन शब्द अपरिचित हैं और न ही इन तीन शब्दों को एक साथ जोड़नेवाली वेबसाइट. 2001 में दुनिया को हैलो बोलते हुए जिम्मी वेल्स और लैरी सांगर ने ज्ञान बांटने का जो जिम्मा उठाया था, आज वह इतना समृद्ध और व्यापक हो चला है कि उसे पांचवा वेद मान लेने में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. लेकिन विकीपीडिया को पांचवा वेद कहने से पहले उन तीन शब्दों की व्याख्या जरूरी है जिनके आलोक में विकीपीडिया को पांचवा वेद मानना आवश्यक हो जाता है. ... Full story
आखिरकार अमर बने खबर
अमर सिंह राजनीति की ऐसी मक्खी हैं जिन्हें दूध के अंदर रखो तो दूध खराब हो जाता है और दूध से बाहर निकाल दो मक्खी मर जाती है. समाजवादी पार्टी में दूध की मक्खी की तरह बाहर फेंक दिये गये अमर सिंह अब अक्सर खबर नहीं बनते हैं. किसी दौर में नेताजी के सिपाही भी जिस अमर सिंह को गेस्ट हाउस के बाहर खड़ा कर दिया करते थे वही अमर सिंह मुलायम सिंह की नाक पर ऐसी मक्खी बनकर बैठे की नाक काटने की नौबत आ गयी. लेकिन यह तो भला हो यादव परिवार का जिसनें संकल्पबद्ध होकर अमर सिंह को आखिरकार बाहर का रास्ता दिखा ही दिया लेकिन बाहर आते ही अमर सिंह अतिवादी हो गये. ... Full story
आखिर कैसे दूर होगा रश्मि हंस के मन का दंश?
समझौता करके जो लोग शीर्ष पर पहुंचते हैं, वे शीर्ष पर पहुंचकर अक्सर आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं. भारत की हिन्दी पत्रकारिता ने पिछले चार दशकों में व्यापक विस्तार किया है. चार दशक पहले अगर एक लाख के सर्कुलेशन वाला अखबार राष्ट्रीय होने का दर्जा पा लेता था तो आज एक करोड़ छपनेवाला हिन्दी अखबार भी दूसरे नंबर का ही माना जाता है. अब शीर्ष पर पहुंचने के लिए करोड़ की तरूणाई के आगे जाने की जरूरत है. हिन्दी अखबारों के इस अनपेक्षित विस्तार ने कई तरह की विडंबनाओं को पैदा किया है. इसमें सबसे बड़ी विडंबना हैं ऐसे अखबारों में शीर्ष पर बैठे लोगों का व्यवहार. ... Full story
जेन्टलमैन जगनमोहन की धमकी है, हल्के में मत लीजिए!
स्वर्गीय वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र जगनमोहन रेड्डी ने जितनी तेजी से व्यवसाय में तरक्की किया था, उससे भी अधिक तेजी से राजनीति में अपना पैर पसार लेंगे इसकी उम्मीद तो शायद वाईएसआर ने भी कभी नहीं की होगी. वाईएसआर की मौत के बाद मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोंकनेवाले जगनमोहन रेड्डी ने मंगलवार को दल बल के साथ दिल्ली के दरवाजे पर दस्तक दे दिया. वे किसानों की मांग लेकर दिल्ली आये और एक दिन के लिए जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे. ... Full story
मरने के बाद माहेश्वरी भी 'महान' हो जाते हैं
पहले तो अतुल माहेश्वरी की आत्मा को श्रद्धांजलि. उनके परिवार के लोगों के प्रति पूरी श्रद्धा रखते हुए उन्हें सांत्वना. हालांकि इस सांत्वना की जरूरत उनके परिवार को शायद ही हो. क्योंकि इतिहास गवाह रहा है कि व्यापारिक घरानों में जीते जी संबंधों को जितनी संदीदगी से निभाया जाता है, मौत के बाद उसे उतनी ही तत्परता से भुला भी दिया जाता है. ऐसा शायद इसलिए क्योंकि उनके पास जीवन से भी अधिक एक साम्राज्य होता है और जहां कहीं भी राज साम्राज्य होगा वहां मौत के शोक से ज्यादा जीवन की जरूरतें हमें व्यस्त कर देती हैं. इसलिए शायद ज्यादा देर नहीं लगेगी जब अमर उजाला घराने में मौत के शोक और व्यथा के मंजर को अलविदा कह दिया जाएगा और संपत्ति के बंटवारे की खबरें हवा में तारी हो जाएंगी. ... Full story
सुनो आरुषि, अब इन तलवारों के घर कभी पैदा मत होना!
सुनो! आरुषि। तुम जहां कहीं भी हो सुनना जरूर। तुम्हारी मौत के ढाई साल बाद अब साबित हो गया है ति तुम्हारी मौत केवल तुम्हारी मौत नहीं थी. यह मां-बाप के उस पवित्र रिश्ते की मौत भी है जिसे तुम्हारे बाप ने अपने पांच नंबर के गोल्फ से अंजाम दिया था. तुम्हारे जीते जी तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हारे साथ क्या व्यवहार किया यह तो हम कभी नहीं जान पायेंगे लेकिन तुम्हारी मौत को तुम्हारे मां-बाप ने इंसानियत की मौत बना दिया है. रिश्तों की ऐसी घिनौनी मौत जिसे जान सुनकर सिर शर्म से धरती में गड़ जाता है, इसे ऊपर उठायें भी तो कैसे? ... Full story
