Sanjay Tiwari

पूरा साल सिर्फ अन्ना और लोकपाल

सैंतालिस, सतहत्तर और इक्यानबे के बाद साल दो हजार ग्यारह भारतीय गणतंत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल रहा है. इस अकेले एक साल ने हमारी कई शिकायतों को दूर कर दिया है. हमारी पहली शिकायत दूर हुई कि देश में जन आंदोलन खड़े नहीं हो सकते. हमारी दूसरी शिकायत दूर हुई टेलीवीजन मीडिया बे-सिर पैर का बकवास बनकर रह गया है. हमारी तीसरी शिकायत दूर हुई देश का खाता पीता मध्य वर्ग सड़कों पर नहीं आता और सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ी शिकायत दूर हुई कि तंत्र को चुनौती नहीं दी जा सकती. ... Full story

लो! आ गया कांग्रेस का लोकपाल
 

लो! आ गया कांग्रेस का लोकपाल

लोकपाल के लिए कांग्रेस ने जो राजनीतिक कर्मकाण्ड रचाया था उसकी पूर्णाहुति हो गई. करीब नौ महीने पहले अप्रैल से जिस लोकपाल के लिए बवंडर उठना शुरू हुआ था उसे कांग्रेस ने समुद्र में समाहित कर दिया है. अन्ना हजारे से कांग्रेस को जो राजनीतिक चुनौती मिली थी उसे निपटाने में उसे करीब नौ महीने लगे जरूर लेकिन आखिरकार अब कांग्रेस विजेता है. कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतिकारों ने लोकसभा से मर्जी का लोकपाल विधेयक भी पारित करवा लिया, उसे संवैधानिक दर्जा भी नहीं देने दिया, अन्ना हजारे का भी काम तमाम कर दिया और जीत का सेहरा अपने सिर बांधते हुए हार का ठीकरा भाजपा के सिर फोड़ दिया. ... Full story

11 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे
 

अन्ना के अनशन का आठवां आयाम

जंतर मंतर पर इस बार वैसी अफरा-तफरी नहीं है जैसी अप्रैल में थी. ज्यादातर सिरों पर "मैं अन्ना हूं" की टोपियां हैं और व्यवस्था बनानेवाले कार्यकर्ताओं के हाथ में वाकी टाकी भी दिख रहा है. भीड़ को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए नौजवान कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज जंतर मंतर पर मौजूद है जो पुलिस बल से ज्यादा मुस्तैदी और विनम्रता से अनशन पर आये लोगों को समायोजित कर रहा है. जंतर मंतर रोड के एक सिरे पर अन्ना का मंच सजा है तो दूसरे सिरे तक लोगों को अन्ना को लाइव दिखाने के लिए दो बड़े बड़े एलसीडी स्क्रीन लगे हैं. व्यवस्था के नाम पर इतना कुछ है कि उसे देखकर हम अब बिल्कुल ही यह नहीं कह सकते कि अन्ना हजारे का आंदोलन निरा जनता का आंदोलन है. अब इस आंदोलन के पीछे खड़े मजबूत संगठन साफ तौर पर महसूर किये जा सकते हैं. ... Full story

कितने गलत हैं कपिल सिब्बल?
 

कितने गलत हैं कपिल सिब्बल?

पहले पाठकों की प्रतिक्रिया सुनिये- कपिल सिब्बल कुत्ता है. अब यह भी समझिए कि कपिल सिब्बल को इस विशेषण से क्यों नवाजा जा रहा है? अमेरिका के अखबार न्यूयार्क टाइम्स का कहना है कि कपिल सिब्बल ने सोमवार को गूगल, याहू और फेशबुक के प्रतिनिधियों को अपने पास बुलाया था, बातचीत करने के लिए. कुछ कुछ वैसे ही जैसे टीम अन्ना या रामदेव से कपिल सिब्बल पहले बात कर चुके हैं. इसी तरह उन्होंने बुलाकर कंपनी प्रतिनिधियों से बात की और चेतावनी दी कि इंटरनेट पर कुछ प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ जिस तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं (जाहिर है इसमें दो ही नाम है मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी) उसे रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए. कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा कि आप कानून बना दीजिए हम पालन कर लेंगे, और वहां से चले गये. ... Full story

संपादक हो गये सौमित्र जी
 

संपादक हो गये सौमित्र जी

अनिल सौमित्र जब भी मुझे मिलते हैं मैं हमेशा उन्हें कहता हूं- अनिल जी के सौ मित्र, उसमें से एक मैं भी हूं. सौमित्र का संधि विच्छेद करके जो विशेषण निकलता है वे उस विशेषण के बिल्कुल अनुरूप हैं. सौम्य हैं. शांत हैं. और मित्र तो ऐसे बनाते हैं जैसे कोई चना चबैना हो. आसान सफर हो या मुश्किल डगर, जैसे चना चबैना सबसे सस्ता और सुमग होता है वैसे ही अपने अनिल सौमित्र सबके लिए सुगम हैं. यही अनिल सौमित्र अब संपादक हो गये हैं. ... Full story

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Sanjay Tiwari Sanjay Tiwari आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com

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