COMMENTARY
Feb
20
2012
संगीत में शिवोहम्
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मनीष व्यास को संगीत की नई सोच प्रेम जोशुआ ने दी और प्रेम जोशुआ को संगीत की यह नई सोच एक सफेद दाढ़ीवाले ने दी. जर्मनी के प्रेम जोशुआ जब भारत आये तो वे उन आचार्य रजनीश के पास पहुंचे जो पूना और मुंबई के बीच रहा करते थे और प्रवचन किया करते थे. उन आचार्य रजनीश ने प्रेम जोशुआ को एक नया संगीत सिखा दिया. शांति का संगीत. मौन का संगीत. अंदर का संगीत. यह शांति, मौन और अंदर का संगीत जोशुआ को इतना जंचा कि फिर भारत सहित पूरी दुनिया में घूम घूम कर मौन का संगीत बिखेरने लगे. मुंबई के मनीष व्यास इसी दौर में उनसे जुड़े और उनके बैण्ड में गाने बजाने के अलावा अपने खुद के एलबम भी बनाने लगे हैं.
ये जो प्रेम जोशुआ हैं या फिर मनीष व्यास हैं, वे कौन सा ऐसा संगीत साध रहे हैं कि उन्हें सुनने की जरूरत है. पूरे भारत में संगीत की नानाविध परंपराएं और विधाएं हैं. आमतौर पर हम इन्हें कीर्तन कहते हैं. पूरब पश्चिम उत्तर और दक्षिण कहीं भी चले जाएं कीर्तन सुनने को मिल जाएगा. यह कीर्तन संगीत
Feb
17
2012
जीत मिली लेकिन करिश्मा कम हुआ
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अगर हम महाराष्ट्र के इन मिनी चुनावों का परिणाम देंखे तो संकेत मिलता है कि प्रदेश में आरपीआई से गठबंधन के बाद भी शिवसेना भाजपा के दावे में कोई खास मजबूती नहीं आई है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पहले ही भांप लिया था कि स्थिति कमजोर हो सकती है इसलिए उन्होंने मुंबई और ठाणे में दो सभाओं को संबोधित भी किया जिससे चुनाव में शिवसैनिकों का उत्साह कायम रहे. लेकिन 2012 के चुनाव नतीजे 2014 के चुनावों के मद्देनजर शिवेसना भाजपा को कोई अच्छा संकेत नहीं दे रहे हैं. जिन संभावनाओं के मद्देनजर रामदास आठवले की आरपीआई को गठजोड़ का हिस्सा बनाया गया था वे संभावनाएं परिणाम देती दिखाई नहीं दे रही हैं.
इन नगरपालिका चुनावों में शिवसेना भाजपा का मुंबई पर कब्जा बरकार है जहां वे पिछले सत्रह साल से बहुमत में हैं. करीब 21 हजार करोड़ के सालाना बजटवाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर शिवसेना के कब्जे से उसके अपने पार्टी तंत्र को एकजुट रखने में मदद मिलती है. शायद यही कारण है कि इस बार बाल ठाकरे मैदान में उतरे. आशंका थी कि राज ठाकरे चोट पहुंचा सकते हैं और 28 सीटें अपने दम पर जीतकर राज ठाकरे ने बुरा
Feb
15
2012
100 करोड़ का प्रेम मंदिर
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ग्यारह साल में 100 करोड़ की लागत से बने कृपालु महाराज के प्रेम मंदिर का लोकार्पण 17 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच किया जाएगा. यह मंदिर वृंदावन में भगवान कृष्ण और राधा के पेम को दर्शाता है. इस मंदिर के निर्माण में 11 साल का समय और करीब 100 करोड रुपए की धनराशि लगी है. इसमें इटालियन करारा संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है. इसे राजस्थान और उत्तर पदेश के एक हजार शिल्पकारों ने कडी मेहनत के बाद बनाया है.
जगदगुरू कृपालु परिषद श्यामा श्याम धाम प्रेम मंदिर के पचारक स्वामी मुकुंदानंद ने आज लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भगवान कृष्ण और राधा के इस प्रेम मंदिर का शिलान्यास 14 जनवरी 2001 को कृपालु जी महाराज ने लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में किया था.
उसी दिन से राजस्थान और उत्तर पदेश के एक हजार शिल्पकार अपने साथ हजारों सहयोगी मजदूरों के साथ इस मंदिर के निर्माण कार्य में लग गए. ग्यारह साल के कठोर श्रम के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मंदिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है.
वृदांवन के चटिकारा मार्ग पर स्थित यह अद्वितीय मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनःजागृत होने का संकेत द
है और कृपालु महाराज का इस कृष्णFeb
14
2012
जागरण ने पेश किया पेड न्यूज का नायाब उदाहरण
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15 फरवरी को इस क्षेत्र में मतदान से पूर्व जागरण में छपे ये दो विज्ञापन संकेत करते हैं कि चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद भी अखबारों ने पेड न्यूज के नये नये तरीके इजाद कर लिये और कारोबार को अंजाम दिया. लोकसभा चुनाव में अखबारों से जो सबसे बड़ी शिकायत थी वह यह कि जो कन्टेन्ट लिखा गया उसमें विज्ञापन शब्द नहीं लिखा गया इसलिए उससे यह समझने में मुश्किल हुई कि अखबार में छपी सामग्री समाचार है या विज्ञापन. तो इसका तोड़ जागरण ने कुछ यूं निकाला है कि सामग्री तो विज्ञापन है लेकिन विज्ञापन के अंदर जो लिखा है वह समाचार है.
ये दोनों विज्ञापन दो अलग अलग उम्मीदवारों के हैं. इसमें एक उम्मीदवार रोहनिया से बसपा के प्रत्याशी रमाकांत सिंह पिन्टू का है तो दूसरा विज्ञापन पिण्डरा से निवर्तमान विधायक और दबंग माफिया अजय राय का है. वैसे तो इन दोनों ही विज्ञापनों में बहुत छोटे अक्षरों में advt लिखकर विज्ञापन होने का संकेत किया गया लेकिन इन विज्ञापनों में ही असली खेल है. विज्ञापन के साथ ही यह भी लिखा हुआ है कि यह संबंधित प्रत्याशी द्वारा जारी किया गया है. जाहिर है, ऐसा करने से विज्ञापन का खर्च प्रत्याशी के खाते में जुड़ जाएगा
Feb
09
2012
अंग्रेजी का हठ और कारपोरेट मठ
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हिंदी के मामले में म.प्र. सबसे आगे है। उसका लगभग सभी सरकारी कामकाज हिंदी में होता है। यहां तक कि विधानसभा के मूल कानून भी हिंदी में ही बनते हैं। म.प्र. में जो कुछ अहिंदी भाषी राज्यपाल रहे हैं, उन्हें कुछ ही दिनों में अपने आप समझ में आ गया कि यदि वे अंग्रेजी में भाषण देंगे तो उनकी खैर नहीं है। लेकिन अब कुछ उद्योगपतियों ने भोपाल जाकर उपदेश झाड़ा है कि मप्र की सरकार अपना काम-काज अंग्रेजी में शुरू करे। साधारण बाबुओं को भी अच्छी अंग्रेजी सिखाए। इन्फोसिस जैसी भारतीय और माइक्रोसॉफ्ट जैसी विदेशी कंपनियों के साथ पत्रचार अंग्रेजी में किया जाए। बेचारे मुख्यमंत्रीजी क्या करते? उन्होंने उनकी हॉ में हॉ मिलाते हुए कह दिया कि ठीक है, अब अंग्रेजी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शिवराज चौहान यों तो बहुत विनम्र और मृदुभाषी व्यक्ति हैं लेकिन उनकी तरह दबंग मुख्यमंत्री कितने हैं? ये वही शिवराज हैं, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों की मशाल थामने से साफ़ मना कर दिया था। गीता-पाठ व सूर्य प्रणाम का प्रावधान करवाने की हिम्मत क्या किसी अन्य मुख्यमंत्री में है? ऐसे मुख्यमंत्री से मैं आशा करनी चाहिए कि वे म.प्र. के राजकाज में अंग्रेजी के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देंगे। शिवराज सिंह चौहान
Feb
04
2012
अभिव्यक्ति की आजादी पर लगा तकनीकि का ताला
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गूगल की इस नयी व्यवस्था में एक मुख्य बात ये है कि जिस देश में जिस किसी ब्लॉग को ब्लाक किया जाएगा उसको छोड़कर नया देशों में उस ब्लॉग को देखा जा सकेगा। गूगल के इस फैसले से साफ हो गया है कि जो तकनीकि कल तक अभिव्यक्ति की आजादी का दरवाजा खोलती थी वही अब अपनी सुविधा और संकटों से बचने के लिए तकनीकि का ताला लगा रही है।
गौरतलब है कि भारत में व्यवस्थापिका से लेकर न्यायपालिका तक ने फेसबुक और गूगल को उनके कंटेंट को लेकर कार्यवाही की चेतावनी दी थी। महत्वपूर्ण है कि ट्विटर ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि वो देशवार त्व्वेट्स को ब्लाक करने की योजना लागू कर सकता है। भारत समेत तमाम देशों का आरोप है कि इन ब्लाग्स और माइक्रोब्लाग्स पर लगातार आपत्तिजनक सन्देश प्रकाशित किये जा रहे हैं ,भारत में राजनैतिक दलों और उनके नेताओं के खिलाफ ब्लाग्स और फेसबुक की वाल पर तमाम तरह की अनर्गल और आपत्तिजनक टिप्पणिया
ने को मिलती रही हैं तो आस्ट्रेलिया और न्यूजीलेंड अशलीलता से परेशान हैं।गूगल जो नयी व्यव्यस्था करने जा रहा है उसके अंतर्गत ब्लॉग पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति को सम्बंधित देश के कोड
े पेज ही
Feb
02
2012
चिदम्बरम की चौखट पर टूजी घोटाले का जिन्न
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सीबीआई की विशेष अदालत का टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में अब तक जैसा रुख रहा है उसे देखकर यह कहना मुश्किल है कि चिदम्बरम बेदाग छूट जाएंगे और अदालत सीबीआई को कोई निर्देश नहीं देगी. वैसे सीबीआई पहले ही चिदम्बरम को प्राथमिक आधार पर आरोप लगाने का कोई आधार नहीं देख पाई है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया है लेकिन अब सारा मामला विशेष जज ओपी सैनी के नजरिये पर निर्भर करेगा. कोई अनहोनी हो तभी ओपी सैनी का नजरिया चिदम्बरम के लिए सकारात्मक हो सकता है अन्यथा तो अभी तक सैनी का नजरिया नकारात्मक ही रहा है.
पी चिदम्बरम के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने जो आरोप लगाये हैं वह यह कि चिदम्बरम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बारे में सबकुछ मालूम था लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखकर जो हुआ उसे न बदल पाने की मजबूरी बताई थी. 10 जनवरी 2008 को डिपार्टमेन्ट आफ टेलिकम्युनिकेशन ने स्पेक्ट्र्म आवंटित िकया था और 15 जनवरी को चिदम्बरम ने बतौर वित्तमंत्री प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित किया था. पत्र के आखिरी पैरे में चिदम्बरम जो कुछ लिखते हैं वह उनकी भूिमका पर संदेह पैदा करता है. संदेह इसलिए भी कि
Feb
02
2012
आशा भोसलें और तीजनबाई का तमाचा
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जब तीजनबाई के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा कि यहां का माहौल देखकर मैं तो डर गई हूं। आप लोग क्या-क्या बोलते रहे, मेरे पल्ले कुछ नहीं पड़ा। मैं तो अंग्रेजी बिल्कुल भी नहीं जानती। तीजनबाई को सम्मानित करने के लिए बुलाया गया था लेकिन जो कुछ वहां हो रहा था, वह उनका अपमान ही था लेकिन श्रोताओं में से कोई भी उठकर कुछ नहीं बोला। तीजनबाई के बोलने के बावजूद कार्यक्रम बड़ी बेशर्मी से अंग्रेजी में ही चलता रहा। इस पर आशा भोंसले झल्ला गईं। उन्होंने कहा कि मुझे पहली बार पता चला कि दिल्ली में सिर्फ अंग्रेजी बोली जाती है। यहां लोग अपनी भाषाओं में बात करने में भी शर्म महसूस करते हैं। उन्होंने कहा मैं अभी लंदन से ही लौटी हूं। वहां लोग अंग्रेजी में बोले तो बात समझ में आती है लेकिन दिल्ली का यह माजरा देखकर मैं दंग हूं। उन्होंने श्रोताओं से फिर पूछा कि आप हिंदी नहीं बोलते, यह ठीक है लेकिन आशा है, मैं जो बोल रही हूं, उसे समझते तो होंगे? दिल्लीवालों पर इससे बड़ी लात क्या मारी जा सकती थी?
इसके बावजूद जब मंच-संचालक ने अंग्रेजी में ही आशाजी से आग्रह किया कि वे कोई गीत सुनाएँ तो उन्होंने
Feb
02
2012
पचास हजारी होने के सदमे
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हालाँकि इस संबंध में अपने देश के बारे में मुझे कोई सटीक आंकड़ा नहीं मिला रहा. विज्ञापन एजेंसियों के पास जरूर यह आंकड़ा होगा, क्योंकि वे इनकम रेंज में अधिक दिलचस्पी रखते हैं. बहरहाल हम फिर भी उपलब्ध साधनों और आंकड़ों के आधार पर इसे समझने की कोशिश करेंगे. इस संबंध में सबसे सटीक आंकड़ा बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों) का है. विकिपीडिया बताता है कि देश की 41 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करती है. भारत के संदर्भ में इसका मानक रखा गया है शहरों में 21.6 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन और गांव में 14.3 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन. इस आंकड़े को जानकर मुझे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से पहली बार तीव्र सहानुभूति हुई. भई उस इनसान ने ऐसा क्या कह दिया था कि देश भर में बाबेला मच गया. इस एक बयान ने उसे विलेन की छवि दे दी जबकि वह तो गरीबी रेखा के आंकड़े में लगभग ढाई गुने की वृद्धि कर रहा था. ये और बात है कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 1.25 डालर यानि लगभग 75 रुपये से कम रोजाना कमाने वाला अत्यंत गरीब की श्रेणी में रखा जाता है बकौल विकिपीडिया. यानी पांच लोगों के
Feb
01
2012
मायानगरी में आये हैं सारे जादूगर
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बुधवार को दो बड़े राजनीतिक दलों की दो बड़ी नेत्रियां (अभिनेत्रियों को इस बार मौका नहीं मिला है.) मैदान में उतरी. इधर मायावती तो उधर सोनिया गांधी. भाजपा की नेत्री उमा भारती तो पहले ही मैदान में हैं. क्योंकि वे आसमान से कम ही उतरती हैं इसलिए उनकी बजाय सोनिया गांधी और मायावती की जादुई आभा को निहारने की ललक ज्यादा रहती है. इसलिए जब बुधवार को उत्तर प्रदेश के आसमान में सीतापुर और गोंडा में दो हेलिकॉप्टर दो बड़ी नेत्रियों के साथ जनता के बीच पहुंचे तो दोनों जगह जिन्दाबाद के नारों से उनका स्वागत किया गया. स्वागत का यह सिलसिला अब करीब महीनेभर चलेगा. महीने भर बाद ही पता चलेगा कि जनता ने आखिरकार सत्कार किसका किया?
उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव इस बार आमतौर पर तीन महिलाओं की जंग का गवाह बनेगा. मुलायम सिंह की पार्टी को छोड़ दें तो बाकी तीन बड़े दलों के प्रचार अभियान की कमान मायावती, सोनिया गांधी और उमा भारती के हाथ में है. कांग्रेस की ओर से सोनिया को प्रियंका गांधी भी मदद पहुंचा सकती हैं. इसमें उमा तो पहले से ही मैदान में हैं लेकिन बुधवार को मायावती और सोनिया गांधी विधिवत कूद पड़ीं. दिल्ली से बड़ी दूर गोंडा से


