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COMMENTARY

Feb

20

2012

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संगीत में शिवोहम्

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संगीत में शिवोहम्

मनीष व्यास को संगीत की नई सोच प्रेम जोशुआ ने दी और प्रेम जोशुआ को संगीत की यह नई सोच एक सफेद दाढ़ीवाले ने दी. जर्मनी के प्रेम जोशुआ जब भारत आये तो वे उन आचार्य रजनीश के पास पहुंचे जो पूना और मुंबई के बीच रहा करते थे और प्रवचन किया करते थे. उन आचार्य रजनीश ने प्रेम जोशुआ को एक नया संगीत सिखा दिया. शांति का संगीत. मौन का संगीत. अंदर का संगीत. यह शांति, मौन और अंदर का संगीत जोशुआ को इतना जंचा कि फिर भारत सहित पूरी दुनिया में घूम घूम कर मौन का संगीत बिखेरने लगे. मुंबई के मनीष व्यास इसी दौर में उनसे जुड़े और उनके बैण्ड में गाने बजाने के अलावा अपने खुद के एलबम भी बनाने लगे हैं.

ये जो प्रेम जोशुआ हैं या फिर मनीष व्यास हैं, वे कौन सा ऐसा संगीत साध रहे हैं कि उन्हें सुनने की जरूरत है. पूरे भारत में संगीत की नानाविध परंपराएं और विधाएं हैं. आमतौर पर हम इन्हें कीर्तन कहते हैं. पूरब पश्चिम उत्तर और दक्षिण कहीं भी चले जाएं कीर्तन सुनने को मिल जाएगा. यह कीर्तन संगीत

Feb

17

2012

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जीत मिली लेकिन करिश्मा कम हुआ

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जीत मिली लेकिन करिश्मा कम हुआ

अगर हम महाराष्ट्र के इन मिनी चुनावों का परिणाम देंखे तो संकेत मिलता है कि प्रदेश में आरपीआई से गठबंधन के बाद भी शिवसेना भाजपा के दावे में कोई खास मजबूती नहीं आई है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने पहले ही भांप लिया था कि स्थिति कमजोर हो सकती है इसलिए उन्होंने मुंबई और ठाणे में दो सभाओं को संबोधित भी किया जिससे चुनाव में शिवसैनिकों का उत्साह कायम रहे. लेकिन 2012 के चुनाव नतीजे 2014 के चुनावों के मद्देनजर शिवेसना भाजपा को कोई अच्छा संकेत नहीं दे रहे हैं. जिन संभावनाओं के मद्देनजर रामदास आठवले की आरपीआई को गठजोड़ का हिस्सा बनाया गया था वे संभावनाएं परिणाम देती दिखाई नहीं दे रही हैं.

इन नगरपालिका चुनावों में शिवसेना भाजपा का मुंबई पर कब्जा बरकार है जहां वे पिछले सत्रह साल से बहुमत में हैं. करीब 21 हजार करोड़ के सालाना बजटवाले बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर शिवसेना के कब्जे से उसके अपने पार्टी तंत्र को एकजुट रखने में मदद मिलती है. शायद यही कारण है कि इस बार बाल ठाकरे मैदान में उतरे. आशंका थी कि राज ठाकरे चोट पहुंचा सकते हैं और 28 सीटें अपने दम पर जीतकर राज ठाकरे ने बुरा

Feb

15

2012

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100 करोड़ का प्रेम मंदिर

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100 करोड़ का प्रेम मंदिर

ग्यारह साल में 100 करोड़ की लागत से बने कृपालु महाराज के प्रेम मंदिर का लोकार्पण 17 फरवरी को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच किया जाएगा. यह मंदिर वृंदावन में भगवान कृष्ण और राधा के पेम को दर्शाता है. इस मंदिर के निर्माण में 11 साल का समय और करीब 100 करोड रुपए की धनराशि लगी है. इसमें इटालियन करारा संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है. इसे राजस्थान और उत्तर पदेश के एक हजार शिल्पकारों ने कडी मेहनत के बाद बनाया है.

जगदगुरू कृपालु परिषद श्यामा श्याम धाम प्रेम मंदिर के पचारक स्वामी मुकुंदानंद ने आज लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भगवान कृष्ण और राधा के इस प्रेम मंदिर का शिलान्यास 14 जनवरी 2001 को कृपालु जी महाराज ने लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में किया था.

उसी दिन से राजस्थान और उत्तर पदेश के एक हजार शिल्पकार अपने साथ हजारों सहयोगी मजदूरों के साथ इस मंदिर के निर्माण कार्य में लग गए. ग्यारह साल के कठोर श्रम के बाद तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मंदिर सफेद इटालियन करारा संगमरमर से तराशा गया है.

वृदांवन के चटिकारा मार्ग पर स्थित यह अद्वितीय मंदिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनःजागृत होने का संकेत द

है और कृपालु महाराज का इस कृष्ण

Feb

14

2012

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जागरण ने पेश किया पेड न्यूज का नायाब उदाहरण

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जागरण ने पेश किया पेड न्यूज का नायाब उदाहरण

15 फरवरी को इस क्षेत्र में मतदान से पूर्व जागरण में छपे ये दो विज्ञापन संकेत करते हैं कि चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद भी अखबारों ने पेड न्यूज के नये नये तरीके इजाद कर लिये और कारोबार को अंजाम दिया. लोकसभा चुनाव में अखबारों से जो सबसे बड़ी शिकायत थी वह यह कि जो कन्टेन्ट लिखा गया उसमें विज्ञापन शब्द नहीं लिखा गया इसलिए उससे यह समझने में मुश्किल हुई कि अखबार में छपी सामग्री समाचार है या विज्ञापन. तो इसका तोड़ जागरण ने कुछ यूं निकाला है कि सामग्री तो विज्ञापन है लेकिन विज्ञापन के अंदर जो लिखा है वह समाचार है.

ये दोनों विज्ञापन दो अलग अलग उम्मीदवारों के हैं. इसमें एक उम्मीदवार रोहनिया से बसपा के प्रत्याशी रमाकांत सिंह पिन्टू का है तो दूसरा विज्ञापन पिण्डरा से निवर्तमान विधायक और दबंग माफिया अजय राय का है. वैसे तो इन दोनों ही विज्ञापनों में बहुत छोटे अक्षरों में advt लिखकर विज्ञापन होने का संकेत किया गया लेकिन इन विज्ञापनों में ही असली खेल है. विज्ञापन के साथ ही यह भी लिखा हुआ है कि यह संबंधित प्रत्याशी द्वारा जारी किया गया है. जाहिर है, ऐसा करने से विज्ञापन का खर्च प्रत्याशी के खाते में जुड़ जाएगा

Feb

09

2012

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अंग्रेजी का हठ और कारपोरेट मठ

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अंग्रेजी का हठ और कारपोरेट मठ

हिंदी के मामले में म.प्र. सबसे आगे है। उसका लगभग सभी सरकारी कामकाज हिंदी में होता है। यहां तक कि विधानसभा के मूल कानून भी हिंदी में ही बनते हैं। म.प्र. में जो कुछ अहिंदी भाषी राज्यपाल रहे हैं, उन्हें कुछ ही दिनों में अपने आप समझ में आ गया कि यदि वे अंग्रेजी में भाषण देंगे तो उनकी खैर नहीं है। लेकिन अब कुछ उद्योगपतियों ने भोपाल जाकर उपदेश झाड़ा है कि मप्र की सरकार अपना काम-काज अंग्रेजी में शुरू करे। साधारण बाबुओं को भी अच्छी अंग्रेजी सिखाए। इन्फोसिस जैसी भारतीय और माइक्रोसॉफ्ट जैसी विदेशी कंपनियों के साथ पत्रचार अंग्रेजी में किया जाए। बेचारे मुख्यमंत्रीजी क्या करते? उन्होंने उनकी हॉ में हॉ मिलाते हुए कह दिया कि ठीक है, अब अंग्रेजी को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

शिवराज चौहान यों तो बहुत विनम्र और मृदुभाषी व्यक्ति हैं लेकिन उनकी तरह दबंग मुख्यमंत्री कितने हैं? ये वही शिवराज हैं, जिन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों की मशाल थामने से साफ़ मना कर दिया था। गीता-पाठ व सूर्य प्रणाम का प्रावधान करवाने की हिम्मत क्या किसी अन्य मुख्यमंत्री में है? ऐसे मुख्यमंत्री से मैं आशा करनी चाहिए कि वे म.प्र. के राजकाज में अंग्रेजी के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा देंगे। शिवराज सिंह चौहान

Feb

04

2012

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अभिव्यक्ति की आजादी पर लगा तकनीकि का ताला

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अभिव्यक्ति की आजादी पर लगा तकनीकि का ताला

गूगल की इस नयी व्यवस्था में एक मुख्य बात ये है कि जिस देश में जिस किसी ब्लॉग को ब्लाक किया जाएगा उसको छोड़कर नया देशों में उस ब्लॉग को देखा जा सकेगा। गूगल के इस फैसले से साफ हो गया है कि जो तकनीकि कल तक अभिव्यक्ति की आजादी का दरवाजा खोलती थी वही अब अपनी सुविधा और संकटों से बचने के लिए तकनीकि का ताला लगा रही है।

गौरतलब है कि भारत में व्यवस्थापिका से लेकर न्यायपालिका तक ने फेसबुक और गूगल को उनके कंटेंट को लेकर कार्यवाही की चेतावनी दी थी। महत्वपूर्ण है कि ट्विटर ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि वो देशवार त्व्वेट्स को ब्लाक करने की योजना लागू कर सकता है। भारत समेत तमाम देशों का आरोप है कि इन ब्लाग्स और माइक्रोब्लाग्स पर लगातार आपत्तिजनक सन्देश प्रकाशित किये जा रहे हैं ,भारत में राजनैतिक दलों और उनके नेताओं के खिलाफ ब्लाग्स और फेसबुक की वाल पर तमाम तरह की अनर्गल और आपत्तिजनक टिप्पणिया

ने को मिलती रही हैं तो आस्ट्रेलिया और न्यूजीलेंड अशलीलता से परेशान हैं।

गूगल जो नयी व्यव्यस्था करने जा रहा है उसके अंतर्गत ब्लॉग पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति को सम्बंधित देश के कोड
े पेज ही

Feb

02

2012

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चिदम्बरम की चौखट पर टूजी घोटाले का जिन्न

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चिदम्बरम की चौखट पर टूजी घोटाले का जिन्न

सीबीआई की विशेष अदालत का टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में अब तक जैसा रुख रहा है उसे देखकर यह कहना मुश्किल है कि चिदम्बरम बेदाग छूट जाएंगे और अदालत सीबीआई को कोई निर्देश नहीं देगी. वैसे सीबीआई पहले ही चिदम्बरम को प्राथमिक आधार पर आरोप लगाने का कोई आधार नहीं देख पाई है और उनके खिलाफ किसी प्रकार के आपराधिक मुकदमा दर्ज करने से मना कर दिया है लेकिन अब सारा मामला विशेष जज ओपी सैनी के नजरिये पर निर्भर करेगा. कोई अनहोनी हो तभी ओपी सैनी का नजरिया चिदम्बरम के लिए सकारात्मक हो सकता है अन्यथा तो अभी तक सैनी का नजरिया नकारात्मक ही रहा है.

पी चिदम्बरम के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी ने जो आरोप लगाये हैं वह यह कि चिदम्बरम को स्पेक्ट्रम आवंटन के बारे में सबकुछ मालूम था लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखकर जो हुआ उसे न बदल पाने की मजबूरी बताई थी. 10 जनवरी 2008 को डिपार्टमेन्ट आफ टेलिकम्युनिकेशन ने स्पेक्ट्र्म आवंटित िकया था और 15 जनवरी को चिदम्बरम ने बतौर वित्तमंत्री प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित किया था. पत्र के आखिरी पैरे में चिदम्बरम जो कुछ लिखते हैं वह उनकी भूिमका पर संदेह पैदा करता है. संदेह इसलिए भी कि

Feb

02

2012

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आशा भोसलें और तीजनबाई का तमाचा

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कार्यक्रम में सबसे बाएं तीजनबाई और आशा भोसले कार्यक्रम में सबसे बाएं तीजनबाई और आशा भोसले

जब तीजनबाई के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा कि यहां का माहौल देखकर मैं तो डर गई हूं। आप लोग क्या-क्या बोलते रहे, मेरे पल्ले कुछ नहीं पड़ा। मैं तो अंग्रेजी बिल्कुल भी नहीं जानती। तीजनबाई को सम्मानित करने के लिए बुलाया गया था लेकिन जो कुछ वहां हो रहा था, वह उनका अपमान ही था लेकिन श्रोताओं में से कोई भी उठकर कुछ नहीं बोला। तीजनबाई के बोलने के बावजूद कार्यक्रम बड़ी बेशर्मी से अंग्रेजी में ही चलता रहा। इस पर आशा भोंसले झल्ला गईं। उन्होंने कहा कि मुझे पहली बार पता चला कि दिल्ली में सिर्फ अंग्रेजी बोली जाती है। यहां लोग अपनी भाषाओं में बात करने में भी शर्म महसूस करते हैं। उन्होंने कहा मैं अभी लंदन से ही लौटी हूं। वहां लोग अंग्रेजी में बोले तो बात समझ में आती है लेकिन दिल्ली का यह माजरा देखकर मैं दंग हूं। उन्होंने श्रोताओं से फिर पूछा कि आप हिंदी नहीं बोलते, यह ठीक है लेकिन आशा है, मैं जो बोल रही हूं, उसे समझते तो होंगे? दिल्लीवालों पर इससे बड़ी लात क्या मारी जा सकती थी?

इसके बावजूद जब मंच-संचालक ने अंग्रेजी में ही आशाजी से आग्रह किया कि वे कोई गीत सुनाएँ तो उन्होंने

Feb

02

2012

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पचास हजारी होने के सदमे

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पचास हजारी होने के सदमे

हालाँकि इस संबंध में अपने देश के बारे में मुझे कोई सटीक आंकड़ा नहीं मिला रहा. विज्ञापन एजेंसियों के पास जरूर यह आंकड़ा होगा, क्योंकि वे इनकम रेंज में अधिक दिलचस्पी रखते हैं. बहरहाल हम फिर भी उपलब्ध साधनों और आंकड़ों के आधार पर इसे समझने की कोशिश करेंगे. इस संबंध में सबसे सटीक आंकड़ा बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों) का है. विकिपीडिया बताता है कि देश की 41 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करती है. भारत के संदर्भ में इसका मानक रखा गया है शहरों में 21.6 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन और गांव में 14.3 रुपये प्रति व्यक्ति प्रति दिन. इस आंकड़े को जानकर मुझे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से पहली बार तीव्र सहानुभूति हुई. भई उस इनसान ने ऐसा क्या कह दिया था कि देश भर में बाबेला मच गया. इस एक बयान ने उसे विलेन की छवि दे दी जबकि वह तो गरीबी रेखा के आंकड़े में लगभग ढाई गुने की वृद्धि कर रहा था. ये और बात है कि अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार 1.25 डालर यानि लगभग 75 रुपये से कम रोजाना कमाने वाला अत्यंत गरीब की श्रेणी में रखा जाता है बकौल विकिपीडिया. यानी पांच लोगों के

Feb

01

2012

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मायानगरी में आये हैं सारे जादूगर

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मायानगरी में आये हैं सारे जादूगर

बुधवार को दो बड़े राजनीतिक दलों की दो बड़ी नेत्रियां (अभिनेत्रियों को इस बार मौका नहीं मिला है.) मैदान में उतरी. इधर मायावती तो उधर सोनिया गांधी. भाजपा की नेत्री उमा भारती तो पहले ही मैदान में हैं. क्योंकि वे आसमान से कम ही उतरती हैं इसलिए उनकी बजाय सोनिया गांधी और मायावती की जादुई आभा को निहारने की ललक ज्यादा रहती है. इसलिए जब बुधवार को उत्तर प्रदेश के आसमान में सीतापुर और गोंडा में दो हेलिकॉप्टर दो बड़ी नेत्रियों के साथ जनता के बीच पहुंचे तो दोनों जगह जिन्दाबाद के नारों से उनका स्वागत किया गया. स्वागत का यह सिलसिला अब करीब महीनेभर चलेगा. महीने भर बाद ही पता चलेगा कि जनता ने आखिरकार सत्कार किसका किया?

उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव इस बार आमतौर पर तीन महिलाओं की जंग का गवाह बनेगा. मुलायम सिंह की पार्टी को छोड़ दें तो बाकी तीन बड़े दलों के प्रचार अभियान की कमान मायावती, सोनिया गांधी और उमा भारती के हाथ में है. कांग्रेस की ओर से सोनिया को प्रियंका गांधी भी मदद पहुंचा सकती हैं. इसमें उमा तो पहले से ही मैदान में हैं लेकिन बुधवार को मायावती और सोनिया गांधी विधिवत कूद पड़ीं. दिल्ली से बड़ी दूर गोंडा से

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Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है। नेटवर्क6 के संपादक।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Dr. Shashi Tiwari

Dr. Shashi Tiwari

डॉ शशि तिवारी मीडिया जगत की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हैं और सूचनामंत्र नामक पत्रिका का संपादन करती हैं. भोपाल में रहते हुए मीडिया संगठनों में सक्रियता के साथ साथ दूरदर्शन के लिए भी मुक्त रूप से काम करती हैं.
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

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लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह मूलतः खगड़िया बिहार के रहने वाले हैं। 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। उसके बाद एक कारोबारी पत्रिका में बतौर संवाददाता काम किया औऱ उसके बाद एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में लगभग एक साल उपसंपादक के पद पर काम किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.
Rajiv Sharma

Rajiv Sharma

राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग.
Arjun Sharma

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जालंधर के रहनेवाले अर्जुन शर्मा बीस साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. बीस साल में 10 मीडिया घरानों की सैर कर चुके अर्जुन शर्मा का ट्रैक रिकार्ड बताता है कि उन्होंने कलम के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. मीडिया में नये आनेवाले पत्रकारों के लिए व्यावहारिक पत्रकारिता नाम की एक पुस्तक भी लिखी है. विस्फोट.कॉम के लिए पंजाब और हिमाचल का प्रभार. journalistarjun@gmail.com
Devinder Sharma

Devinder Sharma

इंडियन एक्सप्रेस में कृषि रिपोर्टर रहे देवेन्द्र शर्मा अब कृषि और खाद्य मामलों में भारत के जाने-माने नाम हैं. दुनिया में जहां कहीं भी खेती-किसानी से जुड़ी नीतियों की बात चलती है देवेन्द्र शर्मा का नाम लिया जाता है. एक्सपर्ट के साथ साथ अब जन आंदोलनों में भी सक्रिय.
Vinayak Sharma

Vinayak Sharma

दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा के दौरान युववाणी और दूरदर्शन आदि के विभिन्न कार्यक्रमों और परिचर्चाओं में भाग लेते हुए जो पत्रकारिता में प्रवेश किया तो बहुत कुछ सीखते हुए विगत पांच वर्षों से पत्रकारिता और लेखन कार्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर के अनेक सामाजिक संगठनों में पदभार संभाल रहे हैं. वर्तमान में मंडी, हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक समाचार पत्र में संपादक.
Dinesh Shakya

Dinesh Shakya

इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम के साथ साथ विस्फोट.कॉम के लिए लेखन.
Anil Saumitra

Anil Saumitra

जनसंचार माध्यमों की पहुंच विषय पर शोध करनेवाले अनिल सौमित्र भोपाल में रहते हैं. सामाजिक कार्य के अलावा स्वतंत्र पत्रकारिता और मीडिया एक्टिविस्ट के बतौर कार्यरत. विश्व संवाद केन्द्र में भी सक्रिय.
Kailash Satyarthi

Kailash Satyarthi

कैलास सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष हैं.
Afsar Khan Sagar

Afsar Khan Sagar

पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहनेवाले एम. अफसरखान सागर ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए किया है. 2007 से पत्रकारिता में है. विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ ही हिन्दी जर्नलिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के संयोजक हैं।
Prakash Ray

Prakash Ray

प्रकाश कुमार रे अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे तक छात्र राजनीति करने के बाद सामाजिक जीवन और पत्रकारिता में हस्तक्षेप. फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन के साथ साथ bargad.org के संचालक.
Nirmal Rani

Nirmal Rani

अंबाला में रहनेवाली निर्मल रानी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं. पिछले पंद्रह सालों से विभिन्न अखबारों में स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार के तौर पर लेखन कर रही हैं.
Rambahadur Rai

Rambahadur Rai

पत्रकार. छात्र आंदोलन से राजनीति और राजनीति से पत्रकारिता में आये रामबहादुर राय हिन्दी में खोजी पत्रकारिता के शीर्षपुरूष समझे जाते हैं. वर्तमान में प्रथम प्रवक्ता के सलाहकार संपादक और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Dr. Ved Pratap Vaidik

Dr. Ved Pratap Vaidik

डॉ वेदप्रताप वैदिक भारतीय पत्रकारिता में जीवित किंवदन्ती बन गये हैं. अपना शोध प्रबंध उस वक्त हिन्दी में लिखा जब शोध का अर्थ ही अंग्रेजी होता था. 1971 में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय मामलों में पीएचडी हासिल करने के बाद पत्रकारिता में आये. नवभारत टाइम्स के संपादक (विचार) फिर समाचार एजंसी भाषा के संपादक रहे. वर्तमान में भारतीय भाषा सम्मेलन और भारतीय विदेशनीति परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य और नियमित लेखन.