COMMENTARY
Nov
06
2011
अब दिल हुम हुम नहीं करेगा
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भूपेन दा महान गायक तो थे ही, वे एक जनपक्ष धर कवि भी थे, संगीत के रचयिता थे और एक बहुत ही मज़बूत और बुलंद आवाज़ के मालिक थे.उनके जाने के बाद असम, कोलकाता और ढाका में तो मातम है ही, बाकी दुनिया में भूपेन के चाहने वालों के चहेरों पर मायूसी की खबरें आ रही हैं .
भूपेन ने बहुत ही उच्च कोटि की शिक्षा पायी थी. शुरुआती पढाई गुवाहाटी में करने के बाद वे बीएचयू चले आये थे जहां से उन्होंने बीए और एमए पास किया. १९४६ में एमए करने के बाद वे अमरीका के विख्यात कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए थे, जहां उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पी एच डी किया. भूपेन हजारिका ने उस के बाद भी पढाई की. उन्होंने पीएचडी के बाद शिकागो विश्वविद्यालय से सिनेमा के शिक्षा में इ
माल पर पोस्ट डाक्टोरल अध्ययन किया. बताया जाता है कि मास कम्युनिकेशन में पीएचडी करने वाले भूपेन पहले एशियन थे.अमरीका में भूपेन हजारिका की मुलाकात पॉल राबसन से हुई थी. पॉल राबसन की हैसियत दुनिया के क्रांतिकारी गायकों में सबसे ऊंची है. यह अमरीका में वह दौर था जब काले लोगों को
ी लोकतंत्र में वोट देने तक का अधिकार नहीं था. उस दौर में
Nov
05
2011
हंगरी में हिन्दी की दूत
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उन्होंने बीसवीं शताब्दी के नौवें दशक में हिंदी अध्यापन का कार्य शुरु किया था। उस समय विभाग में किसी भी भाषा में हिंदी की पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध नहीं थी, और तो और उस समय बुदापैश्त में हिंदी बोलनेवालों की संख्या भी नहीं के बराबर थी।
हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, रूसी, लैटिन, प्राचीन यूनानी भाषा की विदूषी डॉ. नेज्यैशी कहती हैं कि 1992 ई. में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से ऐल्ते विश्वविद्यालय के भारोपीय अध्ययन विभाग में हिंदी के एक अतिथि प्रोफेसर की पीठ का सृजन किया गया और उपहार स्वरूप हिंदी पुस्तकें दी जाने लगीं। पीठ पर सर्वप्रथम नियुक्त हिंदी के जाने-माने साहित्यकार डॉ. असग़र वजाह
हिंदी के साथ-साथ उर्दू पढ़ाने का कार्य प्रारंभ किया और मारिया नेज्यैशी के साथ मिलकर हिंदी अध्यापन की पाठ्य-पुस्तक का निर्माण किया। इस परंपरा को डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, डॉ. रवि प्रकाश गुप्ता, डॉ. उमाशंकर उपाध्याय और डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा ने आगे बढ़ाया। आजकल डॉ. विजया सती इस कार्य को गति दे रही हैं। निरंतर उपहार स्वरूप मिलने वाली पुस्तकों के कारण विभाग का हिंदी पुस्तकालय यूरोप का एक समृद्ध पुस्तकालय बन गया है। विभाग आशा करता है कि उसे इस तरह की पुस्तकें भविष्य में भी मिलती रहेंगी।29 अप्रैल, 1953
Nov
05
2011
पाक की पसंद होने के फायदे
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भारत की सस्ती और बढ़िया चीजें पाकिस्तान पर छा जाएंगी। यह भी आशंका थी कि यदि दोनों का व्यापार बेखटके होने लगा तो दोनों के संबंध इतने घनिष्ट हो जाएंगे कि कश्मीर जैसे मुद्दे नेपथ्य में चल जाएंगे। एक भंयकर तर्क और भी था। वह यह कि भारतीय माल के साथ-साथ धीरे-धीरे ‘हिंदू संस्कृति’ भी पाकिस्तान में घुसने लगेगी और वह पाकिस्तान की इस्लामी पहचान को भी खत्म कर देगी। अब इन तीनों तर्कों को ताक पर रखकर पाकिस्तान के मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से भारत को ‘सर्वाधिक अनुग्रहीत राष्ट्र’ का दर्जा दे दिया है। इस राजनीतिक फैसले को फौज का भी समर्थन है। इसके फायदे क्या-क्या हैं?
सबसे पहला तो यह कि अब तक पाक को भारत सिर्फ 1946 वस्तुओं का निर्यात कर सकता था। अब वह 20 हजार से भी ज्यादा चीजों का निर्यात कर सकेगा। परमाणु बम के अलावा पाकिस्तान जो भी चाहे, हम उसे भेज सकेंगे।
दूसरा, दोनों देश एक-दूसरे से सटे हुए हैं। इसलिए यातायात का खर्च काफी बचेगा।
तीसरा, दोनों देशों के बीच लगभग 15 हजार करोड़ रू. का सीधा व्यापार होता है लेकिन 20 हजार करोड़ से भी ज्यादा का दुबाई, ईरान और अफगानिस्तान के जरिए होता है। अब अगले एक-दो साल में ही
Nov
04
2011
फोर्ब्स की लिस्ट और पॉलिटिक्स
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दुनिया की आबादी सात अरब पार कर गई है इसलिए इस साल फोर्ब्स ने सर्वाधिक ताकतवर 100 लोगों की सूची बनाने की बजाय सर्वाधिक ताकतवर 70 लोगों की सूची बनाई है. इसके शीर्ष दस में भारत का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है. दुनिया के जो सर्वाधिक ताकतवर लोगों की सूची है उसमें पहले नंबर पर बराक ओबामा, दूसरे नंबर पर चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की जगह रूस के प्रधानमंत्री ब्लादिमीर पुतिन आ गये हैं. ब्लादिमीर पुतिन की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर वापसी विश्व राजनीति में रूस की वापसी का संकेत है. चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ अपनी सारी मजबूती के बावजूद तीसरे नंबर पर पहुंच गये हैं. जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्कर दुनिया की चौथी चौधरी हैं तो पांचवे नंबर पर माइक्रोसाफ्ट के प्रमुख बिल गेट्स हैं. इसी तरह अरब के 87 वर्षीय राजा अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सऊद दुनिया के छठे सबसे ताकतवर आदमी हैं तो सातवें नंबर पर पोप बेनेडिक्ट हैं. बेन बर्नेक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख हैं और वे दुनिया के आठवें सबसे ताकतवर आदमी बताये गये हैं. नौवें नंबर पर अमेरिका का ही एक नौजवान मार्क जुकेरबर्ग है जो कि फेशबुक का संस्थापक है जबकि दसवें नंबर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री
Nov
04
2011
नूझ चैनलों का फार्मूला वन
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इस अतिकुलीन गेम को हिन्दीवालों ने अपनी बाज़ार विरोधी कुंठा के बाद भी नहीं छोड़ा है। ग्रां प्रीं नोएडा साउथ दिल्ली में नहीं हैं। वो हिन्दी बेल्ट है। हम कार साक्षरता के लेवल टू में पहुंच रहे हैं। हम आल्टो और नैनो चलाने वाले देश नहीं रहेंगे। सब कुछ टीआरपी के लिए नहीं होता। यह जनकांक्षा और लोकचेतना के प्रसार में उठाया गया कदम है। बस हिन्दीवालों को महान चालकों का साक्षात्कार नहीं मिल सका। जल्दी ही मुगलसराय का कोई ड्राइवर जब इन कारों पर बैठेगा वो पहले इंग्लिश स्टुडियो से निकलने के बाद हिन्दी स्टुडियो ज़रूर आवेगा।
चंडोक साहब का इंटरभू भी छपा है कि नब्बे हज़ार करोड़ के कारोबार की संभावना है और पचास हज़ार रोज़गार की। ऐसी जनउपयोगी प्रतियोगिता का हर हाल में समर्थन करना चाहिए। महंगाई के दौर में महंगे शौक के विस्तार में लोकपक्षीय मीडिया ने ज़बरन ज़बरदस्त भूमिका निभाई है। नूझ लैनलों के ग्राफिक्स एनिमेशन से ट्रैक का जो रा-वनीय रूपांतरण हुआ वो ग़ज़ब है। एंकर फार्मूला वन के एनिमेटेड कार में बैठे दनदना रहे थे। बिना हेल्मेट के। यह एक अद्भुत समय था। हिन्दी चैनलों ने एक अतिकुलीन खेल को अतिसाधारण बना दिया। टायर खोलकर और ईंजन का नट भोल्ट दिखाकर
Nov
04
2011
उत्तर भारतीयों के खिलाफ क्यों तनी ठाकरे परिवार की कमान?
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शिवसेना का मुखपत्र सामना का ताजा संपादकीय लिखता है कि उत्तर भारतीय मुंबई में बिन बुलाए मेहमान हैं. वे यहां काम की तलाश में आये थे और बस गये. अगर उन्हें लगता है कि वह मुंबई की रफ्तार को थाम सकते हैं तो वह अपने मवेशियों और तबेलों को लेकर अपने गांव वापस जा सकते हैं। उत्तर भारतीय समुदाय के खिलाफ ऐसी ही और ढेर सारी अपमानजक बातें लिखी हैं. तबेलेवाला कहकर अपमानित किया गया है.
लंबे समय बाद बाल ठाकरे के अखबार ने उत्तर भारतीयो के खिलाफ इतना सख्त रुख अख्तियार किया है. राज ठाकरे के उदय के बाद बाल ठाकरे राष्ट्रीय हो चले थे और शुद्ध हिन्दूवादी राजनीति को ही शिवेसना का आधार बना रहे थे. पिछले दो दशहरा रैलियों में भी उन्होंने कांग्रेस पर वार तो किया लेकिन उत्तर भारतीयों का कोई जिक्र नहीं किया. फिर भला ऐसा क्या कारण है कि बाल ठाकरे की कमान एक बार फिर उत्तर भारतीयों के खिलाफ तन गई है?
कारण समझना बहुत आसान नहीं है. मोटे तौर पर राजनीतिक मजबूरी है. अगले साल मुंबई महानगरपालिका के चुनाव होनेवाले हैं और मुंबई ही वह जगह है जहां करीब पचास लाख उत्तर भारती
ते हैं. डेढ़ करोड़ के शहर में पचास लाखNov
03
2011
कानून को कमजोर करते न्यायाधीश
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2जी घोटाले में जो मुख्य आरोपी हैं उनके खिलाफ जांच एजंसी सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर ली है. सीबीआई ने अभियुक्तों की जमानत का विरोध इस आधार पर किया था कि जांच के दौरान अगर इन्हें छोड़ दिया जाता है तो वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं. हालांकि जो लोग अभियुक्त बनाये गये हैं वे क्या जेल में और क्या जेल से बाहर. सुब्रमण्यम स्वामी के आरोपों को सही मानें तो टूजी घोटाले में तार जहां जहां तक बिखरे हैं अगर सबको अभियुक्त बनाकर जेल भेज दिया जाए तो शायद इस देश में एक और आपातकाल लगाना पड़ जाए. फिर भी जांच प्रक्रिया के दौरान अभियुक्तों को हिरासत में रखना न्याय की मंशा हो सकती है. लेकिन जांच पूरी हो जाने और चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद ट्रायल के दौरान भी अभियुक्तों को जेल के अंदर रखना क्या भारतीय न्यायप्रणाली का नागरिक जीवन पर अतिरेक का हस्तक्षेप नहीं है?
पिछले कुछ महीनों में दो मामले ऐसे आये हैं जो भारतीय न्याय प्रणाली की निचली अदालतों के ही नहीं बल्कि न्यायाधीशों के काम काज पर गंभीर सवाल खड़ा करते हैं. इसमें पहला मामला संसद में हुए रिश्वत कांड का है और दूसरा मामला टूजी घोटाले का है.
Nov
02
2011
संघ को मदद करने का दिग्विजयी दांव
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इस सांठगांठ के तहत सुनोयोजित तरीके से संघ को गाली देकर दिग्गी राजा उसे मजबूत कर रहे है। महत्वहीन होते संघ को जिस तरह से दिग्गी ने लाइम लाइट में लाया है, उससे कांग्रेस के कई नेता नाराज है। अब वे दिग्गी राजा को वीपी सिंह और अर्जुन सिंह के कैटेगरी में लाने लगे है, जिन्होंने समय-समय पर कांग्रेस को भारी नुकसान किया और इसकी भरपाई कांग्रेस को करनी पड़ी।
इस समय दिग्गी राजा राहुल गांधी के एडवाइजर है। कुछ इसी प्रकार से राजीव गांधी के नजदीक वीपी सिंह थे। अर्जुन सिंह भी राजीव गांधी के नजदीकी थे। लेकिन दोनों ने कांग्रेस को भारी नुकसान किया। बताया जाता है कि ये कांग्रेस की राजघरानों की राजनीति है, जो कांग्रेस को अंदर रहकर कांग्रेस को नुकसान करते है। ये भी सच्चाई है कि तीनों स्वर्गीय वीपी सिंह, अर्जुन सिंह और दिग्गी राजा रिश्तेदार है रियासतों से संबंधित है। दिग्गी राजा के लगातार हमलावर तेवर ने कांग्रेस के कई नेताओं को सतर्क कर दिया है। बताया जाता है कि दिग्विजय सिंह विरोधी कई कांग्रेसी इस बात का
लगा रहे है कि संघ से दिग्गी का क्या सांठगांठ है।वैसे संघ दिग्गी राजा पर मेहरबान रहा है। दिग्गी राजा के भाई लक्ष्मण स
Nov
02
2011
जहाज से आये और चौपाल लगाकर चले गये राहुल
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इन चौपालों में राहुल गांधी ने कहा कि आप के पास शक्ति है, सत्ता परिवर्तन की ताकत है इसीलिए सभी दलों के नेता आपके पास आते हैं, मैं भी आपके पास यहां इसीलिए आया हूं. यानी राहुल ने अपनी यात्रा का मकसद गांववालों से नहीं छिपाया. साथ में समाधान यह दिया कि केंद्र व प्रदेश में एक सरकार हो तो विकास तेजी से होगा.
राहुल गांधी मंगलवार सुबह 10.25 पर क्लब वन एअर के विशेष चार्टर्ड विमान से लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा, बाबतपुर पहुंचे। यहां से उनकी लक्जरी गाडि़यों का काफिला बनारस शहर की ओर निकला। बनारस में उन्होंने सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास मंदिर में दर्शन पूजन किया और लंगर छका। यहां से वह चंदौली के चकिया विधानसभा क्षेत्र के कुरथियां गांव पहुंचे। यहां राहुल ने गांव में घुसते ही एक घर का दरवाजा खटखटाया और ग्राम प्रधान के विषय में पूछा। यह घर पूर्व प्रधान इन्द्रसेन
ह का था। बाद में राहुल वयोवृद्ध इन्द्रसेन को लेकर गांव के मध्य स्थित ब्रह्मबाबा के चबूतरे पर पहुंचे और पीपल के पेड़ के नीचे लकड़ी की चौकी पर चादर बिछाकर चौपाल लगा ली। यहां राहुल ने ग्रामीणों से सीधा संवाद शुरू किया।राहुल गांधी ने ग्रामीणों को बताया कि केंद्र
Oct
30
2011
अर्श से फर्श पर आई नीरा राडिया
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जाहिर है, जो नीरा राडिया साल भर पहले अर्श पर थीं, फर्श पर आ गई हैं. उनकी व्यावसायिक दोस्ती और ऊंचे उड़ने की तमन्ना ने ही उन्हें जितनी तेजी से ऊंचाई पर पहुंचाया था उतनी ही तेजी से जमीन पर लाकर पटक दिया है. साल भर पहले नीरा राडिया के आस पास न केवल कारपोरेट घराने मंडरा रहे थे बल्कि पूरे देश का राजनीतिक परिदृश्य एक नीरा राडिया की संभावनाओं के आगे बौना नजर आ रहा था. चमत्कारिक नीरा राडिया के नित नये कारनामें सामने आ रहे थे. हमें भारत के कारपोरेट इतिहास में पहली बार एक ऐसे व्यक्ति के बारे में पता चला जिसने बड़े बड़े राजनीतिक फैसलों के लिए मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया और उस घोटाले की आधारभूमि तैयार कर दी जिसने देश को बत्तीस हजार करोड़ रूपये की चपत लगा दी. (स्पेक्ट्रम घोटाले में सीबीआई ने पौने दो लाख करोड़ की बजाय बत्तीस हजार करोड़ का घोटाला माना है.)
उस वक्त जिसने भी नीरा राडिया पर सवाल उठाया जवाब रतन टाटा ने दिया. बात बनी नहीं तो देश के लोकतंत्र को बनाना रिपब्लिक तक करार दे दिया. लेकिन वही रतन टाटा अब नीरा राडिया की कंपनी को अपने पीआर व्यापार के लिए उपयुक्त नहीं मानते इसलिए



