Home | COMMENTARY

COMMENTARY

Dec

26

2011

0
Comments

लोकपाल की लड़ाई में उधर जनता तैयार इधर जन प्रतिनिधि

By

लोकपाल की लड़ाई में उधर जनता तैयार इधर जन प्रतिनिधि

अपने गांव रालेगढ़ सिद्धी से अन्ना हजारे पुणे होते हुए मुंबई पहुंच गये हैं. देर शाम मुंबई पहुंचे अन्ना हजारे को कहां रुकवाया जाएगा इसका खुलासा नहीं किया गया है लेकिन यह बात कन्फर्म हो गई है कि बीमारी की खबरों के बीच अन्ना हजारे मुंबई पहुंच गये हैं और बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स के मैदान में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अनशन करेंगे. मुंबई में अन्ना के अनशन को लेकर खूब प्रचार किया गया है और आयोजक मुंबई में अनशन के होने के बावजूद इसके असर को किसी भी तरह से कम नहीं होने देना चाहते. अन्ना के अनशन प्रायोजक इंडिया अगेन्स्ट करप्शन को जितनी जगह मिली है उसमें साठ हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है.

इधर संसद में भी बहस के लिए हर दल अपनी अपनी तैयारियां कर रहा है. प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा लोकपाल की बहस पर रास्ता रोकने की बजाय अपनी मांग को जबर्दस्त तरीके से रखने की रणनीति बनाई है. भारतीय जनता पार्टी की रणनीति है कि प्रस्तावित लोकपाल को पूरी तरह से सरकार के प्रभाव से मुक्त रखने की मुखालफत की जाए. कांग्रेस ने भी स्वीकार किया है कि कुछ बातों पर मतभेद हो सकते हैं लेकिन जो कुछ होगा वह संसद के अंदर ही

Dec

26

2011

1
Comments

मुसलमान पटाओ अभियान के आठ नुकसान

By

कांग्रेस की मुस्लिम पटाओ नीति देश के हित में नहीं है कांग्रेस की मुस्लिम पटाओ नीति देश के हित में नहीं है

भूख मिटाओ पैंतरा काफी अच्छा है बशर्ते कि वह ईमानदारी से लागू हो जाए लेकिन मुसलमान पटाओ पैंतरा कांग्रेस के लिए ही नहीं, देश के लिए और उससे भी ज्यादा मुसलमानों के लिए काफी खतरनाक सिद्घ हो सकता है। कांग्रेस पार्टी बड़े समझदारों की पार्टी है। वह इतनी भोली नहीं कि वह नाम लेकर बताए कि वह मुसलमानों को पटाने पर उतारू है। उसने अपनी चाल पर ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का पर्दा डाल दिया है। वह अब ‘अल्पसंख्यकों’ को 4.5 प्रतिशत आरक्षण देगी। अल्पसंख्यकों में सिर्फ उन्हें आरक्षण मिलेगा, जो पिछड़े हैं। इससे कम से कम आठ प्रकार के नुकसान होंगे।

पहला, सच्चे मुसलमान नाराज़ होंगे। वे कहेंगे कि कांग्रेस मुसलमानों पर भी जातिवाद की काफिराना हरकत थोप रही है। यह इस्लाम के मानवीय बराबरी के मूल सिद्घांत के खिलाफ है।

दूसरा, मुसलमानों में जो ऊंची जातियों के लोग हैं, उनके दिल में जलन पैदा होगी याने मुस्लिम समाज में फूट पड़ेगी।

तीसरा, अभी पिछड़े मुसलमानों को किसी राज्य में 12 प्रतिशत और किसी में 3 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, यदि यही आरक्षण अन्य ‘अल्पसंख्यकों’ याने ईसाई, सिख, बौद्घ, जैन और पारसियों में बंट गया और 4.5 प्रतिशत में से बंट गया तो मुसलमानों के पास अभी जितना है,

Dec

25

2011

0
Comments

चुनाव 2012 का दांव 2014 पर

By

चुनाव 2012 का दांव 2014 पर

बिना संगठन के मजबूत ढाँचे के कांग्रेस अपने सबसे होनहार नायक राहुल गांधी के भरोसे है. एक पुराने कांग्रेसी नेता मानते हैं की बिना जनता में सीधे जाए कुछ नहीं होने वाला. आज प्रदेश में कांग्रेस  के प्रत्याशी  ये मानकर चल रहे हैं की जब और जिस भी विधान-सभा में राहुल या सोनिया जी आ जायेंगी बस सारे वोट उसे ही मिल जायेंगे. ऐसा नहीं है. जनता से बढ़ी दूरी इन कांग्रेसी प्रत्याशियों की सबसे बड़ी समस्या है. जिससे उबरने का मंत्र उनके पास नहीं है. 'वों' ये नहीं समझ पा रहे हैं की जनता उन्हें क्यों वोट करे?  देश-व्यापी बढ़ती महँगाई, काला धन वापसी की मांग और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का प्रभाव इस बार के विधान सभा चुनाव में जरूर पडेगा.  दिग्विजय, चिदंबरम, ए. राजा, कलमाडी और कपिल सिब्बल की बदनामी और अलोकप्रियता का असर भी इस पार्टी के चुनाव-अभियान पर पडेगा.

दूसरी राष्ट्रीय पार्टी भाजपा है. जिसमें हतबल और ऊर्जाहीन नायकों का जमावडा है. इस दल में कोई भी अपने दल के प्रति समर्पित नहीं है. सभी इस दल के झूठे राष्ट्रनायकों के इर्द-गिर्द "गणेश-परिक्रमा" में व्यस्त है. पूरी पार्टी कबीलावादी संस्कृति से सराबोर है. प्रदेश के कई प्रभारी हैं और सभी अपने चुनाव - अभियान में

Dec

19

2011

1
Comments

चिनम्मा से दूर क्यों हुई अम्मा?

By

चिनम्मा से दूर क्यों हुई अम्मा?

सीधे तौर पर दो कारण है. एक शशिकला के खिलाफ प्रशासनिक शिकायतों का अंबार लगने लगा था और दो, शशिकला नौकरशाही तथा सरकार का इस्तेमाल खुद का ओहदा ऊंचा करने के लिए कर रही थी. हालत यह होती जा रही थी छाया मुख्यमंत्री का कद असल मुख्यमंत्री से बड़ा होने लगा था. हालात यह थे कि नौकरशाहों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति में अम्मा की बजाय चिनम्मा का आदेश चलने लगा था.

इसे देखते हुए तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में शशिकला, उनके पति और जयललिता के दत्तक पुत्र को मन्नारगुडी माफिया कहा जाने लगा था. इस मन्नारगुडी माफिया ने इंटेलिजेन्स विंग का प्रमुख जिस टी राजेन्द्रन की नियुक्ति करवा दी वे घोषित तौर पर करुणानिधि के कृपापात्र आईपीएस कहे जाते रहे हैं. अब आप सोचिए कि अगर जयललिता की सरकार के गुप्तचर विभाग का मुखिया करुणानिधि का आदमी होगा तो जयललिता कितनी निश्चिंत रह सकती हैं? लेकिन राजेन्द्रन के भाग्य ने साथ नहीं दिया और जयललिता ने उन्हें दरवाजा दिखा दिया.

लेकिन मन्नारगुडी माफिया की मनमानी इतनी ही नहीं थी. शशिकला ने जयल

के आस पास अपने आदमी "फिट" कर िदये थे जो मुख्यमंत्री से ज्यादा शशिकला के भरोसे के आदमी होते थे. मुख्यमंत्री के सचिव राममोहन राव, सह

Dec

17

2011

1
Comments

किस धन को काला कहें, किसे कहें सफेद?

By

किस धन को काला कहें, किसे कहें सफेद?

इसीलिए कि यह सरकारी पैसा जनता के भले के लिए इस्तेमाल किया जाए लेकिन वाकई क्या यह जनता की सेवा के लिए इस्तेमाल होता है? राजीव गांधी कहते थे कि रूपए में से सिर्फ 15 पैसे जनता तक पहुंचते हैं और राहुल गांधी कहते हैं कि सिर्फ 10 पैसे पहुंचते हैं| याने टैक्स के नाम पर दिया गया 90 प्रतिशत पैसा अपने आप काला हो जाता है। अर्थात सरकार को टैक्स देना अपने पैसे को काला धन बनाना है। काला धन तो वह है, जिसे हमारे नेता और नौकरशाह अपनी सुख-सुविधाओं पर खर्च करते हैंं और जो रिश्वत, तस्करी, ब्लेकमेल, दादागीरी, अवैध दलाली और चोरी-डकैती से कमाया जाता है। यह निकृष्टतम काला धन है।

हमारे देश में 45 तरह के टैक्स हैं, जिनमें सबसे बुरा आयकर है| आय में से 30 प्रतिशत की कटौती शुद्घ लूट-पाट है। सरकारी लूट-पाट! सरकार का खर्च तो सिर्फ 3 प्रतिशत के टैक्स से भी चल सकता है| हर साल 7-8 लाख करोड़ रू. का टैक्स उगाहा जाता है| अगर विदेशों में जमा काला धन वापस आ जाए तो अगले 8-10 साल तक भारत में किसी को भी कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं है। 70 लाख करोड़ रू. भारत लौट आएं तो भारत

Dec

09

2011

0
Comments

एएमआरआई में लगी मनमानी की आग

By

एएमआरआई में लगी मनमानी की आग

जो शुरूआती जांच पड़ताल हुई है उसमें यह बात निकलकर सामने आ रही है कि शुक्रवार की सुबह आग अस्पताल के बेसमेन्ट में लगी थी. देखते ही देखते आग ने पूरे अस्पताल को अपने चपेट में ले लिया और दम घुटने से अब तक पचास लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है. मरनेवालों में अधिकांश वे मरीज हैं जो विभिन्न क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती थे. जैसे ही आग लगी मरीजों को मरने के लिए छोड़कर अस्पतालकर्मी और डॉक्टर अपनी जान बचाते हुए वहां से भाग निकले.

प्रदेश सरकार का कहना है कि अभी भी आग लगने के कारण का पता नहीं चल पाया है लेकिन सरकार भी यह जानकर हैरान है कि इतने बड़े और मंहगे अस्पताल में आग लगने की स्थिति से निपटने के कोई प्राथमिक इंतजाम भी नहीं थे. मानों अस्पताल प्रशासन मान रहा था कि वह लोगों का इलाज करता है इसलिए उसके यहां कभी कोई संकट खड़ा ही नहीं हो सकता.

एएमआरआई अस्पताल कोई उपेक्षित सरकारी अस्पताल नहीं है बल्कि कोलकाता का प्रतिष्ठित निजी अस्पताल है जहां देश और विदेश के पैसेवाले लोग इलाज कराते हैं. दक्षिण कोलकाता के ढकुरिया में मौजूद इस अस्पताल की शुरूआत ईमामी ग्रुप ने साची ग्रुप के साथ

Dec

06

2011

14
Comments

डर्टी पिक्‍चर ऊ ला ला...बाबरी मस्जिद राम लला

By

डर्टी पिक्‍चर ऊ ला ला...बाबरी मस्जिद राम लला

फिल्‍म में एक सैकंड में 24 फ्रेम्‍स होते हैं परंतु डर्टी के फ्रेम्‍स का तो आप अंदाजा ही नहीं लगा सकते। सब सबसे अधिक उसी के दीवाने हैं। कहते हैं कि जानेंगे नहीं, तो बचने के उपाय कैसे करेंगे। इसी बहाने सब इसी के चारों ओर मंडराते हैं। गंदगी का साम्राज्‍य कभी ध्‍वस्‍त नहीं हो सकता क्‍योंकि राग-द्वेष से किसी का भला नहीं हो सकता। सब उसी ओर बढ़ रहे हैं, खाई गहरी में गिर रहे हैं। सबसे अधिक डिमांड में डर्टी है, इसी से उम्‍मीदें बंधी हैं। नेताओं की डिमांड में पावर्टी है। वहीं से वोट मिलते हैं। मिलते कम हैं, खरीदे ज्‍यादा जाते हैं। इसी वजह से नफरत का ज्‍वालामुखी फटता है। कभी बावरी मस्जिद गिराई जाती है। वहां का ऊह ला ला बन जाता है राम लला। और कुछ नहीं है, इन सबमें भावना डर्टी है।

डर्टी पिक्‍चर सभी को लुभाती है। ऊह ला ला उ ला ला। चाहे कितना हो पाला, इसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया, चाहे कितना ही पॉवरफुल हो साला। ऊह ला ला उ ला ला। सबसे आंख बचाकर सब इसी के पास जाते हैं, वहां पर सब बेशर्म हो जाते हैं। बिग बॉस का धंधा मंदा है तो क्‍या हुआ, सन्‍नी

Dec

04

2011

2
Comments

रुपया गिरा क्यों... खुदरा बिका क्यों...

By

रुपया गिरा क्यों... खुदरा बिका क्यों...

पिछले कई साल से लगातार मंदी का मुकाबला कर रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था के रिटेल नायक से हम इतना डर रहे हैं. देश के वाल मार्ट के बाप बैठे हैं लूटने के लिए, गुलाम बनाने के लिए. रिलायंस से लेकर आईटीसी तक ने न जाने कितने स्टोर खोले मगर एक भी नहीं चला. अपने देश में कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं हैं चले हैं भारत को गुलाम बनाने. तो फिर इतना ड्रामा क्यों ? कहीं इसलिए तो नहीं कि सरकार लोकपाल के मुद्दे को डाइवर्ट करना चाहती है ? या कहीं इससे भी बड़ी कोई वजह तो नहीं. कहीं रुपये के गिरना और एफडीआई के फैसले के बीच में कोई अंतर्संबंध तो नहीं ?

अर्थशास्त्री कंचन बनर्जी ने एक रोचक निष्कर्ष पेश किया है जो न्यू ग्लोबल इडियन नामक पत्रिका में छपा है. वे रुपये के अवमूल्यन के पीछे सरकारों के चारित्रक अवमूल्यन को देखते हैं. वे बताते हैं, जब-जब सरकार में शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है, रुपये का अवमूल्यन हुआ है. क्योंकि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बनता है, काला धन बड़े पैमाने पर देश से बाहर ले जाने की कोशिश की जाने लगती है. उन्होंने इस आलेख में बताया है कि 1750 में एक रुपये

Dec

03

2011

0
Comments

ह्वाई दिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी दी!

By

ह्वाई दिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी दी!

जैसे हिन्दी में इंगलिश ने हस्तक्षेप करके इसे हिंगलिश बना दिया है उसी तरह तमिल के साथ मेल मिलाप करके इंगलिश ने तमिलिश भाषा का निर्माण कर दिया है. आम बोलचाल से आगे पहली बार किसी गाने में इसका जमकर इस्तेमाल हुआ है जिसका परिणाम है कि गाना सिर्फ तमिलभाषियों के लिए ही नहीं बल्कि अन्य भाषा भाषियों को थोड़ा थोड़ा समझ में भी आ रहा है और लोकप्रिय भी हो रहा है. हालांकि जैसा बताया जा रहा है उतना भी लोकप्रिय नहीं है फिर भी गाना सुनने में आकर्षक है और ड्रम बीट तथा तेज संगीत गाने के प्रति आपका मन जरूर आकर्षित करता है.

कोलावेरी शब्द तमिल में उस टूटे हुए प्यार के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिसमें लड़की लड़के का दिल तोड़ देती है. लड़की द्वारा लड़के का दिल तोड़ना यह कोई बीसवीं इक्कसवी सदी में विकसित हुई व्यवस्था नहीं है. सदियों से स्त्रियां पुरुषों का दिल तोड़ती आई हैं और हर सदी के पुरुषों ने स्त्रियों के इस "अत्याचार" को अनेकों तरह से आत्मसात करते आये हैं. राजा भर्तहरि का वैराग्य शतकम भी उनके टूटे हुए प्रेम का कोलावेरी था तो देव डी का इमोशनल अत्याचार भी स्त्रियों के तथाकथित फरेब फेर था. बीच के

Dec

03

2011

3
Comments

राहुल गांधी की दो बेजोड़ बातें

By

राहुल गांधी की दो बेजोड़ बातें

राहुल ने युवक कांग्रेस के हजारों नौजवानों को संबोधित करते हुए कहा कि आप में से कोई भी यहां ‘पैराशूट’ से नहीं उतरा है। याने आप में से कोई भी ऊपर से नहीं थोपा गया है। सब लाखों साधारण सदस्यों के बीच से चुनकर आए हैं। कुछ हद तक ये बात ठीक भी है, क्योंकि कांग्रेस के इतिहास में पहली बार युवक कांग्रेस के सदस्यों ने अपने प्रतिनिधियों को चुना है लेकिन ये चुनाव कैसे हुए होंगे, इसकी तुलना कांग्रेस पार्टी के आंतरिक चुनावों से की जा सकती है। फर्जी सदस्यता और फर्जी मतदान की जैसी गहन विशेषज्ञता के लिए कांग्रेस पार्टी विख्यात है, वैसी दुनिया की कोई पार्टी नहीं है। क्या राहुल गांधी ने इस परंपरा को तोड़ा है या उसे उच्चतर आयाम प्रदान किए हैं? जो भी केंद्रीय समिति उन्होंने बनाई है, क्या उसे भी किसी ने चुना है? या वह राहुलजी के ‘पैराशूट’ में ही लदकर सबके कंधे पर सवार हो गई है? क्या युवक कांग्रेस के पदाधिकारी भी साधारण सदस्यों द्वारा चुने जाएंगे? या ऊपर से थोप दिए जाएंगे?

स्वयं राहुल गांधी का क्या हाल है? उन्हें किसने चुना है? क्या वे अपनी योग्यता से कांग्रेस महासचिव बने हैं? उनकी जितनी योग्यता है, वैसे तो

back 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 next last total: 198 | displaying: 81 - 90

Bloggers

मदन तिवारी

मदन तिवारी

मदन तिवारी पेशे से वकील हैं. गया में रहकर वकालत करते हैं. लेकिन वकालत के पेशे में पत्रकारिता कब घुस गई पता ही नहीं चला. मदन तिवारी कहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जब कलम ने अपनी लड़ाई बंद कर दी तो उन्होंने कलम उठा ली. इसलिए अब मीडिया के अलावा अर्थ और विदेश मामलों पर भी जमकर लिखते हैं.
Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Ashok Wankhade

Ashok Wankhade

यवतमाल में पैदा हुए अशोक वानखेडे पढ़ने के लिए इंदौर आये तो पत्रकारिता का कैरियर साथ में लेकर इंदौर से बाहर निकले. फ्री प्रेस जर्नल से पत्रकारिता शुरू करनेवाले अशोक वानखेडे चौथा संसार में काम करने दिल्ली आये तो यहीं के होकर रह गये. करीब पचीस साल के अपने पत्रकारीय कैरियर में अंग्रेजी, हिन्दी और मराठी तीनों भाषाओं के लिए काम किया है. इलेक्ट्रानिक का जमाना आया तो विडियो जर्नलिज्म में भी हाथ आजमाया. अब एक अखबार के राजनीतिक संपादक होने के साथ साथ नये मीडिया को नारा-ए-मस्ताना बनाना चाहते हैं.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है। नेटवर्क6 के संपादक।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.