Home | CURRENT AFFAIRS

CURRENT AFFAIRS

Feb

22

2012

0
Comments

महामाया की महाछाया

By

महामाया की महाछाया

गाजियाबाद के एक हिस्से को अलग करके मायावती ने ही इसे गौतमबुद्धनगर जिला बनाया था. इसी गौतमबुद्ध नगर में उत्तर प्रदेश के दो सबसे तेज विकसित होते उपनगर स्थित हैं. एक ह नोएडा और दूसरा है ग्रेटर नोएडा. इस नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच में जहां मायावती की सभा रखी गई थी वहां इतना विशाल मैदान था कि दो तीन लाख लोगों की सभा हो सकती थी. लेकिन मैदान को कांट छांटकर कई हिस्सों में विभाजित कर दिया था जिसमें एक हिस्से में उनकी सभा हुई. जितने बड़े हिस्से को उनकी सभा के लिए आरक्षित किया गया था लगभग उतने ही बड़े हिस्से को उनके हेलिकाप्टर के लिए हैलीपैड बनाया गया था. अगर एक तराजू लेकर दोनों हिस्सों को तौलते तो तोले माशे का ही फर्क शायद पड़ता. मायावती के समर्पित सिपाही उनके भाषण को सुनने के लिए उतनी ही जगह भर पाये जितना उनके हेलिकॉप्टर को उतरने के लिए जगह चाहिए थी.

अब ये दो विरोधाभाषी दृश्य हैं या फिर इसे मायावती के राजनीति का अनिवार्य सच मान लें लेकिन जो दृश्य वहां दिखा उससे लग रहा था कि वहां मौजूद लोगों को मायावती से ज्यादा उनके हैलिकॉप्टर में रुचि थी. जैसे ही मायावती अपना करीब 45 मिनट

Feb

22

2012

1
Comments

अति के आगे अंत

By

अति के आगे अंत

यह केवल सरकारी संरक्षण में चल रहे आर्थिक भ्रष्टाचार तक सीमित मामला नहीं है अपितु यह पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करता है कि हम किस जंगल तंत्र में जीने को विवश हैं। इस जंगलतंत्र का एक रूप हमने गुजरात में देखा था जहाँ आज भी अपराधी न केवल स्वतंत्र हैं अपितु शान से सत्ता सुख लूट रहे हैं क्योंकि वे अपने दुष्प्रचार से मतदाताओं के एक वर्ग को बरगलाने में सफल हैं और हम लोकतंत्र के नाम पर उनको अपने अपराध छुपाने दबाने व जाँच एजेंसियों को प्रभावित करने की ताकत देने के लिए मजबूर हैं। हरियाणा में चुनावों से ठीक पहले कुछ लोग खाप पंचायत के फैसले के नाम पर सरे आम हत्याएं कर देते हैं और लगभग सभी पार्टियों में बैठे, सत्तासुख के लिए वोटों के याचक उनका खुल कर विरोध भी नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें एक जाति के नाराज हो जाने का खतरा था। न्याय व्यवस्था के रन्ध्रों में से निकल कर लम्बे समय तक सुख से जीने वाले अपराधी न्याय में भरोसा रखने वालों को मुँह चिढाते लगते हैं जिसके परिणामस्वरूप लोग जंगली न्याय में भरोसा करने लगते हैं। समाज में बढती हिंसा के पीछे यह एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है।

Feb

22

2012

0
Comments

ममता बनर्जी से बंगाल को एलर्जी

By

ममता बनर्जी से बंगाल को एलर्जी

केन्द्र में कांग्रेस से बात बात पर भिड़नेवाली ममता सरकार के खिलाफ विपक्षी वाममोर्चा फिर एक बार गोलबन्द हो चुका है। 19 फरवरी को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में लाखों की भीड़ का जुटाव इस बात को और पुष्ट करता है। ब्रिगेड की सभा में माकपा महासचिव प्रकाश करात, सीताराम येचुरी सहित वाममोर्चा के राज्य सचिव विमान बोस, पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने तृणमूल-कांग्रेस की साझा सरकार की नाकामियों को बिंदास तरीके से उठाया। समझा जा सकता है कि अप्रैल में होने वाले पंचायत चुनावों के पहले वामपंथियों की 19 फरवरी की कामयाब रैली ममता बनर्जी के लिए चिन्ता का कारण बन चुकी है।

ममता बनर्जी की निजी छवि साफ-सुथरी मानी जा सकती है, लेकिन उनकी सरकार के कामकाज के तरीके पर लोगों को तसल्ली नहीं है। विधाननगर और मालदह के अस्पतालों में बच्चों की मौत पर अस्प्रपताल प्रबन्धन का बचाव ममता बनर्जी की छवि पर एक दाग की तरह है। बताना प्रासंगिक है कि यही ममता बनर्जी वाममोर्चा के शासन के दौरान ऐसी घटनाओं पर आन्दोलन किया करती थीं और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की लापरवाही के लिए वामपंथी सरकार को दोषी ठहराया करती थीं, लेकिन जब घटना उनके शासन में हुयी तो वे बचाव में उतरीं और

Feb

22

2012

0
Comments

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

By

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

उल्लेख्नीय है कि बंगलादेश के भाषाई आन्दोलन के शहीदों  की याद में संयुक्त राष्ट्र संघ ने नवम्बर १९९९ में २१ फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा  दिवस के रूम में मनाने की घोषणा की. तब से यह दिन दुनिया भर में मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन इस दिन को लेकर जैसा उत्साह और उत्सवधर्मिता तथा जागरूकता एवं आम जनता की भागीदारी बांग्लादेश में दिखाई देती है वैसी अन्यत्र दुर्लभ है. भारत में तो इस दिवस को शायद लोग जानते भी नहीं है. भारतीय जनता के लिए यह दिवस वैसे ही लगभग अनजाना है जैसे अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस (२ अक्टूबर). हो सकता है कि बौद्धिक और शासक वर्ग इन ‘दिवसों’ से परिचित हो लेकिन आम जनता को बिल्कुल इनसे कोई सरोकार नहीं दिखाई देता. उत्सवधर्मिता और उत्साह तो दूर की बातें हैं. ऐसा भी नहीं है कि भारतीय मातृभाषाओं के सामने कोई खतरा मौजूद नहीं है इसलिए भारतवासी इन ‘दिवसों’ की औपचारिकता को अपने लिए निरर्थक मानते हों. और आयोजनों और उत्सवों से दूर रहते हों.

लेकिन, बांग्लादेश में २१ फरवरी का दिन राष्ट्रीय उत्सव की तरह से मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा २१ फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में घोषित करने की पृष्ठभूमि में

Feb

21

2012

1
Comments

निर्विवाद जीत के महानायक

By

मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत के बाद बाल ठाकरे बेटे उद्धव और पोते के साथ मुंबई महानगरपालिका चुनाव में जीत के बाद बाल ठाकरे बेटे उद्धव और पोते के साथ

जिस दिन शिवसेनाप्रमुख ठाणे के सेंट्रल मैदान पर अपनी पहली चुनावी सभा में गए, उनके हरफनमौला वत्कृत्व ने शिवसेना के लहर की आगाज उसी दिन कर दी। जब बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स मैदान पर उनकी दूसरी सभा हुई तब तो भगवा लहर तूफान का स्वरूप ले चुका था। चुनाव परिणाम आए तो विरोधियों को भी स्वीकार करना पड़ा कि शिवसेना और शिवसेनाप्रमुख एकमेवाद्वितीय संगठन और व्यक्तित्व हैं। कोई कितनी भी नकल कर ले उनके महाव्यक्तित्व के समक्ष वह माशा-तोला भी नहीं ठहरता।

शिवसेना द्रोहियों का छल: इस तथ्य को फिलवक्त स्वीकारना हर चुनावी विश्लेषक की मजबूरी है। पर इस विजय के बाद भी शिवसेना द्रोही एक छल करने से बाज नहीं आ रहे हैं शिवसेना कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे की भूमिका के मूल्यांकन का। मुंबई महानगरपालिका के इतिहास को खंगालने पर भी मुझे ऐसा कोई नाम नहीं मिलता जिसके सांगठनिक कौशल के बल पर किसी भी राजनीतिक दल को सतत् 4 बार अपने संगठन को मुंबई मनपा का चुनाव जितवाने में सफलता हासिल हुई हो। आजादी के बाद का दृश्य देखें। मुंबई मनपा के चुनाव कांग्रेस पार्टी बी.जी. खेर, मोरारजी देसाई, सदोबा पाटील, रजनी पटेल, मुरली देवड़ा और गुरुदास कामत के नेतृत्व में लड़ती रही है। सदोबा पाटील, रजनी पटेल और मुरली देवड़ा

Feb

21

2012

2
Comments

डेमोक्रेसी के लिए पार्लियामेन्ट्री डिप्लोमेसी

By

डेमोक्रेसी के लिए पार्लियामेन्ट्री डिप्लोमेसी

मीरा कुमार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसूफ रजा गीलानी ने भी पाकिस्तान आने की दावत दिया था. इसके पहले लोकसभा का कोई भी स्पीकर कभी भी पाकिस्तान की यात्रा पर नहीं गया है. यह बहुत ही दिलचस्प संयोग है कि भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों में आजकल संसद के निचले सदन की पीठासीन अधिकारी महिलायें हैं.

दरअसल पाकिस्तानी कौमी असेम्बली की स्पीकर डॉ फहमीदा मिर्ज़ा तो किसी भी एशियाई देश की पहली महिला स्पीकर हैं. मीरा कुमार २००९ में लोकसभा की अध्यक्ष बनीं जबकि फहमीदा मिर्ज़ा २००८ में ही पाकिस्तान की कौमी असेम्बली की स्पीकर बन चुकी थीं. मीरा कुमार और डॉ फहमीदा मिर्ज़ा के बीच निजी तौर पर भी बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं. मीरा कुमार को लिखे एक पत्र में फहमीदा मिर्ज़ा ने कहा था कि हमारे दोनों ही देशों के लोग चाहते हैं कि इस इलाके में शान्ति और सम्पन्नता हो. यह उनका हक भी

हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी आकांक्षा को हकीकत बनाने में मदद करें. हमारे दोनों ही मुल्क पड़ोसी तो हैं ही वे गरीबी, अशिक्षा, बीमारी और अभाव के भी शिकार हैं. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि दो महिला स्पीकर साथ साथ काम करके अपने क्षेत्र में लोगों की, ख़ासकर महिलाओं की तरक्की को

Feb

20

2012

4
Comments

राजनीति का जनाजा ढोते अर्थीबाबा एमबीए

By

चुनाव प्रचार के दौरान अर्थी बाबा चुनाव प्रचार के दौरान अर्थी बाबा

तीसरी बार विधानसाभा चुनाव लड़ रहे पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमबीए डिग्रीधारी राजन यादव जब "अर्थी" लेकर अपना चुनाव प्रचार करते थे तो लोगों के मुंह से बरबस ही हंसी छूट पड़ती थी. लेकिन जैसे ही राजन यादव लोगों को बताते हैं कि वे आखिर क्यों "अर्थी" लेकर चल रहे हैं तो जल्दी ही उनके चेहरों से हंसी काफूर हो जाती. वे राजन की बातों पर एक बार सोचने को मजबूर होते थे. आप के मन में सवाल होगा, आखिर पढ़ा लिखा यह नौजवान पूरे चुनाव के दौरान अर्थी उठा कर अपना मजाक क्यों उडवाता रहा?

दरअसल, बेहतरीन करियर और मान-प्रतिष्ठा त्याग कर 35 वर्षीय यह नौजवान व्यवस्था परिवर्तन चाहता है. राजन यादव के मन में वर्तमान राजनीति के प्रति बेहद आक्रोश है. उनका कहना है कि राजनीति तो मर चुकी है. नेताओं और भ्रष्ट व्यवस्था ने लोकतंत्र और राजनीति की हत्या कर दी है. इसीलिए वह "राजनीति का जनाजा" निकाल रहे हैं. 2007 में पहली बार गोरखपुर से चुनाव लड़ने वाले राजन "अर्थी" लेकर प्रचार करते हैं. इसी वजह से वह "अर्थीबाबा" के नाम से चर्चित हैं. वैसे वे अब आधिकारिक स्तर पर अपना नाम राजन यादव एमबीए उर्फ अर्थीबाबा लिखते हैं. राजनीति का जनाजा

Feb

20

2012

4
Comments

दुश्मन के दर पर मुसलमानों का मसीहा

By

महंत अवैद्यनाथ के साथ दिग्विजय सिंह महंत अवैद्यनाथ के साथ दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह को आरएसएस से जुड़े लोग ही मजाक में उन्हें अपना भाई बताते रहते हैं लेकिन यह कोई मजाक नहीं है. पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक मुस्लिम मतों को विभाजित करने के लिए गोरखनाथ पीठ के प्रमुख महंत अवैद्यनाथ ने न केवल मुसलमानों की पीस पार्टी पैदा करवा दी बल्कि उसको आर्थिक मदद पहुंचाने में कांग्रेस से मदद भी करवा दी. गोरथनाथ पीठ ठाकुर महंत की पीठ कही जाती है इसलिए यहां के महंत अवैद्यनाथ और उनके उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने चुनाव से बहुत पहले पीस पार्टी की स्थापना में जमकर मदद की. अगर आप पीस पार्टी का एजंडा देखें तो समझ में आ जाता है कि वह प्रदेश में ठाकुर और मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण को ही अपनी जीत का आधार बताती रहती है. पीस पार्टी के मुखिया मोहम्मद अय्यूब खुलेआम कहते रहते हैं कि वे प्रदेश में ठाकुरों और मुसलमानों का राजनीतिक गठजोड़ तैयार कर रहे हैं जो पूरे प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करेगा.

प्रभावित करने की इसी राजनीति को अंजाम देने के लिए ढाई तीन महीने पहले दिग्विजय सिंह ने भी महंत अवैद्यनाथ से मुलाकात की थी. यह मुलाकात गोरखपुर में हुई थी और

Feb

17

2012

3
Comments

भ्रष्टाचार क्यों नहीं बना मुख्य चुनावी मुद्दा ?

By

टीम अण्णा के सदस्य उत्तर प्रदेश गये जरूर लेकिन उनको कोई खास तवज्जो नहीं मिली टीम अण्णा के सदस्य उत्तर प्रदेश गये जरूर लेकिन उनको कोई खास तवज्जो नहीं मिली

पूरा देश इस वक़्त भ्रष्टाचार से त्रस्त है। निचले स्तर से लेकर शीर्ष तक; सर्वत्र भ्रष्टाचार ने अपनी जडें मजबूत की हैं। भ्रष्टाचार को लेकर देश की छवि वैश्विक परिदृश्य में कितनी खराब हुई है यह इस बात से समझा जा सकता है कि बीते वर्ष हांगकांग स्थित एक प्रमुख व्यापारिक सलाहकार संस्थान ने अपने सर्वे में भारत को एशिया-प्रशांत के १६ देशों के बीच चौथा सबसे भ्रष्ट देश बताया था। हालांकि इस तरह के सर्वेक्षणों पर संशय के बादल हमेशा रहते हैं मगर इस तथ्य को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि हमारे देश में भ्रष्टाचार एक ऐसा नासूर बन चुका है जिसे जड़समूल समाप्त करना किसी के बस में नहीं है। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और भ्रष्टाचार से पीड़ित; बड़ा अजीब सा लगता है। चूँकि लोकतंत्र में असली ताकत जनता के हाथों होती है इसलिए भारत में भी बढ़ते भ्रष्टाचार के लिए एक हद तक जनता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि राजनेताओं की कारगुजारियों ने भी भ्रष्टाचार को बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। देश में व्याप्त राजनीतिक शून्यता के कारण वर्तमान राजनीति दिग्भ्रमित होती जा रही है। कोई भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम आदमी के

Feb

17

2012

1
Comments

कांग्रेस की खुशी सोनिया का गम

By

सोनिया गांधी बेटी प्रियंका के साथ सोनिया गांधी बेटी प्रियंका के साथ

उत्तर प्रदेश में खुर्शीद ने एक चुनावी सभा में कहा, ‘जिस वक्त बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ था उस समय मैं हुकुमत में नहीं था, बावजूद एक वकील की हैसियत से मैं कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह के साथ सोनिया जी के पास गया और उन्हें मुठभेड़ की तस्वीरें दिखाईं तो वह रोने लगीं और प्रधानमंत्री के पास जाने को कहा था।’ खुर्शीद के इस नाटकीय बयान पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने पूछा कि ‘क्या बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा और संसद हमले में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के लिए भी सोनिया के आंसू फूट पड़े थे।’

दरअसल कांग्रेस बाटला हाउस के जख्मों को जान बूझकर छेड़ती रहती है और इस मुद्दे से उपजी सहानुभूति को वोटों  में बदलने की फिराक में रहती है। पार्टी आला कमान की शै पर ही पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बाटला हाउस मुठभेड़ के दौरान आजमगढ़ के संजरपुर जाकर सरकार की परेशानियां बढ़ा दी थीं। बाटला हाउस पर एक के बाद एक नाटकीय बयान देने वाले कांग्रेस नेता भूल जाते हैं कि खुद कांग्रेसी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री इसे जायज ठहरा चुके हैं। तो सवाल है कि सनसनी खेज बयानबाजियों के बहकावे में यूपी का

1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 next last total: 954 | displaying: 1 - 10

Bloggers

Seetaram Yechuri

Seetaram Yechuri

हैदराबाद के ब्राह्मण कुल में पैदा हुए सीताराम येचुरी भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के कुछ चेहरों में एक बन गये हैं. सेंट स्टीफेन और जेएनयू से शिक्षा. 1974 में एसएफआई में सक्रिय और बाद में सीपीआईएम से जुड़े. 1984 में सीपीआई सेन्ट्रल कमेटी में शामिल हुए. वर्तमान में सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो के मेम्बर और ऐसे सक्रिय राजनीतिज्ञ जिनसे मिलने की तमन्ना बराक ओबामा भी रखते हों.
Rajiv Yadav

Rajiv Yadav

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक राजीव दिल्ली स्थित आईआईएमसी से मीडिया में मास्टर डिग्री ले चुके हैं. फिलहाल इलाहाबाद में रहकर मुक्त पत्रकारिता और जनाधिकार के मुद्दों पर सक्रिय कार्य कर रहे हैं. विस्फोट पर लेखन.
Dr. Ashish Vashisth

Dr. Ashish Vashisth

डॉ. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में रहनेवाले स्वतंत्र पत्रकार हैं. विभिन्न विषयों पर समसामयिक टिप्पणी और लेखन.
Harsh Vardhan

Harsh Vardhan

हर्षवर्धन टीवी पत्रकार हैं. अमर उजाला में लंबे समय तक काम करने के बाद सीएनबीसी आवाज में काम किया. बतंगड़ नाम से नियमित ब्लाग भी लिखनेवाले हर्षवर्धन राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर स्थापित हैं.
Vinod Upadhyay

Vinod Upadhyay

मूलत: बक्सर बिहार के रहनेवाले विनोद उपाध्याय भोपाल में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता में प्रवेश. वर्तमान में भोपाल से ही प्रकाशित होनेवाले दैनिक अग्निबाण से जुड़े हुए हैं.
Arvind Tripathi

Arvind Tripathi

अरविन्द त्रिपाठी देश के कई बड़े समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में काम करने के बाद वर्तमान में दिल्ली से प्रकाशित हो रही "सामना" हिंदी पत्रिका में उत्तर प्रदेश से विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. साथ ही पानी और पर्यावरण के मुद्दे पर राजेन्द्र सिंह के साथ काम कर रहे हैं.
Sanjay Tiwari

Sanjay Tiwari

आप जहां तक सोच सकते हैं इंटरनेट आपको वह करने का मौका देता है. अभी तक मानव सभ्यता ने जितने भी मीडिया माध्यमों का उपयोग किया है यह उन सबमें अनूठा, प्रभावी और सर्वगुण संपन्न है. सूचना लेने देने के तीन माध्यमों दृश्य, श्रवण और पाठ को एक ही धागे में लपेटे नया मीडिया उत्पादन और पहुंच दोनों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ है. ऐसे नये मीडिया का जनहित के लिए भरपूर उपयोग हो, विस्फोट.कॉम उसी दिशा में उठा एक कदम है. visfot@visfot.com
Awesh Tiwari

Awesh Tiwari

मेरे लिए खबरें सिर्फ सूचनाओं को कलमबंद करने का जरिया नहीं है ,ये जरुरी है कि जिनके लिए भी हम खबरें लिख रहे हैं उनको उन ख़बरों से कुछ मिले |पिछले एक दशक से उत्तर भारत के सोन-बिहार -झारखण्ड क्षेत्र में आदिवासी किसानों की बुनियादी समस्याओं ,नक्सलवाद ,विस्थापन ,प्रदूषण और असंतुलित औद्योगीकरण को लेकर की गयी अब तक की रिपोर्टिंग में हमने अपने इस सिद्धांत को जीने की कोशिश की है। नेटवर्क6 के संपादक।
Anshuman Tiwari

Anshuman Tiwari

मूलत: उत्तर प्रदेश के रहनेवाले अंशुमान तिवारी ने आर्थिक पत्रकारिता को हिन्दी में बहुत शुरूआती दौर से देखा समझा है. अमर उजाला कारोबार के लिए काम किया और बाद में दैनिक जागरण समूह से जुड़े. वर्तमान में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ हैं. इसके साथ ही अर्थार्थ नाम से ब्लाग भी लिखते हैं.
Dr. Shashi Tiwari

Dr. Shashi Tiwari

डॉ शशि तिवारी मीडिया जगत की विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हैं और सूचनामंत्र नामक पत्रिका का संपादन करती हैं. भोपाल में रहते हुए मीडिया संगठनों में सक्रियता के साथ साथ दूरदर्शन के लिए भी मुक्त रूप से काम करती हैं.
Rakesh Sinha

Rakesh Sinha

अकादमिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखनेवाले प्रो. राकेश सिन्हा संघ विचारधारा के बीच सक्रिय समानतावादी विचारक हैं. राकेश सिन्हा हिन्दुत्व की प्रखर धारा के पैरोकार हैं. लेकिन ऐसा करने के लिए वे हिंसक विवाद की बजाय अहिसक "संवाद" को अपना जरिया बनाते हैं. इंडिया पॉलिसी फाउण्डेशन के मानद निदेशक के रूप में शोध, अध्ययन और संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं.
S N Singh

S N Singh

शेष नारायण सिंह मूलतः इतिहास के विद्यार्थी हैं. शुरू में इतिहास के शिक्षक रहे. .बाद में पत्रकारिता की दुनिया में आये...प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया. इन्होने १९२० से १९४७ तक की महात्मा गाँधी की जीवनी के उस पहलू पर काम किया है जिसमें वे एक महान कम्युनिकेटर के रूप में देखे जाते हैं..1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की. अब मुख्य रूप से लिखने पढने के काम में लगे हैं. एक अखबार में काम और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Rajesh Singh

Rajesh Singh

मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
SATISH SINGH

SATISH SINGH

लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.
Abhishek Singh

Abhishek Singh

अभिषेक रंजन सिंह मूलतः खगड़िया बिहार के रहने वाले हैं। 2007-08 में नई दिल्ली के भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरूआत सकाल मीडिया गुप्र से किया। उसके बाद एक कारोबारी पत्रिका में बतौर संवाददाता काम किया औऱ उसके बाद एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक में लगभग एक साल उपसंपादक के पद पर काम किया। इन दिनों दक्षिण एशिया की प्रमुख ब्रॉडकास्ट एजेंसी सीवीबी न्यूज सर्विस में कार्यरत हैं। इसके अलावा विस्फोट सहित देश के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र और पत्रिकाओं में समसामयिक मुद्दों पर नियमित लेखन कर रहे हैं।
A N Sibli

A N Sibli

1993 से हिन्दी, उर्दू और अंग्रेजी के विभिन्न राष्ट्रीय अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन कर रहे अब्दुल नूर सिबली इस वक्त दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान एक्सप्रेस में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं. विभिन्न वेबसाइटों पर नियमित लेखन.
Prem Shukla

Prem Shukla

मुंबई से प्रकाशित हिन्दी सामना के कार्यकारी संपादक. पिछले 20 सालों से पत्रकारिता. पत्रकारिता के साथ ही मुबंई में हिन्दीभाषी समाज के विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभ लेखक.
Balendu Sharma

Balendu Sharma

माईक्रोसाफ्ट के मोस्ट वैलुएबल प्रोफेशनल पुरस्कार से सम्मानित बालेन्दु दाधीच वेब पोर्टल प्रभासाक्षी के समूह संपादक है. तकनीकि के घोड़े पर हिन्दी की काठी बांधनेवाले बालेन्दु दाधीच केवल तकनीकि के जानकार ही नहीं बेहतरीन पत्रकार भी हैं.
Rajiv Sharma

Rajiv Sharma

राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग.
Arjun Sharma

Arjun Sharma

जालंधर के रहनेवाले अर्जुन शर्मा बीस साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. बीस साल में 10 मीडिया घरानों की सैर कर चुके अर्जुन शर्मा का ट्रैक रिकार्ड बताता है कि उन्होंने कलम के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया. मीडिया में नये आनेवाले पत्रकारों के लिए व्यावहारिक पत्रकारिता नाम की एक पुस्तक भी लिखी है. विस्फोट.कॉम के लिए पंजाब और हिमाचल का प्रभार. journalistarjun@gmail.com
Devinder Sharma

Devinder Sharma

इंडियन एक्सप्रेस में कृषि रिपोर्टर रहे देवेन्द्र शर्मा अब कृषि और खाद्य मामलों में भारत के जाने-माने नाम हैं. दुनिया में जहां कहीं भी खेती-किसानी से जुड़ी नीतियों की बात चलती है देवेन्द्र शर्मा का नाम लिया जाता है. एक्सपर्ट के साथ साथ अब जन आंदोलनों में भी सक्रिय.
Vinayak Sharma

Vinayak Sharma

दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षा के दौरान युववाणी और दूरदर्शन आदि के विभिन्न कार्यक्रमों और परिचर्चाओं में भाग लेते हुए जो पत्रकारिता में प्रवेश किया तो बहुत कुछ सीखते हुए विगत पांच वर्षों से पत्रकारिता और लेखन कार्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर के अनेक सामाजिक संगठनों में पदभार संभाल रहे हैं. वर्तमान में मंडी, हिमाचल प्रदेश से प्रकाशित होने वाले एक साप्ताहिक समाचार पत्र में संपादक.
Dinesh Shakya

Dinesh Shakya

इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम के साथ साथ विस्फोट.कॉम के लिए लेखन.
Anil Saumitra

Anil Saumitra

जनसंचार माध्यमों की पहुंच विषय पर शोध करनेवाले अनिल सौमित्र भोपाल में रहते हैं. सामाजिक कार्य के अलावा स्वतंत्र पत्रकारिता और मीडिया एक्टिविस्ट के बतौर कार्यरत. विश्व संवाद केन्द्र में भी सक्रिय.
Kailash Satyarthi

Kailash Satyarthi

कैलास सत्यार्थी सामाजिक कार्यकर्ता और बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक अध्यक्ष हैं.
Afsar Khan Sagar

Afsar Khan Sagar

पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहनेवाले एम. अफसरखान सागर ने पूर्वांचल विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए किया है. 2007 से पत्रकारिता में है. विभिन्न अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ ही हिन्दी जर्नलिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के संयोजक हैं।
Prakash Ray

Prakash Ray

प्रकाश कुमार रे अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लंबे तक छात्र राजनीति करने के बाद सामाजिक जीवन और पत्रकारिता में हस्तक्षेप. फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन के साथ साथ bargad.org के संचालक.
Nirmal Rani

Nirmal Rani

अंबाला में रहनेवाली निर्मल रानी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं. पिछले पंद्रह सालों से विभिन्न अखबारों में स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार के तौर पर लेखन कर रही हैं.
Rambahadur Rai

Rambahadur Rai

पत्रकार. छात्र आंदोलन से राजनीति और राजनीति से पत्रकारिता में आये रामबहादुर राय हिन्दी में खोजी पत्रकारिता के शीर्षपुरूष समझे जाते हैं. वर्तमान में प्रथम प्रवक्ता के सलाहकार संपादक और विस्फोट.कॉम के सम्मानित स्तंभलेखक.
Dr. Ved Pratap Vaidik

Dr. Ved Pratap Vaidik

डॉ वेदप्रताप वैदिक भारतीय पत्रकारिता में जीवित किंवदन्ती बन गये हैं. अपना शोध प्रबंध उस वक्त हिन्दी में लिखा जब शोध का अर्थ ही अंग्रेजी होता था. 1971 में जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय मामलों में पीएचडी हासिल करने के बाद पत्रकारिता में आये. नवभारत टाइम्स के संपादक (विचार) फिर समाचार एजंसी भाषा के संपादक रहे. वर्तमान में भारतीय भाषा सम्मेलन और भारतीय विदेशनीति परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य और नियमित लेखन.