INTERVIEW
सर्वोच्च से उतरकर अब साधारण कार्यकर्ता हूं- राजनाथ सिंह
भाजपा अध्यक्ष के रूप में चार साल की राजनीतिक पारी खेलनेवाले राजनाथ सिंह को भाजपा का सबसे बेचारा अध्यक्ष कहा गया. लेकिन राजनाथ सिंह कहते हैं कि जिन कारणों से उन्हें बेचारा कहा जाता है वह उनकी उदारता है. राजनीति में आध्यात्मिक भावना रखने की सलाह देने वाले राजनाथ सिंह से चार साल के अपने अध्यक्षीय कार्यकाल और अन्य कई महत्वपूर्ण मसलों पर विस्फोट.कॉम ने विशेष बातचीत की. ... Full story
मैं अकेला आया हूं और निरंतर चलता रहूंगा- नितिन गडकरी
भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गुरुवार को नई दिल्ली में विधिवत भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली. इस मौके पर उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों से भी बातचीत की. लगभग एक घण्टे चली इस प्रेस कांफ्रेस में नितिन गडकरी से पत्रकारों ने खुलकर सवाल पूछे. इस प्रेस कांफ्रेस में पूछे गये कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उस पर गडकरी के जवाब यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक ... Full story
दलित के हाथ में सत्ता नहीं देना चाहती कांग्रेस
अली अनवर पश्मान्दा मुस्लिम महाज के नेशनल प्रेसीडेन्ट हैं और राज्यसभा में जद (यू) के मुख्य सचेतक हैं. रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत करवाने में अकेले अली अनवर की ही भूमिका है. पिछले दो साल से लगातार वे इस रिपोर्ट को सदन में पेश किये जाने के लिए अभियान चला रहे थे. रंगनाथ मिश्रा आयोग के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर हमने उनसे लंबी बात की. प्रस्तुत है अली अनवर से पूरी बातचीत- ... Full story
हिन्द स्वराज में है हमारी सब समस्याओं का समाधान-रिन्पोछे
यह महज संयोग ही नहीं है कि सरकार से इतर जो लोग विरोध के स्तर तक समाज कार्य में सक्रिय हैं उनमें से अधिकांश कहीं न कहीं महात्मा गांधी से प्रेरित हैं. 15 अगस्त की आधीरात जब देश आजादी का जश्न मना रहा था तो महात्मा गांघी बंगाल में बंटवारे से पैदा हुए शूल पर मरहमपट्टी कर रहे थे. आजादी के बाद भी समाज का वह शूल और नासूर कम नहीं हुआ है बल्कि और अधिक जटिल और भयावह हो गया है. इस शूल और नासूर को मिटाने के लिए जो लोग काम कर रहे हैं उनमें निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री समदौंग रिन्पोछे भी हैं. हिन्द स्वराज के लेखन के सौ साल पूरे हो गये हैं. स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर हमने समदौंग रिन्पोछे से बातचीत की. ... Full story
कांग्रेस ने शुरू की दंगों की राजनीति: जरनैल सिंह
देश विदेश में सूचनाओं से जुड़े किसी व्यक्ति के लिए जरनैल सिंह शायद ही अपरिचित नाम हो. दिल्ली दंगों के मसले पर चिदंबरम पर जूता फेंककर उन्होंने न केवल राजनीति को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का संदेश दिया बल्कि मीडिया को भी मुद्दों पर पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित किया. जरनैल सिंह जिस जज्बे और मुद्दे को लेकर पत्रकारिता में आये थे उसी जज्बे और मुद्दे के कारण वे पत्रकारिता से छुट्टी पर भेज दिये गये. उनका वह जज्बा और मुद्दा क्या है, कांग्रेस के बारे में वे क्या सोचते हैं और वे अब क्या करेंगे जैसे अनेकों सवालों पर हमने उनसे बात की. ... Full story
मैं नेल्सन मंडेला नहीं हूं- कर्नल बैंसला
देश विदेश में अपनी और कौम की पहचान बनाने के बाद , सफलता के मंत्र चुनिंदा ऐतिहासिक आन्दोलनों से जुडी पुस्तकों के पन्नों में ढूंढते हुए कर्नल किरोडी बैसला को एक बार फिर से सर्व समाज को साथ लेकर आरक्षण की किसी बड़ी जंग के लिए इन दिनों अपने आवास पर आराम के साथ अध्ययन, मनन और चिंतन करते देखा जा सकता है। दिल में 'शोले ओर शिकायतों' का तूफान जब उबाल लेता है तो अपनी गलतियॉ पूछने लग जाते है, तो किताबों से इतिहास के उदाहरण देकर खुद को बेकसूर साबित करने का कोई मौका भी नहीं चूकते। महापंचायत के बाद अभी उन्हें मुख्यमंत्री के बुलावे का इंतजार है। यह बात दीगर है कि उनका लक्ष्य खुद उनको ही कोसों दूर दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि उनके पास जो भी है पाने के लिए है खोने को कुछ नही है। जीवन के कुछ अनछुए बिन्दुओं पर उनसे हुई एक बेबाक बातचीत- ... Full story
अभी भी हरे हैं ऑपरेशन ब्लू स्टार के जख्म- दलजीत सिंह मट्टू
दलजीत सिंह बिट्टू पंजाब के उन प्रभावी अलगाववादी नेताओं मे से हैं जिनका युवाओं पर काफी प्रभाव है. अस्सी और नब्बे के दशक में वे करीब 10 साल भूमिगत रह कर अलग सिख राष्ट्र आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाते रहे. अप्रैल 1996 में गिरफ्तार होने के के बाद वे करीब 10 साल तक नाभा और तिहाड़ जेल में रहे. जेल से बाहर आने के बाद दलजीत सिंह फिर से युवाओं को एकजुट कर लोकतांत्रिक तरीके से अलग सिख राष्ट्र की मांग कर हैं. आपरेशन ब्लू स्टार से लेकर मौजूदा आंदोलन के बारे में अनिल पांडेय ने उनसे बातचीत की. ... Full story
राजनीतिक भ्रष्टाचार से निपटना सीबीआई के बूते की बात नहीं-अश्विनी कुमार
आज सीबीआई को विभिन्न राजनीतिक दलों से लेकर आम जनता तक की आलोचना का शिकार बनना पड़ रहा है। फिर भी देश में कहीं भी छोटी-बड़ी कोई भी घटना हो जाती है तो उसकी सीबीआई से जांच की मांग की जाती है। आखिर क्या है सीबीआई? सीबीआई पर सरकार का शिकंजा कितना है? क्यों होना पड़ता है सीबीआई को आलोचनाओं का शिकार? इन सभी मुद्दों पर सीबीआई निदेशक अश्विनी कुमार के साथ नीलू रंजन ने बात की। सीबीआई डायरेक्टर अश्विनी कुमार ने स्वीकार किया कि उच्च स्तरीय राजनीतिक भ्रष्टाचार से निपटना सीबीआई के बूते की बात नहीं है और इसके लिए केंद्रीय स्तर पर लोकपाल जैसी अथारिटी का गठन जरूरी है। ... Full story
कश्मीरी वही कर रहे हैं जो पाकिस्तान कह रहा है-एस के सिन्हा
जम्मू-कश्मीर चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस की जीत, पीडीपी की हार और अमरनाथ श्राइन बोर्ड की जमीन आदि को लेकर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल रहे जनरल एस.के. सिन्हा से संजीव कुमार की लंबी बातचीत के प्रमुख अंश- ... Full story
हमारे नेताओं को सुरक्षा की समझ नहीं-अजय साहनी
अजय साहनी इंस्टीट्यूट आफ कानफ्लिक्ट मैनेजमेन्ट के फेलो हैं. उनका मानना है कि पाकिस्तान के साथ ये लड़ाई आप एक महीने में नहीं जीत सकते। क्योंकि हम ये लड़ाई एक महीने में जीतने की कोशिश कर रहे हैं इसीलिए ये बीस साल से चल रही हैं, आप एक बीस साल की योजना बना लीजिये तो पाँच साल में ये लड़ाई खत्म हो जायेगी। यह रक्षात्मक युद्ध है, एक लंबा युद्ध हैं, इसको छोटे युद्ध की तरह लड़ने का मतलब है अपनी क्षमता जाया करना। ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story


