आदमीनामा

जन्मशती में भी याद नहीं आये राधाकृष्ण
 

जन्मशती में भी याद नहीं आये राधाकृष्ण

राधाकृष्ण को हमारे हिंदी लेखकों ने उनकी जन्मशताब्दी पर भी याद नहीं किया। जाहिर है, वे किसी ऐसे गुट के नहीं थे, जो उन्हें याद करता। हिंदी साहित्य जगत में गुटबाजी का ऐसा आलम है कि हम उन्हें याद भी नहीं करते, न जन्म तिथि पर पुण्य तिथि पर। वे ऐसे कथाकार थे, जिन्हें प्रेमचंद पुत्र की तरह प्रेम करते थे, गुरबत के दिनों में उनका खर्च चलाते थे और जब प्रेमचंद का निधन हुआ तो राधाकृष्ण 'हंस' को संभालने रांची से बनारस चले गए थे। इनकी कथा-प्रतिभा को देखकर प्रेमचंद ने कहा था 'यदि हिंदी के उत्कृष्ट कथा-शिल्पियों की संख्या काट-छांटकर पांच भी कर दी जाए तो उनमें एक नाम राधाकृष्ण का होगा।' ... Full story

नक्श के नक्श-ए-कदम
 

नक्श के नक्श-ए-कदम

गीतकार नक्श लायलपुरी की नज्मों का एक संकलन आया है.'आँगन आँगन बरसे गीत' नाम की यह किताब उर्दू में है.पिछले ५० से भी ज्यादा बरसों से हिन्दी फिल्मों में उर्दू के गीत लिख रहे नक्श लायलपुरी एक अच्छे शायर हैं. कविता को पूरी तरह से समझते हैं लेकिन जीवनयापन के लिए फ़िल्मी गीत लिखने का का काम शुरू कर देने के बाद उसी दुनिया के होकर रह गए.रस्मे उल्फत निभाते रहे और हर मोड़ पर सदा देते रहे. उनकी कुछ नज्मों के टुकड़े तो आम बोलचाल में मुहावरों की शक्ल अख्तियार कर चुके हैं. ... Full story

जल्लादों के बीच फौलाद सा कवि
 

जल्लादों के बीच फौलाद सा कवि

फेसबुक पर एक बहुत ही दिलचस्प बहस चल रही है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उनके छात्र जीवन के साथी असरार खां ने जनवादी कवि रमाशंकर यादव विद्रोही के बारे में कुछ ऐसे बयान दे दिए हैं जिन पर विवाद है. जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चन्द्रशेखर से उनकी तुलना कर देने के बाद कुछ लोगों को नागवार गुज़रा और उन्होंने विद्रोही की कविता पर ही सवाल उठाने शुरू कर दिए. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में १९८३ में हुए संघर्ष की कथा में नायकों और खलनायकों का ज़िक्र चल पड़ा और बात विद्रोही की कविता से हट कर छात्र राजनीति की बारीकियों पर केन्द्रित हो गयी. मुझे लगता है कि चंद्रशेखर और विद्रोही दोनों उस महान विश्वविद्यालय के छात्र हैं और दोनों की अपनी अपनी विशिष्टता है. ... Full story

4 दिसंबर 1926 से 17 दिसंबर 2010
 

निर्बल काया का सबल समाजवादी

सुरेन्द्र मोहन सदा सदा के लिए शांत हो गये हैं. देश में कभी समाजवादी चिंतन की धुरी पर आसीन रहे सुरेन्द्र मोहन की काया भले ही आज शांत हुई हो लेकिन समाजवाद के मद्धिम होने के साथ ही उनकी वाणी और विचार भी अप्रांसगिक होने लगे थे. जिस दौर ने समाजवाद को फैशन बनाया था उस दौर के नेताओं का धीरे धीरे होते अवसान ने शायद सुरेन्द्र मोहन को इतना अप्रांसगिक बना दिया था कि इंटरनेट पर उनका नाम खोजने पर उनसे ज्यादा सूचनाएं सुरेन्द्र मोहन पाठक के बारे में मिलती हैं. ... Full story

सिकरिया की 'शांति' यात्रा
 

सिकरिया की 'शांति' यात्रा

आज सिकरिया में कोई अपने अतीत को याद नहीं करना चाहता। नक्सल हिंसा वहां के लिए बीते समय की बात हो चुकी है। `लाल मिट्टी´ जो कभी जहानाबाद वालों के लिए आतंक का पर्याय था, जिसकी गिनती लोग-बाग बाथे, सेनारी, मियांपुर, बढ़ैता, कंसारा, दोहिया, पारसबीघा, पेरियारी, चौरम, झुनाठी (करपी थाना), बारा, शंकरबीघा जैसे नरसंहार पीड़ित इलाकों में ही करते थे। पर आज `लाल मिट्टी´ का अर्थ पूरी तरह बदल गया है, अब यह नाम लोगों को आतंकित नहीं करता, बल्कि प्रगति के लिए प्रेरित करता है। ... Full story

भरथरी गायकी और सुरुजीबाई
 

भरथरी गायकी और सुरुजीबाई

भरथरी गायिकी में उनका कोई सानी नहीं. जब वह ' घोड़ा रोवय घोड़सार मां' पंक्तियों से गाना शुरू करती हैं तो हजारों की भीड़ में आखिरी छोर पर बैठा श्रोता तक सुध-बुध खो बैठता है. आज 59 साल की उम्र में भी यदि सुरूजबाई खाण्डे की बुलंद आवाज बरकरार हैतो इसलिए कि वह छत्तीसगढ़ में पसीना बहाने वाले कर्मठ मजदूर के घर से है, उसका पालन-पोषण किसी ऐसे परिवेश में नहीं हुआ जहां गायिकी के हुनर को सिर माथे पर लेकर रियाज़ करने के लिए कोई सहूलियत दी जाए. ... Full story

मुंबई में के उन्नीकृष्णन
 

बेटे की शहादत पर बाप के जज्बे को सलाम

वह 27 नवंबर का ही दिन था. 27 नवंबर 2008. मुंबई के ताज पैलेस होटल में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स की टीम वहां पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा बंधक बनाये गये लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन ब्लैक टारनेडो को अंजाम दे रहे थे. अपने दस कमाण्डोज के साथ मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ताज होटल की छठी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे थे. सीढ़ियों से आगे बढ़ते हुए उन्हें अहसास हुआ कि आतंकी तीसरी मंजिल पर है और वहां उन्होंने कुछ महिलाओं को बंधक बना रखा है. संदीप और उनकी टीम उस ओर आगे बढ़ी. ... Full story

चुक गये पर झुके नहीं
 

चुक गये पर झुके नहीं

इस वक्त कांग्रेस और केन्द्र सरकार के बीच भले ही कुछ साझा हो न हो, एक बात जरूर साझा है कि उस एक आदमी ने सरकार और सोनिया गांधी दोनों को ही संकट में डाल रखा है जो लंबे समय से लगभग राजनीति के हाशिये पर फेंक दिया गया है. जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी सत्तर के दशक में भले ही राजनीति की धुरी पर बैठे रहे हों लेकिन उनके अति उर्वर दिमाग ने उन्हें उस दक्षिणपंथी राजनीति के हाशिये पर फेक दिया जिसके लिए वे काम कर रहे थे. ... Full story

पीएमओ वाले पृथ्वीराज
 

पीएमओ वाले पृथ्वीराज

महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है. ... Full story

माइ नेम इज बाल ठाकरे
 

माइ नेम इज बाल ठाकरे

साल भर पहले की बात है. 26 फरवरी की देर शाम मुंबई के लीलावती अस्पताल में एक बीमार व्यक्ति को रुटीन चेक-अप के नाम पर अस्पताल लाया गया. डाक्टरों ने परीक्षण किया तो उस बीमार व्यक्ति को अस्पताल में दाखिल कर लिया क्योंकि उन्हें फेफड़े में संक्रमण था. संक्रमण सामान्य नहीं था. डाक्टरों ने लंबे समय तक आराम करने की सलाह दे दी. ... Full story

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R L Francis

R L Francis

पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मुवमेन्ट के अध्यक्ष आर एल फ्रांसिस ईसाई मिशनरियों के बीच व्याप्त भेदभाव और कटुता के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद किये हुए हैं. विभिन्न अखबारों में लेखन के साथ विस्फोट के स्तंभ लेखक.