जनता दरबार
लो ! लाठियों से फोड़ डाला "बम"
भ्रष्टाचार मिटाने और विदेशी बैंकों में जमा काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करवाने की जिद पर अड़े "बाबा से बम" बने रामदेव को आम आदमी के बीच देखकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सांसे रुक गयीं। ठीक वैसे ही, जैसे किसी आदमी के पैरों के नीचे से अचानक "काला-नाग" आर-पार निकल जाये। बिना डसे हुए । हुकूमत को बाबा भी "बम" और "काले-सांप" से कम नज़र नहीं आ रहे । वो बम जो जनता के बीच फट जाये, तो भी सरकार की फजीहत । वो काला-नाग जिसे मारने में पाप लगेगा और देखकर रोंगटे खड़े हो रहे हैं। नहीं मारा तो इस बात का डर, कि न मालूम कब, कहां, किसको डस बैठे ? परेशान-हाल सरकार को एक बाबा दो रुपों में एक साथ नज़र आ रहा- बम और सांप। दोनो ही एक से बढ़कर एक खतरनाक। एक के फटने से तबाही । तो दूसरे के डसने से। ... Full story
आईआईएम में आखिर सही क्या है?
भारत के सर्वाधिक सुरक्षित एवं बहुप्रचारित उच्च शिक्षा के संस्थानों-आईआईटी और आईआईएम में गलत क्या है? अगर आप मुझसे पूछते हैं, तो यह पता लगाना मुश्किल है कि आखिर सही क्या है! सिवाए इसके कि उनके पास सैकड़ों एकड़ जमीन और बहुत अच्छी जनसंपर्क मशीनरी है (प्रिंट मीडिया में काबिज अद्र्धशिक्षित और कुंठित पत्रकारों का शुक्रिया जो कि मुद्दे पर समझ की कमी की वजह से उनके आग्रह पर किसी भी अतार्किक चीज पर लिखने के लिए तैयार हैं). इससे पहले कि कोई मुझ पर प्रतिस्पर्धात्मक निंदा का आरोप लगाए, बिना कोई शब्द बर्बाद किए मुझे सिलसिलेवार तरीके से जाने दीजिए! सबसे पहले हमें यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि कौन-सी चीज एक महान संस्था का निर्माण करती है? वास्तव में इसका जवाब बेहद आसान है! शानदार पाठ्य सामग्री और श्रेष्ठतम संकाय! ... Full story
रामदेव की रामलीला
दिल्ली के रामलीला मैदान में चल रही तैयारियों के बीच शाम 5.25 मिनट पर अचानक हड़कम्प मच जाता है. चारों ओर बिखरे कार्यकर्ता जो व्यवस्था का संयोजन कर रहे थे वे सिमटकर उस मंच के नीचे आ जाते हैं जहां मीडियाकर्मी बेसब्री से बाबा रामदेव का इंतजार रहे थे. करीब डेढ़ दर्जन चैनल और दो दर्जन से भी अधिक फोटोग्राफरों के कैमरों के बीच मंच पर बाबा रामदेव प्रकट होते हैं और घूमकर वहां आ बैठते हैं जहां उनके लिए एक सोफा लगाया गया है. ... Full story
सत्याग्रह के लिए दस सुझाव
भ्रष्टाचार के विरुद्ध बाबा रामदेव जो मोर्चा लगा रहे हैं, वह एक बेमिसाल घटना होगी। यदि दिल्ली में एक लाख और देश में एक करोड़ से भी ज्यादा लोग अनशन पर बैठेंगे तो इसके मुकाबले की घटना हम कहां ढूंढेंगे? यह सबसे बड़ा अहिंसक सत्याग्रह होगा। इसका उद्देश्य जनता व शासन दोनों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध कटिबद्ध करना है। यदि आंदोलन सिर्फ सरकार के विरुद्ध होता तो उसे शुद्ध राजनीति माना जाता, लेकिन बाबा ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता की राजनीति से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सबके लिए दरवाजे खुले रखे हैं। जो भी भ्रष्टाचार विरुद्ध हो, वह अंदर आ सकता है। ... Full story
वर्ल्ड क्लास या थर्ड क्लास?
वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने अपनी एक बेबाक टिप्पणी से ऐसी बहस को जन्म दे दिया है जिस पर बहस होना बहुत जरूरी है. रमेश का कहना है कि सरकारी दायरों में रहकर कोई वर्ल्ड क्लास एजूकेशन इंस्टीट्यूशन नहीं बनाया जा सकता. आईआईटी और आईआईएम की उनकी आलोचना बेजा नहीं है. लेकिन जब हम विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान बनाने की बात करते हैं तो हमारे सामने यूरोप की शिक्षा व्यवस्था से निकले वे टाप इंस्टीट्यूशन होते हैं जो दुनिया में अपने ब्रांड का डंका बजा रहे हैं. पीपुल्स न्यूज नेटवर्क से जुड़े आनंदी शरण बता रहे हैं कि कैसे विश्वस्तरीय बताये जा रहे शिक्षण संस्थान बेहद निम्न स्तरीय संस्थान हैं. क्या जयराम रमेश ऐसे ही संस्थानों का उदाहरण देकर वर्ल्ड क्लास शिक्षण संस्थान बनाने की वकालत कर रहे हैं? ... Full story
इस हार की सुबह होगी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट की बड़ी हार हुई है. पश्चिम बंगाल वाम राजनीति की धुरी रहा है इसलिए इस राज्य में हमारी करारी हार से पूरे देश के प्रगतिशील शक्तियों को करारा धक्का लगा है. 1977 से लगातार सात चुनाव जीतकर सीपीएम के अगुवाई वाली लेफ्ट फ्रंट सरकारों ने 34 साल तक राज्य में शासन किया था. फिर भी इस चुनाव के कुछ संकेत बिल्कुल साफ हैं. जनता ने सीधे सीधे परिवर्तन का जनादेश दिया है और तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को राज्य में सत्ता सौंपी है. इस चुनाव में सभी वाम विरोधी शक्तियां एकजुट हो गयी थीं. फिर चाहे वह दक्षिणपंथी धड़े हों या फिर धुर वामपंथी माओवादी. हम उम्मीद कर रहे थे कि 2008 के बाद हम अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को दोबारा कुछ हद तक हासिल कर लेंगे लेकिन हमारी इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया. ... Full story
पांच साल की कमाई दो साल में गंवाई
कांग्रेस के नेतृत्ववाली यू.पी.ए-२ सरकार के दो साल भ्रष्टाचार के नए रिकार्डों और आसमान छूती महंगाई के बीच पूरे हो गए. यू.पी.ए खेमे में भले ही जश्न का माहौल हो लेकिन इस जश्न पर छाए मातम के माहौल को अनदेखा करना मुश्किल है. आखिर किस बात का जश्न मनाएं? किसे नहीं पता कि पांच सालों की कमाई वह पिछले दो सालों में गंवा चुकी है. ... Full story
हारा है पर बेचारा नहीं है वापमंथ
पश्चिम बंगाल और केरल के विधानसभा चुनावों में वामपंथी दलों की चुनावी हार के प्रति गैरवामपंथी दल और संगठन मुक्त बुद्धिजीवी कुछ अधिक ही संवेदनशील हो रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है जैसे कि बामपंथ भी दूसरे दक्षिणपंथी दलों की तरह चुनाव लड़ने, सरकार बनाने और सत्तासुख लूटकर घर भरने वाले दल हों व सरकार जाने से वे विधवा विलाप कर रहे होंगे। दूसरी ओर वामपंथियों का ही एक वर्ग चुनाव लड़ने वाले वामपंथी दलों को वामपंथी मानने तक से इंकार करता है। दरअसल ये गैरवामपंथी बुद्धिजीवी, और हिन्दी के कई नये पत्रकार वामपंथी दलों के बारे में बिल्कुल ही अनपढ हैं और उन्हें चुनाव लड़ने वाले वामपंथी दलों, उनकी घोषणाओं, और कार्यक्रमों के बारे में प्रारम्भिक जानकारी भी नहीं है। ... Full story
पश्चिम बंगाल का भयावह भविष्य
ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के 11 मुख्यमंत्री के बतौर शपथ ग्रहण कर लिया. 34 साल बाद पश्चिम बंगाल में इतिहास ने करलट ले ली. अब कोलकाता के सचिवालय भवन में लाल निशान की बजाय तिरंगे पर बने तीन फूल गुल खिलाएंगे. लेकिन ममता बनर्जी क्या आर्थिक रूप से प्रदेश को बदहाली से बाहर निकाल पायेंगी? आर्थिक पत्रकार और विशेषज्ञ अंशुमान तिवारी का आंकलन है कि अगर कोई चमत्कार नहीं हुआ अगले चुनाव में इन्हीं ममता बनर्जी को यही बंगाल नमस्कार कर लेगा. ... Full story
जय जननी, जनता, जनार्दन!
आपको भी ऐसा ही एसएमएस आया होगा। पूर्व में दीदी, दक्षिण में अम्मा, उत्तर में बहनजी और राजधानी में आंटी। इन सब के अलावा देश की सत्ता सोनिया मैडम के हाथ में और राष्ट्र की बागडोर प्रतिभा ताई के हाथ में है। क्या जनता जनार्दन का भरोसा पुरूष समुदाय से उठ गया है? या यह भ्रष्टाचार से त्रस्त जनता का उद्घोषणा है। सवाल यह भी है कि क्या महिला मतदाता पुरूष मतदाताओं से ज्यादा लोकतांत्रिक हों गयी हैं? ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story




