जनता दरबार

सरकार ने ही कर दिया महाराजा को कंगाल
 

सरकार ने ही कर दिया महाराजा को कंगाल

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिर्पोट ने फिर से पूरे देश में बवाल खड़ा दिया है। अपनी इस रिर्पोट में कैग ने यह कहा है कि नागरिक एवं उड्डयन मंत्रालय की गलत नीतियों तथा एयर इंडिया एवं इंडियन एयरलाइंस प्रबंधन के अंदर व्याप्त खामियों की वजह से महाराजा कंगाल हुआ है। ... Full story

अन्ना के आंदोलन से आगे का रास्ता
 

अन्ना के आंदोलन से आगे का रास्ता

अनशन तोड़ने के 48 घंटे बाद ही प्रधानमंत्री ने अन्ना हजारे को फूलों के गुलदस्ते के साथ 'गेट वैल सून' का कार्ड भेजा था। संकेत यही निकला अन्ना बीमार है और मनमोहन सिंह अन्ना की तबियत को लेकर चिंतित हैं। लेकिन तेरह दिनों के अन्ना के आंदोलन के दौर में जो सवाल रामलीला मैदान से खड़े हुए उसने देश के भीतर सीधे संकेत यही दिये कि कहीं ना कहीं बीते बीस बरस में सरकार बीमार रही और समूची व्यवस्था की तबियत ही इसने बिगाड़ रखा है। और अब जब जनलोकपाल संसद के भीतर दस्तक दे रहा है तो फिर संसद में दस्तक देते कई सवाल दोबारा खड़े हो रहे हैं, जिसे बीते बीस बरस में हाशिये पर ढकेल दिया गया था। ... Full story

संसद को लोकतंत्र का पाठ पढाते अन्ना
 

संसद को लोकतंत्र का पाठ पढाते अन्ना

भ्रष्टाचार के खिलाफ ताजा अभियान में अन्ना हजारे का प्रवेश अनायास और आमंत्रणमूलक ढंग से हुआ, पर सर्वोच्च अधिकारियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए स्वतंत्र, सक्षम और साधन-संपन्न लोकपाल बनाने की मांग पर दांवपेंच का रास्ता अपनाकर कांग्रेस ने अभियान को आंदोलन का रूप लेने का अवसर दिया जिसके केद्रबिन्दु अन्ना बन गए हैं। इस आंदोलन को संभालने में मनमोहन सरकार की नीति, नीयत और स्थिति का आंकलन करने की क्षमता पर गहरे प्रश्न उठ गए हैं। जिस संसद की सर्वोच्चता को बनाए रखने के नाम पर सरकार बारबार शीर्षासन करती नजर आई है, वह संसद लगातार हंमागों और सत्ता पक्ष की पहल पर स्थगित हो गई। ... Full story

आइये, गाइये मध्य प्रदेश गान
 

आइये, गाइये मध्य प्रदेश गान

मध्य प्रदेश के स्कूलों में सूर्य नमस्कार और गीता पढ़ाने के विवादास्पद फैसले के बाद शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार अब मध्यप्रदेश गान अनिवार्य करने के विवाद में फंस गई है। मध्यप्रदेश के गान पर राज्य के राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मध्यप्रदेश गान के गाने को अनिवार्य बनाए जाने के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब राष्ट्रीय गान और राष्ट्र गीत गाए जाते हैं तो फिर अलग से मध्यप्रदेश गान की क्या ज़रुरत है। जबकि सरकार का कहना है कि मध्यप्रदेश गान राज्य की संस्कृति के बारे में इसलिए इसे गाने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। ... Full story

महज ढाई करोड़ की महामहीम
 

महज ढाई करोड़ की महामहीम

भारत की राष्ट्रपति महामहीम प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने अपने संपत्तियों की घोषणा की है. वे देश की ऐसी पहली प्रथम नागरिक हैं जिन्होंने अपनी संपत्तियों की घोषणा की है. 25 जुलाई को अपनी चल अचल संपत्तियों की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने कहा है कि उनके पास करीब ढाई करोड़ रूपये की चल अचल संपत्तियां हैं (जाहिर है इसमें राष्ट्रपति भवन शामिल नहीं हैं.) ऐसे वक्त में जब देश में भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक बहस चल रही है तब उनके द्वारा संपत्ति की घोषणा निश्चित रूप से स्वागत योग्य कदम है. लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की जनता उनकी संपत्तियों के बारे में जानना चाहती है? या फिर वे देश की जनता से सच्चाई बयान कर रही हैं? ... Full story

जनता के वोट पर नोट की चोट
 

जनता के वोट पर नोट की चोट

समाजवादी पार्टी के पूर्व कर्ता-धर्ता अमर सिंह इन दिनों ‘कैश फॉर वोट’ की जांच का सामना कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने बीते शुक्रवार को अमर सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया, उसके ठीक एक दिन पहले उसने मीडिया में ‘वोट फॉर नोट’ में कांग्रेस और सपा को क्लीन चिट दे दी। ... Full story

अमर न मरते कभी कभार
 

अमर न मरते कभी कभार

खुली आंखों से समाज का देखा-परखा सच सामने हो, तो जांच में पुलिस की मुश्किल बढ जाती है। मुश्किल तब और बढ जाती है जब दागदार दिख रही सरकार की पुलिस के मुलाजिमों से उम्मीद रहे कि जांच में उसे बेदाग निकाल दिया जाए। 'नोट के बदले वोट'’ या सांसद रिश्वत कांड की जांच में पुलिस को इन्हीं दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड रहा है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का हथौड़ा है, तो दूसरी तरफ नोट कांड से फायदा उठाने वाली केंद्र सरकार का भय। भय की भयावहता से बनी मजबूरी को कांड की तीसरी बरसी के दिन देश और समाज के लोगों ने फिर खुली आंखों से देखा है। ... Full story

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष बिमल गुरुंग के साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
 

हो गया करार फिर भी मुश्किल बरकरार

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में राजनेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की अजीब-सी फितरत है। पहले वे समस्याएं पैदा करते हैं, फिर उसे अपने राजनीतिक हितों के लिए बढ़ावा देते हैं, समाधान भी वही करते हैं और चलते-चलते ऐसा समाधान करते हैं कि उस समाधान में भी भविष्य के लिए कुछ नई समस्याएं रह जाती हैं। दार्जिलिंग टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन यानी दार्जिलिंग क्षेत्रीय प्रशासन बनाने को लेकर हुआ त्रिपक्षीय समझौता भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की इसी खासियत का ताजा उदाहरण है। ... Full story

विकेन्द्रीकरण और अकेन्द्रीकरण के बीच
 

विकेन्द्रीकरण और अकेन्द्रीकरण के बीच

ग्लोबलाइजेशन का अर्थ है उदारीकरण। भारत ने उदारीकरण की सन इक्यान्नवे से राह पकडी जो आज तक धीरे धीरे सरक रही है। उदारीकरण की शुरूआत मनमोहन सिंह जी ने की थी जो उस समय नरसिंह राव सरकार मे वित्तमंत्री थे और आज प्रधानमंत्री हैं। उदारीकरण का सीधा सा आशय होता है विकेन्द्रीकरण। यह केन्द्रीयकरण तथा अकेन्द्रीयकरण के बीच की स्थिति होती है।। केन्द्रीयकरण का परिणाम होता है सुव्यवस्था और गुलामी। विकेन्द्रीयकरण का परिणाम होता है अव्यवस्था और लोकतंत्र। अब यह समाज पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा मे जाना चाहता है? ... Full story

कांग्रेस में ‘प्रजातांत्रिक राजशाही'
 

कांग्रेस में ‘प्रजातांत्रिक राजशाही'

भारत गणराज्य में प्रजातंत्र की सरेआम शवयात्रा निकाली जा रही है। आम जनता प्रजातंत्र के शव पर सर रखकर गगनभेदी करूण रूदन कर रहा है, किन्तु नीति निर्धारकों और विपक्ष में बैठे नेताओं को इसकी आवाज नहीं सुनाई दे रही है। कांग्रेस में युवाओं को आगे लाने के हिमायती सबसे ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने तो मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों के दो साल पहले ही अपने पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ से कांग्रेस का प्रत्याशी तय कर दिया है। अपने आप में यह ‘‘प्रजातांत्रिक राजशाही‘‘ का नायाब उदहारण माना जाएगा। ... Full story

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Diwakar Muktibodh

Diwakar Muktibodh

दिवाकर मुक्तिबोध प्रसिद्ध कवि गजानन माधव मुक्तिबोध के पुत्र और वरिष्ठ पत्रकार हैं. दैनिक भास्कर के रायपुर-विलासपुर संस्करण के संपादक रहे. वर्तमान समय में रायपुर से प्रकाशित एक स्थानीय दैनिक के संपादक. संपादन और लेखन के साथ साथ सामाजिक रूप से भी सक्रिय.