देश प्रदेश
Feb
22
2012
ममता बनर्जी से बंगाल को एलर्जी
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केन्द्र में कांग्रेस से बात बात पर भिड़नेवाली ममता सरकार के खिलाफ विपक्षी वाममोर्चा फिर एक बार गोलबन्द हो चुका है। 19 फरवरी को कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान में लाखों की भीड़ का जुटाव इस बात को और पुष्ट करता है। ब्रिगेड की सभा में माकपा महासचिव प्रकाश करात, सीताराम येचुरी सहित वाममोर्चा के राज्य सचिव विमान बोस, पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने तृणमूल-कांग्रेस की साझा सरकार की नाकामियों को बिंदास तरीके से उठाया। समझा जा सकता है कि अप्रैल में होने वाले पंचायत चुनावों के पहले वामपंथियों की 19 फरवरी की कामयाब रैली ममता बनर्जी के लिए चिन्ता का कारण बन चुकी है।
ममता बनर्जी की निजी छवि साफ-सुथरी मानी जा सकती है, लेकिन उनकी सरकार के कामकाज के तरीके पर लोगों को तसल्ली नहीं है। विधाननगर और मालदह के अस्पतालों में बच्चों की मौत पर अस्प्रपताल प्रबन्धन का बचाव ममता बनर्जी की छवि पर एक दाग की तरह है। बताना प्रासंगिक है कि यही ममता बनर्जी वाममोर्चा के शासन के दौरान ऐसी घटनाओं पर आन्दोलन किया करती थीं और सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की लापरवाही के लिए वामपंथी सरकार को दोषी ठहराया करती थीं, लेकिन जब घटना उनके शासन में हुयी तो वे बचाव में उतरीं और
Feb
06
2012
केरल के कामरेड ईसा
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यह तो सबको पता है कि 10-15 वर्षों से विश्व के सारे कम्युनिस्ट अपने आप को अनाथ-सा महसूस कर रहे हैं। सोवियत संघ खुद तो बिखर ही गया, अब लेनिन और स्टालिन भी इतिहास के नेपथ्य में चले गए। चीन ने भी पूंजीवादी रास्ता पकड़ लिया। पूर्वी यूरोप के साम्यवादी देश अब पश्चिमी यूरोपीय संघ के सदस्य बनते चले जा रहे हैं। ऐसे में हमारे भारत के मार्क्सवादियों ने जबर्दस्त वैचारिक पैंतरा मारा है। यह पैंतरा, भारत में ही नहीं, सारे विश्व में तहलका मचा सकता है।
केरल की मार्क्सवादी पार्टी ने घोषणा की है कि वह ईसा मसीह को एक क्रांतिकारी नेता मानती है। उन्होंने चोरों, मुनाफाखोरों और ढोंगी पुरोहितों के खिलाफ जमकर अभियान चलाया था। सूदखोरों, ठगों और चोरों ने ही मिलकर उनको सलीब पर चढ़वाया था। वे सब उनके वर्ग-शत्रु थे। पार्टी ने अपने सम्मेलन की तैयारी करते हुए ईसा मसीह के बड़े-बड़े चित्र भी बनवाए हैं, जिन्हें प्रदर्शनी में लगवाया जाएगा। मार्क्सवादी पार्टी के इस नए पैंतरे पर केरल का कैथोलिक चर्च काफी लाल-पीला हो रहा है। उसका कहना है कि ईसा को इसलिए उछाला जा रहा है कि कम्युनिस्ट बिल्कुल दिवालिए हो गए हैं। वे अचानक आस्तिक कैसे हो गए हैं? क्या वे अपने
Dec
21
2011
जल, जंगल और आसमान सब खा रहे हैं शिवराज चौहान
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मध्य प्रदेश में जब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने प्रदेश में सुशासन लाने के लिए सात तरह के माफियाओं पर अंकुश लगाने की कार्ययोजना बनाई थी लेकिन शासन और प्रशासन की मिलीभगत से प्रदेश में जमीन, शराब, वन, ड्रग, खनिज, गोवंश और गरीबों को मिलने वाले केरोसिन और अन्य सामग्री को पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंचने देने वाले जैसे सात तरह के माफिया लूट मचाए हुए है। तमाम सेक्टरों में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों के साथ ही प्रदेश में खनिज माफिया ने भी इस सरकार के राज में अपने आप को स्थापित कर लिया है। प्रदेश में अब करीब दस हजार करोड़ का खनिज घोटाला सामने आया है जिसमें न सिर्फ बड़ी माइनिंग कंपनियों ने बल्कि भाजपा के छोटे-बड़े नेताओं ने भी करोड़ों के खेल कर दिए हैं। पूरे प्रदेश में माइनिंग माफिया सक्रिय है। माफिया में केवल खनिज के कारोबारी ही नहीं हैं। बल्कि प्रदेश के अधिकांश मंत्री, भाजपा विधायक, सांसद और संगठन के पदाधिकारियों और उनके रिश्तेदार नेता से बड़े व्यापारी बन गए हैं।
मध्य प्रदेश में खनिज माफिया का कहर सबसे अधिक बुंदेलखंड के पठार पर पड़ रहा है। बुंदेलखंड इलाके की सबसे बड़ी कही जाने वाली सिद्धबाबा की पहाड़ी कभी समुद्र तट से
Nov
25
2011
नटवर नागर नीतीश कुमार
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लालू राज के पंद्रह साल के सामने नीतीश सरकार के पांच साल बेहतर साबित हुए जिसका फल जदयू-भाजपा गठबंधन को बीते चुनाव में अपार बहुमत के रूप में मिला भी। पर उन चुनावों में लालू और दूसरे विपक्षी पार्टियों के सफाया हो जाने से वर्तमान सरकार को जनता के सुखदुख और आकांक्षाओं पर खरा उतरने की अधिक कठिन चुनौती का सामना करना है। इसका आभाष होने से सरकार ने बिहार के विकास की धारा को बीते चालीस साल से अवरुध्द बताने का दांव अपना लिया है। हालांकि उसने चालीस साल की नाकामियों को दुरुस्त करने में विशेष दर्जा की मांग को तुरुप के पत्ते की तरह उछालने के अलावा कोई नीतिगत सुधार या योजनागत पेशकश नहीं की है। उन्हीं पुरानी योजनाओं और केन्द्रीय योजनाओं को आगे बढाते हुए वह कार्यान्वयन में उपलब्धियों को लेकर पीठ थपथपा रही है। सुशासन का मतलब नीतीश सरकार के लिए सरकारी अमले और नौकरशाही की जकडन को अधिक मजबूत बनाना रहा है।
साल भर में सरकार की विभिन्न घोषणाओं और कार्यों की समीक्षा करें तो सिर्फ एक ऐसा कार्य दिखता है जिसका कार्यान्वयन अगर सही ढंग से हो सके तो बिहार प्रदेश का विकास और यहां के निवासियों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
Nov
17
2011
भंवरी का भंवरजाल
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खुला खेल फर्रुखाबादी
1980 के दशक में बिहारकांड की तर्ज पर पता नहीं भंवरीदेवी के भंवरजाल में और कितने कद्दावरों की पोल खुलती है? संभव है सीबीआई तमाम मामलों की तरह अदालत के नरम पड़ते ही इस कांड को भी रफा-दफा कर दे। यदि अदालत ने कड़ा रूख न अपनाया होता तो राजनीतिक सत्ताधीशों के दबाव में कार्यपालिका ने तो अपना पल्ला झाड़ ही लिया था। मामला सीबीआई को सुपुर्द किए जाने के बाद भी घोंघा बसंत की गति से ही चलता यदि पी-9 चैनत के एक पत्रकार को भंवरीदेवी की वह वीडियो सीडी न मिल गई होती जिसमें मदेरणा भंवरी के साथ यौन क्रिया में मशगूल दिखाई दिए? आखिर जो वीडियो सीडी सीबीआई को नहीं मिल रही थी, वह सीडी पी-7 के किसी पत्रकार के हाथ कैसे लग गई? जब तक मदेरणा की यह सीडी चैनल पर चली नहीं थी तब तक न केवल मदेरणा बल्कि पूरी राजस्थान सरकार दावा कर रही थी कि भंवरीदेवी को तो मदेरणा पहचानते तक नहीं। सत्ता के गलियारों में स्त्री देह का भोग सत्ता का चरित्र बन चुका है। केंद्र और राज्यों की शायद ही कोई सरकार बची हो जिसमें दो-पांच महिपाल मदेरणा दर्जन दो दर्जन भंवरी देवियों का भोग न कर
Nov
15
2011
बड़ी कठिन है डगर गहलोत की
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राजस्थान की राजनीति में भंवरी के भंवर में फंसी कांग्रेस की सरकार का पार पाना आसन नहीं होगा। यहां के नेताओं को करीब से समझने के बाद एक बात तो कही जा सकती है कि केवल सरकार ही नहीं बल्कि कांग्रेस के आगे की राजनीतिक डगर भी मुश्किल है। हालांकि भाजपा हो या फिर कांग्रेस, दोनों ही कई खेमे में बंटी हुई है। हर बड़े नेता का अपना एक अलग खेमा है। यही वजह रही है न तो कभी वसुंधरा और न कभी गहलोत मजबूत नेता के तौर पर उभर सके। फिर भी इस बार भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन पाने के लिए बहुत कुछ है। गहलोत ने भले ही कैबिनेट के सभी मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया हो लेकिन नई कैबिनेट चुनने में उन्हें अच्छी खासी मशक्त करनी होगी। नई कैबिनेट में न सिर्फ जातीय समीकरण का ख्याल रखना पड़ेगा बल्कि अलग-अलग क्षेत्र को भी तवज्जो देनी होगी। आलाकमान को इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि कोई भी खेमा या जाति छूट न जाए। हालांकि, राजनीति के होशियार कांग्रेसी ऐसी कोई भूल करने वाली नहीं, यदि ऐसा हुआ तो यह राजनीतिक रूप से आत्महत्या के समान ही होगा।
भंवर में फंस
Nov
13
2011
मलेरिया से मर रहा है मध्य प्रदेश
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जिस वक्त वे सचिन के सौवें शतक का शुभकामना संदेश प्रसारित कर रहे थे, तब वे प्रदेश में मलेरिया से हो रही मौतों से बेखबर थे। विपक्ष के हर आरोप को हवा में उड़ाने वाले शिवराज की नींद तब टूटी जब ये मामला अखबारों की सुर्खियों में आया। अधिकारियों की बैठक में वे खूब बिफ़रे कि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई है। प्रधानमंत्री पद के दावेदारों की फ़ेहरिस्त में नाम शामिल कराने की जोड़तोड़ में लगे मुख्यमंत्रीजी से लाख टके का सवाल ये है कि जब उन्हें अपने प्रदेश की समस्याओं की कोई जानकारी ही नहीं रहती है, तो उनके सूबे का मुखिया बने रहने का औचित्य ही क्या है ?
आदिवासी बहुल सीधी जिले के कुछ गाँवों में मलेरिया कहर बनकर टूटा है। जिले में मलेरिया से हुई मौतों का आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक पचास मौतें हो चुकी हैं। तीन गाँवों में 30 सितंबर से एक नवंबर तक 35 लोगों की मौत हुई। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि पैंतीस मृतकों में सत्रह बेटियाँ भी हैं, जिनको बचाने के लिए सरकार अभियान छेड़े हुए है। इन मौतों ने बेटी बचाओ अभियान के साथ-साथ स्वास्थ्य इंतजामों की कलई खोलकर रख दी है। हालाँकि यह बात
Nov
01
2011
अब सिर्फ गेंदा फूल भर नहीं है रायपुर
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यह भारतीय गणराज्य के तीन सबसे नए राज्यों में एक की राजधानी भी बन चुका है। जाहिर है, उसकी अपनी साख कायम हो चुकी है। राजधानी ने उसे मंत्रालय का शक्ति केंद्र दिया है, जहां छत्तीसगढ़ के दो करोड़, दस लाख लोगों के भाग्य का फैसला करने वाली सरकार बैठती है। अब इस शहर को नई राजधानी का भी इंतजार है, जिससे यह शहर अचानक बढ़ आयी भीड़ का इलाज पा सके। कोई शहर जब राजधानी बनता है तो वह किस तरह खुद को रूपांतरित करता है यह देखना बहुत रोचक है।
राजधानी बनता एक शहरः रायपुर शहर का छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी बन जाना एक ऐसी घटना है जिसने एक बड़े गांव को महानगर बनने का रास्ता दे दिया है। तेलीबांधा से आगे महासमुंद रोड की ओर बढ़िए तो आपको माल नज़र आएगा जहां से रायपुर पहली बार मॉल संस्कृति से परिचित होता दिखता है। आईनाक्स में सिनेमा देखने का एक सुख है जो रायपुर के सिनेमाघरों से अलग है। अब इसी रोड पर एक और मॉल बन गया है तो पंडरी में भी एक और मॉल की धूम है। एडलैब्स का सिनेमाघर भी समता कालोनी में आ गया है। लालगंगा शापिंग मॉल से लेकर बिग बाजार, सालासर
Oct
31
2011
कंगाल प्रदेश का शाहखर्च मुखिया
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तूफ़ानी तरीके से चलाये जा रहे इस अभियान के मकसद पर कई बुनियादी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस अभियान ने मीडिया, विज्ञापन और प्रिंटिंग कारोबार में नई जान फ़ूँक दी है। मध्यप्रदेश में कुछेक ज़िलों को छोड़कर शायद ही कोई इलाका ऎसा हो जहाँ लिंगानुपात के हालात इतने चिंताजनक हों। दरअसल लिंग अनुपात में असंतुलन का मुख्य कारण विलुप्त हो रही भारतीय परंपराएँ और संस्कृति है। वाहनों पर चस्पा पोस्टर, बैनर और सड़क किनारे लगे होर्डिंग बेटियाँ बचाने में कारगर साबित होते, तो शायद देश को अब तक तमाम सामाजिक बुराइयों से निजात मिल जाती। जनसंपर्क विभाग की साइट पर अभी कुछ समय पहले एक प्रेस विज्ञप्ति पर नज़र पड़ी, जिसमें बताया गया है कि सरकार ने पानी बचाओ अभियान में गोष्ठी, परिचर्चा, कार्यशाला, सेमिनार और रैली जैसे आयोजनों के ज़रिये जनजागरुकता लाने पर महज़ तीन सालों में करीब नौ सौ तेरह करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिये। पानी के मामले में प्रदेश के हालात पर अब कुछ भी कहना-सुनना बेमानी है। वैसे भी देखने में आया है कि जिस भी मुद्दे पर सरकारी तंत्र का नज़रे-करम हुआ, उसकी नियति तो स्वयं विधाता भी नहीं बदल सकते। कहते हैं,जहँ-जहँ पैर पड़े संतन के,तहँ-तहँ बँटाढ़ार।
कुछ साल पहले बीजेपी
Oct
21
2011
खनन माफिया खोद रहे हैं मध्य प्रदेश
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आलम यह है कि प्रदेश में तीन साल के अंदर 33590 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर वैध रूप से खदानें खुद गई हैं तो माफियाओं ने सालभर में करीब 40,000 अवैध गड्ढे खोद डाले हैं। इतना ही नहीं इन गड्ढों से लाखों घन फुट पत्थर भी निकाला जा चुका है। इस बात का खुलासा वन महकमे की जांच रिपोर्ट से होता है। बावजूद इसके वन महकमे ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है। हद तो यह है कि जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई के बजाय उसे दबा दिया गया है। इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि मैदानी अमले की लगातार रिपोर्ट के बाद भी आला अधिकारियों ने जंगल को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। वन महकमे का यह रवैया माफिया से उसकी मिलीभगत का संकेत देता है। क्योंकि आला अधिकारियों ने जंगल में माफिया की गतिविधियों की रिपोर्ट देने वाले ग्वालियर के डांडा ख़ेड़ा वन चौकी के दो लोगों को निलंबित कर दिया तथा रेंजर को नोटिस थमा दिया।
महकमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जंगल में माफिया की गतिविधियों को लेकर हाल ही में हल्ला मचा तो आला अधिकारियों ने एक टीम गठित कर जंगल में हो रहे अवैध उत्खनन की


