परत-दर-परत
Feb
02
2012
हमारे अखबार और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
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पूँजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद और सास्कृतिक राष्ट्रवाद
पूंजीवाद उत्पादक शक्तियों के स्वामित्व और संचालन की वह पद्धति है जिसके अतादक शक्तियों और व्यक्तियों को अपनी क्षमता तथा प्रतिभा के अनुसार पूंजी उत्पादन, संग्रहण, विनियोग और व्यापार पर सामान्यत: कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। समाजवाद वह सामाजिक व्यवस्था है जिसके अंतर्गत जीवन और समाज के सभी साधनों पर संपूर्ण समाज का स्वामित्व होता है – जिसका उपयोग पूर्ण समाज के कल्याण और विकास की भावना को लक्ष्य करके किया जाता है।साम्यवाद का ध्येय समाज में सर्वहारा और शोषित वर्ग के बीच पूंजी, अवस्था, व्यवस्था और अवसरों की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके समकक्ष सांस्कृतिक राष्ट्रवाद वह परिकल्पना है जिसमें राष्ट्र की रचना का आधार आर्थिक या राजनैतिक न होकर सांस्कृतिक होता है।
लेखों का अध्ययन
इस शोध कार्य में कुल १३ राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों और दो प्रमुख राष्ट्रीय पत्रिका सहित कुल १५ पत्र और पत्रिकाओं का अध्ययन किया गया। शोध विधि के रूप में अन्तर्वस्तु विश्लेषण और अक्रमिक (रैंडम) सर्वेक्षण विधि का प्रयोग किया गया। निष्कर्षों से पता चला कि पूंजीवाद पर सर्वाधिक लेख दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुए। पत्र में इन्हें सर्वाधिक ४६ प्रतिशत स्थान प्राप्त हुआ। साम्यवाद पर सर्वाधिक लेख दैनिक जागरण में प्रकाशित हुए। पत्र में
Jan
18
2012
आधार परियोजना का कारपोरेट भ्रष्टाचार
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संसदीय समिति की रिपोर्ट कहती है की सरकार ने विश्व अनुभव की अनदेखी की है. इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया की मौजूदा पहचान प्रणाली को कारगर कैसे बनाया जाए. हैरानी की बात है की जल्दबाजी में ऐसी कोई तुलनात्मक अध्ययन भी नहीं की गयी जिससे यह पता चलता की मौजूदा पहचान प्रणाली कितनी सस्ती है और आधार और जनसँख्या रजिस्टर जैसी योजनाये कितनी खर्चीली है. आज तक किसी को यह नहीं पता है की आधार और जनसँख्या रजिस्टर पर कुल अनुमानित खर्च कितना होगा?
सरकार यह दावा कर रही थी कि यह परियोजना को देशवासियों और नागरिको को सामाजिक सुविधा उपलब्ध कराने की परियोजना है. अब यह पता चला है की इस योजना के पैरोकार गाड़ियो और जानवरों पर भी ऐसी ही योजना लागु करने की सिफारिश कर चुके है, ये बाते परत दर परत सामने आ रही है. यह परियोजना १४ विकासशील देशो में फ्रांस, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की कंपनियों और विश्व बैंक के एक पहल के जरिये लागु किया जा रहा है. दक्षिण एशिया में यह पाकिस्तान में लागु हो चुका है और नेपाल और बंगलादेश में लागू किया जा रहा है.
संसदीय समिति ने कानुनविदों, शिक्षाविदो और मानवाधिकार कार्यकर्ताओ
Jan
17
2012
बाजारू क्रिकेट से नहीं बनेंगे विश्वविजेता
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भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैण्ड में लगा झटका आस्ट्रेलिया दौरे तक बरकरार है। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ में आसान हार के बाद भारत टेस्ट श्रृंखला हार चुका है। पहले मेलबर्न में 122 रन की हार और फिर सिडनी में एक पारी और 68 रन की शर्मनाक हार हुई है, इसके बाद पर्थ में भी 37 रन व एक पारी की हार हुई। भारत ने टेस्ट सीरीज जीतने की दौड़ से खुद को बाहर कर लिया। सन 2007-08 के आस्ट्रेलियाई दौरे पर भारतीय प्रदर्शन देखते हुए ही इस बार श्रृंखला जीतने की आशाएं बंधी थी। लेकिन ये आशाएं निराशाओं में बदल गईं।
आस्ट्रेलिया में भारतीय क्रिकेट का इतिहास निराशाजनक ही रहा है। पहली बार भारतीय टीम का आस्ट्रेलियाई दौरा सन 1947-48 में लाला अमरनाथ के नेत्रृत्व में हुआ था। भारत ने आस्ट्रेलिया में सिडनी मैच को मिला कर कुल 38 टेस्ट खेले हैं। इस छह दशक के आस्ट्रेलियाई दौरों के इतिहास में भारत ने सिर्फ 5 टेस्ट ही जीते हैं। आस्ट्रेलिया ने 24 टेस्ट जीते हैं और केवल 9 टेस्ट ही भारत ड्रा या अनिर्णीत करा पाया है। घरेलू मैदानों पर आस्ट्रेलियाई खेल सर्वथा भारतीय खेल पर सवासेर और हावी रहा है। भारत को आस्ट्रेलिया में हावी होने का
Jan
16
2012
प्रतिबंध की पॉलिटिक्स और अतिवादी अमेरिका
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इसे एक कानून (एच.आर 1540 में राष्ट्रपति का वक्तव्य, जैसा कि वह व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर दिखता है) बना दिया और कहा गया, ‘कुल 500 पन्नों पर सैकड़ों खंडों में लिखे गए इस कानून में वह तमाम महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल भी शामिल हैं, जिनसे रक्षा विभाग की तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य सेवाओं की कीमतें नियंत्रित की जा सकें, विदेशों में आतंकवाद विरोधी प्रणाली विकसित की जा सके, सहयोगियों की सुरक्षा क्षमता का विकास किया जा सके, बल का आधुनिकीकरण हो सके और विश्व भर में सेना की दक्षता और प्रभाव बढ़ाया जा सके.’ इस पूरे वक्तव्य में ‘सेना’ शब्द का प्रयोग 19 बार किया गया है जबकि ‘रक्षा’ केवल नौ बार, जो कानून के उद्देश्य को बहुत स्पष्ट बना देता है. अब तक ईरान पर 15 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं.
प्रतिबंध के बाद ईरान की राष्ट्रीय मुद्रा रियाल का मूल्य तुरंत 15-20 प्रतिशत तक घट गया और अब तो यह आज तक के सबसे कम यानी 17,000-17,500 रियाल के बदले एक डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है. इस प्रतिबंध के कारण दूसरे देश भी ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीद सकेंगे क्योंकि ऐसा कोई चैनल या पार्टी ही नहीं होगी जिसके माध्यम से भुगतान
Jan
05
2012
सांप्रदायिकता का शिकार मीडिया
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अभी हाल ही में 7 सितम्बर 2011 को दिल्ली-हाईकोर्ट के बाहर हुए विस्फोट के बाद एक ईमेल के आधार पर इंडियन मुजाहिद्दीन कि संलिप्तता की बात कही गयी. समाचारपत्रों में भी ईमेल का जिक्र करते हुए इंडियन मुजाहिद्दीन का नाम लिया गया. जनसत्ता (9 सितम्बर,नई दिल्ली) ने खबर छापा ‘इंडियन मुजाहिद्दीन के छोटू ने ली धमाके की जिम्मेदारी’. इसी अखबार में 10 सितम्बर को खबर छपी- ‘इंडियन मुजाहिद्दीन के ताज़ा धमकी भरे ईमेल पुलिस के लिए चुनौती’. इसमें कहा गया कि यह चुनौती इंडियन मुजाहिद्दीन का छोटू है. हूजी के अलावा ईमेल भेजनेवालों में एक इंडियन मुजाहिद्दीन है. खबर के आखिर में इंडियन मुजाहिद्दीन कि संलिप्तता की बात कहते हुए पत्र लिखता है- ‘लेकिन इस बार इस संगठन ने विस्फोट का अपना तरीका बदला है’. वैसे पी.चिदंबरम का बयान भी है कि यह कोई नौसिखिया भी हो सकता है. जांच के बाद पता चला कि इस विस्फोट कि जिम्मेदारी लेते हुए खुद को इंडियन मुजाहिद्दीन का सदस्य अली सईद अल हूरी बताने वाला अहमदाबाद का कोई मनु ओझा था. काटजू साहब ने इसी ओर इशारा करते हुए कहा है कि ऐसे ईमेल या एसएमएस कोई भी ऐसे बुरे इरादों वाला आदमी भेज सकता है जिसका मकसद सांप्रदायिक नफरत फैलाना हो.
Dec
21
2011
सत्ता और सीबीआई
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सीबीआई को लेकर किसी के भी जेहन में बोफोर्स घूसकांड से लेकर बाबरी मस्जिद में नेताओं को फांसने और क्लीन चिट देना रेंग सकता है। बोफोर्स कांड में गांधी परिवार के करीबी क्वात्रोकी को लेकर सीबीआई ने तीन बार यू टर्न लिया, और बाबरी कांड में लालकृष्ण आडवाणी को क्लीन चिट देने की पहल कैसे रायबरेली कोर्ट में हुई यह भी किसी से छुपा नहीं है। लेकिन सत्ता के लिये कैसे सीबीआई सत्ता के निर्देश पर काम करता है यह कांग्रेस हो या भाजपा दोनों ने ऐसे ऐसे प्रयोग किये हैं कि सीबीआई देश में जांच एजेंसी से ज्यादा पिंजरे में बंद शेर लगने लगा है। जिसे पिंजरे से खोलने का डर दिख कर सत्ता अपनी सत्ता बचाती है।
सीबीआई को सांप-सीढ़ी के खेल में कैसे बदला गया इसका पहला खुला नजारा अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए की सत्ता में 1998 में ही नजर आया था। तब सरकार बनाने में वाजपेयी के पीछे जयललिता भी खड़ी थी तो एनडीए ने सत्ता में आते ही जो पहली चाल चली वह जयललिता के खिलाफ सीबीआई की उस जांच को रोक दिया जो जन्मदिन में मिली भेंट के तौर पर करोड़ों के डिमांड-ड्राफ्ट को लेकर 1996 में करुणानिधि सरकार ने
Dec
16
2011
सब्सिडी से भूख की भरपाई का सवाल
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खाद्य सुरक्षा बिल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नाक का सवाल बना लिया है। आका के इरादे पर नतमस्तक केंद्रीय मंत्रिमंडल रविवार को इस पर दोबारा विचार करने वाली है। अध्यक्ष का मान रखने की अदावत है कि किसी भी सूरत में सरकार इसे संसद के मौजूदा सत्र में पेश कर देना चाहती है। सहकारिता क्षेत्र के विरोध और कृषि मंत्री शरद पवार समेत कांग्रेस के ही कई सांसदों के व्यवहारिक एतराज पर इस बिल को पिछले हफ्ते ही रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया था। अब शरद पवार के एतराज को कम करने की पहल कर लिए जाने की बात कही जा रही है। मुमकिन है कि कैबिनेट से खाद्य सुरक्षा विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश करने के लिए मंजूरी ले ली जाए।
सवाल है कि आखिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खाद्य सुरक्षा बिल को लेकर इतना बेताब क्यों हैं ? टका सा जवाब है कि यह उनके ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। सोनिया गांधी की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने गरीबों को दो जून की रोटी मुहैया कराने की गारंटी देने वाले इस विधेयक के प्रस्ताव पर 2009 में ही सहमति प्रकट कर दी थी। इसे सूचना का अधिकार
Sep
20
2011
आखिर क्यों गई शहला मसूद की जान?
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इस बीच स्थानीय पुलिस तफ़्तीश में जुटी रही। इस दौरान सबूत भी बखूबी खुर्द-बुर्द कर दिये गये और मामले का रुख भी बेहद चतुराई से दूसरी तरफ़ मोड़ दिया गया। सीबीआई अब तक इस मामले में करीब आधा दर्जन लोगों से पूछताछ कर चुकी है, पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। पक्ष-विपक्ष की राजनीति को नज़दीक से समझने वाले आशंका जता चुके हैं कि इस मामले का हश्र भी रुसिया हत्याकांड की तरह होना तय है। उस मामले में सुषमा स्वराज के करीबी विधायक जीतेन्द्र डागा का नाम उछलने के बाद सीबीआई जाँच कराई गई थी और जाँच में रुसिया की मौत को हादसा करार दिया गया था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद तरुण विजय और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से व्यक्तिगत जान पहचान रखने वाली शहला के भाजपा के साथ गहरे ताल्लुकात पर चर्चा का बाज़ार गर्म है। आरटीआई कार्यकर्ता शहला के भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं से गहरे संबंधों ने पार्टी के सामने मुश्किलें खडी कर दी हैं। आज आलम यह है कि शहला मसूद हत्याकांड भाजपा में अंदरूनी घमासान और एक-दूसरे को निबटाने का हथियार बन गया है। सबसे ज्यादा गंभीर बात यह है कि भोपाल से लेकर दिल्ली तक के कई भाजपा
Sep
17
2011
कर्ज लेकर मौज कर रही शिवराज सरकार
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विभिन्न संस्थाओं की आउट स्टैंडिंग पर 3,000 करोड़ की गारंटी दे रखी है। कुल जमा सरकार पर 77,990.02 करोड़ का दायित्व है। प्रदेश में आम आदमी की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उसकी औसत सालाना आय 27,250 रुपए रह गई है जबकि गोवा जैसे छोटे से राज्य की औसत आय 1,32,719 रुपए है। ये आंकड़े शिवराज सिंह के शासनकाल की हकीकत बयां कर रहे हैं,लेकिन इन आंकड़ों से सबक लेने की बजाय सत्कार के नाम पर हर साल करोड़ों रूपए फूंके जा रहे हैं। व्यर्थ के सम्मेलनों और अपनी पार्टी के नेताओं की आवभगत में सरकार का कोष लुटाया जा रहा है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में इस तथ्य का खुलासा हुआ है। यह तो सर्व विदित है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आयोजन प्रिय हैं। लेकिन पिछड़े राज्यों में शुमार होने के बावजूद मध्यप्रदेश के निवासियों की गाढ़ी कमाई से वसूले गए कर को राज्य सरकार बड़े नेताओं की आगवानी, अफसरों की आवभगत एवं अन्य मामलों में नियमों को दरकिनार कर लुटा रही है।
आडवाणी पर बेहिसाब खर्च
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार 31 मई 2010 को वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी,पत्नी कमला और पुत्री प्रतिभा
Sep
13
2011
मजदूरों पर मारुति सुजुकी की मार
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पिछले एक पखवाड़े से दिनों से लगातार चल रहे भाषणों के बीच जब एकरसता-सी आ रही थी तो सड़क के उस पार एक बस से ज़ोर-ज़ोर से आ रही क्रांतिकारी नारों की आवाज़ ने मज़दूरों में कौतूहल जगा दी. पहले बस से उतरते कुछ पैर नीचे दिखे, फिर दो-एक चेहरे और फिर 50 से ज़्यादा ऐसे चेहरे जिसे देखकर मज़दूरों ने किलकारी मारनी शुरू कर दी. उनके हाथ में तख़्तियां थीं जिनमें मज़दूरों के समर्थन वाले हर्फ़ लिखे थे. सड़क के इस पार अब यह साफ़ हो गया था कि जेएनयू से यह बस आई है और मज़दूरों के इस सवाल पर वे उनका साथ देने आए हैं. बहुत देर तक तालियां बजती रही. फिर छात्र-मज़दूर एकता ज़िदाबाद के नारे. डीयू और जामिया से भी छात्र-छात्राओं के कुछ समूह वहां मौजूद थे. नौजवान से दिखने वाले मज़दूरों के उत्साही नेता सोनू गुज्जर ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘जिस आंदोलन में स्टूडेंट घुस जाए. समझो वो लड़ाई जीत ली गई.’ मानेसर और गुड़गांव के बाकी कंपनियों के मज़दूर यूनियनों से मिलने वाले समर्थन के बाद दिल्ली के विश्वविद्यालयों से आ रहे विद्यार्थियों ने सबके भीतर उत्साह और जीत की नई उमंग भर दी.
सफ़ेद और लाल रंग के


