परत-दर-परत
मंहगाई और गरीबी का भ्रामक मायाजाल
स्वतंत्रता के तत्काल बाद ही राजनेताओं तथा उनके आश्रित बुद्धिजीवियों ने मंहगाई और गरीबी के विरूद्ध सामूहिक हल्ला बोल दिया था जो साठ वर्ष बाद भी उसी रूप में उसी प्रकार जारी है। मैने इन आर्थिक समस्याओं पर पिछले तीस चालीस वर्षों से गहन शोध किया। मुझे कई बार आंकड़े इकठ्ठे करने पड़े क्योंकि जो नतीजे आते थे उनमें पूरे भारत में मैं अकेला दिखता था। मैं अपने आधे अधूरे नतीजों पर कुछ प्रश्न करता था तो कोई अन्य उत्तर देने वाला भी नहीं था। परिणामस्वरूप मुझे अकेले ही बढ़ना पड़ा और आज मैं यह कहने की स्थिति में हूं कि भारत में पिछले साठ पैंसठ वर्षों से मंहगाई, गरीबी, का जो हल्ला किया जा रहा है वह पूरी तरह या तो झूठा है या कृत्रिम। न मंहगाई वास्तविक है न गरीबी। ये सब प्रचार भारत के बुद्धिजीवियों, पूंजीपतियों, राजनेताओं का मिला जुला षड़यंत्र मात्र है। ... Full story
गरीबी के दमखम पर अमीरी की बमबम
यू.पी.ए सरकार की कामयाबियों की सूची में एक और उपलब्धि जुड़ गई है. भारत में अमीरों और सुपर अमीरों की संख्या और उनकी संपत्ति देश के विकास दर की तुलना में लगभग ढाई गुना तेजी से बढ़ रही है. मेरिल लिंच और केपजेमिनी की ताजा वैश्विक सम्पदा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष २०१० में ऐसे अमीरों की संख्या में २०.८ प्रतिशत की बढोत्तरी हुई है जिनकी संपत्ति ४.५ करोड़ रूपये से अधिक है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऐसे अमीरों की संख्या वर्ष २००९ के १,२६,७०० से बढ़कर २०१० में १.५३ लाख पहुँच गई है. इसके साथ ही, अमीरों की कुल संख्या के मामले में भारत दुनिया में १४ वें से १२ वें स्थान पर पहुँच गया है. ... Full story
कल और आज समलैंगिक समाज
आज से ठीक दो साल पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अंतर्गत अपराध माने गए 'अप्राकृतिक' यौन संबंधों के बारे में व्यवस्था दी थी कि वयस्कों के बीच आपसी सहमति से और निजी परिवेश/एकांत (प्राइवेट) में बनाये गए यौन संबंधों को अपराध मानना संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हनन है. अदालत के इस फैसले के दो साल बाद भी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन क्या भारत में समलैंगिकों को कानूनी अधिकार के साथ साथ सामाजिक मान्यता भी मिलनी चाहिए? ... Full story
नक्सलवाद से जंग, सेना के संग
जून महीने में ही अबूझमाड़ के घने जंगलों में फौज की तैनाती का जवाब नक्सलियों ने जिस तौर तरीके से देना शुरु किया है वह राज्य एवं केंद्र सरकार के लिए गहन चिंता का विषय होना चाहिए। मई और जून के बीच एक के बाद एक नक्सलियों ने पांच बड़ी वारदातें कीं और अद्धसैनिक बलों एवं पुलिस जवानों की टुकडिय़ों पर हमले करके 36 लोगों को मौत के घाट उतारा। और तो और नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले के दोरनापाल के निकट गांव डुब्बाटोला के लगभग सभी ग्रामीणों का 16 जून 2011 को अपहरण कर लिया और घंटों कड़ी पूछताछ के बाद उन्हें इस चेतावनी के साथ रिहा किया कि कोई भी पुलिस की मुखबिरी नहीं करेगा। इस घटना से जाहिर हैं कि नक्सली हिंसा और आतंक के जरिए दबाव को और तेज करने की कोशिश में है और इसमें वे कामयाब भी हैं। ... Full story
आमने सामने सत्ता और सत्याग्रह
लोकपाल के सवाल पर सरकार ने नागरिक समाज के नुमाइंदों को कुछ इस कदर घेरा कि नुमाइंदे दोबारा सत्याग्रह के रास्ते जाने को मजबूर हो गये. सत्ता और सत्याग्रह आमने सामने जा खड़े हुए हैं. संसदीय व्यवस्था से निकले सत्तातंत्र के पक्ष विपक्ष अब प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए आगामी तीन जुलाई को विचार विमर्श करेंगे. पुण्य प्रसून वाजपेयी समझा रहे हैं कि जिस प्रकार अन्ना हजारे के पीछे जनता लामबंद हो रही है क्या वह जनता संसदीय लोकतंत्र को ही खारिज करने का संकेत है? ... Full story
दगाबाज दोस्त अमेरिका
देश में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच जिस एक खबर पर लोगों का ध्यान कम गया वह है एक स्थानीय अमेरिकी अदालत द्वारा तहव्वुर राणा को निर्दोष करार दे देना. तहव्वुर राणा 26/11 के आतंकी हमले का प्रमुख षण्यंत्रकारी था. तहव्वुर राणा को अमेरिकी अदालत द्वारा निर्दोष करार दे देना भारत के गाल पर अमेरिका का करारा तमाचा है. इस फैसले से अमेरिका भारत का दगाबाज दोस्त साबित हुआ है. अब यह तय हो गया है कि अब मुंबई आतंकी कांड के असली षड्यंत्रकारियों तक भारतीय एजेंसियां नहीं पहुंच सकती. ... Full story
राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का राष्ट्रद्रोही षड्यंत्र
बाल गंगाधर तिलक, महर्षि अरविन्द, लाला लाजपत राय, दयानंद सरस्वती जैसे राष्ट्रवादियों की बात तो दूर समाजवादी आचार्य कृपलानी, मार्क्सवादी बी.टी. रणादिवे, सर्वोदय नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे लोगों पर भी सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने, कथित अल्पसंख्यकों को आहत पहुंचाने एवं दुष्प्रचार करने के आरोप में न सिर्फ उनके लेखों एवं प्रकाशित भाषणों पर प्रतिबंध लग सकता है बल्कि उन सब पर मरणोंपरांत मुकदमा भी चल सकता है। यह बात अतिशयोक्ति या व्यंग्यपूर्ण नहीं एक कटु सत्य है। ... Full story
तेल की कमाई, कांग्रेस बनी कसाई
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण पेट्रोल के दाम बढ़ाए जाने की केंद्र सरकार की दलील का देशभर में विरोध हो रहा है। पेट्रोल के दाम बढ़ाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार की दलीलें लंगड़े तर्क साबित हो रहे हैं। तेल के भाव बढ़ने पर सरकार हर बार यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती है कि कच्चे तेल की मूल्य वृद्धि के कारण ही उन्हें मजबूरन कीमतें बढ़ानी पड़ती हैं- असल में सरकार की यह नीति ‘बासी रोटी बेचने’ जैसी है। सरकार की कर नीति में तमाम ऐसी खामियां हैं, जिससे तेल के दाम बढ़ते हैं और उसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ... Full story
ओसामा का अल अमरीकी कनेक्शन
अमेरिकी विशेष दस्ते द्वारा वैश्विक इस्लामी आतंकवाद के मुखौटे ओसामा बिन लादेन के खात्मे के साथ ढेर सारे सवाल उठ खड़े हुए हैं। हर कोई जानना चाहता है कि क्या ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी अधिकारी बिना पाकिस्तानी मदद के ढूंढ सकते थे? क्या पाकिस्तानी सैन्य अकादमी से सटी एबोटाबाद की हवेली में बिना पाकिस्तानी प्रतिष्ठान की जानकारी के अमेरिकी कमांडो दस्ते सील के अधिकारी इतने खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम दे सकते थे? क्या इस ऑपरेशन के बाद अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बिगड़ जाएंगे? क्या अमेरिकी प्रतिष्ठान ओसामा बिन लादेन को संरक्षण देने वाले पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा? क्या ओसामा बिन लादेन के मसले पर नाराज अमेरिकी संसद पाकिस्तान को टेररिस्तान घोषित करेगी? इन सवालों के जवाब भावनाओं में बहकर भारतीय हितचिंतक की भूमिका अपनाने के बजाय सत्य परिस्थितियों के साक्ष्य में खोजना जरूरी है। ... Full story
मोहम्मद का बेटा ओसामा
आखिरकार मोहम्मद का बेटा ओसामा मारा गया. अब अलकायदा ने भी कन्फर्म कर दिया है कि एबटाबाद में अमेरिकन कमाण्डो ने जिस इंसान को कत्ल किया है वह ओसामा ही है. इसलिए इसमें कोई शक नहीं कि एबटाबाद में जिस व्यक्ति के सिर में अमेरिकी कमाण्डो ने गोली मारी वह ओसामा बिन लादेन ही था. उत्तर आधुनिक दुनिया के ईसाई रणनीतिकार इस बात पर चैन की सांस ले सकेंगे फिलहाल इस्लामिक नेशननस्टेट का सबसे प्रमुख प्रवक्ता से निजात मिल गयी है. साम्यवाद के बाद ईसाई नेशनस्टेट के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में उभर रहे इस्लामिक नेशनस्टेट की सोच के सरगना को उसने ठिकाने लगा दिया है. ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story
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Rajiv Sharma
राजीव शर्मा राजस्थान में रहकर मुक्त पत्रकारिता कर रहे हैं.इससे पूर्व कइ अखवारों के लिए रिपोटिंग कर चुके हें। राजनीति के अलावा पानी-पर्यावरण के मुद्दे पर संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए प्रयासरत। विस्फोट के लिए राजस्थान से नियमित लेखन और रिपोर्टिंग.- रोजाना बढ़ रही है अशोक गहलोत की मुश्किलें
- जाट लॉबी के सामने पस्त हुये गहलोत
- राजस्थान सरकार पर सितमों का सितंबर



