पर्यावरण

गैंडों को बसाएंगे पर हाथी कहां जाएंगे?
 

गैंडों को बसाएंगे पर हाथी कहां जाएंगे?

उत्तर प्रदेश के एकमात्र दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा परिवार पर मंडरा रहे आनुवांषिक प्रदूषण से निपटने के उद्देश्य से आसाम से जल्दी ही एक नर गैंडा दुधवा लाया जाएगा। नए गैंडा का परिवार बसाने के लिए गैंडा पुनर्वास परियोजना का क्षेत्रफल भी बढ़ाने की योजना है। इसके अंतर्गत सैकड़ों एकड़ में फैले प्राकृतिक भादीताल के वनक्षेत्र को ऊर्जाबाड़ से घेरकर संरक्षित किया जाएगा। दुधवा के तीस सदस्यीय गैंडा परिवार के लिए आशियाने का विस्तार भले ही ऊपर से ठीकठाक लग रहा हो लेकिन भादीताल इलाका को अपना पंसदीदा शरणगाह बनाकर रहने वाले लगभग चार दर्जन हाथी क्या ऊर्जा बाड़ के भीतर रह पाएंगे? ... Full story

पतित पावनी गंगा और काइली का ‘कचराघर’
 

पतित पावनी गंगा और काइली का ‘कचराघर’

आस्ट्रेलिया के 2डे एफएम रेडियो की एंकर काइली सैंडिलैंड्स के पिछले दिनों भारत की राष्ट्रीय नदी गंगा को कचराघर कहने से हंगामा मचा गया। मामले की गंभीरतर भांपते हुए सिडनी शहर में स्थित 2डे एफएम रेडियो स्टेशन और काइली ने गंगा को कचराघर कहने के मामले में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली। जन्म से मरण तक अनेक रूप् में गंगा भारतीय जनमानस से इस तरह जुड़ी हैं कि आदरभाव से उन्हें मैया कहा जाता है। ... Full story

गढ़ में ही गायब हो रहे बाघ
 

गढ़ में ही गायब हो रहे बाघ

दो साल पहले तक टाइगर स्टेट के रूप में विख्यात रहे मध्य प्रदेश में अब कितने बाघ बचे हैं इसको लेकर यहां के वन विभाग और केंद्र सरकार में ठन गई है। मध्य प्रदेश को मिले टाइगर स्टेट के दर्जे से स्पष्ट था कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में बाघों की संख्या सबसे अधिक है, पर हाल में जारी गणना दस्तावेज के मुताबिक, बाघों की संख्या के मामले में यह सूबा पिछड़ गया है। 2006 की गणना में राज्य में बाघों की संख्या 300 बताई गई थी, जो 2010 में खिसककर 257 पर आ गई है। ... Full story

गद्दाफी की नदी जिसे मैनमेड रीवर कहा जाता है
 

तानाशाह की नदी

लीबीया और गद्दाफी का नाम आजकल हम सिर्फ इसलिए सुन रहे हैं क्योंकि देश के लिए गद्दार साबित हो चुके गद्दाफी को गद्दी से हटाने के लिए अमेरिका बमबारी कर रहा है. लेकिन गद्दाफी की तानाशाही के दौर में उनके एक ऐसे काम का जिक्र करना भी जरूरी है जो न केवल लीबीया बल्कि विश्व इतिहास में अनोखा है. तानाशाह गद्दाफी की नदी. अपने शासनकाल के शुरूआती दिनों में ही उन्होंने एक ऐसे नदी की परियोजना पर काम शुरू करवाया था जिसका अवतरण और जन्म जितना अनोखा था शायद इसका अंत उससे अनोखा होगा. ... Full story

बाघ की बाढ़ हो, न जीना अपाढ़ हो
 

बाघ की बाढ़ हो, न जीना अपाढ़ हो

ऐसे में जब दुनिया के हर कोने से बाघों के विलुप्त होने की आशंका जाहिर की जा रही है, तब भारत में इनकी तादात बढऩा नई उम्मीद जगाता है। ताजा गणना के अनुसार देश में बाघों का औसत अनुमानित आंकड़ा 1,706 है। गौरतलब है कि बाघों की पिछली गणना 2006 में हुई थी और तब इनकी संख्या 1,411 बताई गई थी। यानी पिछले चार साल में देश में बाघों की संख्या में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी ऐतिहासिक तो नहीं है, फिर भी यह मायने रखती है। ... Full story

मुक्ति मांगती बिहार की गंगा
 

मुक्ति मांगती बिहार की गंगा

सदियों से सभ्यता का विकास नदियों के किनारे होता रहा है। नदी के बिना जीवन की कल्पना असंभव है। बावजूद इसके नदियों की मौत पर हम कभी अफसोस जाहिर नहीं करते। जबकि उनकी मौत के लिए सिर्फ हम हमेशा से जिम्मेदार रहे हैं। कभी हम विकास के नाम पर उनकी बलि चढ़ाते हैं तो कभी अपनी लालच को साकार करने के लिए। ... Full story

पानी बचाओ नहीं तो मर जाओ!
 

पानी बचाओ नहीं तो मर जाओ!

स्टोरी थोड़ी पुरानी है. तकरीबन चार महीना पहले लिखी गयी है. लेकिन स्टोरी में लिखी गयी कहानी ऐसी है जो आनेवाले चार दशकों तक कभी पुरानी नहीं पड़ेगी. मुंबई में पत्रकारिता करनेवाले ओमप्रकाश तिवारी ने ढब्बूजी का कार्टून कैरेक्टर गढ़नेवाले आबिद सुरती का एक अनोखा कैरिकेचर बनाया है. हाथ में नल ठीक करने का पाना लिए मुंबई के उस उप नगर में ढब्बू जी पानी सहेज रहे हैं जो बस तो गया लेकिन जो बिना पानी के बिना मोल बह रहा है. आबिद सुरती ने साबित कर दिया है कि बड़े मुहिम की शुरूआत बहुत छोटे उपकरणों के साथ होती है और जीवन में नई शुरूआत करने के लिए उम्र कोई अवरोध नहीं होती. ... Full story

बाघ के रास्ते में खड़ा इंसान
 

बाघ के रास्ते में खड़ा इंसान

पिछले तीन सालों में उत्तर प्रदेश के जिला खीरी एवं पीलीभीत के जंगलों से निकले बाघों के द्वारा खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, बाराबंकी, लखनऊ, फैजाबाद में करीब दो दर्जन के लोग बाघ का शिकार बन चुके हैं. इसे हम इंसानों के लिए त्रासदी कह सकते हैं लेकिन जितनी त्रासदी यह इंसानों के लिए है उससे अधिक त्रासदी उन बाघों के लिए जो इंसानों का शिकार कर रहे हैं. बाघ जन्म से हिंस्रक और खूंखार तो होता है, लेकिन मानवभक्षी नहीं होता। इंसानों से डरने वाले वनराज बाघ को मानवजनित अथवा प्राकृतिक परिस्थितियां मानव पर हमला करने को विवश करती हैं। ... Full story

पानी की राजनीति
 

पानी की राजनीति

आज हर बात की तरह पानी का राजनीति भी चल निकली है। पानी तरल है, इसलिए उसकी राजनीति भी जरूरत से ज्यादा बहने लगी है। देश का ऐसा कोई हिस्सा नहीं है, जिसे प्रकृति उसके लायक पानी न देती हो, लेकिन आज दो घरों, दो गांवों, दो शहरों, दो राज्यों और दो देशों के बीच भी पानी को लेकर एक न एक लड़ाई हर जगह मिलेगी। ... Full story

पर्यावरण सुरक्षा के दोहरे मापदण्ड
 

पर्यावरण सुरक्षा के दोहरे मापदण्ड

एक तरफ तो श्री जयराम रमेश बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को पर्यावरण के नाम पर रोकने का नाटक कर रहे हैं तो दूसरी तरफ उद्यमियों को पर्यावरण मंजूरी के लिए मैनुअल फॉर्म भरने के लिए दफ्तर न जाना पड़े और साथ ही उनसे लंबी प्रतीक्षा भी न करवाया जाए, इसके लिए भरपूर जतन भी कर रहे हैं। उनका आदिवासी प्रेम भी महज एक दिखावा है। नवी मुम्बई के हवाई अड्डा परियोजना के मामले में शुरुआत में श्री रमेश ने जरुर अड़ंगा लगाया था, किन्तु कालांतर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हस्तक्षेप के बाद उक्त परियोजना को हरी झंडी दिखा दी गई थी। श्री रमेश और यूपीए सरकार की इस दोहरी नीति से भले ही अनपढ़ और नासमझ लोग तात्कालिक रुप से खुश हो सकते हैं, परन्तु पढ़े-लिखे प्रबुद्व जन इस दिखावे के सच को अच्छी तरह से जानते हैं। ... Full story

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Pankaj Jha

Pankaj Jha

मधुबनी (बिहार) में जन्म। माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की उपाधि। अनेक प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर सतत् लेखन से विशिष्‍ट पहचान। कुलदीप निगम पत्रकारिता पुरस्‍कार से सम्‍मानित। संप्रति रायपुर (छत्तीसगढ़) में 'दीपकमल' मासिक पत्रिका के समाचार संपादक।