बात करामात

हमारा भगवा भगवान, तुम्हारा भगवा शैतान
 

हमारा भगवा भगवान, तुम्हारा भगवा शैतान

यदि देश-विदेश में जाने जाने वाले भगवा भेष धारी सन्यासी को अपमानित करने के लिए किसी सार्वजनिक स्थान पर चाँटा मार दिया जाता है तब भगवा रंग की चिंताओं पर एकाधिकार प्रकट करने वाले धार्मिक संगठनों को क्या चुप रहना चाहिए? यह सवाल उन हिन्दू संगठनों की कलई खोलता है जो देश के गृहमंत्री द्वारा आतंकवाद के आरोप में पकड़े गये उन व्यक्तियों को भगवा आतंकी कहने पर भड़क गये थे जो भगवा भेष में रह कर अपनी आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहे थे व अपने ही धार्मिक समाज को धोखा देकर उन्हें दंगों की आग में झोंके जाने का षड़यंत्र रच रहे थे। यद्यपि यह तय है कि जब कोई रंग या भेष किसी सम्प्रदाय विशेष की पहचान करा रहा तो उसके उल्लेख में सावधानी बरतना चाहिए ताकि उस सम्प्रदाय के निर्दोष लोग आरोपों की चपेट में आकर आहत न हों। पर यह सावधानी इकतरफा नहीं हो सकती। ... Full story

अमरनाथ की आग से मत खेलो
 

अमरनाथ की आग से मत खेलो

अमरनाथ यात्रा पर सवाल खड़ा करके स्वामी अग्निवेश ने बवाल मचा दिया है. हिन्दुओं का बड़ा वर्ग स्वामी अग्निवेश की इस दलील से सहमत नहीं है कि अमरनाथ यात्रा बंद कर देनी चाहिए. स्वामी अग्निवेश की सलाह हो या फिर कश्मीरी अलगाववादियों का एजेण्डा, अमरनाथ यात्रा को रोक पाना तब संभव नहीं होगा जब तक श्रद्धा का शिवलिंग हर साल बनता रहेगा. लेकिन अग्निवेश ने यह बयान देकर सबसे ज्यादा आहत किया है आरएसएस से जुड़े संगठनों और कट्टर कार्यकर्ताओं को. राष्ट्रवाद के दायरे को अपनी समझ के अनुसार परिभाषित करनेवाले आरएसएस के कार्यकर्ताओं की कट्टरता कितनी है इसका परिणाम स्वामी अग्निवेश को थप्पड़ के रूप में मिल चुका है. ऐसा ही एक लेख जिसमें विनोद बंसल अमरनाथ यात्रा को "मुसलमानों पर हिन्दुओं का अहसान" बताकर यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे सामरिक दृष्टि से भी यह यात्रा महत्वपूर्ण है. ... Full story

जाति जानने से नहीं मिटेगी गरीबी
 

जाति जानने से नहीं मिटेगी गरीबी

जनगणना के दूसरे दौर में सरकार दोबारा जाति का चक्कर चला रही है। उसने घोषणा की है कि देश के गरीबों की गणना करते समय उनकी जाति पूछी जाएगी इस घोषणा का क्या यह अर्थ माना जाए कि जो गरीब नहीं है यानी जो गरीबी रेखा के नीचे नहीं हैं, उनकी जाति नहीं पूछी जाएगी? यदि ऐसा है तो यह भी उल्लेखनीय राहत है, क्योंकि अलग-अलग अनुमानों के अनुसार देश में गरीबों की संख्या 40 करोड़ से ज्यादा नहीं है। यदि अर्जुन सेनगुप्ता की परिभाषा मानें तो यह संख्या 80 करोड़ तक पहुंच जाएगी लेकिन स्वर्गीय सेनगुप्ता की बात कौन मानने वाला है। अभी तो सरकार की कोशिश यही है कि गरीबों की संख्या कम से कम दिखाई जाए। यदि ऐसा करने में सरकार सफल हुई तो इसका एक सुफल यह भी होगा कि देश के लगभग 90 करोड़ लोगों की जाति नहीं पूछी जाएगी, क्योंकि वे गरीबी रेखा के नीचे नहीं होंगे। यानी जातिवादी दुर्गंध फैलेगी जरूर लेकिन वह ज्यादातर लोगों तक नहीं पहुंचेगी। ... Full story

हेडली के खुलासों की अमेरिकी गुगली
 

हेडली के खुलासों की अमेरिकी गुगली

जिस वक्त भारतीय मीडिया डेविड हेडली के खुलासों से मुंबई पर हुए आंतकी हमलों की तहकीकात कर रहा है, अमेरिकी मीडिया में एक दूसरी ही खबर लीड स्टोरी बनी हुई है. पाकिस्तानी प्रशासन ने अमेरिकी खुफिया एजंसी सीआईए को एबटाबाद के उस घर की तलाशी लेने की इजाजत दे दी है जहां ओसामा बिन लादेन रहा करता था. इन दो खबरों में कोई पारस्परिक संबंध है, जिसकी तहकीकात करने की जरूरत है? ... Full story

संकट में है जिन्ना का पाकिस्तान!
 

संकट में है जिन्ना का पाकिस्तान!

पाकिस्तानमें वर्तमान हालात बहुत खराब है. लेकिन भविष्य तो और भी भयावह है. अगले पांच सालतक पाकिस्तान एक स्थिर प्रजातांत्रिक देश बना रहेगा, इसकी गारंटी किसी भी सूरत मेंनहीं ली जा सकती. आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हरतरफ पाकिस्तान भ्रंस पर खड़ा है. कब कहां से टूटकर बिखर जाएगा इसकी भी गारंटी कोईनहीं ले सकता. पाकिस्तान फेल होता जा रहा है. हर मोर्चे पर. लेकिन दुनिया में जैसेदूसरे देश ढह रहे हैं उन्हीं के तर्ज पर पाकिस्तान को ढहते हुए देखना सचमुच दुखद होगा. ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को बिखरने के लिए छोड़ देना कहीं से अमेरिका के हित में नहीं होगा. ... Full story

अफगानिस्तान में अमेरिका से आगे
 

अफगानिस्तान में अमेरिका से आगे

प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की यह काबुल यात्रा ऐतिहासिक मानी जाएगी, क्योंकि पहली बार किसी प्रधानमंत्री ने अफगानिस्तान में भारत को क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में प्रतिबिंबित किया है। अब तक काबुल जाने वाले हमारे नेताओं ने हमेशा सिर्फ सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बढ़ाने की बात कही है। ... Full story

इतनी बड़ी आबादी फिर भी खाने की बरबादी
 

इतनी बड़ी आबादी फिर भी खाने की बरबादी

क्या भारत को पाकिस्तान से प्रेरित होकर कुछ करना चाहिए? निश्चय ही हममें से अधिकांश का उत्तर ना में होगा। लेकिन इस विषय में कुछ ऐसा ही है कि जो पाकिस्तान ने किया है हमे उसका अनुसरण करना चाहिए। विगत दिनों हमारे देश में भी इस परिपेक्ष्य में केंद्रीय स्तर पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा का केंद्र पाकिस्तान का वन–डिश कानून है, जो सार्वजनिक और व्यक्तिगत समरोह में भोजन-पानी की बर्बादी रोकने का एक सटीक उपाय है। ... Full story

सत्ता जरूरी इसलिए यूपीए है मजबूरी
 

सत्ता जरूरी इसलिए यूपीए है मजबूरी

राजनीति में किसी की कमजोरी कई बार किसी की मजबूती का सबब बन जाती है। 2 जी घोटाले से जूझ रही द्रविड़ मुनेत्र कषगम की विदाई ने केंद्र की यूपीए सरकार की मजबूती की नींव रख दी है। सीबीआई अदालत और आयकर अधिकारियों के दफ्तरों की चक्कर काट रही कनिमोझी को कानूनी पचड़े से बचाने के लिए द्रविड़ मुनेत्र कषगम का यूपीए के साथ रहना मजबूरी है। ... Full story

प्रचार के दौरान कोलकाता में चुनाव प्रचार करने पहुंचे लालकृष्ण आडवाणी
 

विधानसभा नतीजों का हिन्दुत्ववादी विश्लेषण

सुरेश चिपलूणकर पांच राज्यों में हुए विधानसभा नतीजों का हिन्दुत्ववादी विश्लेषण कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी को हिन्दुत्ववादी माननेवाले सुरेश चिपलूणकर मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का सेकुलर नजरिया जनता को रास नहीं आता है यही कारण है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा का खाता भी मुश्किल से खुल पाया है. वामपंथ को देश का दुश्मन मानकर उसके सफाये की तमन्ना रखनेवाले सुरेश चिपलूणकर अपने इस गणितीय विश्लेषण से साबित कर रहे हैं कि भाजपा को सेकुलर होने की भौड़ी कोशिश छोड़ देनी चाहिए. ... Full story

आधी दुनिया पूरा पॉवर
 

आधी दुनिया पूरा पॉवर

हिन्दुस्तान के सभ्य समाज में महिलाओं का स्थान काफी नीचे ही माना जाता रहा है। यह उतना ही सच है जितना कि दिन और रात कि भारतीय पुरूषों ने महिलाओं के वर्चस्व को कभी भी स्वीकार नहीं किया है। इतिहास में चंद उदहारण एसे हैं जिनमें महिलाओं द्वारा शासन किए जाने के किस्से सुनने को मिलते हैं। इक्कीसवीं सदी में भारत की महिला ने घर की चौखट लांघ दी है, अब वह पुरूषों के कांधों से कांधा मिलाकर चल रही है। ... Full story

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ashish maharishi

ashish maharishi

लेखक दैनिक भास्कर समूह से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा उनका ब्लॉग बोलहल्ला भी मीडिया के चुनिंदे ब्लॉग में से एक हैं। मौकों-मौकों पर राजनीति, सामाजिक और पर्यावरण पर भी लिखते हैं।