बियाबान में शोर
कैसा योग कहां का योगी?
दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई महाभारत के बाद पूरे देश में घमासान मच गया है। रामदेव के मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में मृतप्राय हो चली बीजेपी के लिये संजीवनी बूटी का काम किया है। चारों तरफ़ रामदेव के हाईटेक और पाँचसितारा सत्याग्रह पर हुए पुलिसिया ताँडव की बर्बरता पर हाहाकार मचा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन के ज़रिये अपनी बात सरकार तक पहुँचाने वालों का दमन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, लेकिन संवैधानिक अधिकार की आड़ में बाबा के कुकृत्यों पर पर्दा डालना भी आत्मघाती कदम से कम नहीं होगा। मीडिया बाबा को हठयोगी, महायोगी और ना जाने कौन-कौन सी पदवी से नवाज़ रहा है, मगर हाल के दिनों की उनकी करतूतें रामदेव को "शठ योगी" ही ठहराती हैं। ... Full story
बाबा करें तमाशा, अन्ना खाएं तमाचा
लाख सुलह सफाई और एकता के पाखंडी दिखावे के बीच अन्ना हजारे ने आशंका व्यक्त कर ही दी. रालेगढ़ में उन्होंने आज बयान दे ही दिया कि वे दिल्ली जरूर जा रहे हैं लेकिन बाबा रामदेव के सत्याग्रह में शामिल होंगे या नहीं इसका निर्णय अभी तक नहीं किया है. यह निर्णय कल लिया जाएगा. कल की कल देखी जाएगी लेकिन बाबा रामदेव के सत्याग्रह के इस तमाशे की आड़ में सरकार बूढ़े बाबा अन्ना हजारे को किनारे करने में कामयाब हुई है. आलोक कुमार बता रहे हैं कि कैसे रामदेव के तमाशे से अन्ना हजारे के लोकपाल अभियान पर तमाचा पड़ा है. ... Full story
सावरकर की आत्मा को न सताए कांग्रेस
रविवार यानी 28 मई को वीर सावरकर की जयन्ती थी। यह महान क्रांतिकारी सन् 1883 में महाराष्ट्र के नासिक के निकट भगुर गांव में जन्मे थे। जन्मजात मेधावी सावरकर की पद्य में असाधारण प्रतिभा थी और जब वह मुश्किल से 10 वर्ष के रहे होंगे तभी उनकी कविताएं समाचारपत्रों में छपने लगी थीं। जब वह मात्र 16 वर्ष के थे तब सावरकर ने अभिनव भारत संस्था बनाई जिसका मुख्य उद्देश्य भारत से अंग्रेजों को बाहर निकालने और देश को पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता दिलाना था। मैं जब 15 वर्ष का था और हाई स्कूल से निकला ही था कि लाहौर गए मेरे एक मित्र मेरे लिए सावरकर की पुस्तक ‘दि फर्स्ट वार ऑफ इंडिपेंडेंस‘ की पुरानी प्रति लेकर आए। पुस्तक की कीमत 28 रूपये पड़ी जो कि उस समय एक बड़ी राशि हुआ करती थी। ... Full story
मारन मार गये इस बार
पहले ए राजा, फिर कनिमोजी, और अब कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन भी अचानक लुटेरे के अवतार में। करोड़ों की कमाई के लिए करुणानिधि की कलाबाजियों के मोहरों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साफ सुथरी छवि का लबादा ओढ़कर मारन भी वह सब पहले से ही कर रहे थे, जो उनकी पार्टी के बाकी लोगों ने किया। इसलिए अब यह अंदाज लगाना गैरजरूरी लगने लगा है कि अगला नाम किसका आएगा। जब अपने नाम के बिल्कुल विपरीत दयानिधि ने भी देश की निधि को लूटने में कोई दया नहीं दिखाई, तो फिर अगला नाम तो कोई भी हो सकता है। ... Full story
द मोस्ट हांटेड होम मिनिस्टर
देश के गृहमंत्री पी चिदम्बरम पहले माओवादियों के खिलाफ शुरू किये गये अपने अभियान को लेकर चर्चा में आये थे. उस वक्त उनके ऊपर आरोप लगा था कि ऐसा करने के पीछे बड़ी कंपनियों का दबाव है क्योंकि जमीन पर जारी विरोध के कारण कंपनियों को अपने औद्योगिक विस्तार में सफलता नहीं मिल रही है. लेकिन इस बार अचानक वे उस वक्त चर्चा में आ गये जब कठोर गृहमंत्री ने पाकिस्तान को दिये जानेवाली उस सूची में चूक कर दिया जिसमें पचास मोस्ट वांटेड आतंकवादियों के नाम शामिल थे. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या हमारे गृहमंत्री किसी प्रेतछाया (हांटेड) से ग्रस्त हैं. यह प्रेतछाया किसकी है जिसके दबाव में गृहमंत्री इतनी बड़ी चूक करते हैं फिर भी कुर्सी पर बने रहते हैं. गृहमंत्री चिदम्बरम पर प्रेम शुक्ल की टिप्पणी. ... Full story
गांधी की जगह लेनिन
वामपंथी शासन वाले एकमात्र राज्य त्रिपुरा में पिछले महीने से स्कूली किताबों में महात्मा गांधी की जगह लेनिन को थोप दिया है। यह तो किसी को भी तर्कसंगत नहीं लगेगा कि भारत के नौनिहालों को महात्मा गांधी की जगह लेनिन पढ़ाया जाए। त्रिपुरा में फिलहाल सीपीएम की सरकार है। मुख्यमंत्री कम्युनिस्ट माणिक सरकार हैं। त्रिपुरा में कक्षा पांच के सिलेबस से सत्य, अंहिसा के पुजारी महात्मा गांधी की जगह कम्युनिस्ट, फासिस्ट, जनता पर जबरन कानून लादने वाले लेनिन (ब्लादिमिर इल्या उल्वानोव) को शामिल किया है। ... Full story
रमन ने बनाया विनायक को नायक
डा. बिनायक सेन की ख्याति, उनके राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संबंध तथा एक चिकित्सक के रुप में की गई सेवाओं के बीच क्या कोई संगति बैठती है? क्या सचमुच उन्होंने ऐसा कुछ किया है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी जन-जीवन में गुणात्मक परिवर्तन आया है? क्या मुख्यत: दुर्ग एवं बस्तर जिले के जिन क्षेत्रों में उन्होंने काम किया है, वहां के आदिवासियों की जीवन शैली बदली है? क्या वे नागरिक अधिकारों का महत्व समझने लगे हैं? क्या उनमें स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता आयी है? यदि इन सवालों का जवाब राज्य सरकार से पूछा जाए तो वह दो टूक शब्दों में कहेगी कि कोई फर्क नहीं पड़ा है। बिनायक सेन ने ऐसा कोई बड़ा काम नहीं किया है कि उन्हें याद रखा जाए। ... Full story
इंटरनेट पर बैठ गया सरकारी पहरा
सूचना तकनीक संशोधन अधिनियम 2009 के प्रस्तावित मसौदे को कानून बने एक महीने से अधिक का वक्त हो गया। पिछले 11 अप्रैल सरकारी गजट में इस संबध में तमाम कानूनों को प्रकाशित कर दिया गया था, लेकिन इतने महत्वपूर्ण विषय पर जितनी बहस होनी चाहिए थी वह न पहले हुई और न बाद में। प्रस्तावित मसौदे पर सूचना तकनीक मंत्रालय ने आम लोगों से 28 फरवरी तक राय मांगी थी, लेकिन सिविल सोसाइटी की तरफ से जितने भी सुझाव दिए गए उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। ... Full story
पाला लगा शिवराज को
मध्यप्रदेश की मंडियों में आजकल गेंहूँ की बम्पर आवक ने सरकार के होश फ़ाख्ता कर रखे हैं। सरकारी खरीद के अनाज को रखने के लिये गोदाम कम पड़ रहे हैं। अभी तक का आंकड़ा यह है कि अकेले मध्य प्रदेश में 34 लाख टन गेहूं की पैदावार हुई है। लेकिन बम्पर पैदावार ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की नीयत पर सवाल खड़े कर दिये हैं। बीती सर्दियों में सूबे की सरकार पाले और तुषार का रोना रोकर किसानों की चिंता करने में लगी थी, वो अब गेंहूँ की बम्पर पैदावार से हैरान है। अभी ज़्यादा वक्त नहीं गुज़रा है,जब प्रदेश में पाले से कहीं सत्तर तो कहीं सौ फ़ीसदी फ़सल चौपट होने की हवा बनाई गई थी। बात-बात में केन्द्र सरकार पर तोहमत जड़ने के आदी शिवराजसिंह किसानों को भरपूर मुआवज़ा देने की माँग को लेकर अपने संवैधानिक दायित्वों को बलाये ताक रखकर आमरण अनशन पर आमादा थे। ... Full story
क्रिकेट के चकाचौंध की काली सच्चाई
ग्लैमर और चकाचौंध से भरे टी-20 फॉर्मेट ने जितनी जल्दी कामयाबी के आसमान को छुआ उसका विववादों से भी चोलीदामन का साथ रहा। लीग के पहले सीजन से ही इसमें कई विवाद उठते गए। और आईपील-4 के शुरू होने तक विवादों का सिलसिला लगातार जारी है। खेलों की दुनिया में जब क्रिकेट का अवतरण हुआ था तब इसको भद्र पुरुषों के खेल की संज्ञा दी गई थी लेकिन धीरे-धीरे इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता ने क्रिकेट को भद्र पुरुषों के खेल की जगह लफंगों तथा भ्रष्टों का खेल बना दिया। इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल में तो सारी वर्जनाएं तार-तार हो गई हैं और इस बात को बल मिला है दक्षिण अफ्रीका की चीयरगर्ल गैबरियला के खुलासे से। ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story




