बियाबान में शोर
किसका टेंशन है नोएडा एक्सटेंशन?
ये वहीं इलाके हैं जिन्हें उत्तर-भारत के सबसे खुशहाल इलाकों में गिना जाता है और जहां के किसान कई बार अपने बच्चों की शादी में हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा करवाते हैं। दिल्ली का विस्तार क्या हुआ उससे सटे इलाकों के लोग आसमान छूती जमीन की कीमतों की वजह से मालामाल हो गए। लेकिन समृद्धि के कांटे जब चुभने लगे तो लोग सड़कों पर उतर आए और मामला अदालत में चला गया। ... Full story
आप न आते तो अच्छा होता
मुंबई में बम फटे। धमाके हुए। लोग मरे। और बहुत सारे घायल भी हुए। इन धमाकों के बाद सोनिया गांधी मुंबई आईं। साथ में अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी लाईं। रस्म निभाने के लिए दोनों विस्फोट स्थलों पर गए। रिवाज के तहत मृतकों के परिजनों से मिले। उनको ढाढ़स बंधाया। जख्मों पर मरहम लगाने अस्पतालों में भी गए। घायलों से मिले। उनको सांत्वना दी। मुंबई के सामान्य लोग बेचारे बाग – बाग, कि तकलीफ के मौके पर देश के दो सबसे बड़े नेता शहर को संभालने दिल्ली से दौड़े चले आए। मगर क्या तो उनका आना, और क्या जाना। इस शहर की जिंदगी के असली आसमान पर मनमोहन और सोनिया गांधी का आज कोई असर नहीं है। ... Full story
तमिल नाश का नंगा नाच
श्रीलंका में साल 2009 में जो कुछ हुआ वह अमेरिका सेना द्वारा अफगानिस्तान में या इराक में भी नहीं किया गया. तमिलों के खिलाफ छेड़े गये महायुद्ध में तमिल नाश का जो नंगा नाच खेला गया उससे जुड़ी रपटें और खबरें अब बाहर आ रही हैं. दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि जिस वक्त श्रीलंका से तमिलों का सफाया किया जा रहा था श्रीलंकाई सेना और वहां के राष्ट्रपति से हमारे उच्च राजनयिक मुलाकातें कर रहे थे तो श्रीलंकाई तमिलों के घोषित भारतीय समर्थक तमिलनाडु छोड़कर दिल्ली में अपने चुप रहने की कीमत वसूल रहे थे. लेकिन अब जब सच्चाई सामने आ रही है तो दर्द से दिल कराह उठता है और आश्यर्य से आंखें फटी रह जाती हैं, कि किस तरह से श्रीलंकाई सेना ने तमिलों का सफाया कर दिया और भारत सरकार चुपचाप तमाशाई बनी रही. ... Full story
भ्रष्टाचार का घुन
भारतीय समाज और राज व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर गहराती जा रही हैं, इसका अनुमान फोरेंसिक इंडिया की एक ताजा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, एक आम नागरिक को अपना वाजिब काम करवाने या हक पाने के लिए घूस के रूप में लगभग 2218 रूपये खर्च करने पड़े. आज से दस साल पहले घूस की यह रकम कोई 836 रूपये थी. इसका अर्थ यह हुआ कि पिछले एक दशक में एक आम भारतीय नागरिक पर घूस का बोझ लगभग 265 फीसदी यानि ढाई गुने से भी ज्यादा बढ़ गया है. यही नहीं, इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक दशक में देश को भ्रष्टाचार के कारण लगभग 1555 हजार करोड़ रूपयों का नुकसान उठाना पड़ा है. ... Full story
आजमगढ़ का नाम बदनाम न करो
मुंबई में 13 जुलाई को हुए बम धमाकों के बाद उत्तर प्रदेश के अखबारों में आजमगढ़ फोबिया फिर सुरुर पर है और पत्रकारों में कथित खूफिया सूत्रों, कथित स्रोतों की आड़ में खूब कुलांचे मार-मार के फर्जी खबरें की होड मच गई है। मिसाल के तौर पर अमर उजाला लखनऊ के 16 जुलाई के अंक को ही लेते हैं जिसकी मुख्य पृष्ठ की पहली लीड स्टोरी ‘‘संजरपुर के सैकड़ों मोबाइल फोन पर खूफिया निगाहें’’ को ही लेते हैं। यह खबर न सिर्फ आजमगढ़ को बदनाम करने की शातिर कोशिश है बल्कि कई पहलुओं से तो हास्यास्पद भी बन गई है। ... Full story
वर्दीधारी अपराधियों के संगठित गिरोह का शिकार उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में विशेषकर मायावती के मायावी शासनकाल में प्रदेश के कथित तेज-तर्रार खाकीवर्दीधारी पुलिसिया रणबांकुरों के कृत्यों-कु-कृत्यों पर इलाहाबाद उच्चन्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मुल्ला की यह टिप्पड़ी अक्षरशः सत्य प्रतीत होती है जिसमें वे कहते हैं- ‘‘पुलिस बल वर्दीधारी अपराधियों का एक संगठित गिरोह है।’’ गुरूवार की आधी रात को इलाहाबाद में पूर्व न्यायाधीश की यह टिप्पणी एक बार फिर सच साबित हुई है। वैसे तो नीशीथ राय और उनका अखबार लंबे अर्से से मायावती प्रशासन के निशाने पर हैं लेकिन गुरूवार की रात इलाहाबाद स्थित उनके घर पर छापेमारी करके साबित कर दिया कि प्रदेश में वही सुरक्षित है जो प्रशासन और पुलिस के साथ है। जो कोई भी प्रशासन या पुलिस के खिलाफ है उसको प्रदेश में नहीं रहने दिया जाएगा। ... Full story
दर्द को दबा देने की साजिश
मीडिया मजबूरी में या ये कहें कि और करे भी तो, क्या। अब यही चलाना-दिखाना है कि मुंबई के जज्बे को सलाम। आखिरकार जिंदादिल मुंबई के लोगों ने आतंक को फिर से मात दे दी। कुछ 22 प्वाइंट की मामूली सेंसेक्स की बढ़त ने एक और हेडलाइन ये भी दे दी कि आतंक को शेयर बाजार का करारा जवाब। लेकिन, क्या सचमुच ऐसा हुआ है? क्या सच्चाई यही है कि मुंबई या फिर शेयर ने आतंक को करारा जवाब दिया है? ... Full story
मौत की पटरी पर दौड़ती रेल
कालका एक्सप्रेस की घटना पर रेल मंत्रालय की गर्जना सुनने में काफी अच्छी लगती है। रेल मंत्रालय के एक कनिष्ठ मंत्री का कहना है कि कालका दुर्घटना के दोषियों को बख्सा नहीं जायेगा और उन पर लापरवाही के कानून का सौटा चलेगा। यह गर्जना सिर्फ और सिर्फ दिखावे के लिए है। दुर्घटना में हताहत परिवारों और अन्य जनाक्रोशों पर पानी डालने के लिए है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर रेल मंत्रालय को कई सवालों का जवाब भी देना होगा। ... Full story
दंडकारण्य के अरण्य में आरएसएस
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समस्या को सुलझाने के लिए सेना के बाद अब एक और अघोषित सेना कमान संभालने जा रही है. अबूझमाड़ में सेना की मौजूदगी के बाद अब आरएसएस के कार्यकर्ता नक्सलवादियों से संवाद के बहाने दंडकारण्य के अरण्य में प्रवेश करने के लिए तैयार हैं. प्रदेश में सलवा जुड़ुम के प्रयोग के असफल हो जाने के बाद राज्य सरकार भी आरएसएस की इस मुहिम को अपना समर्थन देने का मन बना चुकी है. दिवाकर मुक्तिबोध का मानना है कि आरएसएस का दंडकारण्य के अरण्य में प्रवेश समस्या को सुलझाने की बजाय उलझा देगा. ... Full story
छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में सुरंग
ऐसा लगता है, जैसे छत्तीसगढ़ की परीक्षाओं का, फर्जीवाड़ा और विवादों से चोली-दामन का साथ है। तभी तो प्रदेश में होने वाली अधिकांश परीक्षाओं में किसी न किसी तरह से धब्बा लग ही जाता है। छग में शिक्षा नीति जिस तरह लचर है, उसी का खामियाजा होनहार छात्रों व उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश के लिए परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा की बात कोई नई नहीं रह गई है, यही कारण है कि छग से दूसरे राज्यों में जाकर पढ़ने वाले प्रतिभावान छात्रों को ‘हेय’ की दृष्टि से देखा जाता है। ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story
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Pankaj Jha
मधुबनी (बिहार) में जन्म। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की उपाधि। अनेक प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों पर सतत् लेखन से विशिष्ट पहचान। कुलदीप निगम पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। संप्रति रायपुर (छत्तीसगढ़) में 'दीपकमल' मासिक पत्रिका के समाचार संपादक।- छत्तीसगढ़ में पत्रिका बनाम पत्रकारिता
- अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम मौन व्रत की मुश्किल
- अपनी चवन्नी खुद तलाशो लिंगाराम




