राजनीति
मुस्लिम मत के कारोबारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों अपने चार साल मुकम्मल कर लिए हैं। इधर नगर निकायों का कार्यकाल भी समाप्त होने को है, इसलिए नगर निकाय और विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गर्इं हैं। राजनैतिक दलों ने कुछ उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है। जब चुनाव आते हैं, तो मुसलिम वोट बैंक को हर राजनैतिक दल ललचाई नजरों से देखता है। देखे भी क्यों नहीं? उत्तर प्रदेश में मुसलिम आबादी लगभाग 20 प्रतिशत है। भले ही भाजपा का आधार मुसलिम विरोध पर टिका हो, लेकिन वह भी मुसलिम वोटों की चाहत रखती है। ... Full story
जंगलमहल का जंगलराज
सीपीएम का हश्र तो ममता ने देख लिया इसलिये ममता ज्योति बसु के रास्ते पर चलेगी यह संभव नहीं है। फिर एक अंतर नक्सलबाड़ी और जंगलमहल को लेकर यह भी है कि नक्सलबाड़ी के दौर में किसान-मजदूरों का सवाल नीतिगत तौर पर खड़ा हुआ था जो समूचे देश में इस सवाल पर आग लगा रहा था और अतिवाम देश के कई हिस्सा में लगातार बढ़ रहा था। यानी सत्तर के दशक में सवाल नक्सलबाड़ी के विकास का नहीं था बल्कि देशभर में नक्सलियों के उठाये जा रहे सवालों का था। लेकिन ममता बनर्जी के सामने सवाल जंगलमहल के विकास का है और जंगलमहल से निकले सवाल सिर्फ बंगाल को प्रभावित कर रहे हैं। ... Full story
वाम को आवाम की मार
ममता को मिले जनादेश की आधी में वामपंथ का अभेद्य किला आखिरकार भर-भराकर गिर ही गया। मार्क्स के चेलों की दहाड़ अब मंद हो चली है। विकल्पहीनता को विजय का औजार समझने वाले कॉमरेड अंत तक ममता बनर्जी को घरेलू नायिका की तर्ज पर ही देखते-समझते रहे, लेकिन ममता ने 34 साल तक राजनीतिक उत्थान के शिखर पर आसन जमाए वामपंथियों को पतन का पाताल दिखाकर साबित कर दिया कि लोकतंत्र को सत्ता के घातक हथियारों से दीर्घकाल तक हाका नहीं जा सकता है। ... Full story
भाजपा की चाल, खुद ही बदहाल
भोपाल में पिछले दिनों प्रदेश भाजपा के विधायकों और जिला अध्यक्षों के प्रशिक्षण की पाठशाला सम्पन्न हुई जिसे पार्टी के प्रदेश प्रभारी संचार मंत्रालय घोटाले की प्रसिद्धि वाले अनंत कुमार ने सम्बोधित किया। इन दिनों भाजपा की लोकप्रियता का ग्राफ दिनों दिन गिरता जा रहा है जिससे ऊपर से नीचे तक हड़कम्प मचा हुआ है। इसका असर यह हुआ है कि पहले से ही अपने दोहरेपन के लिए मशहूर पार्टी को आम जनता और अपने पदाधिकारियों के बीच द्वन्द से निरंतर गुजरना पड़ता है। एक ओर वे कहते हैं कि हमारी पार्टी बहुत संगठित और अनुशासित है तो दूसरी ओर अपनों के बीच उन्हें कहना पड़ता है जिस अनुशासनहीनता और लालच की अति से विधायक और जिलाध्यक्ष गुजर रहे हैं उससे अगला चुनाव किसी तरह नहीं जीता जा सकता। ... Full story
अमेरिका की सरपरस्ती करती राजनीति
विकीलीक्स के खुलासों से पहले अमेरिकी प्रशासन में खलबली मची और अब भारत की राजनीतिक दुनिया में भूचाल आ गया है। 15 मार्च से "द हिन्दू" ने विकीलीक्स के जरिये इंडिया कैबल्स के तथ्यों का खुलासा करना शुरू किया। ये दस्तावेज वे हैं, जो अमेरिकी दूतावास से वाशिंगटन भेजे गए और इनमें करीब 36 लाख शब्द हैं। इनमें सिर्फ चार साल अर्थात 2005 से 2009 तक के कैबल्स हैं। जो तथ्य इसमें आए हैं या आने वाले हैं, उनका दायरा बहुत व्यापक है। ... Full story
खूंटी पर टंगी खड़ाऊं सरकार
अंग्रेजी के प्रतिष्ठित और संतुलित अखबार ‘द हिंदू’ ने विकीलीक्स के ‘गोपनीय केबल’ छापने शुरू कर दिए हैं। अभी सिर्फ दो ही दिन हुए हैं, भारत की संसद और सरकार हिलने लगी है। इन ‘केबलों’ में से पता नहीं कैसे-कैसे गड़े मुर्दें उखड़ेंगे। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने विदेश मंत्रलय को जो गोपनीय संदेश, रपट, पत्र् और सुझाव आदि भेजे हैं, वे इतने विकट हैं कि हमारी सरकार न तो उन्हें गलत बता सकती है और न सही ! पिछले दो दिनों में जो दस्तावेज़ छापे हैं, उनके तथ्य ही इतने खतरनाक हैं कि इस सरकार की जगह अगर जवाहरलाल नेहरू या मोरारजी देसाई की सरकार होती तो वह बिना मांगे ही इस्तीफा दे देती। ... Full story
सिर पर सवार सत्ता का शैतान
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के बारे में जसवंत सिंह ने जो कुछ कहा है उससे यह बात साफ हो जाती है कि आडवाणी जी पर सत्ता का शैतान हावी रहा है. इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में उन्होंने सत्ता के नशे में हमेशा पार्टी को परास्त करने की कोशिश की है. जसवंत सिंह का बयान हो या आडवाणी जी द्वारा राम मंदिर आंदोलन के संदर्भ में दिया गया बयान, साबित करता है कि आडवाणी जी पर सत्ता का शैतान हावी रहा है. सत्ता के इस शैतान ने विरोधियों की नजर में भी ईमानदारी की धमक रखनेवाले आडवाणी को राजनीतिक महत्वाकांक्षा का हैवान बना दिया है. वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का विश्लेषण. ... Full story
सियासत की सांप-सीढ़ी
दिल्ली की राजनीति अब शतरंज के खेल से उठकर सांप और सीढ़ी के खेल में बदल चुकी है। शतरंज के खेल में शह और मात को दिमागी दांव से अंजाम दिया जाता है। सांप और सीढ़ी के खेल में सब कुछ तकदीर पर निर्भर है। कब खिलाड़ी सीढ़ी पाकर उंची पायदान चढ़ जाएगा और कब सांप का दंश उसे नीचे फेंक देगा, खेल का चतुर से चतुर खिलाड़ी विश्वासपूर्वक नहीं बता सकता। ... Full story
राव की राह पर मनमोहन
1993 के बाद जब जब कांग्रेस में नरसिंहराव को हटाकर सोनिया गांधी को लाने की सुगबुगाहट होती थी, हर बार बोफोर्स का मामला सुर्खियों में ला दिया जाता था. जो काम 1990 के दशक में नरसिंहराव कर रहे थे, इक्कीसवीं सदी में वही करामात राजनीति में मनमोहन सिंह कर रहे हैं. ... Full story
निकम्मी सरकार का बेकार सरदार
अभी मिस्र जैसी बात तो नहीं है लेकिन अब भारत की जनता भी शासक वर्गों की मनमानी के खिलाफ लामबंद होने लगी है. जहां तक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों की बात है उनकी विश्वसनीयता तो बहुत कम है लेकिन अगर कोई भी आदमी या संगठन सरकार की तरफ से प्रायोजित महंगाई के खिलाफ नारा देता है तो जनता मैदान लेने में कोई संकोच नहीं करती. अभी कुछ हफ्ते पहले बाबा रामदेव और उनकी तरह के कुछ संदिग्ध लोगों ने महंगाई के खिलाफ एकजुटता का नारा दिया तो देश के हर शहर में लोग जमा हो गए और सरकार के साथ साथ सभी राजनीतिक पार्टियों की निंदा की. ... Full story
मोदी के पक्ष में है देश का मूड
मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए सरकार निश्चित तौर पर अपनी ज़मीन खोती जा रही है. यूपीए के सत्ता में तीन साल तक बने रहने के मौके पर एबीपी न्यूज़-नीलसन के सर्वे तो यही चुग़ली कर रही है. देश के 28 शहरों में 9000 लोगों पर किये गये एक सर्वे के आधार पर एबीपी-निल्सन का कहना है कि देश राहुल गांधी की बजाय नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के बतौर देखना चाहता है और अबकी चुनाव में यूपीए की पराजय तय है. ... Full story




