रामदेव
Jun
15
2011
आरएसएस फोबिया डिसआर्डर
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इसके पहले कि आरएसएस का कोई आधिकारिक जवाब आता कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने संघ का नाम लेकर आंदोलनकारियों को कटघरे में खड़ा करना शुरु कर दिया। कांग्रेस के निशाने पर पहले अन्ना हजारे आए, फिर बाबा रामदेव और बाद में सभी आंदोलनकारी। देश के गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा- ‘‘आपको सोचना चाहिए कि बाबा रामदेव के पीछे कौन है? आरएसएस ने 2 अप्रैल को भ्रष्टाचार विरोधी विरोधी मोर्चा के गठन की घोषणा की थी जिसके संरक्षक बाबा रामदेव और संयोजक गोविंदाचार्य हैं।’’
चिदंबरम के आरोपों की हवा निकालते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता और केन्द्रीय कार्यसमिति के सदस्य राममाधव ने गृहमंत्री के वक्तव्य पर क़ड़ी प्रतिक्रया दी है। राममाधव ने कहा कि यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि केन्द्र सरकार का एक वरिष्ठ मंत्री गलत सूचनाओं के आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहा है। राममाधव ने यह भी कहा कि संघ ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन के लिए कभी कोई मंच का गठन नहीं किया है। हालांकि संघ भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चलाने वालों का समर्थन करता है। यह देश के हर नागरिक का दायित्व है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करे। संघ के पूर्व प्रवक्ता ने तल्ख लहजे में कहा
Jun
15
2011
संतन को कहा सीकरी सों काम ?
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संभवत: तभी से हिंदीभाषी इलाकों में एक मुहावरा ही चल पड़ा – संतन को कहा सीकरी सों काम। जब भी संत-सन्यासी और साधु राजनीति और देशनीति के सवालों से जूझने की कोशिश करने लगते हैं, कुंभनदास की ये पंक्तियां प्रबुद्ध हिंदी समाज के साथ ही भारतीय राजनीति के पुरोधा उछालने लगते हैं। काले धन की देशवापसी और उसके लिए योगगुरू रामदेव के अनशन को लेकर एक बार फिर यही सवाल उछाला जा रहा है। बिहार की राजनीति से अप्रासंगिकता की हद तक किनारे हो चुके लालू यादव हों या कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह या फिर कपिल सिब्बल, योगगुरू रामदेव पर हमला करते वक्त सबका यही कहना है कि उनका काम योग सिखाना है, राजनीति करना नहीं। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में जब साधु-संतों का प्रवेश बढ़ा था, तब भी यही सवाल उठाया गया था। एक वामपंथी सांस्कृतिक संगठन की कर्ता-धर्ता को बाबाओं में सिर्फ गुंडे और मवाली ही नजर आ रहे हैं।
लेकिन यह हकीकत नहीं है। कुंभनदास को सीकरी जाना भले ही पसंद नहीं था। लेकिन यह भी सच है कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ पहला विद्रोह संन्यासियों ने ही किया था। 1773 से तीस बरसों तक यह संघर्ष इतना तेज बढ़ा कि उसकी अनुगूंज
Jun
13
2011
गांधी जी की धरती पर चापलूसों की तानाशाही
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बाबा रामदेव ने आमतौर पर राष्ट्रीय सरोकारों के बहुत प्रासंगिक मुद्दों को ही उठाया है. उन्होंने हजार रुपये के नोट पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहने से लेकर (इससे कालेधन की जमाखोरी दस गुना कहीं ज्यादा आसान हो जाती है. यही कारण है कि अमेरिका और ब्रिटेन में सबसे बड़ी मुद्रा 100 ही है) स्विस बैंकों में छुपा कर रखे गए 1.4 ट्रिलियन डॉलर को वापस लाने तक की मांग भारत सरकार के समक्ष उठाई है. (भारत ऐसा देश है, जो विदेश में काला धन रखने के मामले में सबसे आगे है. दूसरे नंबर पर 400 बिलियन डॉलर के साथ रूस, तीसरे पर यूके, चौथे पर यूक्रेन और 96 बिलियन के साथ चीन पांचवें स्थान पर है.) बाबा रामदेव अकेले ऐसे जननेता हैं, जिनके देशभर में अनुयायी हैं और जिनके नुस्खों से लाखों भारतीयों को लाभ पहुंचा है. वे वास्तव में उनकी कसमें खाते हैं. इस तरह की भी चर्चाएं थीं कि भाजपा से असंतोष के चलते संघ से बाबा की नजदीकियां बढ़ रही हैं. स्वाभाविक रूप से सरकार के पास डरने की वजहें थीं. सरकार बुरी तरह से भयभीत थी. खासतौर पर तब, जबकि समूचे संसार में नागरिक समाज की त्योरियां चढ़ी हुई हैं. ऐसे समय में, इस आंदोलन
Jun
12
2011
पूरा हुआ रविशंकर का मिशन, रामदेव का अनशन खत्म
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अनशन टूटने के बाद आचार्य बालकिशन ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बाबा रामदेव का अनशन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं था. यह काले धन के खिलाफ देश में जनजागृति लाने के उद्येश्य से किया गया था जिसके पहले चरण में हम सफल रहे हैं. आचार्य बालकिशन ने खुद भी जूस पीकर अनशन खत्म करने का ऐलान किया है. दिल्ली में चार दिन छिपे रहने के बाद आचार्य बालकिशन हरिद्वार पहुंचे थे और बाबा रामदेव को अस्पताल पहुंचाने के बाद खुद भी वहीं भर्ती हो गये थे.
अस्पताल पहुंचाने के बाद से ही रामदेव की ओर से कोशिशें हो रही थी कि उनका अनशन सम्मानजनक तरीके से समाप्त होना चाहिए. इस काम में पहले आरएसएस ने श्री श्री रविशंकर को लगाया था लेकिन अगले दिन वे रामदेव और सरकार के बीच भी दूत का काम करने लगे. शनिवार को उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि वे जिस काम का संकल्प लेकर आये हैं उसे हर हाल में पूरा करेंगे. रविवार को रामदेव का अनशन समाप्त होने के साथ ही उन्होंने मिशन पूरा होने का ऐलान कर दिया.अगले एक दो दिनों तक बाबा रामदेव अस्पताल में ही रहेंगे जिसके बाद उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी.
रामदेव
Jun
12
2011
बालकिशन के गांव में
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भारत की सोनौली सीमा से नेपाल के बुटवल के रास्ते काठमांडू की ओर बढ़ने पर पोखरा जिले से पहले स्यांजा पड़ता है। आचार्य बालकिशन का घर स्यांजा जिले के भरूआ गांव में है और वह स्कूल गांव के ऊपर,जिसके रजिस्टर में बालकृष्ण के चौथी तक पढ़ने का साक्ष्य दर्ज है। इस सिलसिले में हमारी पहली मुलाकात बालकृष्ण के चाचा के लड़कों से होती है जो अपने नामों के पीछे सुवेदी लगाते हैं। वालिंग कस्बे में दुकान चला रहे बालकृष्ण के चाचा के लड़कों से पता चलता है कि भरूआ गांव ब्राह्मणों का है और वहां सुवेदी ब्राह्मणों की तादाद ज्यादा है। उनमें से एक जो फोटो में सबसे किनारे है, वह बालकृष्ण के साथ ही पढ़ा होता है, लेकिन जब मैं उससे दुबारा उसका नाम पूछता हूं तो उसको मुझ पर संदेह होता है और वह हंसते हुए नाम बताने से इंकार कर देता है।
मैं हाथ में डायरी नहीं निकालता, क्योंकि अपना परिचय उनको मैंने बालकृष्ण के दोस्त के रूप में दिया होता है और रिकॉर्डर तो बिल्कुल भी नहीं। मुझे ऐसा इसलिए करना पड़ता है कि जिनके जरिये यहां मैं पहुंचा हुआ होता हूं उन्होंने हिदायत दे रखी थी कि ऐसी कोई गलती मत करना जिससे तुम
Jun
12
2011
कांग्रेस से सुलह समझौता चाहते हैं बाबा रामदेव
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लेकिन कांग्रेस के अंदर ही बाबा रामदेव को लेकर दो फाड़ हो गया है. पार्टी कांग्रेस बाबा रामदेव को इतना महत्व दिये जाने के ही खिलाफ है और फिलहाल रामदेव के मसले पर मौन ही रहना चाहती है. कांग्रेस ने संकेत दे दिये हैं कि जो भी करना है वह सरकार करे. खबर यह भी है कि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह को अब बाबा रामदेव के बारे में बोलने से रोक दिया गया है. दिग्विजय सिंह को कहा गया है कि वे बाबा रामदेव के बारे में सार्वजनिक बयानबाजी बंद करे और कांग्रेस इस मसले में मूक दर्शक ही बने रहना पसंद करेगी. हालांकि सरकार के स्तर पर अब भी बाबा रामदेव को लेकर चिंताएं बरकरार हैं लेकिन सरकार तत्काल कोई कदम उठा पाने में सक्षम नहीं है.
लेकिन पांच जून के आपरेशन रामलीला मैदान के बाद खुद बाबा रामदेव बेहद सहमे हुए हैं. उनकी चिंता निजी छवि को हुआ नुकसान और संभावित सरकारी छानबीन दोनो हैं. बाबा रामदेव को भाजपा पर कोई भरोसा नहीं है और पांच जून को ही हरिद्वार पहुंची उमा भारती को वे आग्रह कर चुके थे कि उमा भारती आरएसएस और भाजपा से बात करें और उनसे दूर रहने के लिए राजी करें. इससे पहले
Jun
11
2011
राम के अस्पताल में रामदेव
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एलोपैथी दवाएं उपचार की आखिरी अवस्था नहीं है. बीमार शरीर को ठीक करने के लिए एक सीमा के बाद ऐलोपैथिक मेडिसिन सिस्टम असफल साबित होता है. भारत जैसे रहस्यवादी देश में ऐलोपैथी तब पानी भरने लगता है जब किसी बाबा की जड़ी कैंसर ठीक कर देती है और एलोपैथी के तथाकथित आधुनिक रिसर्च मुंह ताकते रह जाते हैं. लेकिन यह पारंपरिक भारत की गहन विद्या है जो सूफियों, दरवेशों, सिद्धों और संतो के पास पीढ़ी दर पीढ़ी आगे चलती रहती है. चमत्कार के ऐसे हजारों किस्से हमें आकर्षित करते हैं और संयोगवश हमें कभी कभी ऐसे लोगों से मिलने का मौका भी मिलता है. भारतीय सिद्धों, संतो, सूफियों, दरवेशों की इसी परंपरा में आजादी से पहले एक नाम जुड़ा था स्वामी राम का. स्वामी राम का जन्म गढ़वाल के एक दूरस्थ गांव में हुआ था. बचपन का नाम था ब्रजकिशोर धस्माना. विवाहोपरान्त सन्यासी हुए और जल्द ही शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गये. लेकिन 1952 में शंकराचार्य की पदवी से अपने आपको मुक्त करके दोबारा हिमालय में खो गये. उनके गुरू तिब्बत में रहते थे. लंबे समय तक उनके पास रहकर साधना, तपस्या की. फिर गुरु के आदेश पर अमेरिका गये, और अमेरिका के पेन्सलवेनिया स्टेट में हिमालयन इंस्टीट्यूट आफ
Jun
10
2011
बाबा से बातचीत पर विचार करे सरकार
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बाबा और सरकार के बीच हुई बातचीत में दोनों तरफ से यह दावा किया गया कि 90 प्रतिशत से ज्यादा मुद्दों पर उनकी सहमति बन गई है और इस बारे में दोनों ही पक्षों द्वारा मीडिया को भी तत्काल ही सूचित कर दिया गया। सहमति के करीब-करीब पहुंचे आंदोलन के संयोजकों और सरकार के बीच अचानक तनाव इस कदर बढ़ा कि सरकार ने शांतिपूर्वक चलने वाले इस आंदोलन को दमनचक्र चलाकर कुचल दिया। इस दमन के विरुद्व जनहित को देखते हुए तत्काल संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार और संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। अन्ना हजारे और उसके बाद बाबा रामदेव द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्व छेड़े गए इस आदोलन के चलते देश में भ्रष्टाचार विरोधी महौल बनने लगा था। इसी से ध्यान हटाने के मकसद से कांग्रेस पार्टी और सरकार से जुड़े कुछ लोगों ने एक गैर-राजनीतिक जनता के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने में कोई कसर नही छोड़ी।
सरकार ने अपनी गलती को छिपाने के लिए कभी इसे भाजपा तसे कभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जोड़ने की कोशिश की। यहां समझने वाली बात यह है कि अगर यह संघ का आंदोलन होता तो क्या दिल्ली का कैथोलिक चर्च रामदेव के साथ मंच
Jun
10
2011
अनशन के कारण अस्पताल पहुंच गये रामदेव
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अपने भक्तों को एलोपैथी दवाइयों से दूर रखने की सलाह देनेवाले बाबा रामदेव को उस वक्त अस्पताल ले जाने का फैसला लेना पड़ा जब उनकी हालत बिगड़ने लगी और उन पर बेहोशी के दौरे पड़ने लगे. हरिद्वार के सीएमओ योगेश शर्मा के अनुसार अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में ही उन्हें ग्लूकोज और आक्सीजन दिया जाने लगा था. अस्पताल पहुंचकर बाबा रामदेव को आईसीयू में रख दिया गया जहां 20 डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. बाबा रामदेव के साथ अस्पताल पहुंचे बालकृष्ण के भी अस्पताल में भर्ती होने की खबर है. डॉक्टरों का कहना है कि अब बाबा रामदेव की हालत में सुधार है.
रामदेव के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने एक बयान जारी करके कहा है कि हरिद्वार के सीएमओ द्वारा सलाह दिये जाने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने का निर्णय लिया गया. सात दिनों से भोजन पानी का त्याग करने के कारण उनके स्वास्थ्य को भारी नुकसान हो रहा था. ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना जरूरी हो गया था.
रामदेव की बिगड़ती हालत को देखते हुए उनका अनशन तोड़ने की अपील करने पहुंचे श्री श्री रविशंकर ने कहा कि उन्होंने बाबा रामदेव से अपील किया है कि वे अपना
Jun
10
2011
थानेदार हुई सरकार
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वह सिविल सोसायटी से तो सवाल पूछती है कि रैली के लिये उसके पास कहां से पैसा आया, कहां खर्च किया। लेकिन अपने जमा-खाते पर खामोश रहती है। क्या इस दौर में ईमानदारी इतनी महंगी हो चुकी है कि अन्ना का फक्कड होना और बाबा रामदेव में साधु तत्व ही ईमानदार आंदोलन के प्रतीक बन गये हैं। जाहिर है यह सारे ऐसे सवाल हैं, जिसने इस दौर में कांग्रेस से लेकर बीजेपी और सामाजिक संगठनो से लेकर सुप्रीम कोर्ट हीं नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज तक को ऐसी हरकत में ला खड़ा किया, जहां लोकतंत्र भी शर्मसार हो जाये। संयोग से जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने रामलीला मैदान पर पुलिसिया कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाया, उसी दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पुलिसिया कार्रवाई को जायज ठहराया और उसी दिन सुषमा स्वराज ने राजघाट पर ठुमके लगाने से परहेज भी नहीं किया। लेकिन देश की आम अवाम के लिये यह तीनों पहल कितना मायने रखती हैं जबकि अन्ना से लेकर बाबा रामदेव के उठाये सवालो का अगर वाकई समाधान निकल जाये तो देश के 120 करोड़ लोग जरुर राहत से सांस ले सकते हैं। हां , बाकि एक करोड़ के लिये जरुर


