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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>
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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>
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						<title>उद्योगपतियों से क्यों मिले आडवाणी?</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=515</link>
						<category>बात-करामात</category>
						<pubDate>Thu, 20 Nov 2008 11:14:00 -0600</pubDate>
						<description>२० नवंबर की शाम आडवाणी के घर के बाहर भारी गहमा-गहमी थी. दरवाजे के बाहर पत्रकारों की भारी भीड़ जमा थी. कैमरे और गनमाईक तैनात थी. शाम के पांच बजते ही सारे मीडियाकर्मी हरकत में आने लगते हैं. एक-एक कर उद्योगपतियों की गाड़िया आडवाणी के घर के अंदर जाती हैं और बाहर पत्रकारों में उस उद्योगपति को पहचानने की बुझौवल शुरू हो जाती है. पंद्रह बीस मिनट के अंदर देश के कोई १५ शीर्ष उद्योगति आडवाणी के घर पहुंच चुके थे. पहुंचनेवाले लोगों में दोनो अंबानी बंधु भी शामिल थे. मुकेश अंबानी पहले आ गये थे, अनिल बाद में आये.  </description>
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						<title>अपनी अर्थव्यवस्था से जुड़ने का वक्त</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=514</link>
						<category>अर्थ-अनर्थ</category>
						<pubDate>Wed, 19 Nov 2008 08:09:00 -0600</pubDate>
						<description>इंटीग्रेशन बहुत अच्छा शब्द है. योग भी एक तरह का इंटीग्रेशन ही है. सत्य का परम सत्य के साथ इंटीग्रेशन. अपूर्ण का पूर्ण के साथ मिलन. पूर्ण के साथ मिले तो अपूर्ण का अभाव दूर हो गया. भारत में भी जब अर्थव्यवस्था को दुनिया के साथ (खासकर दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ) इंटीग्रेटशन की कोशिशे शुरू हुईं तो समर्थकों ने कहा कि हमारा अभाव दूर हो जाएगा. भारत में कोई बीस साल भी नहीं बीते. ढोल फट गया.
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						<title>आडवाणी की वेबसाईट : नो वारंटी</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=513</link>
						<category>खोज खबर</category>
						<pubDate>Tue, 18 Nov 2008 22:47:00 -0600</pubDate>
						<description>&amp;quot;This website makes no representations or warranties in relation to this website or the information and materials provided on this website.&amp;quot; भारतीय राजनीति में डिजिटल तकनीकि का प्रयोग करनेवाले लालकृष्ण आडवाणी अपनी ही वेबसाईट पर कही गयी बातों की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करते. इसका उदाहरण यह वाक्य है जो आडवाणी की वेबसाईट पर चस्पा है. हालांकि वेबसाईट का होमपेज यह दावा करता है कि यह भाजपा और एनडीए के भावी प्रधानमंत्री की वेबसाईट है लेकिन इतने बड़े दावे का सच यह है कि वे वेबसाईट पर कही गयी बातों की जिम्मेदारी खुद स्वीकार नहीं करते.</description>
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						<title>विरोध की &#039;एकल खिड़की&#039; भी खुली रखिए</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=512</link>
						<category>जंतर-मंतर</category>
						<pubDate>Tue, 18 Nov 2008 12:32:00 -0600</pubDate>
						<description>आज सभी खदान परियोजनाओं को बगैर किसी रूकावट के पास करने का दबाव पैदा हो गया है। देश के विकास के लिए बिजली चाहिए। इसीलिए बिजली घरों को तो पर्यावरण नियमों से पूरी तरह मुक्त करने की आवाजें उठने लगी हैं। और तो और, जमीन-जायजाद का ताकतवर गुट भी अब मॉल, आवासीय कालोनियों व अन्य किस्म की शहरी परियोजनाओं को पर्यावरण विभाग से प्रमाणित करवाने जैसी बेमतलब की झंझटों से मुक्त करने की मांग करने लगा है।</description>
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						<title>मीठे पानी को जोड़ लेने की जुगत </title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=511</link>
						<category>पूत सपूत</category>
						<pubDate>Tue, 18 Nov 2008 09:53:00 -0600</pubDate>
						<description>यह पूरा इलाका खारे पानी से भरा है. कुदायूं (केरल) के पास राष्ट्रीय राजमार्ग १७ के आसपास का यह इलाका मीठे पानी के लिए मुश्किल जगह है. लेकिन ७० साल के फादर बेंजामिन डीसूजा ने ऐसा अभिनव प्रयोग किया है कि सबके लिए मीठे पानी तक पहुंच का रास्ता खुल गया है. चर्च के अपने पास चार एकड़ जमीन है. फादर बेंजामिन ने तय किया कि वे इस भूभाग पर बरसनेवाली हर बूंद को रोकेंगे और इस खारे पानी के इलाके में कुओं को मीठे पानी से भर देंगे. उन्होंने पांच कुओं को मीठे पानी से लबालब कर दिया. अब मीठे स्वभाव और व्यवहार ही नहीं, मीठे पानीवाले पादरी है.  </description>
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						<title>क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=510</link>
						<category>धर्म-अधर्म</category>
						<pubDate>Mon, 17 Nov 2008 09:20:00 -0600</pubDate>
						<description>पिछले तीन-चार महीनों में मंदिर-मस्जिद और गिरजाघरों के भक्त आपस में लड़े हैं और इससे जो आग लगी है, उससे फिर कई लोग झुलसे हैं। कश्मीर, उड़ीसा और कर्नाटक में धर्मों की बुनियाद-सहिष्णुता को जलाकर यह आग तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी फैली है। गांधीजी ने सनातन धर्म को सबसे सहिष्णु धर्म बताया था। उन्होंने बहुत भारी मन से पूछा था कि क्या यह दुख सबको मिटाकर मिटेगा?</description>
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						<title>खामोश अदालत जारी है</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=509</link>
						<category>खोज खबर</category>
						<pubDate>Mon, 17 Nov 2008 04:39:00 -0600</pubDate>
						<description>राज ठाकरे को किस तरह उग्र मराठी उभार का नायक बनाया जा रहा है, वह गौरतलब है। जमशेदपुर की अदालत से राजठाकरे के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को मुंबई पुलिस ने आखिरकार 15 नवंबर को जिस ढंग से तामील किया, उससे कानून की व्यवस्था के बारे में कैसे संकेत गए? वारंट एक महीना पहले जारी हुआ था और तब से मुंबई पुलिस´ इसे दबाए हुए रही। आखिरकार राजठाकरे अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हुए। गिरफ्तारी के कागजात रास्ते में तैयार किए गए और झारखंड की अदालत से जारी वारंट के गैरजमानती जुर्मो से संबंधित धाराओं में नहीं होने से महाराष्ट्र की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।</description>
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						<title>चारा नहीं, चर लिया भविष्य</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=508</link>
						<category>परत-दर-परत</category>
						<pubDate>Mon, 17 Nov 2008 01:35:00 -0600</pubDate>
						<description>बिहार को &amp;quot;बाढ़, बालू और बलवा&amp;quot; प्रदेश की संज्ञा किसी महाराष्ट्र के नेता ने नहीं दी. यह संज्ञा बिहार के कर्महीन नेतृत्व की देन है. बिहार को यह कर्महीन नेतृत्व कहीं और से नहीं गरीबों की आशा लालू प्रसाद याजव की ओर से मिला है. लालूवंश ने केवल चारा ही नहीं बिहार के भविष्य को चरने का काम किया है. जिसे मेरी इस बात पर संदेह हो वह कृपया बताएं कि बिहार की इस आर्थिक दुर्दशा का जिम्मेदार किसे ठहराया जाए? क्या बिहार लालू से पहले के अपने सुनहरे अतीत को देखकर, उससे रोमांचित होकर सुनहरे भविष्य का सपना नहीं देख सकता? </description>
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						<title>जेहाद से न खुलेंगे जन्नत के द्वार</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=506</link>
						<category>बात-करामात</category>
						<pubDate>Sun, 16 Nov 2008 04:40:00 -0600</pubDate>
						<description>सिर्फ यह कहकर छुटकारा नहीं पाया जा सकता कि आतंकवादी हिंसा सिर्फ कुछ सिरफिरे या बहके हुए लोगों का काम है। पूरी दुनिया में इस्लाम के नाम पर हो रही आतंकवादी गतिविधियां इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि इस्लाम की पूरी विचारधारा में कहीं ऐसा कुछ जरूर है जिसे इस तरह की हिंसा के लिए आसानी से आधार बनाया जा सकता है.</description>
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						<title>आडवाणी की पाती ओबामा के नाम</title>
						<link>http://www.visfot.com/index.php?news=505</link>
						<category>राजनीति</category>
						<pubDate>Sat, 15 Nov 2008 14:37:00 -0600</pubDate>
						<description>नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने ओबामा की जीत के बाद उन्हें बधाई देनेवाला एक पत्र लिखा था. लेकिन रूकिये, यह नेता प्रतिपक्ष का पत्र किसी संभावित राष्ट्राध्यक्ष के लिए था या फिर निजी पत्र किसी नेता के नाम था? पत्र का मजमून तो यही कहता है कि यह निजी पत्र है जो किसी करिश्माई नेता से अभिभूत होकर लिखा गया है. हालांकि यह पत्र अपने आप में एक प्रहसन की तरह लगता है. पत्र का लेटरपैड नेता प्रतिरक्ष का है, पहली लाईन में लिखा गया है कि वे भाजपा और अपनी ओर से लिख रहे हैं और बधाई अपनी बीवी, बेटा-बेटी की ओर से दी गयी है. पहले पत्र ही पढ़ लेते हैं-</description>
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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>
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