Avadhesh Akodia
आबू की पहाड़ियों में मीडिया पर मंथन
ब्रह्माकुमारीज संस्था के मीडिया प्रभाग द्वारा आयोजित नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामाजिक दायित्वों पर मंथन जारी है। देश भर से आए सैकड़ों पत्रकार इस मसले पर खुले मन से बात कर रहे हैं। कॉन्फेंस का उद्घाटन करते हुए राजस्थान के सूचना व जनसंपर्क राज्यमंत्री अशोक बैरवा ने कहा कि नकारात्मकता का दंश झेल रही मानवता को राहत प्रदान करने के लिए मीडियाकर्मियों को आध्यात्मिकता के परिवेश से जुड़कर सामाजिक बदलाव का नया अध्याय लिखने का संकल्प लेना चाहिए।
आखिर चुप क्यों हैं आडवाणी?
पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों का मौसम याद कीजिए। 'पीएम इन वेटिंग' लालकृष्ण आडवाणी की आक्रामकता को देखकर हर कोई हैरत में था। साठ साल के सार्वजनिक जीवन में वे शायद ही कभी इतना सक्रिय हुए हों। खुद को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बेहतर साबित करने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया। सीधी बहस की भी चुनौती भी दी। जब मनमोहन ने इससे इंकार कर दिया तो खूब खिल्ली भी उड़ाई, पर देश की जनता ने बिना बहस के ही निर्णय कर लिया कि कौन कमजोर है और कौन मजबूत?...अफगानिस्तान में फिर मुस्कुराएंगे बुद्ध
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति चुनावों में हामिद करजई का लगातार दूसरी बार जीतना लगभग तय हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 92 फीसदी मतदान केंद्रों पर वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है और करजई ने 54 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। करजई अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला अब्दुल्ला से काफी आगे निकल गए हैं। अब्दुल्ला को महज 28 फीसदी वोट मिले हैं। अब तक की मतगणना से तय हो गया है कि चुनाव आयोग को अब दूसरे चरण का मतदान 'रन-ऑफ' नहीं कराना पड़ेगा।...संघ को भी सुधारिए भागवत जी
मोहनराव भागवत भले ही लाख इंकार करें, लेकिन संघ भाजपा में बड़े बदलाव चाहता है। यदि ऐसा नहीं होता तो भाजपा के आला नेताओं की सांसें यूं ही फूली नहीं रहतीं। भाजपा में विचारधारा से लेकर नेतृत्व तक बदलने की कवायद में जुटे मोहन भागवत को अपने घर यानी संघ की ओर भी देखना चाहिए। संघ के भीतर समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। यह संगठन इस समय विशेषकर भाजपा से बिगड़ते रिश्तों, आनुषांगिक संगठनों में फैली अराजकता, वैचारिक भटकाव, व्यक्तिवादी राजनीति के चलते सत्ता संघर्ष और एक-दूसरे के खिलाफ गलाकाट प्रतिद्वंदिता सरीखी समस्याओं से जूझ रहा है।...उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी भाजपा - सुदर्शन
के.एस. सुदर्शन संघ के लोकप्रिय व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं। नौ साल तक आरएसएस के सरसंघचालक रहे सुदर्शन के काल में ही भाजपा ने सत्ता संभाली. जाहिर है वह वक्त भाजपा संघ संबंधों को लेकर सबसे संवेदनशील वक्त था जब कई बार संघ और भाजपा आमने-सामने आ खड़े हुए थे. अब सुदर्शन सरसंघचालक तो नहीं है लेकिन भाजपा को लेकर उनके अपने अनुभव क्या रहे हैं? संघ और भाजपा के बीच बढ़ी दूरियों के लिए कौन जिम्मेदार हैं, ऐसे ही कई सारे सवालों के साथ अवधेश आकोदिया ने उनसे बात की....धरा पर वसुंधरा
भारतीय राजनीति में ऐसे कम ही मौके आएं हैं जब नेता प्रतिपक्ष को लेकर घमासान मचा हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों ऐसे ही काम ज्यादा हो रहे हैं जो अतीत में कभी नहीं हुए हों। राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेता प्रतिपक्ष पर बने रहने के मुद्दे पर तीन-चार दिन खूब हंगाम हुआ। हालांकि अब इसका पटाक्षेप हो गया है और महारानी केंद्रीय नेतृत्व की मंशा के अनुरूप पद छोड़ने के लिए राजी हो गई हैं। वसुंधरा की ओर से नरमी के संकेत मिलने के बाद आलाकमान ने भी अपनत्व उडेलते हुए कहा है कि इस्तीफा देने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है और नेता प्रतिपक्ष चुने जाते समय भी उनकी भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा।...आतंक वाया ओपेन बॉर्डर
पाकिस्तान से लगी राजस्थान की एक हजार किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा आतंकवादियों के लिए स्वर्ग साबित हो रही हैं। सूबे की इस पश्चिमी सीमा के रास्ते धडल्ले से आतंकवादी, जाली नोट, मादक पदार्थ और अवैध हथियार आ रहे हैं, जिनका उपयोग देश में आतंक फैलाने के लिए किया जा रहा है। राजस्थान की सीमा के सहारे आ रहे खतरे का खुलासा करती रिपोर्ट!...बिके सब, कोई कम कोई एकदम
हरमोहन धवन जी ने अपनी आप बीती में मीडिया के कड़वे सच से एक बार फिर परदा उठाया है। मैं इसे थोड़ा और उपर खिसकाने की जुर्रत कर रहा हूं। मैं यहां अपने पत्रकार मित्रों के मुंह से सुनी बातें भी नहीं करुंगा। मैं आपको वहीं बता रहा हूं जो अपनी आंखों से देखा है। मेरा इरादा पत्रकारों की जमात, जिसमें मैं खुद भी शामिल हूं को कठघरे में खड़ा करने का नहीं है, पर इतना जरूर कहना चाहता हूं कि जो व्यापारी करोड़ों का निवेश करेगा वह तो केवल लाभ के बारे में ही सोचेगा, लेकिन पत्रकार द्वारा उसकी हां में हां मिलाना कहां तक जायज है? सवाल आपके सामने है जबाव भी आपको ही खोजना है......अहमदीनेजाद से निजात नहीं
ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद का दुबारा चुने जाने की घोषणा के बाद उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पराजित प्रत्याशी मीर हुसैन मुसावी ने चुनावों में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए परिणामों को खारिज कर दिया है। वे इस चुनाव को रद्द कर फिर से मतदान की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थक देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगह प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है और लोगों के मारे जाने की भी खबरें आ रही हैं। मामला बिगड़ता देख गार्डियन काउंसिल ने चुनाव परिणामों पर अस्थाई घोषित कर दिया है। इस रोक को अहमदीनेजाद की कमजोर होती पकड़ के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। वैसे देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अभी भी अहमदीनेजाद के पक्ष में हैं। गार्डियन काउंसिल के ज्यादातर मौलवी भी उनके पक्ष में हैं। ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम है कि परिणामों को निरस्त किया जाएगा और देश में फिर से चुनाव होंगे।...अब तालिबान के सफाये की बारी
श्रीलंका में लिट्टे के सफाए के बाद पाकिस्तान की स्वात घाटी से भी एक अच्छी खबर आई है। पाकिस्तानी सेना ने यहां के सबसे बड़े शहर मिंगोरा से तालिबान को हटाकर फिर से नियंत्रण कर लिया है। पिछले एक हफ्ते से मिंगोरा में सेना और तालिबानियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा था। गौरतलब है कि पाकिस्तान और तालिबान के मध्य हुआ शान्ति समझौता पिछले महीने की शुरुआत में टूटते ही पाकिस्तानी सेना ने यहां अभियान शुरू किया था। संघर्ष शुरू होने के बाद से सैकड़ों लोग मारे गए हैं और बीस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। मिंगोरा फतह करने से यह साबित होता है कि पाकिस्तानी सेना की स्थिति यहां लगातार मजबूत होती जा रही है।...Author info
