visfot news network
मोदी का गुजरात एनिमियाग्रस्त
उद्योगपतियों ने हिटलर का जमकर साथ दिया था। हिटलर प्रजातंत्र का दुश्मन था लेकिन इससे उद्योगपतियों को कोई मतलब नहीं था। शायद यही कारण है कि आशीष नंदी सहित कई गंभीर चिंतकों ने मोदी को फासिस्ट नेता के सभी लक्षणों से युक्त व्यक्ति बताया है। सन् 2002 के मुसलमानों के कत्लेआम और उसके बाद ईसाईयों पर सिलसिलेवार हमलों ने पहले ही गुजरात को धार्मिक तानाशाही के रास्ते पर धकेल दिया है। अपनी इन्ही उपलब्धियों के वशीभूत मोदी स्वयं को अत्यधिक कार्य-कुशल और अनुशासित व्यक्ति मानते हैं।
ठाकरेगीरी न करें राज !
ठाकरे परिवार से ही एक और नेता अस्तित्व में आया है जिन्होंने उत्तर भारतीयों को निशाना बनाकर परप्रांतवाद की विषैली राजनीति शुरू की है. यह ठाकरेगीरी देश भला क्यों बर्दाश्त करे? मुंबई ही क्यों देश के किसी भी शहर में कोई भी व्यक्ति रहने और काम करने के लिए स्वतंत्र है. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसी विषैली राजनीति को हवा देकर कांग्रेस एक और भिण्डरावाला पैदा करने की कोशिश कर रही है. क्या कांग्रेस यह भूल गयी कि भिण्डरावाला पैदा करने का कितना भयानक नुकसान उसे और देश को झेलना पड़ा था? ...आईएसआई का गढ़ बन रहा है असम
असम में जेहादियों के हौसले बुलंद हैं तथा कम से कम पांच जिलों में उनके नेटवर्क का विस्तार इतना ताकतवर चुका है कि स्थानीय जनजातीय लोगों को भागना पड़ रहा है। उत्तरी असम के तीन जिलों-दंरग, उदालगुडी और चिरांग में भड़की हिंसा के दौरान कम से कम पांच स्थानों पर पाकिस्तान के झंडे फहराए जाने की घटना से यह बात साबित हो जाती है कि जेहादी ताकतों ने बांग्लादेश से आकर बसे लोगों में अपनी पैठ बना ली है। परंतु असम सरकार पाकिस्तानी झंडे फहराने की बात से इनकार कर रही है।...साध्वी के बहाने सेकुलरिज्म की दुहाई
पुलिस के एक आला अधिकारी ने व्यक्तिगत चर्चा में इस बात का खुलासा किया कि डंडे के बल पर किसी को भी आरोपी बनाया जा सकता है। किसी से कुछ भी कबूल कराया जा सकता है। यह तब और भी आसान हो जाता है जब पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का उच्चस्तरीय राजनैतिक दुरूपयोग होने लगे। यह कौन दावा करेगा कि साध्वी प्रज्ञा को पुलिस ने प्रताड़ित नहीं किया? सिर्फ आरोपी से अपराधी और आतंकी जैसा सलूक नहीं किया?...जय हो, मंगल हो, कल्याण हो !
आप सबका शुभ हो. आपके बीच आकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है. वेदों का सार उपनिषद है और उपनिषदों का परिणाम वेदांत में कहा गया है. वेदांत में ही एक शब्द कहा गया है- ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या है. यह बात मेरी समझ में नहीं आयी. सत्य से मिथ्या की उत्पत्ति कैसे हो सकती है? इस एक बात ने मुझे प्रेरित किया कि मुझे सत्य की खोज करनी चाहिए. फिर मैंने परंपरा में ऋषियों-मुनियों द्वारा कहे गये इस बात की ओर ध्यान दिया कि समाधि में ही सब समाधान है. इसके बाद मैं अमरकंटक आ गया. वहां २५ साल साधना की. साधना के परिणामस्वरूप जो कुछ प्राप्त हुआ वह मैं आपके सामने लेकर प्रस्तुत हूं....परमाणु करार लागू अब आगे?
अमेरिका भारत को विशेष रूप से अपने लिए एक बड़े परमाणु बाजार में तब्दील करने में सफल हो चुका है। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया जा चुका है भारत ने अमेरिका को यह राजनीतिक भरोसा दिलाया है कि वह उसके लिए अपने आण्विक व्यवसाय का 50 प्रतिशत आरक्षित रखेगा। इस बात का संकेत एनएसजी से मिली राहत के तीन दिनों के भीतर ही आयी अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडलीजा राइस के उस बयान से भी मिलता है जिसमें उन्होंने मांग की थी कि भारत अमेरिकी हितों का ख्याल रखे और जब तक अमेरिकी कांग्रेस 123 करार को पारित नहीं करती तब तक अमेरिकी एनएसजी के अन्य सदस्यों के साथ द्विपक्षीय व्यापार नहीं शुरू करे।...सुशील प्रकरणः पुलिस बैकफुट पर
दो दिन से तमाम वेब और प्रिंट पत्रकारों के विरोध अभियान का असर अब दिखने लगा है. उत्तर प्रदेश पुलिस इस पूरे मामले में अब बैकफुट पर नजर आ रही है. उत्तर प्रदेश पुलिस के कुछ आला अफसर कह रहे हैं कि उन्होंने दिल्ली में डेरा डाले पुलिसकर्मियों को कह दिया है कि वे वापस आ जाएं. लेकिन यह कहा-सुनी सब मौखिक हो रही है. सुशील सिंह अभी भी अपने घर से दूर हैं....कांग्रेस का गुण्डा'राज'
आगजनी, तोड़फोड़, करोड़ों का नुकसान, उत्तरभारतीयों की सरेआम पिटाई फिर भी धारा १४४ के बीच कल्याण की अदालत राज ठाकरे को जमानत दे देती है. एक दूसरी कोर्ट पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है. उत्तर भारतीयों की तर्ज पर पान खानेवाले आरआर पाटिल फिर भी कह रहे हैं कि उनका कानून मंत्रालय अध्ययन में मशगूल है. मुख्यमंत्री बिलासराव कह रहे हैं कि वे विक्रोली कोर्ट की अग्रिम जमानत को खारिज करने के लिए सरकार की ओर से अर्जी देंगे. कब? पता नहीं...."जी" का सर्वे या जी का जंजाल
जी का छत्तीसगढ़ में किया गया चुनावी सर्वेक्षण पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए जी की जंजाल बनता जा रहा है. जी न्यूज समूह का यह सर्वे दोनों ही प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता के करीब मान रही है. चुनाव पूर्व इस सर्वेक्षण में जहां एक ओर यह संभावना दिखाई गयी है कि कांग्रेस की दोबारा सत्ता में वापसी हो सकती है वहीं दूसरी ओर भाजपा के लिए भी यह संभावना छोड़ दी गयी है कि अगर वे मेहनत करेंगे तो हो सकता है वे सत्ता से दूर ही न हों. क्या ऐसे सर्वे सिर्फ सर्वे ही होते हैं या बात कुछ और भी हो सकती है?...बिहार की तो तकदीर ही खराब है
उत्तर बिहार के एक रेलवे स्टेशन पर मैं उस रेलगाडी में सवार था। जब गाडी आगे बढी तो बीच में ही चेन पुलिंग हो गई। दूधवाले और सब्जी वाले अपने-अपना सामान लेकर चढ गए। फिर रेलगाडी चलने लगी। आगे बढने पर किसी ने वैक्यूम खोल दिया। हांफती हुई रेलगाडी फिर ठिठक गई। फिर सामानों को लादने का वही सिलसिला शुरु हुआ। मुझे चिंता हुई कि क्या समय पर मैं अपनी मंजिल तक पहुंच पाऊंगा ?...समितियों और रपटों की बाढ़
बिहार में बाढ़ पीछे छूट गयी है. एक बार फिर समितियों और रपटों के भरोसे बाढ़ से निपटने की कवायद शुरू हो चुकी है. इस तरह की कवायद पहली बार नहीं हो रही है. यह रिपोर्ट बताती है कि जब से हम लोकतंत्र हुए हैं बिहार में बाढ़ से ज्यादा समितियों और रपटों की बाढ़ आयी है. जब समाज को अपने तरीकों से बाढ़ से निपटने से मना कर दिया गया तो सरकार ने हमेशा बाढ़ से ज्यादा समितियों और रपटों पर ध्यान दिया, लेकिन नतीजा कभी कुछ नहीं निकला. ...सूचना श्रृंगार के तीन साल
शासकीय गोपनीयता कानून तथा सूचना के अधिकार कानून के अंतर्संबंधों की अस्पष्टता के कारण भी इस कानून के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है। ये दोनों कानून परस्पर विरोधी हैं। शासकीय गोपनीयता कानून मूलत: सामंती शासन व्यवस्था के हितों को पूरा करने के लिए बनाया गया था, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए।...महानायक याद रहा, भूल गये लोकनायक
देश भूल गया कि 11 अक्टूबर को जेपी का भी जन्मदिन था. देश को याद रहा तो बस ये कि सदी के महानायक बिग बी 11 अक्टूबर को पैदा हुए थे. जहां कहीं जेपी का जन्मदिन मनाया गया मीडिया वहां नहीं पहुंच पाया. पहुंचता भी तो क्या हासिल होता? ...अमेरिकी संकट की आउटसोर्सिंग
अमरीकी वित्तीय संस्थाओं के संकट की जड़ें काफी गहरी हैं। अमरीका का वास्तविक संकट वहां की निरंतर घटती वास्तविक आय, निरंतर आमदनी से ज्यादा खर्च करने की अमरीकी लोगों की आदत, सेवाओं की आउट सोर्सिंग के चलते वहां बढ़ती बेरोजगारी, अमरीका के लगातार बन्द होते उद्योग और अंत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग, अंतरिक्ष विज्ञान, आणविक विज्ञान के क्षेत्र में भारत और चीन से लगातार मिलने वाली चुनौतियों के चलते अमरीका का इस क्षेत्र में नेतृत्व का क्षरण है।...यह भारतमाता कौन है?
अंग्रेजों से लड़ते समय सारे भारत ने `भारत माता की जय´ का नारा लगाया था। ऐसी ही नारेबाजी के बीच पं. नेहरू ने एक सभा में भीड़ से पूछा ``यह भारत माता कौन है?´´ एक व्यक्ति ने कहा कि यह धरती। पंडित जी ने पूछा ``कौन सी धरती? किसी खास गांव की? जिले की? या पूरे भारत की?´´ फिर पं. नेहरू ने स्वयं उत्तर दिया, ``भारत वह सब कुछ है जो वे सोचते हैं लेकिन इससे भी कुछ ज्यादा है- पर्वत, नदियां, वन, विशाल खेत, मैदान और आप सब, हम सब। आप भारत माता के अंग हैं। आप स्वयं भारत माता है।´´ ...हमें बेकार कर देगा यह करारः सिन्हा
परमाणु करार पूरा हो गया. यूपीए सरकार जहां परमाणु करार को `ऐतिहासिक विजय´ बता रही है, वहीं भाजपा डील को अब भी `ऐतिहासिक शर्म´ साबित करने पर तुली हुई है। भाजपा कोर टीम के सदस्य और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा से अजय कुमार श्रीवास्तव ने डील के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...गंगा बचाने की राजनीति
गंगा की राजनीति फिर गर्म है । गंगा को बचाने और शुद्ध रखने की राजनीति ने कई सवाल खडे कर दिए हैं। गंगीय राजनीति के इस श्वर में उत्तरप्रदेश की मुख्यमन्त्री मायावती, भाजपा नेता डॉ मुरली मनोहर जोशी, योग गुरु बाबा रामदेव और विहिप सुप्रीमो अशोक सिंघल पर सवाल उठाये जा रहे हैं। सवाल आस्था और नीयत पर है, इसलिए गंगा के प्रश्नों का फिलहाल कोई समाधान होता नहीं दिख रहा है।...महात्मा गांधी का आखिरी जन्मदिन
अक्तूबर 1947 की दो तारीख गांधीजी का जन्म दिवस उनके जीवनकाल में मनाया जाने वाला अंतिम जन्मदिवस था। सुबह भोर होते ही उनके दल के लोग उन्हें अभिवादन करने आ गए। उनमें से एक ने कहा, बापूजी हम अपने जन्मदिन पर अन्य लोगों के चरण छूकर आशार्वाद ग्रहण करते हैं. लेकिन आपके मामले में बात इसके बिलकुल विपरीत होती है। क्या यह उचित है?...Author info
visfot news network
विस्फोट.कॉम इंटरनेट पर नये दौर की पत्रकारिता में परंपरागत मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है, जो कि पूरी तरह से जनकेन्द्रित, वास्तविक और निहित स्वार्थी तत्वों के प्रभाव से मुक्त है. हमारा संपर्क है visfot@visfot.com
