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हमास पर फिर हुआ हमला
छह महीने के युद्ध विराम के बाद मध्य- पूर्व एक बार फ़िर से अशांत हो गया है। इज़रायल ने फ़लीस्तीनी शहर गाज़ापट्टी में मिसाइल हमले किए, जिसमें दो सौ से ज्यादा लोग मारे गए और हज़ारों की तादाद में लोग घायल हुए हैं। इन हमलों के पीछे इज़रायल का दावा है कि – उसने ये हमले गाज़ा में हमास के आतंकी शिविरों पर किए हैं,जो कुछ रोज़ पहले इज़रायल पर रॉकेट हमलों का ज़बाब है। इसके साथ इज़रायल ने ये भी धमकी दी है कि वो हमास के ख़िलाफ़ फ़लीस्तीन में ज़मीनी लड़ाई से भी गुरेज़ नहीं करेगा।
'मेरा बयान अखबार में जरूर छापना कि पाकिस्तान हमला करेगा तो हम झेल लेंगे'
पंजाब का गांव दिलावर भैणी तीन तरफ से पाकिस्तान से घिरा हुआ है. लेकिन यह गांव कल तक जैसे बेखौफ था आज भी बेखौफ है. युद्ध की आहट देहरी पर है. भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की राजधानियों में भले ही युद्ध की आशंका से भले ही पारा गरम हो लेकिन यहां इस गांव में सबकुछ सामान्य है. यह कोई कूटनीतिक रणनीति नहीं है. बल्कि यहां के गांववालों की यह दिलेरी और जिंदादिली है जो जंग की आशंकाओं के बीच भी उनको बैखौफ जीने को प्रेरित कर रहा है. सीमा से लौटकर अर्जुन शर्मा की रिपोर्ट- ...सब हारे चावल जीत गया
छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनावों ने एक बार फिर भाजपा को मुस्कराने का मौका दे दिया है। राज्य की 90 विधानसभा सीटों में 50 पर जीत दर्ज कराकर भाजपा ने एक बार फिर 2003 का इतिहास दुहरा दिया है। 2003 के विधानसभा चुनावों में भी भाजपा को इतनी ही सीटें मिली थीं। ऐसे में जब सत्ताविरोधी रूझानों से देश भर में सरकारें धराशाही हो रहीं हैं औऱ उनके मत प्रतिशत में कमी आ रही है, भाजपा का सीटें कायम रखना और अपने वोट बढ़ाना साधारण बात नहीं है।...राजा जनक की दरिद्र मिथिला
ऐसी पौराणिक मान्यता है कि एक बार इंद्रदेव राजा जनक के मिथिला राज्य की संपन्नता देखने आये थे. एक सेवक के घर की संपन्नता देखकर उन्होंने उसे ही राजमहल समझ लिया था. यह मिथिला की संपन्नता का ऐसा उदाहरण था जिसके किस्से आज भी कहे जाते हैं. लेकिन आज का मिथिला बिहार राज्य का एक हिस्सा है. आज के मिथिला की सच्ची तस्वीर देखनी हो तो अलग मिथिला राज्य के लिए आंदोलन चलानेवाले धनाकर ठाकुर के शब्दों में देख लीजिए. ...उर्दू के अखबार, आडवाणी का प्रचार
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मुसलमानों के बीच अपनी बेहतर छवि चाहते हैं. जिन्ना को सेकुलर बताकर जो अभियान उन्होंने शुरू किया था वह अभियान अभी भी जारी है. ऐसा समझा जाता है कि इस अभियान के सूत्रधार उनके करीबी और आडवाणी कैम्पेन के संयोजक सुधीन्द्र कुलकर्णी हैं. कुलकर्णी लगातार कोशिश कर रहे हैं कि अर्दू अखबारों में आडवाणी के प्रति अच्छी छवि बने. इस कड़ी में पहला अखबार जो उनके लिए लगभग काम करने लगा है वह है राष्ट्रीय सहारा का उर्दू अखबार. ...हां, वह परमाणु युद्ध होगा- सुदर्शन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के.एस.सुदर्शन ने दिल्ली में मंगलवार को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि आज की तारीख में अगर सारे उपाय और अन्य विकल्पों के आज़माने के बाद भी पाकिस्तान न सुधरे तो फिर आर-पार की लड़ाई जरूरी है। हो सकता है कि यह लड़ाई आणविक-युध्द में परिवर्तित हो जाए और बहुत सारे लोगों को अपनी जानें भी गवानी पड़े, मगर इस विनाश के बाद जो संसार बचेगा वो बहुत ही सुंदर होगा। वहाँ पर कुछ भी बुरा नहीं रहेगा और आतंकवाद भी गायब हो जाएगा।...भारत परस्त राजनीति की शुरूआत करने जा रहा हूं
दोबारा राजनीति में सक्रिय होने की खबर आयी तो प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक ही था. लेकिन मैं आप लोगों से कह देना चाहता हूं कि मैं सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति नहीं कर रहा हूं. मैं अपने कार्यों को विस्तार देने के लिए राजनीति पर ध्यान दे रहा हूं. मैं भारत परस्त राजनीति की शुरूआत कर रहा हूं. इस काम में मेरी सेवाएं केवल भारतीय जनशक्ति के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी दलों के लिए उपलब्ध है जो वोट से नोट और नोट से वोट की राजनीति में विश्वास नहीं करते. ...लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba)
मुंबई पर आतंकी हमले के बाद जमात-उद-दावा (Jama'at ud Dawa) और लश्कर-ए-तैयबा(Lashkar-e-Taiba) का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. जमात पर प्रतिबंध का क्या कोई औचित्य है? लश्कर-ए-तोएबा पर भारत ने पिछले आठ साल से प्रतिबंध लगा रखा है. संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटेन और खुद पाकिस्तान द्वारा पिछले पांच सालों से लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगा हुआ है? नतीजा क्या है? प्रतिबंध के बाद लश्कर ने ज्यादा व्याहरिक होते जमात-उद-दवा के नाम से काम शुरू कर दिया. अब वह एक ऐसा जेहादी समूह बन गया है जिसका एक सामाजिक आधार है और जो आतंक के स्कूल ही नहीं चलाता अस्पतालों का भी संचालन करता है. ...प्रिय मुंबईकरों,मैंने अपना योगदान दे दिया है
इस बात के पर्याप्त सुबूत है कि मोबाइल कंपनियों ने ऐसे सायबर आतंकी नियुक्त किए हैं, जो डॉ. मनमोहन सिंह की माननीय सरकार को बुरे लतीफों से अस्थिर करना चाहते हैं, अन्यथा उन लतीफों का उत्पादन कौन कर रहा है, जो मौका मिलते ही एसएमएस पर प्रसारित होने लगते है? यह पेशेवरों का काम है। शौकिया लोगों के बस की बात नहीं है। यदि ख्यात अमेरिकी कॉमेडियन जे लेनो पेशेवर लतीफेबाजी की सेवा ले सकते है तो मोबाइल फोन कंपनियां ऐसा क्यों नहीं कर सकतीं? ...आतंकवादियों से ज्यादा खतरनाक है मीडिया
मीडिया में ऐसी खबरें आ रही हैं कि मैं मुंबई में हुए भयानक आतंकवादी हमले पर कोई फिल्म बनाना चाहता हूं जिसमें मैं रितेश देशमुख को हीरो रखूंगा इसीलिए मैं उनके पिता श्री विलासराव देशमुख के साथ घटनास्थल पर गया था. यह निश्चित रूप से मेरे लिए बहुत चिंता की बात है. ये बातें पूरी तरह से निराधार हैं....मुंबई का जीवित आतंकवादीः आमिर कसाब
गिरगांव चौपाटी पर पकड़े गये आमिर आजम कासव उर्फ मोहम्मद अजमल उर्फ मोहम्मद आमिर कसाब की उम्र-21 साल है. अकेला जीवित आतंकवादी जो मुंबई हमलों में पाकिस्तान के हाथ का सबसे जीता-जागता सबूत बन गया है. मुंबई पुलिस की जाबांजी और बहादुरी के परिणामस्वरूप पकड़ में आया कसाब अब वह सब बता रहा है जिसे जरदारी साहब चाहकर भी नहीं नकार सकते. थोड़ा कसाब के बारे में विस्तार से जान लेते हैं. ...युद्ध या गृहयुद्धः बोलिए किस ओर ले जाएंगे?
देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति सामान्य नहीं है । दुनिया भर में आई आर्थिक मंदी का असर भारत पर हो रहा है । देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक वातावरण तनावपूर्ण हो चुका है । जातीय, सांप्रदायिक और आर्थिक विषमताएं तनाव के मुख्य कारण के तौर पर उभरे हैं । देश की वर्तमान राजनैतिक स्थिति भी नाजुक दौर में है । केन्द्र में बड़े दल कमजोर और संकुचित होते जा रहे हैं । कांग्रेस और भाजपा, दोनों की अन्य दलों पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है । आने वाले लोकसभा चुनाव में इस स्थिति में और भी अधिक बढ़ोतरी की संभावना है । अंदेशा है कि आसन्न लोकसभा में कांग्रेस और भाजपा दोनों मिलकर 250 सीटों तक सिमट जायेंगे ।...पाक मीडिया का पलटवारः हिन्दुओं ने कराया मुंबई पर हमला
27 नवंबर की सुबह अखबारों में एक फोटो छपी थी जो अजमल आमिर कसाव की थी. कसाब जिस हाथ में एक-47 लेकर आगे बढ़ रहा था उस हाथ में रक्षा सूत्र बंधा हुआ था. वही रक्षासूत्र जो आमतौर हिन्दू तीर्थों में भक्तों के हाथ में बांध दिया जाता है. हो सकता है उस दिन यह बात किसी ने नोटिस नहीं की लेकिन पाकिस्तान मीडिया ने पलटवार करने के लिए उसी तर्क को सामने रख दिया है. ...Author info
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