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व्यापारी बाबा रामदेव अब बेचेंगे क्रीम पाउडर
बाबा रामदेव अब सीएमडी ( चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर) रामदेव हो गये हैं. योग बेचने के अपने कारोबार को बढ़ाते हुए उन्होंने फल, सब्जियां, फलों के जूस, बिस्कुट, क्रीम, पाउडर और बालों का सुगंधित तेल भी बेचेंगे. रामदेव अब योगाचार्य के साथ-साथ सब्जियों, फलों और कास्मेटिक बनानेवाली कंपनी के सीएमडी बन गये हैं.
मैं भारत के युवाओं पर भरोसा करता हूं- राहुल गांधी
मैं पांच साल से राजनीति में हूं. इन पांच वर्षों में मैंने देशभर में दौरा किया है. जबसे मुझे कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों का प्रभारी बनाया गया है तबसे मैं इनके बारे में सीखने की पूरी कोशिश की है. मेरी उम्र इतनी नहीं है कि मैं यहां बैठे अपने बुजुर्गों को सलाह दे पाऊं. पर इन वर्षों में जो कुछ मैंने देखा और सीखा है वह मैं अापके सामने रखना चाहता हूं....सूचना प्रौद्योगिकी का असली संकट
जिस सूचना प्रौद्योगिकी के बल पर हमारी सरकारें भारत को 21 वीं सदी में दुनिया का सिरामौर बनाने का दावा कर रही हैं, वहीं के छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। बीती तीन जनवरी को देश के कुल सात सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में अव्वल माने जाने वाले कानपुर आईआईटी के छात्र जी. सुमन की हास्टल के कमरे में फांसी लगाकर की गयी आत्महत्या इसका ताजा उदाहरण है। आंध्र प्रदेश के नेल्लूर जिले के रहने वाले सुमन एमटेक द्वितीय वर्ष में इलेक्टिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे। ...किसे करें वकील किससे मुंसिफी चाहें
लगभग उन्नीस महीने से डॉ. विनायक सेन रायपुर, छत्तीसगढ़, केंद्रीय कारागार की काल कोठरी में सांस ले रहे हैं। 14 मई 2007 से डॉ. विनायक सेन को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है। डॉ. सेन मानवाधिकार संगठन लोक स्वातंत्र्य संगठन यानी पीयूसीएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ राज्य संगठन के महासचिव हैं। लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित इस संगठन से वे लंबे समय से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।...कौन से राम कहां का मंदिर?
लालकृष्ण आडवाणी तथा अन्य भाजपा नेताओं को बार-बार यह सफाई क्यों देनी पड़ती हे कि हमने राम मंदिर के मुद्दे को छोड़ा नहीं है? उन्होंने अगर इस मुद्दे को छोड़ा नहीं होता, तो यह बात छिपानेवाली नहीं थी। आम जनता को भले ही न दिखे, पर पत्रकारों को तो दिख जाता। हमारे पत्रकार इतने सूक्ष्मदर्शक हो गए हैं कि जहां कोई चीज नहीं होती है, वहां भी वे उसे देख लेते हैं। इसलिए राम मंदिर का मुद्दा अगर किसी भी स्तर पर और किसी भी रूप में जीवित है, तो यह उनकी नजर से छिपा नहीं रह सकता था।...'रावण नहीं यह राम की सेना है'
श्रीराम सेना के महासचिव विनय सिंह ने साफ कहा है कि "हमारा संगठन श्रीराम के आदर्शों पर गठित सेना है जो बाजार प्रायोजित सड़ांध को साफ करने के लिए काम कर रही है. यह रावण सेना नहीं है.." विस्फोट.कॉम से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि राम सेना किसी भी प्रकार की हिंसा में यकीन नहीं करता. उन्होंने यह भी कहा कि नारी स्वतंत्रता के नाम पर जो लोग गुलाबी चड्ढी अभियान चला रहे हैं, उन्हें हम मर्यादा का प्रतीक गुलाबी साड़ी भेंट करेंगे. ...हिन्दू ही हिन्दुत्व का संकट
कितना भी विरोधाभासी प्रतीत हो किन्तु हिन्दू ही हिन्दुत्व का संकट है। यही कारण है कि बड़े से बड़ा हिन्दुत्ववादी भी हिन्दू को परिभाषित करने से कतराता है। भाषा विज्ञान की दृष्टि से हिन्दू अभारतीय-विदेशीराज-फारसी शब्द है। इसी कारण भारतीय धर्म ग्रन्थों और पुराने संस्कृत कोशो में दूर-दूर तक इसका कहीं अता-पता नहीं है। पुराने फारसी कोशों में हिन्दू शब्द का अर्थ काला, चोर आदि मिलते हैं।...दूध के धुले नहीं हैं न्यायमूर्ति
यह इसी देश के लोकतंत्र में यह संभव है। इसकी जड़ में हमारा घिसा-पिटा सामंतवादी संविधान है। इस संविधान ने देश के कुछ विशेष वर्ग को अपार विशेष अधिकार दे रखे हैं। माना यह गया था कि देश के लोकतंत्र को विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका बनाए रखेंगी। सबसे पहले जनता को ऐसा लगा कि विधायिका और कार्यपालिका ने मिलकर जनता का मन तोड़ा। विधायिका, यानि विधानसभा और लोकसभा प्रमाणित और अप्रमाणित भ्रष्ट और अपराधियों या आपराधिक छवि के लोगों का आखड़ा बन गईं।...कश्मीर में कमजोर हुए हैं अलगाववादी तत्व
जम्मू-कश्मीर चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस की जीत, पीडीपी की हार और अमरनाथ श्राइन बोर्ड की जमीन आदि को लेकर जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल रहे जनरल एस.के. सिन्हा से संजीव कुमार की लंबी बातचीत के प्रमुख अंश-...चित्त हुए चीते
तमिल विद्रोहियों का सफाया अब गिने-चुने दिन की बात रह गयी है. एक एक कर तमिल चीतों के सारे किले लगभग ध्वस्त हो चुके हैं. हारकर लिट्टे ने स्थाई युद्ध विराम की अपील की है. श्रीलंका ने इस अपील को ठुकरा दिया है. श्रीलंका का कहना है कि इस वक्त ऐसा करने से आतंकवाद को देश से उखाड़ने के प्रयासों को धक्का लगेगा. श्रीलंका सेना के इस व्यापक अभियान की समीक्षा कर रहे हैं प्रख्यात प्रतिरक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी-...रिवायतों को खत्म करने की साज़िश
पहले मज़हब शिया और सुन्नी तबकों में बंटा था, लेकिन अब मज़हब बंटना शुरू हो गया है, क़ाज़ी साहब की नीयत से। जो रिवायतें पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के वक्त से चली आ रही हैं, अब उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करने की ही नहीं, बल्कि उन्हें ख़त्म करने की कोशिशें की जा रही हैं। इसकी ताज़ा मिसाल है मध्य प्रदेश के नीमच इलाके के चेहलुम पर होने वाले चालीसवें के खाने (मृत्युभोज) को बंद करने का ऐलान। हैरत की बात तो यह है कि यह सब बच्चों को तालीम दिलाने के नाम पर किया जा रहा है। माना बच्चों को शिक्षित करना आज बेहद ज़रूरी है, लेकिन क्या रिवायतों को ख़त्म किए बिना बच्चों को तालीम नहीं दिलाई जा सकती है?...राजस्थान में उच्च शिक्षाः दर बढ़ी स्तर गिरा
शिक्षा के मामले में राजस्थान बीमारू राज्य राज्य था क्योंकि जब देश में आजादी आयी थी तो राज्य में साक्षरता दर 9 प्रतिशत थी. आज राज्य में साक्षरता दर 70 फीसदी हो जाना सुखद अनुभव भले ही देता हो, लेकिन वास्तविक हकीकत कुछ और ही है. शिक्षा में उच्च शिक्षा में प्रगति के नाम पर राजस्थान में शिक्षा एक उद्योग के रूप में विकसित हो गया है जिसमें निशाने पर शिक्षा है. राजस्थान में शिक्षा की दर भले ही बढ़ी हो लेकिन शिक्षा का स्तर बहुत गिर गया है. राजीव शर्मा की रिपोर्ट- ...वरूणा की करूणा
विश्व की सांस्कृतिक राजधानी प्राच्य नगरी वाराणसी को पहचान देने वाली वरूणा नदी तेजी से समाप्त हो रही है। कभी वाराणसी व आसपास के जनपदों की जीवनरेखा व आस्था की केन्द्र रही वरूणा आज स्वयं मृत्युगामिनी होकर अस्तित्वहीन हो गयी है।...Author info
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