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हिन्दुस्तान के संपादक होंगे शशि शेखर, मृणाल पाण्डेय ने दिया इस्तीफा
देश के एक बड़े अखबार अमर उजाला के प्रसिडेंट न्यूज शशि शेखर हिंदुस्तान ज्वाइन करने जा रहे है। उधर शशि शेखर की नियुक्ति किए जाने के विरोध में हिंदुस्तान की ग्रुप एडीटर मृणाल पांडेय ने इस्तीफा दे दिया है। शशि शेखर काफी अरसे से नए जुगाड़ की तलाश में थे। अमर उजाला के मालिक अशोक अग्रवाल ने उन्हें हटाने की इच्छा तीन महीनें पहले जता दी थी और इसके बाद ही शशि शेखर ने अपने नए ठौर तलाशना शुरू कर दिया था।
आतंकवाद जिन्ना की विरासत है
पाकिस्तान बनने के बाद वहां एक आम मान्यता रही थी कि भारत एक कमजोर देश होगा क्योंकि हैदराबाद में निजाम का राज है और द्रविड़ लोग अपना अलग द्रविड़िस्तान बना लेंगे। अलगाववाद को प्रोत्साहन देते हुए मुहम्मद अली जिन्ना सवर्ण हिंदुओं के प्रति तिरस्कारपूर्वक बोलते थे। इस तरह जिन्ना का लक्ष्य, भारत के प्रति, हाफिज मोहम्मद सईद के इरादों से कुछ अलग नहीं था।...क्या है सहारा समय का संकट?
मंदी के इस दौर में देश के मीडिया संस्थान संकट काल से गुजर रहे हैं यह कोई नयी बात नहीं है. एक के बाद एक मीडिया घराने चौराहे पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. सहारा समूह का मीडिया डिवीजन भी इन संकटों से अलग नहीं है. इन दिनों सहारा समय अपने कर्मचारियों को निकालने के मसले पर जिस तरह से चर्चा में आ गया है वह सहारा में व्याप्त संकट की ओर इशारा करता है....एमिटी मालिकों के बारे में सरकार नहीं दे रही है जानकारी
भारत का सबसे अधिक चर्चित निजी शिक्षण संस्थान के मालिकों के खिलाफ जर्मनी में करोड़ों डालर की धोखाधड़ी का आरोप है जिसके लिए जर्मनी सरकार ने इंटरपोल के जरिए रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय यह जानकारी मुहैया कराने में आनाकानी कर रहा है. ...पार्टी के सदस्य नहीं फिर भी इस्तीफा दे दिया
बीते आमचुनाव में लालकृष्ण आडवाणी की प्रचार टीम के संचालक रहे सुधीन्द्र कुलकर्णी ने भी भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. लेकिन उनके इस्तीफे के ऐलान से भाजपा ही दिक्कत में फंसी नजर आ रही है. कारण? वे तो भाजपा के सदस्य ही नहीं है फिर इस्तीफा कहां से दे रहे हैं?...हमला हुआ जसवंत पर चित्त हो गयीं वसुंधरा
भाजपा से जसवंत सिंह के निष्कासन के बाद जहां एक ओर जसवंत सिंह आक्रामक हो गये हैं और भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साध रहे हैं वहीं दूसरी ओर उसी राज्य से बगावत पर उतारू वसुंधरा राजे आज दोपहर बाद दिल्ली पहुंच गयी और देर शाम पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात कर समर्पण का संदेश दे दिया....मुकेश के खिलाफ अनिल का विज्ञापन अभियान
कृष्णा गोदावरी बेसिन गैस विवाद में अनिल अंबानी हार मानने को तैयार नहीं हैं इसलिए उन्होंने मुकेश अंबानी के खिलाफ विज्ञापन अभियान शुरू कर रखा है. 17 अगस्त से दिल्ली के विभिन्न अखबारों में अनिल अंबानी की कंपनी एडीएजी की ओर से विज्ञापन अभियान चलाकर सरकार को होनेवाले संभावित नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं. अनिल अंबानी के इस विज्ञापन अभियान का अब असर होने लगा है और केन्द्र सरकार ने इस मामले पर बोलते हुए सफाई दी है कि उसे कोई नुकसान नहीं होनावाला है. ...अथ श्री मोहनराव भागवत पुराण
मार्च 2009 में जब मोहनराव मधुकर राव भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक बने तब तक वे देश के लिए एक अपरिचित नाम ही थे. लेकिन आज पांच महीने के भीतर ही पूरा देश जानता है कि आरएसएस का कोई अध्यक्ष मोहनराव भागवत है जो आडवाणी को भाजपा से बाहर निकालना चाहता है. पिछले कुछ दिनों से देश के मीडिया की सुर्खियों में शीर्ष पर बैठे मोहनराव मधुकरराव भागवत ने अपने जीवन में कई मिथकों को तोड़ा है, वह भी संघ में काम करते हुए. ...जिन्ना के गांव में जसवंत का विरोध
बंटवारे के लिए जिन्ना से ज्यादा जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार बतानेवाले जसवंत सिंह का जिन्ना के गांव में ही विरोध हो रहा है. हालांकि यह विरोध जिन्ना की तारीफ पर नहीं बल्कि सरदार पटेल की भूमिका पर उठाये गये सवाल को लेकर हो रहा है. ...जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू
जिन्ना को जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार अप्रैल 1916 में देखा था जब मोतीलाल नेहरू के निमंत्रण पर वे आनंद भवन में रूके हुए थे. इसी साल दिसंबर में उन्होंने लखनऊ अधिवेशन में पहली बार गांधी जी को भी देखा था. इस अधिवेशन न तो गांधी जी की कोई खास हैसियत थी और न ही जवाहरलाल की. दोनों ही इस अधिवेशन में मौन पर्यवेक्षक की तरह मौजूद थे लेिकन जिन्ना इस अधिवेशन के केन्द्रबिन्दु थे. लखनऊ समझौते के शिल्पी के रूप में जिन्ना का योगदान इतिहास के पृष्ठों पर आदर के साथ दर्ज है. ...नेता, पत्रकार सब गिर गये हैं-आडवाणी
चंडीगढ़ में एक किताब का लोकार्पण करने पहुंचे भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने नेताओं और पत्रकारों पर बहुत सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इन लोगों में बहुत तेजी से गिरावट आ रही है. ...दर्शनपुरवा के राजीव भाई
हर पत्रकार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती है. और फिर राजीव शुक्ला तो राजनीतिक संपादक ही थे इसलिए उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा न हो ऐसा कैसे हो सकता है? उनकी पत्रकारिता और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के दरम्यान बड़ा आदमी बनने की उनकी अदम्य चाहत ने आज शाहरुख खान के एक फोन ने मीडिया के बीच चर्चा का विषय बना दिया है. ऐसे राजीव भाई उर्फ राजीव शुक्ला दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में काम के पत्रकार और पत्रकारों के बीच ऊंची पहुंच वाले आदमी समझे जाते हैं. ...सरकार का मिड डे मील नहीं, समाज का अक्षय पात्र
केन्द्र द्वारा संचालित स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के बारे में चारों ओर से आ रही निराश करने वाली खबरों के बीच एक आशा जगाने वाली खबर यह है कि मध्यप्रदेश के एक जिले में इस योजना को सफल बनाने के लिए नागरिक सहयोग से ``अक्षय-पात्र´´ नामक अभियान शुरू किया गया है। ``अक्षय-पात्र´´ अर्थात एक ऐसा बर्तन जिसमें से चाहे जितना निकालो वह खाली नहीं होता। ऐसा बर्तन किसी सरकार के पास नहीं, समाज के पास होता है। सरकार के पास जो है वह उसका अपना नहीं, समाज का दिया हुआ है। मध्यप्रदेश के सुदूर आदिवासी अंचल के एक छोटे से जिले उमरिया में सरकार और समाज के इस रिश्ते को पहचानने, सशक्त बनाने और उसका रचनात्मक उपयोग करने की जो कोशिश की जा रही है, उसे नाम दिया गया है - `` अक्षय-पात्र´´।...सिंहासन खाली करें आडवाणी और राजनाथ
पीएम इन वेटिंग की तमन्ना बरकरार रखनेवाले आडवाणी के लिए आरएसएस का ताजा रुख बड़ा झटका साबित हो रहा है. शिमला में 19 तारीख को प्रस्तावित चिंतन बैठक के पहले संघ प्रमुख मोहनराव भागवत दिल्ली आये तो उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को मिलने का संदेश भिजवाया. संदेश पाकर आडवाणी गये तो साफ कह दिया गया कि सिंहासन खाली करने की तैयारी करिए....बिगड़ रहा है देश का पर्यावरण
आठ साल बाद भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट आफ द इन्वायरमेन्ट रिपोर्ट-2009 में कहा गया है कि देश का पर्यावरण बुरी तरह से बिगड़ रहा है. हवा, पानी और जमीन तीनों ही खतरनाक रूप से प्रदूषित हो रहे हैं. ...शिक्षा की दुकानों में टाट के पैबंद पाटने की पहल
शिक्षा को मौलिक अधिकार में शामिल करना वह भी कानून के रूप में, निश्चित तौर पर एक बड़ा कदम है। इसके लिए यूपीए सरकार बधाई की पात्र है। अब इसे अक्षरश: लागू करवाना भी केंद्र और राज्य सरकारों की जवाबदारी ही है। देश के नागरिकों को चाहिए कि इस महात्वाकांक्षी कानून का पालन सुनिश्चित करने में स्कूल, बच्चों और स्कूलों के बीच समन्वय का वातावरण निर्मित करें।...जनता की कमाई पर दो भाईयों की लड़ाई
कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस को लेकर दोनों अंबानी भाइयों मुकेश अंबानी की रिलायंस इंड्रस्ट्रीज (आरआईएल) और अनिल अंबानी की रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस (आरएनआरएल) के बीच छिड़ा कारपोरेट युद्ध दिन पर दिन गहराता और तीखा होता जा रहा है। इस विवाद का दायरा फैलता हुआ संसद से सड़क तक पहुंच चुका है। ...पाकिस्तान से संबंध सुधारने की आठ मिथ्या अवधारणाएं
पाकिस्तान हमेशा से भारत के दोस्ती के हाथ को झटकता आया है, फिर भी प्रत्येक विचारशील भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता का आकांक्षी रहा है, लेकिन आत्मसम्मान के साथ। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भले ही एकतरफा तरीके से यह महसूस करते हों कि भारत को हमेशा पाकिस्तान के साथ शांति के मामले में आधे से ज्यादा रास्ता पार करना चाहिए, लेकिन भारत के लिए सही रास्ता यह है कि पाकिस्तान के साथ सहयोग की बात हो या मुकाबले की, हमें हमेशा आधे से अधिक सफर तय करना चाहिए।...गरीब की भलाई के नाम पर अधिकारियों की कमाई
एक गलती को छुपाने के लिए इंसान बार बार गलती दर गलती करता चला जाता है। ऐसी ही एक बानगी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में आपूर्ति विभाग और विकास विभाग में देखने को मिल रही है। पहले तो इन दोनों विभागों ने आपसी मिलीभगत से जिले में तकरीबन तीन चौथाई बीपीएल/अन्तयोदय राशन कार्ड फर्जी/अपात्र बना दिये और बाद में इन गलतियों को छुपाने के लिए इनका रिकार्ड (जांच पत्र) भी गायब कर दिया।...झूठ पकड़नेवाली मशीन के इस सच का सामना कौन करेगा?
प्राचीन समय से विभिन्न संस्कृतियों में एक बात पर सहमति दिखती रही है और जिसका इस्तेमाल वह अपने तरीके से अपराधी को पकड़ने में करते रहे हैं। जैसे यह धारणा लंबे समय से सहजबोध की शक्ल धारण की है कि झूठ बोलने के साइड इफेक्ट होते हैं। मिसाल के तौर पर, पश्चिम अफ्रीका में अपराध के इल्जाम में पकड़े गए व्यक्तियों को एक विचित्र परीक्षण से गुजरना पड़ता था। उन्हें चिड़िया का अंडा एक से दूसरे तक देना होता था। अगर व्यक्ति विशेष के हाथों अंडा फूट गया तो माना जाता था कि वही व्यक्ति अपराधी है, क्योंकि वह नर्वस है।...क्यों जरूरी है बलूचिस्तान पर बात?
पिछले पखवाड़े भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भारतीय राजनीति और मीडिया के निशाने पर थे. शर्म अल शेख में उन्होंने पाकिस्तान के सामने ऐसा कौन सा समपर्पण कर दिया था कि पूरी भारतीय मीडिया और राजनीतिज्ञों ने निशाने पर ले लिया? शर्म अल शेख में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा जिस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर हुआ उसमें ऐसा क्या उल्लेख आ गया था कि भारतीय प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया? बहुत सारे भारतीय संयुक्त बयान में बलूचिस्तान के उल्लेख से नाराज हैं. वे समझते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री ने बलूचिस्तान का जिक्र करके मान लिया है कि वहां भारतीय एजंसियां गड़बड़ी फैलाने में सक्रिय हैं. ...Author info
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