इरफ़ान अली
भारत में लोकतंत्र उदय
भारत के चुनाव परिणामों से अमेरिका मे रह रहे भारतीय खुश है. सिर्फ़ इसलिए नही की मनमोहन सिह साहब दोबारा प्रधानमंत्री बने है बल्कि इसलिए भी की अब भारत में लोकतंत्र के उदय का अहसास होने लगा है. यही कारण है के भारतीय समाज ने तमाम उन पार्टियो को नकार दिया जो गंदी राजनीति के लिए हिन्दुस्तान मे नफ़रत के बीज बोने से बाज नही आते थे. इन चुनाव ने शायद उन सभी पार्टियो को सोचने पर फिर से मजबूर कर दिया होगा जिन्होने राजनीति मे सफलता का शार्टकट पाने के लिए हिन्दुस्तान मे ज़हर घोल दिया था. इस बार लालू, मुलायम, पासवान, मायावती और भाजपा के धर्म और जातीय एजेंडे को जनता ने सिरे से नकार दिया है.
तालिबान के देसी संस्करण
कुछ दिन पहले किसी अखबार में पढ़ा था कि तालिबान ने पेशावर की बसों मे म्यूज़िक न चलाने की धमकी दी थी. कहा था कि अगर कोई बस मे म्यूज़िक सुनता हुआ पकड़ा गया तो अंजाम बुरा होगा. इस्लामी कट्टरपंथियो की ऐसी कितनी ही ख़बरे आम बात है, लेकिन अचरज तब हुआ जब सुना की तालिबान ने मंगलूर मे किसी क्लब मे वहाँ उपस्थित लड़के लड़कियो को दौड़ादौड़ा कर मारा. ...भारत में ओबामा होने का मतलब है जमानत ज़ब्त
अमेरिका में बैठे हम भारतीयों को कम ही मौका मिलता है कि हम भारत के समाचार चैनलों को देखें लेकिन जैसे ही मौका मिलता है, देखते जरूर हैं. भारत के चैनल ही नहीं बल्कि सभी समाचार माध्यम आंदोलित हैं. सब पर ओबामा का जादू छाया हुआ है. देखकर थोड़ा अचरज होता है कि अमेरिका में रहते हुए भी ओबामा भारतीय दलितों के मसीहा घोषित कर दिये गये हैं. नारे लग रहे हैं, आवाजें आ रही हैं - भारत को भी एक ओबामा चाहिए. ...Author info
