Anil Saumitra
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?
न अचार है न मुरब्बा है, राहुल खाली डब्बा है
सबसे पहले तो उत्तर प्रदेश भाजपा को बधाई कि उसने राहुल गांधी का संघ ज्ञान बढ़ाने के लिए संघ विचारधारा को समझानेवाली पुस्तकों का सेट भेजा है. मध्य प्रदेश की तीन दिवसीय यात्रा में उन्होंने जिस प्रकार से संघ को सिमी के करीब ठहरा दिया उससे साबित होता है कि संघ विचारधारा के बारे में तो उन्हें तनिक भी अंदाज नहीं है, साथ ही यह भी आभास होता है कि वे राजनीतिक रूप से टीन और कनस्टर के ऐसे खाली डिब्बे हैं जो जैसे चाहे अपने हित के लिए इस्तेमाल कर सकता है. ...मीडिया खड़ा बाजार में, नहीं किसी की खैर
भौतिकता से दग्ध मानवता को शांति और दिशा देने का काम भारतीय मूल्य और दर्शन ही करेंगे। भारतीय मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को संरक्षित करने और प्रसारित करने की जिम्मेदारी मीडिया को निभानी होगी। आज भारतीय मूल्यों और परंंपराओं को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मीडिया भी इसमें शामिल है। मीडिया को मर्यादित होना होगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने इंडियन मीडिया सेंटर की बैठक में समापन उद्बोधन देते हुए ये बातें कही।...राममंदिर बनवाएं, भाईचारा बढ़ाएं
रामजन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद पर फैसला आने ही वाला है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बहुप्रतीक्षित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मुकदमे में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया है। उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.यू. खान, न्यायमूर्ति डी.वी. शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल हैं। चूंकि न्यायमूर्ति डी.वी. शर्मा सितंबर के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इसलिए माना जा रहा है कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में फैसला सितंबर महीने के पूर्व कभी भी आ सकता है।...मीडिया प्रायोजित 'हिन्दू' आतंकवाद
आजकल मीडिया में आतंकवाद, खासकर ‘हिन्दू आतंक’ चर्चा में है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि ‘हिन्दू आतंक’ मीडिया के कारण ही चर्चा में है। कई बार किसी खास मुद्दे और विषय पर चर्चा करते समय उस मुद्दे पर और उसके माध्यम पर भी चर्चा होने लगती है। कुछ ऐसा ही हुआ जब पिछले हफ्ते आजतक के सहयोगी चैनल ‘हेडलाइन्स टुडे’ ने स्टिंग आॅपरेशन दिखाने का दावा किया।...एक बम विस्फोट और इतने सारे मास्टर माइंड!
हेडलाइन्स टुडे ने 15 जुलाई को संघ, हिन्दू संगठनों और हिन्दुओं को आरोपित करने वाला स्टिंग आॅपरेशन दिखाया है। कुछ लोगों ने इसके खिलाफ हेडलाइन्स टुडे के मुख्य समाचार चैनल आजतक के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने तोड़-फोड़ कर दी। हालांकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तोड़-फोड़ की घटना को अनुचित बताते हुए यह कहा है कि संघ के कार्यकर्ता वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए गए थे।...घर में बढ़ती विदेशी घुसपैठ
घुसपैठ और सामान्य आवाजाही में फर्क है। दुनियाभर में अपनी आवश्यकताओं के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर आबादी की आवाजाही सामान्य बात है। लेकिन घुसपैठ सुनियोजित और रणनीतिक है। अर्थात भारत में घुसपैठ आवश्यकता या परिस्थितियों के कारण नहीं बल्कि किसी खास मकसद का हिस्सा है। इनका आगमन, बसाहट और निवास सब रणनीतिक होता है।...नकचढ़े नीतीश की नकारात्मक राजनीति
राजनैतिक विश्लेषकों के मुताबिक बिहार में एनडीए या भाजपा-जदयू गठबंधन टूट के कगार पर है। यह महज आशंका नहीं, बल्कि घटनाओं और नेताओं के रवैये के आधार पर किया जा रहा विश्लेषण हैं। एनडीए संयोजक शरद यादव भले ही बीच-बचाव कर रहे हों, वे गठबंधन बनाए रखना चाहते हों, लेकिन बिहार में नीतीश का दखल शरद से ज्यादा और सबसे ज्यादा हैं। घटनाक्रम बता रहे हैं कि नीतीश उड़ीसा के नवीन पटनायक के रास्ते पर हैं। लेकिन न तो बिहार उड़ीसा है और न ही नीतीश, नवीन पटनायक। लेकिन यह भी सच है कि नीतीश की जिद्द के आगे शरद यादव की वैसे ही कुछ नहीं चलेगी, जैसे जार्ज फर्नांडीस की नहीं चली।...मीडिया की कलमबंद माओ
आउटलुक पत्रिका के पिछले अंक में अरुंधती रॉय का लंबा आलेख प्रकाशित हुआ है जिसे पढ़ने वाले एक मित्र ने कहा - इस आलेख में जबर्दस्त माओवादी अपील है, वैसे ही जैसे शोभा-डे के लिखे में सेक्स अपील होती है। पाठक ने स्मरण दिलाया- हजार चैरासी की मां’ फिल्म में भी ऐसी ही माओवादी अपील था। पाठक ने बताया अरुंधती को पढ़कर माओवादी बन जाने का मन करता है। विकास, आदिवासी और जंगल की बात करने का मन करता है। माओवादियों की तरह हत्या, लूट, डाका, वसूली, बलात्कार और अत्याचार करने का जी करता है।...कौन बतायेगा गोविन्दाचार्य को भाजपा का रोडमैप!
कोडिपाक्कम् नीलमेघाचार्य गोविन्दाचार्य दिल्ली से भोपाल आते हैं तो लोग आपस में बाते करते हैं- आजकल गोविन्दजी भोपाल में अधिक समय दे रहे हैं, क्या बात है! लेकिन गोविन्दाचार्य 3 अप्रैल की सुबह दिल्ली क्या गए एक चर्चा तेजी से भोपाल से लेकर दिल्ली तक चली - गोविंदजी भाजपा में जाने वाले हैं! ...Author info
