अर्जुन शर्मा
बिकाऊ ब्रांड बन गए हैं प्लेटलेट्स, डेंगू, वायरल!
करीब पच्चीस साल पहले फोरहंस नामक टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनी ने अपने प्रचार अभियान को नया फोकस देते हुए एक नारा गढ़ा था कि डाक्टर का बनाया टूथपेस्ट जो देता है आपके मसूड़ों को सुरक्षा, क्योंकि मसूड़ों का सुरक्षित होना ही दांतों की मजबूती का आधार है। जो केवल फोरहंस ही प्रदान करता है। फोरहंस इस प्रचार अभियान के चलते कई गुणा माल बेचने में कामयाब रहा जबकि हकीकत ये थी कि सभी कंपनियों के टूथपेस्ट भी मसूड़ों के लिए सुरक्षित थे व टूथपेस्ट में ये गुण बहुत पहले से ही मौजूद थे।
ऐसे आदमी का सियासत में क्या काम?
कहां इकबाल,गालिब व फैज का शौक और कहां सियासत! जो भी हो पर पंजाब के कमजोर आर्थिक पक्ष व सियासत की गफलत में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री (निलंबन के दूसरे दिन उन्हें पूर्व भी कर दिया गया है) मनप्रीत सिंह बादल पंजाब के उन अहम से मारे सियासतदानों से बिल्कुल अलग है जो सियासतदान गनमैनों के लाव लश्कर के बिना चलना अपनी तौहीन समझते हैं।...भारत तो आजाद है हम आजाद कब कहलाएंगे?
यह 15 अगस्त हमें आजादी के 63वें वर्ष के द्वार पर ले आयी है। आजादी के उपरांत इतने लंबे वर्षों के सफर के बाद निसंदेह भारत की तस्वीर बदली है। पिछले दस साल से तो विकास की गति का भी अहसास किया जा रहा है व तरक्की की चमक दिखने भी लगी है। इसके साथ हमने बहुत कुछ खोया भी है। समाज का विभाजन। जाति-धर्म में बंटा हुआ भारतीय समाज। पिछड़ो व दलितों के उत्थान के लिए बने कानून व नियम निसंदेह बहुत पूजनीय हैं जिनके माध्यम से समाज के दबे हुए वर्गों को बराबरी का हक दिलवाने का माद्दा भी है पर क्या उनका ज्यादातर इस्तेमाल दलितों व पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वालों द्वारा हाईजैक नहीं हो गया? ऐसा दिखता तो है।...बाढ़ में बह गयी व्यवस्था
पंजाब में बाढ़ जैसी स्थिति न आए इस विषय पर सोचने व ठोस नीति लागू करने वाला सरकारी अमला मौजूद है। उन्हें मिलने वाला सारे साल का वेतन बरसात के महीनों में ही अपनी प्रासंगिकता का अहसास करवाता है, जब बरसात के मौसम में पंजाब में कोई तबाही नहीं होती। कई सालों से पंजाब में मानसून ही पूरी गति से नहीं आया। जब आया तब इस दौर में लोगों को जान माल की हानि से बचाने वाले विभाग की भी पोल पट्टी खुल गई।...सरकार तो नहीं पर चौकन्ने हैं संत सीचेवाल
इस साल मौसम विभाग का आकलन बिल्कुल सही साबित हुआ है कि अबकी बार सावन पूरी तरह से झूम कर आने वाला है। पंजाब बिजली की कमी से थर्राया हुआ है। सरकार को इस बात की ही बहुत खुशी है कि यदि सचमुच मानसून झमाझम बरसा तो बिजली की कमी वाली कमजोरी को सावन ढंक देगा। पर इसके आगे की भी सोची है सरकार ने कि बरसने वाले पानी का और क्या लाभ लिया जा सकता है?...अल्लाह के नाम पर
क्या यह तथ्य हैरान परेशान और पशेमाान करने वाला नहीं है कि 121 वर्ष से स्थापित एक इस्लामिक मूवमेंट जमायत अहमदिया को पाकिस्तान में खुद को मुस्लिम कहने से रोकने के लिये बाकायदा एक कड़ा कानून काम कर रहा है। पाकिस्तान में अहमदिया लोग मुस्लिम जगत में मिलने पर प्रयोग होने वाले इस्लामावालेकुम - वालेकुम इस्लाम अभिवादन करते हुए पकड़े जायें तो तीन साल तक कैद व जुर्माना लगने का कानून है।...दर-ओ-दीवार बचाने की आरज़ू ही किसकी है!
पूरे पंजाब में सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है व सड़क किनारे बने असंख्य भवनों को धड़ाधड़ नोटिस आ रहे हैं कि उनका निर्माण सड़क को चौड़ा करने में अवरोध पैदा कर रहा है। ये बात निकली है तो इसका आगे तक जाना लाजिमी है। मेरा इस सारे सिलसिले पर एक ही सवाल है कि सड़कों के किनारे होने वाले वैध या अवैध निर्माण करते समय कोई भी सात पर्दे नहीं डाल सकता. फिर ये अवैध निर्माण होते कैसे हैं?...घर घर में हो रहा है 'सच से सामना'
"मेरा बच्चा हाथ से निकलता जा रहा है। कुल जमा सोलह साल का है पर मुझे पता है कि वो ड्रग्स लेने लगा है। उसकी हर जिद पूरी करते हुए मुझे लगा करता था कि जो कुछ कमा रहा हूं, इन्हीं बच्चों का ही तो है। मैने उसे मोबाइल भी ले दिया और स्कूटी भी। देखता हूं कि पता नहीं किसके साथ रात-रात भर बातें करता है।"...बुनियादी समस्या तो खुद पीडीएस ही है
पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम जिसे हिंदी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहते हैं व संक्षिप्त में पीडीएस कहा जाता है। इस व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले नागरिकों को सस्ता राशन उपलब्ध करवाया जाता है। यह व्यवस्था कितने लोगों के स्विस बैंक लबालब भर सकती है या भर रही है इसका अंदाज़ा लगाने के लिए कुछ आंकड़ों पर दृष्टिपात करते हैं। ...पेट्रोल से आग कहां बुझती है?
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत सिंह राम रहीम के खिलाफ पुराने डेरा प्रबंधक फकीर चंद की हत्या का मामला दर्ज होने के बाद भावुक हुए डेरा प्रेमियों द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शन और तोड़-फोड़ की घटनाओं के बाद डेरा प्रबंधन भी सकते में है। जिस प्रकार इस उग्र प्रतिक्रिया का समाज में संदेश गया है उसके चलते जहां समाज के लोगों में सहम है वहीं डेरा सच्चा सौदा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में भी नकारात्मता का समावेश हुआ है।...Author info
