आशीष कुमार
अब कोई नहीं पूछता पत्रकारिता मिशन है या प्रोफेशन
अब कोई नहीं पूछता पत्रकारिता मिशन है या प्रोफेशन। शायद अब सब जान-बूझ गए हैं कि भारत में 25000 करोड़ रुपए की मीडिया इण्डस्ट्री मिशनरी भाव से खड़ी नहीं की जा सकती है। यह शुद्ध व्यावसायिक हितों से ही सम्भव है। बिरला से लेकर उषा मार्टिन तक हर तरह के व्यावसायी इस व्यवसाय में क्या किसी सामाजिक परिवर्तन की अकांक्षा लेकर आए हैं? बिल्कुल नहीं।
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