दिनेश शाक्य
मुलायम सिंह के अमर प्रेम का राज क्या है?
मुलायम सिंह के परिवारनुमा पार्टी में एक बार फिर कूटनीति चरम पर है. कारण कोई और नहीं हमेशा की तरह अमर सिंह ही है. इससे पहले अमर सिंह के कारण पार्टी के कई नेता सपा छोड़कर बाहर जा चुके हैं लेकिन मुलायम का अमर प्रेम अखण्डित बना हुआ है. ताजा प्रकरण में अब अमर सिंह ने रामगोपाल यादव को निशाने पर लिया है. लेकिन मुलायम सिंह रामगोपाल यादव को साथ ले अमर सिंह के आवास पर पहुंच गये और विवाद को खत्म करने की गुजारिश की.
नख-शिख नुमाइश में डूबा इटावा
महाभारत कालीन सभ्यता से जुडे यमुना नदी के तट पर बसे ऐतिहासक इटावा जिले का सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का अपना एक अलग ही महत्व है.इटावा महोत्सव के सौ वर्ष पूरा हो गये है। शताब्दी वर्ष को लेकर इटावावासी बेहद खुश नजर आ रहे है. शुभांरभ के दौरान अद्भुत छटा देखने को मिली जिसे लोगों ने महसूस किया....मुलायम होने का मतलब
आज मुलायम सिंह यादव सत्तर साल के हो गये. 22 नबबंर 1939 को जन्में मुलायम सिंह यादव वही मुलायम हैं, जिन्हे रतन सिंह, अभय राम, राजपाल और शिवपाल की जगह अखाड़े में ले जाने के लिये पिता ने चुना था. वो खुद मुलायम की वर्जिश करते और दंगल में जब मुलायम बड़े-बड़े पहलवानों को चित्त कर देते तो बेटे की मिट्टी से सनी देह से लिपट जाते और उसमें से आती पसीने की गंध को ही मुलायम की असल पूंजी बताते....चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर भी सपा से नाराज
उत्तर प्रदेश के उप चुनाव और कल्याण सिंह से किनारा करने के प्रकरण अभी ठंडे नहीं पड़ पाए थे कि सपा के एक और सांसद समाजवादी पार्टी से रूठ गए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर इसलिए सपा से नाराज हो गए हैं क्योंकि स्थानीय निकाय के प्रत्याशियों की सूची में उनके भतीजे रविशंकर सिंह पप्पू का नाम नहीं है. ...सपा के 'युवराज' की राजनयिक सरगर्मी बढ़ी
लखनऊ। जहां एक ओर कांग्रेस आसमान के युवराज को जमीनी राजनीतिक बारीकियां सिखाने में जुटी है वहीं इधर उत्तर प्रदेश में सपा के जमीनी युवराज की राजनयिक और कूटनीतिक ट्रेनिंग शुरू हो गयी है. इसी कड़ी में बुधवार को उन्होंने ब्रिटिश उच्चायोग की राजनयिक से मुलाकात की और उनसे द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा की. ऐसी भेंट मुलाकातों का सिलसिला अब अखिलेश यादव की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होता जा रहा है जिसे उनके भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. ...हिन्दी के लिए कत्ल होने को तैयार हैं आजमी
लखनऊ। समाजवाद को नया हिन्दी प्रेमी मिल गया है. हिन्दी में शपथ लेकर भाषा प्रेम की पराकाष्ठा दिखानेवाले समाजवादी पार्टी (सपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबू आजमी ने महाराष्ट्र नव निर्माण सेना(मनसे) प्रमुख राज ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा कि वह महाराष्ट्र विधानसभा में हिंदी लाकर रहेंगे....भाजपा में जाने से उमा भारती की तौबा
लखनऊ। कभी भाजपा की फायर ब्रांड नेता रही मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनशक्ति पार्टी की अध्यक्ष उमा भारती ने स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक दल जरुर बनना चाहती हैं, मगर उनका भाजपा में वापस जाने का कोई इरादा नहीं है....संकट में है सारस
सारस पक्षी के लिये दुनिया का एक मात्र स्थल होने के बावजूद इटावा को पूरी तरह से सरकारी तौर पर उपेक्षित रखा गया है,जब कि सर्वोच्च न्यायालय के सारस संरक्षण के आदेशों को बलाये ताक रख कर आजतक ना तो केन्द्र सरकार और ना ही उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई ठोस कार्य योजना अमल में नहीं लाई गई है.जब कि सारस पक्षी को उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य पक्षी का दर्जा देकर महज खाना पूरी कर रखी है....मुलायम के गढ में मची भगदड़
उत्तर प्रदेश में हुये उप चुनाव में समाजवादी पार्टी अभी हार का गम भुला भी नहीं पाई थी अब उसे इस्तीफों से भी जूझना पड रहा है. इस्तीफों की शुरूआत आज समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव के गृह जिले इटावा से हुई जहां पर समाजवादी पार्टी के कददावर ठाकुर नेता शिवप्रताप सिंह भदौरिया और उनकी जिला पंचायत सदस्य मिथलेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया....कौन है सच्चा कौन है झूठा
कहावत है कि क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती है कुछ ऐसा ही हुआ है.सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की तल्ख बयानगी से आहत कल्याण सिंह ने अब मुलायम सिंह यादव को आड़े हाथो ले लिया है. अगर कल्याण सिंह की बात को सही माने तो यह कहने मे कोई गुरेज नहीं की मुलायम सिंह यादव उप चुनाव की हार के बाद मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गये है. मुलायम के बारे यह हम नहीं कह रहे है बल्कि मुलायम के पुराने दोस्त कल्याण सिंह की जुबानी है,जिसे कल्याण ने पेश किया है मुलायम के जबाब स्वरूप.कल्याण के जबाब के बाद जहां समाजवादी पार्टी में हडकंप मच गया है वहीं राजनैतिक हलको में भी सनसनी फैली हुई....सपा में डटे रहना चाहते हैं अमर सिंह
उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में सबसे अधिक कहर समाजवादी पार्टी पर टूटा है. समाजवादी पार्टी में आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. सपा के महासचिव अमर सिंह पहले पार्टी के संगठन से अलग होने की चिट्ठी लिख रहे थे अब वही अमर सिंह कह रहे हैं कि उन्होंने सपा के सांगठनिक जिम्मेदारियों से अलग होने की कोई मंशा नहीं जताई है....मुलायम को मार गये कल्याण
जो काम भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए कल्याण सिंह नहीं कर सके वह सपा के करीब आकर कर दिया. उत्तर प्रदेश के हाल के उपचुनाव में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद पूर्व भाजपा नेता कल्याण सिंह से मोहभंग हो जाने का संकेत देते हुए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आज यहां कहा कि कल्याण सिंह न तो कभी सपा मे शामिल किये गये थे और न ही कभी शामिल किये जायेगे. यादव ने आज इटावा में एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं यह बात पहले भी कह चुका हूं और पुन: दोहराना चाहता हूं कि कल्याण सिंह न तो कभी सपा में थे और न भविष्य में उन्हें कभी भी सपा में शामिल किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह बात तो कल्याण सिंह ने भी कही है कि वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं....अब क्या करेंगे मियां मुलायम?
मुलायम सिंह यादव के पैरों तले की जमीन खिसक चुकी है। तीस साल से भी ज्यादा वक्त तक उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहे मुलायम अब हाशिए पर जाते दिख रहे हैं.फिरोजाबाद लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में बहू डिंपल यादव की करारी हार इस बात का प्रमाण है कि जिस तरह की राजनीति मुलायम अब तक करते आए हैं, उसका अंत नजदीक है....हमारी हार के लिए राहुल गांधी और भाजपा जिम्मेदार - अखिलेश यादव
फिरोजाबाद लोकसभा सीट के उपचुनाव में हार से तिलमिलाई समाजवादी पार्टी ने आज कहा कि पार्टी की सीधी लडा़ई कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी के साथ है. सपा के प्रदेश अध्यक्ष और फिरोजाबाद सीट से अपनी पत्नी डिम्पल यादव को जीत दिलाने से वंचित रह गये अखिलेश यादव ने यहां प्रेस कांफ्रेंस में हार की भडा़स कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी पर निकाली और साथ में यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ठीक से चुनाव नहीं लड़ सकी जिससे पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा....सपा में व्यापक फेरबदल का फैसला, अमर सिंह को ठिकाने लगाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की शर्मनाक हार ने शीर्ष स्तर के नेताओं को झकझोर कर रख दिया है। घाव इसलिये भी गहरे हैं कि स्वयं सपा प्रमुख की पुत्रवधू व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव की बीबी डिंपल यादव की उपचुनाव में करारी हार हुई। पार्टी में हारने के बाद सैफई में `मंथन´ चल रहा है कि इतनी बड़ी हार क्यों और कैसे हुई? कुछ कार्यकर्ताओं ने दबे मन से नेताजी तक जो कड़वाहट पहुंचायी उससे संकेत मिलते हैं कि सपा में भी शीघ्र बड़े स्तर पर व्यापक फेरबदल होने के साथ-साथ कुछ को किनारे भी किया जा सकता है....नहीं चला मुलायम का बहूवाद
उत्तर प्रदेश में उपचुनाव में बसपा के हाथी ने समाजवादी पार्टी की साइकिल को कुचल डाला.सबसे ज्यादा हैरात तो मुलायम को अपने बेटे अखिलेश की बीबी डिंपल यादव की फिरोजाबाद में हार पर हुई है काग्रेंस के राजबब्बर के मुकाबले डिंपल की हार ने सपा को सदमें में ला कर खडा कर दिया है ऐसा लगने लगा है कि मुलायम की तिलस्म अब टूटने के कगार पर आ खडा हुआ है.मुलायम परिवार की किसी भी महिला के सांसद बनने का सपना अब सिर्फ सपना बन कर रह ही गया है....अपनों को जितवाने की जद्दोजहद
उत्तर प्रदेश में हो रहे उप चुनावों का नजारा कुछ अलग हट कर ही नजर आ रहा है,जहां एक ओर आम प्रत्याशी अपने आप को जिताने की कोशिशों में प्रभावी ढंग से लगे हुये है, वहीं दूसरी ओर ऐसी आधा दर्जन सीटें है, जहां पर बडे राजनेताओ की प्रतिष्ठा इस बात पर लगी हुई है क्यों कि इन सीटों पर उनके खानदान के लोग यानि की खासमखास उतरे हुये है.इस लिये इन नेताओ ने अपनी खुद की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा रखा है.सबसे बडी बात यह है कि इनको अपनी प्रतिष्ठा दांव पर इसलिये लगानी पड रही क्योंकि किसी नेता की बीबी,तो किसी की मां, तो किसी का भाई, तो किसी का बेटा, और तो और किसी का बाप जो चुनाव मैदान में उतरा हुआ है....वंदेमातरम् का विरोध उचित नहीं- जगतगुरु
ज्योतिष एवं द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उलेमाओं के वन्देमातरम न पढ़े जाने का विरोध किया हैं।सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी परिक्षेत्र स्थित शंकराचार्य आश्रम में बातचीत में कहा है कि वंदेमातरम मां को नमन है,जो सभी को करना चाहिए। इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। स्वरूपानंद सरस्वती के इस विरोध से कांग्रेस मुश्किल में पड़ सकती है क्योंकि वे अकेले ऐसे शंकराचार्य हैं जो राजनीतिक रूप से भाजपा नहीं बल्कि कांग्रेस को समर्थन करते हैं. ...पांच नदियों का संगम फिर भी उपेक्षित होने का गम
दुनिया में दो नदियों के संगम तो कई स्थानों पर है जब कि तीन नदियों के दुर्लभ संगम प्रयागराज,इलाहबाद को धार्मिक दृष्टि से अत्यत महत्वपूर्ण समझा जाता है लेकिन आश्चर्य की बात यह हैकि पांच नदियों के इस संगम स्थल को त्रिवेणी जैसा धार्मिक महत्व नहीं मिल पाया है.प्रयाग का त्रिवेणी संगम पूर्णतः धार्मिक मान्यता पर आधारित है क्यो कि धर्मग्रन्थों में वहां गंगा तथा यमुना के अलावा अदृश्य सरस्वती नदी को भी स्वीकारा गया है,यह माना जाता है कि कभी सतह पर बहने वाली सरस्वती नदी अब भूमिगत हो चली है बहराहल तीसरी काल्पनिक नदी को मान्यता देते हुये त्रिवेणी संगम का जितना महत्व है उतना साक्षात पांच नदियों के संगम को प्राप्त नहीं हैं....धोबी बन गये है अमर सिंह
एक लोकप्रिय और आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कहावत है कि धोबी का तो कुछ उखाड नहीं पाये और गधे का कान उमेंठ दिया......इसी कहावत को अब सीधे तौर पर आपके सामने बिना किसी रूप रेखा रखना जरूरी समझ रहा हूं,यहां पर बात हो रही है मुलायम सिंह यादव,मायावती और अमर सिंह की। अपनी बीमारी से सही ढंग से अभी उबर भी नहीं पाये अमर सिंह आये तो थे भरथना विधान सभा के उप चुनाव में वोट मांगने लेकिन बयान कर गये अपना दर्द जो मिला है उन्हे मायावती से....Author info
