दिनेश शाक्य
पागल था, हत्या का आरोपी बताया और पीट पीटकर मार डाला
इटावा पुलिस ने वह कारनामा कर दिखाया है, जिससे इंसानियत भी कांप उठे। यूं तो पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगना कोई नई बात नहीं है परंतु इटावा जनपद की चौबिया पुलिस ने जिस प्रकार से रुपयों के लालच में आकर पिछले सत्रह सालों से मानसिक संतुलन खो चुके एक पागल को हत्या के प्रयास का गुनहगार करार देते हुए न सिर्फ अपनी अभिरक्षा में लेकर उस पर पुलिसिया कहर बरपाया बल्कि उसके बाद उसे जेल भी भेज दिया। जेल प्रशासन ने भी पुलिसकर्मियों का साथ निभाया और इस पागल के मानसिक रोग चिकित्सालय में चल रहे दस्तावेजों को दरकिनार कर दिया।
नकली नोट के असली कारोबारी
आईएसआई की अर्थव्यवस्था में फर्जी दखलंदाजी के बाद हमारा खुफिया तंत्र किस कदर सक्रिय है इसकी बानगी इटावा में जाली नोटों के कारोबारियों के खुलासे के साथ हुई। यह लगभग चार सालों से लगातार हमारे अर्थतंत्र को खोखला करते रहे परंतु न तो जनपद के खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी हुई और न ही प्रदेश को। ऐसे में करोड़ों रुपये के जाली नोटों को भारतीय बाजार में खपा देने वाले इस प्रकार के कारोबारियों का नेटवर्क किस प्रकार से सक्रिय है, इसका जबाब शायद खुफिया तंत्र के पास भी नहीं है।...भ्रष्ट चिकित्सा तंत्र की भेंट चढ़ गयी गर्भवती महिला
चिकित्सकों को बेशक भगवान का दूसरा रूप माना जाता हो और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करने के दावे करती रहती है। परंतु इटावा जनपद का डा. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय तो कम से कम मरीजों को जीवन नहीं देता है, बल्कि चिकित्सीय स्टॉफ की भ्रष्ट और लापरवाही कार्य प्रणाली मरीजों की मौत का सबब बनती जा रही है। ...घड़ियालों की जान खतरे में
देश की महत्वपूर्ण नदियों में पाये जाने वाले घडियाल इन दिनों भटक रहे है,इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिला इटावा के भरथना में जहां एक घड़ियाल नदियों के छोड़े गये पानी के सहारे आ गया एक नहर में। इस घडियाल की मौजूदगी भर से इलाके में हड़कंप मच गया. इस घड़ियाल को पकड़ने के लिये वन विभाग की टीम के साथ इलाकाई मछुआरों को सक्रिय करना पडा तब कहीं जा कर इस घडियाल को पकड पाने में कामयाबी मिली....इटावा में अब अजगरों का आतंक
दस्यु गतिविधियों के लिए कुख्यात समझी जाने वाली चंबल घाटी के लोगों ने दस्यु गिरोहों की दहशत से निजात पाई ही थी कि अब घाटी में निकलने वाले अजगरों ने घाटी वासियों की दहशत और बढ़ा दी है। आबादी वाले क्षेत्रों में अजगरों के आ जाने के कारण यहां के वाशिंदों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होने लगी है। अजगरों का खौफ यहां के लोगों में इस कदर बस गया है कि उन्होंने अपने जानवरों एवं बच्चों को भी गांव से बाहर भेजना बंद कर दिया है।...Author info
