Diwakar Muktibodh
शहर की ओर जा रहे हैं नक्सली
नक्सली मोर्चे पर आलोचना के कटघरे में खड़ी छत्तीसगढ़ सरकार के लिए यकीनन यह नई चिंता की बात है कि नक्सली आतंक अब गांवों की सीमाएं लांघकर शहरों की ओर बढ़ चला है। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा, कोंटा, बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर, भानुप्रतापपुर, राजनांदगांव जिले का मानपुर आदि नक्सली आंतक के पुराने गढ़ हैं जहां अब तक अनेक हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। इन पुराने गढ़ों पर अपना आधिपत्य बरकरार रखते हुए नक्सली कमांडर आतंक के साम्राज्य के विस्तार में लगे हुए हैं तथा अब वे रायगढ़, महासमुंद, धमतरी एवं रायपुर जिले के उन गांवों एवं कस्बों में घुसपैठ कर रहे हैं जो अर्धशहरी इलाके हैं तथा जहां के जंगलात बस्तर जैसे सघन नहीं हैं।
छत्तीसगढ़ में सुरक्षित नहीं हैं मजदूर
छत्तीसगढ़ की राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर दूसरी दुर्घटना यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि औद्योगिक सुरक्षा के प्रति लापरवाही का कोई ओर-छोर नहीं है और सुरक्षा का कामकाज केवल कागजों पर चल रहा है। यह गहन चिंता का विषय है कि रायपुर, रायगढ़ एवं कोरबा के औद्योगिक संयंत्रों में आए दिन कोई न कोई दुर्घटना होते रहती है जिसमें या तो श्रमिकों की जान जाती है या वे घायल होकर स्थायी अपंगता के शिकार होते हैं।...नक्सली हमारे अपने लेकिन तनी रहेंगी बंदूकें
बस्तर के सीने पर फिर रक्त की लकीरें खींच गयीं। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के गांव भुस्की में सीमा सुरक्षा बल एवं नक्सलियों के बीच 7 घंटे तक चली जंग में 5 जवान शहीद हो गए। इसके पूर्व अंतिम बड़ी वारदात 29 जून 2010 में हुई थी। नारायणपुर जिले के धौड़ाई शिविर पर हुए हमले में सीआरपीएफ के 26 जवान मारे गए थे। धौड़ाई और भुस्की तथा अन्य छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़ दें तो बस्तर के दो महीने लगभग शांति से गुजरे हैं।...छलावा है नक्सलियों से बातचीत का दावा
कुछ अजीब सी बात है। नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता के लिए वातावरण बनाने में लगे हुए स्वामी अग्निवेश ने 12 अगस्त को मीडिया के सामने स्पष्ट कर दिया कि माओवादी वार्ता के लिए राजी हैं। लेकिन उनकी एक महत्वपूर्ण शर्त है नक्सली नेता चेरूकुरी राजकुमार उर्फ आजाद की पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की न्यायिक जांच कराई जाए। अभी कुछ दिन पूर्व 16 अगस्त को नई दिल्ली में एक नितांत व्यक्तिगत बातचीत में उन्होंने खुलासा किया कि वार्ता से संबंधित माओवादियों का एजेंडा केन्द्र सरकार को सौंप दिया गया है। अब निर्णय सरकार को लेना है किंतु वह ढिलाई बरत रही है।...Author info
