आरएल फ्रांसिस
विपक्ष का कार्य सरकार गिराना ही नही है
दक्षिणी दुर्ग में बनी भाजपा की पहली सरकार गहरे संकट में है। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा शुरु से ही सकटों से घिरे रहे है। यह संकट बाहरी कम अंदरुनी ज्यादा रहे है। कुछ समय पहले बंगलौर निकाय चुनावों में भी भाजपा को जोरदार सफलता मिली थी। ईसाई समुदाय को छोड़कर किसी और वर्ग को भाजपा सरकार से कोई खास नराजगी नही रही है। चर्च का एक हिस्सा पिछले कुछ समय से राज्य में युदियुरप्पा सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग करता रहा है इसके लिए यह वर्ग राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को कई ज्ञापन भी दे चुका है।
कंधमाल: सांप्रदायिक धुव्रीकरण नई चुनौती
कंधमाल की आग उड़ीसा से अधिक अब राजधानी दिल्ली में धधक रही है. पिछले महीने 22 से 24 अगस्त के बीच दिल्ली में चर्च संगठनों द्वारा एक जनसुनवाई करके यह साबित करने की कोशिश की गयी कि कंधमाल में दंगा पीड़ितों का पुनर्वास नहीं हो रहा है. इस जन-सुनवाई के संयाजकों में जॉन दयालॅ, कटक-भुवनेश्वर के बिशप रिफेल चैनथ एवं वामपंथी विचाराधरा सहमत की माला हाशमी प्रमुख थी....हिन्दुओं के विरोध में मुसलमानों पर मेहरबान चर्च
विगत चार जुलाई को इस्लामी जेहादी संगठन ‘पापुलर फ्रंट आफ इंडिया’ के कार्यकर्ताओं ने मुव्तातुपुझा के चर्च से लौटते समय उनका दाया हाथ शरीर से अलग कर दिया था यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने बी. कॉम परीक्षा में एक प्रश्नपत्र में ‘मोहम्मद’ शब्द का उल्लेख किया था। चरमपंथी मुस्लिमों का आरोप था कि जोजफ ने जानबूझकर अपमानजनक तरीके से इस शब्द का उल्लेख किया है इसी कारण उन्मादी जेहादियों ने उन्हें ‘ईशनिंदा’ का दोषी मान लिया था। और अपने तरीके से सजा दी। छोटे-छोटे मामलों पर हिंदू संगठनों को धकियाने वाले चर्च नेताओं को मानों सांप सूघ गया। उनके गले से आवाज तक नही निकली। दो वर्ष पहले तक ‘लव जेहाद’ के विरुद्ध मोर्चा खोलने वाला राज्य का कैथोलिक चर्च कट्टरपंथी मुसलमानों के सामने मिमयाता नजर आ रहा है।...कुरान जले पर भारत को पता न चले
इस्लाम को मानवता विरोधी बताते हुए अमेरिकी चर्च के एक हिस्से ने 9/11 को अमेरिका पर हुए अलकायदा के हमले की वर्षगांठ पर पवित्र कुरान को जलाने की घोषणा करके दुनिया भर के मुस्लिम समाज में बैचानी पैदा कर दी है। लेकिन इस घटनाक्रम को भी वेटिकन अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है. चर्च संगठनों की कोशिश है कि इन घटनाओं को भारत में ज्यादा प्रचार न मिले ताकि भारत में मुस्लिम-ईसाई एकता पर फर्क न पड़े. अगर ऐसा होता है तो ईसाई संगठनों के बड़े दुश्मन "हिन्दुओं" को इसका फायदा मिल सकता है और हिन्दू-मुसलमानों के बीच दूरियां कम हो सकती है जिसका सीधा नुकसान मिशनरियों को होगा. ...कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।...अल्पसंख्यक अधिकारों की आड़ में शिक्षा का व्यापार!
राजधानी दिल्ली क्षेत्र में कैथोलिक चर्च द्वारा संचालित संत थॉमस स्कूल में 1500 बच्चे पढ़ते है. उनमें ईसाई बच्चे 50 से भी कम है. इसी तरह देश की राजधानी दिल्ली के पास खतौली में कोई कैथोलिक परिवार ही नही है लेकिन कान्वेंट चल रहा है। अब प्रश्न खड़ा होता है कि ‘जहां स्कूल में बच्चे ईसाई नही है, अध्यापक ईसाई नही है तो चर्च संगठन किस धर्म, भाषा और संस्कृति के संरक्षण' के लिए अल्पसंख्यक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे है?...यौनाचार के दलदल में कैथोलिक चर्च
आयरिश बिशपों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोप बेनेडिक्ट (सोलहवें) से मंगलवार को वेटिकन में ‘बच्चों के यौन शोषण’ के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका के बाद आयरलैंड में कैथोलिक चर्च को यह दूसरा सबसे बड़ा झटका है। अमेरिका की तरह आयरलैंड के चर्च विश्वासी ‘पोप’ के प्रतिनिधि बिशपों एवं पादरियों को न्यायालय में घसीट रहे है। पीड़ित परिवार मुआवजे के रुप में 1.37 अरब डालर की मांग कर रहे है। वही दूसरी और पादरियों द्वारा पीड़ित लोग वेटिकन से उन गुप्त फाइलों को सर्वाजिनक किये जाने की मांग कर रहे है जिनमें रोमन कैथोलिक चर्च में यौन दुर्व्यवहार की अदरुनी जांच का ब्यौरा है।...ईसाई समाज में फैलता मजहबी उन्माद
पिछले दिनों पंजाब के विभिन्न विभिन्न शहरों में ईसाई समुदाय का महजबी उन्माद देखने को मिला। प्रभु ईसा मसीह के असम्मान जनक चित्र को लेकर उग्र ईसाई समाज के लोगों ने चर्च के पादरियों की अगुवाई में कई शहरों एवं कस्बों में जम कर उत्पात मचाया। ऐसा ही उत्पात कुछ समय पूर्व जालंधर में हिन्दू दलितों के एक वर्ग द्वारा मचाया गया था।...अंतिम संस्कार के मामले में जड़ता में फंसा चर्च
2 नवम्बर को ईसाई समाज `ऑल सोल्स डे´ मना रहा है। चर्चो के पदाधिकारी इस की तैयारियों में लगे हुए है। इस दिन ईसाई समाज के लोग कब्रिस्तानों में जाकर अपने बिछड़े परिजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रर्थाना करते है। हिन्दू समुदाय भी श्राद्व के दिनों में अपने पित्तरों की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ आदि का आयोजन करता है। यह अच्छी बात है कि हम अपने पित्तरों का सम्मान करे।...अप्प दीपो भव !
जैन धर्म के अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर ने दीपावली की रात को इस प्रकाश पर्व के लिए श्रेश्ठ संदेश दिया। भगवान महावीर को मिले दिव्य ज्ञान को ज्योति का प्रतीक माना गया उनकी शिक्षा मानव के अतंरमन को अलोकित करने का मार्ग दिखाती है। बुद्व की अमृत वाणी ``अप्प दीपो भव´´ अर्थात् `अपने लिए दीपक बन´ इसी भावना को बताती है। जनमानस में दीपावली एक संस्कृतिक पर्व है लेकिन इससे कई महापुरुषों के प्रसंग भी जुड़े हुए है। एक तरह से देखा जाये तो दीपावली लौकिक के साथ आध्याित्मकता का अनूठा संगम है।...Author info
