आरएल फ्रांसिस
चर्च के कब्जे में शांति का मसीहा
ईसा मसीह शांति के मसीहा थे. उन्होंने मानवता और शांति का संदेश दिया है. 25 दिसंबर उनका पवित्र जन्मदिन है और दुनियाभर के ईसाई पवित्र मन से इस त्यौहार पर ईसा को याद करते हैं. लेकिन यहां भारत में हम ईसाई यीशू के सानिध्य को शायद ही अनुभव कर पाते हैं. क्योंकि हमारे और यीशू के बीच साम्राज्यवादी चर्च सुविधा की जगह बाधा बनकर खड़ा है. अपने रिसते दुखों से ही सही हम अपने प्यारे यीशू को याद तो करेंगे ही भले चर्च ऐसा न करने की अपील कर रहा हो.
गर्भ से कब्र तक सिर्फ भेदभाव
7 दिसम्बर को प्रोटेस्टेंट ईसाइयों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था `नेशनल कौंसिल फॉर चर्चेज इन इंडिया´ एवं कैथोलिक बिशप कांफ्रेस ऑफ इंडिया दलितों की मुक्ति के लिए `दलित मुक्ति संडे´ मना रही है। यह दोनों ही चर्च वेटिकन एवं जनेवा स्थित वर्ल्ड चर्च कौंसिल के दिशा निर्देशों के तहत अपने कार्यों को विस्तार देते है। इन चर्च संस्थाओं से मेरा सवाल यह है कि अगर गर्भ से लेकर कब्र तक दलित ईसाईयों के साथ भेदभाव किया जाता है तो फिर इस तरह के संडे मंडे मनाने का क्या तुक है? ...Author info
