अनिल पाण्डेय
विस्थापन के 33 साल बाद,पूरी तरह बर्बाद
भारत की औद्योगिक प्रगति और शहरी विकास के लिए सबसे आधारभूत जरूरत है जमीन. जहां भी विकास का पहिया पहुंचता है, पहले वहां की जमीन और जमीन के वाशिंदों को रौंदता है. फिर अपनी मर्जी के मुताबिक एक नया साम्राज्य विकसित करता है जो विकास का विस्तार बताकर हमारे सामने प्रस्तुत किया जाता है. लेकिन इस साम्राज्य के विकासक्रम में पीछे छूट गये लोगों की एक दुनिया शेष रह जाती है. सरकार और कंपनियां जिन्हें मुआवजा देकर "अमीर" बनाकर छोड़ देती हैं वे पीछे छूट गये लोग कितने दयनीय होकर रह जाते हैं इसका सटीक उदाहरण है गाजियाबाद का कड़कड़ मॉडल गांव. इस गांव के जरिए विकास और विस्थापन का जायजा ले रहे हैं अनिल पाण्डेय.
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