प्रभाष जोशी
गगन घटा गहरानी हो-2
इकानवे के बाद रईस हुए मुटियाए और इतराए लोगों के लिए इस बात का कोई मतलब नहीं कि गांधी, सुभाषचंद्र बोस, लोकमान्य तिलक और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जैसे गैरहिंदी नेताओं ने संकल्प लिया और आंदोलन चलाया था कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा होनी चाहिए क्योंकि वह राष्ट्र हो नहीं सकता जिसकी अपनी भाषा न हो। नए इंडिया के लोग एक भूमंडलीकृत विश्व के नागरिक हैं। वे राष्ट्रभाषा जैसी संकीर्ण भाषा क्यों बोलें?
गगन घटा गहरानी हो-1
हिन्दी दिवस आया और इस बार बम धमाकों के शोर के बीच चुपचाप चला भी गया. कई मायनों में यह अच्छा ही हुआ. साल-दर-साल साल कमजोर होती हिन्दी पर भारी पड़ते दिवस और समारोह जितनी जल्दी रूकें उतना अच्छा. इस मौके पर प्रभाष जोशी ने जनसत्ता में दो किश्तों में एक लेखमाला लिखी है. भाषा के लिए भाव से लिखे गये ये लेख ऐतिहासिक हैं और आनेवाले वक्त के लिए धरोहर साबित होंगे. हम वह लेखमाला सादर प्रस्तुत कर रहे हैं. ...Author info
