प्रभाष जोशी
फच्चर मत फंसाओ। टिकोगे नहीं!!
चलो, कोई तो मैदान में उतरा। न सही लोकसभा चुनाव जैसे नाजुक और निर्णायक मौके पर काला धन लेकर चुनावी विज्ञापन को खबर बना कर बेचने वाला अखबार मालिक, उसका संपादक या जनरल मैनेजर। कोई प्रमोद रंजन ही सही, जिनका मानना है कि विज्ञापन को खबर बना कर बेचने से ज्यादा बुरा और खतरनाक तो पत्रकारिता में जाति धर्म और मित्र धर्म का निर्वाह है।
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