प्रेम शुक्ल
भारतीय गणतंत्र का गणित
भारत गणतंत्र अपने 60 वें पायदान पर पहुंच रहा है। इस अवसर पर यह पूछना स्वाभाविक है कि क्या एक गणतंत्र के रूप में हम सफल रहे है? हमारी संवैधानिक व्यवस्था ने क्या हमको एक राष्ट्र के रूप में सफल साबित किया है? क्या हमारा संविधान सफल हुआ है?
न दुश्मनी न दोस्ती सिर्फ मौकापरस्ती
एक कहावत है- `राजनीति में स्थाई दुश्मन या दोस्त नहीं हुआ करते।´ अमर सिंह-मुलायम सिंह यादव के विवाद से इस कहावत को नया दृष्टांत प्राप्त हुआ है। मुलायम सिंह और अमर सिंह की दोस्ती राजनीति के सारे सिद्धांतों को तोड़ कर नए मुकाम पर खड़ी थी। कोई पार्टी प्रमुख अपने किसी साथी को अपनी ही पार्टी में अपने से अधिक महत्व नहीं देता। मुलायम सिंह यादव अमर सिंह को अपनी ही पार्टी में नंबर वन क्यों बनाए बैठे थे?...ऑल इंडिया करप्ट कांग्रेस
जब राजनीतिक प्रक्रिया नोट भकोसने की व्यवस्था में तब्दील कर दी गई हो। जब कमीशन कमाना ही विकास का पैमाना बन गया हो, तब क्या किसी राजनीतिक प्रक्रिया की समालोचना का कोई अवसर शेष बचता है? 125 वर्ष पहले कांग्रेस संभ्रांतों के `क्लब´ के रूप में जन्मी थी, आज वह भ्रष्टाचारियों के क्लब के रूप में संचालित है। क्या अब भी कांग्रेस को महात्मा गांधी की तस्वीर लगाने का अधिकार है? सोनिया के युग में एआईसीसी का मतलब है ऑल इंडिया करप्ट कांग्रेस। ...Author info
