प्रेम शुक्ल
अयोध्या से कश्मीर तक सत्ता का षण्यंत्र
अयोध्या और कश्मीर दोनों ही मुद्दे पूरी तरह से कांग्रेसी सत्ता के षण्यंत्र की उपज हैं. इन दोनों मुद्दों का निस्तारण चुटकी बजाकर भी किया जा सकता था लेकिन अल्पसंख्यक तुष्टीकरण और स्वयं सत्ता भोगने के साथ अपने चहेतों के हितों को तुष्ट करने की घृणित राजनीति ने इन दोनों मुद्दों को इस कदर उलझा दिया है कि शांतिप्रिय और स्वभाव से ही सेकुलर भारत सांप्रदायिकता के आरोप से घिर गया है. पहले जो राजनीति कांग्रेस तक सीमित थी, उसका संसर्गजन्य रूप अब विशुद्ध गैर कांग्रेसी विपक्ष की अलंबरदार भारतीय जनता पार्टी को भी लग गया है. पिछले साठ वर्षों में कांग्रेस ने राष्ट्रहित की बजाय गांधी नेहरू परिवार के हितों को वरीयता दी है. अब भाजपा में बैठे लोग चंद हाथों में सत्ता को समाये रखने के लिए राष्ट्र के बंटाधार की कीमत पर भी वही कर्म कर रहे हैं. प्रेम शुक्ल का विश्लेषण-
सुलझी हुई समस्या को उलझाने पर आमादा
आज जो लोग भी कश्मीर की समस्या निपटाने निकले हैं सवाल पैदा होता है क्या उन्हें कश्मीर की समस्या का ओर-छोर भी पता है? क्या राहुल गांधी और ओमर अब्दुल्ला की नयी पीढी १९४७ से २०१० के बीच कश्मीर में क्या हुआ है उसकी प्रामाणिक जानकारी से लैस भी है? यदि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार कश्मीर की स्थिति को ठीक से समझ ही रही होती तो क्या पिछले ६ वर्षों के शासनकाल में उसने एक सुलझ चुकी समस्या को उलझा लेने की मूर्खता की होती?...ईसाईयत बनाम इस्लाम की मजहबी जंग
९/११ की नौंवीं वर्षगाँठ के निमित्त आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में तरह-तरह की चर्चा छिड़ी. फ्लोरिडा के कोई एक पादरी टेरी जोन्स ने आतंकवाद का स्रोत इस्लामपंथियों की परमपवित्र पुस्तक कुरआन शरीफ को करार देकर उसे जलाने की घोषणा कर सुर्ख़ियों में रहे. उनकी इस घोषणा से पूरी दुनिया चिंतित हुई. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलारी क्लिंटन से लेकर भारतीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम तक हर किसी को इस चिंता ने सताया कि फ्लोरिडा के पादरी की इस हरकत से पूरी इस्लामी दुनिया में उत्पात मच जाएगा....छत्तीस हुआ तिरसठ का आंकड़ा
सोनिया गांधी बीते शुक्रवार को चौथी बार कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयी .उनके इस चयन के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में सत्ता परिवर्तन का निर्णायक दौर शुरू हो जाएगा. सोनिया गांधी अपने पति राजीव गांधी की १९९१ में हत्या के बाद राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखने के लिए जिस अंदाज में १०,जनपथ से कांग्रेस की राजनीति का नियंत्रण रखने का परोक्ष-अपरोक्ष प्रयास करती रही हैं उसका एकमेव उद्देश्य रहा है अपने पुत्र राहुल गांधी को एक दिन इस देश का प्रधानमंत्री बनाना....Author info
