राजीव शर्मा
सा विद्या ना विमुक्तये
शिक्षक गुरू है, मार्गदर्शक है, भगवान से भी श्रेष्ठ है वाली कहानियां सुनकर हम सब बड़े होते हैं. लेकिन हमारे देश में बच्चों को शिक्षित करने के लिए खुद शिक्षक क्या प्रशिक्षण ले रहे हैं वह इस रिपोर्ट से बखूबी पता चलता है. राजस्थान सरकार गर्मी की छुट्टियों का उपयोग शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कर रही है. सरकार 1 जुलाई से प्रदेश में लहर नामक नयी शिक्षण पद्धति की शुरूआत कर रही है. जाहिर है नयी पद्धति बनाने जा रहे हैं तो नये प्रकार के शिक्षक भी चाहिए. लेकिन प्रशिक्षण शिविर में जो कुछ नजर आया उससे नहीं लगता कि राजस्थान सरकार इन शिक्षकों के भरोसे कोई लहर पैदा कर पायेगी.
आलोक तोमर जी, मैं राजीव शर्मा बोल रहा हूं
उस दिन मेरे आश्चर्य की सीमा नहीं रही जब देश के ख्यातिनाम संघर्षशील कहे जाने वाले पत्रकार आलोक तोमर का ई मेल अपने इनवॉक्स में देखा। सच कहूं तो बहुत देर तक उसे खोलकर पढ नही सका, लेकिन उस दिन सौमवती अमावस्या को गोर्वधन महाराज की परिक्रमा देने और उनसे ये अनुरोध करने जा रहा था कि प्रभू अब तो अपने इस नातुक्ष भक्त पर कुछ कृपा कर दीजिए जिससे जीवन के अनवरत संघर्षों में कुछ राहत मिल सके।...पक्षियों के हिस्से का पानी पी गया इंसान
पानी की किल्लत हो तो इंसान बोतलबंद पानी खरीद सकता है या फिर सरकार को बाध्य कर सकता है कि व्यवस्था उनके लिए पानी की व्यवस्था करे. लेकिन पक्षियों का क्या? पानी तो पक्षियों को भी चाहिए. लेकिन मनुष्य की स्वार्थ बुद्धि कितनी जटिल हो गयी है कि उसने अपने अलावा प्रकृति में सबके लिए जीवन के दरवाजे बंद कर दिये हैं. राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला केवलादेव घना पक्षी विहार अब अपने अस्तित्व के लिए संधर्ष करता नजर आ रहा है इसके पीछे का कारण है पानी, जिस पर होने वाली राजनीति ने पक्षियों का स्वर्ग कही जाने वाली इस प्राकृतिक संपदा के समक्ष गम्भीर संकट खडा कर दिया है।...भाजपा, कांग्रेस सबने धोखा दिया- कर्नल बैंसला
देश विदेश में अपनी और कौम की पहचान बनाने के बाद , सफलता के मंत्र चुनिंदा ऐतिहासिक आन्दोलनों से जुडी पुस्तकों के पन्नों में ढूंढते हुए कर्नल किरोडी बैसला को एक बार फिर से सर्व समाज को साथ लेकर आरक्षण की किसी बड़ी जंग के लिए इन दिनों अपने आवास पर आराम के साथ अध्ययन, मनन और चिंतन करते देखा जा सकता है। दिल में 'शोले ओर शिकायतों' का तूफान जब उबाल लेता है तो अपनी गलतियॉ पूछने लग जाते है, तो किताबों से इतिहास के उदाहरण देकर खुद को बेकसूर साबित करने का कोई मौका भी नहीं चूकते। महापंचायत के बाद अभी उन्हें मुख्यमंत्री के बुलावे का इंतजार है। यह बात दीगर है कि उनका लक्ष्य खुद उनको ही कोसों दूर दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि उनके पास जो भी है पाने के लिए है खोने को कुछ नही है। जीवन के कुछ अनछुए बिन्दुओं पर उनसे हुई एक बेबाक बातचीत-...बूंदों को तरसते राजस्थान में खून के सौदागरों की बाढ़
एक ओर जहॉ विश्व रक्तदान दिवस पर लोग स्वेच्छा से गरीबों के लिए अपना रक्तदान कर रहे थे वही राजथान में लाल पत्थर के लिए प्रसिद करौली जिले के हिन्डौन कस्बे में लहू के सौदागर बने डॉक्टरों के पत्थरदिल बनकर मासूम बच्चों के जिस्म से खून निकाल लेने के मामले के उजागर होने से लोग हैरान थे। तो पुलिस अपराधियों की धर-पकड़ में भागदौड कर रही थी। मानवता को शर्मसार करने वाले इस प्रकरण में भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टरों के हैवान बनने की ये एक ऐसी कहानी है जिसमें उन्होंने अपने लालच के लिए मासूम बच्चों को भी नहीं बख्शा है ।...मूंछ का बाल, नाक का सवाल...एक बार फिर
कर्नल बैंसला एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं. आगामी 10 जून को भरतपुर के बयाना में वे महापंचायत करने जा रहे हैं. महापंचायत की घोषणा उन्होंने पीलूपुरा के शहीद गुर्जरों को श्रद्धांजलि देते हुए की. लेकिन पिछले साल की तुलना में इस बार गुर्जर समाज ही एकजुट नहीं है. महापंचायत की घोषणा करते हुए कर्नल ने कहा कि 'गुर्जर समाज का बहुत बडा कर्ज मेरे उपर है और मैं उस कर्ज को चुकाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्व हूं लेकिन मैं ऐसा तभी कर पाउँगा जब हमेशा की तरह समाज मेरे पीछे खडा मुझे दिखाई देगा.' साफ है कर्नल को भी अहसास है कि इस बार पूरा गुर्जर समाज उनके साथ एकजुट नहीं है. ...Author info
