S A Asthana
टूटने से पहले ही बिक गई थी बाबरी?
बाबरी विध्वंस से दो दिन पहले 4 दिसंबर 1992. स्थान-कच्चा हाता, लखनऊ, जफरयाब जिलानी का आवास. एक तरफ लाखों कारसेवक श्री राम जन्मभूमि पर निर्णायक लड़ाई लड़नें के लिए अयोध्या में एकत्रित हो रहा था, तो दूसरी तरफ देश के करोड़ो मुसलमानों के दिलोदिमाग में विस्फोटक आक्रोश मचल रहा था। इन सबसे बेखबर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जनाब जफरयाब जिलानी लखनऊ के कच्चाहाता स्थित अपने मकान में इस बात को लेकर गमज़दा हो रहे थे कि हमारे उस पत्र पर अशोक सिंघल की क्या प्रतिक्रिया होगी जिसे हमनें अभी-अभी अपने विशेष व्यक्ति के हाथों अशोक सिंघल के पास अयोध्या में भेजी है- देखें खत का मजमून....
भ्रष्टाचारियों के सरगना निकले ईमानदारी के शिखर पुरुष
आम आदमी वैसे तो नौकरशाहों के बारे में कम ही जानता है. फिर भी जिन कुछ नामों को वह नाम से वह परिचित है उसमें विजय शंकर पाण्डेय का नाम एक है. विजय शंकर पाण्डेय को हम जानते हैं इसलिए क्योंकि अभी तक हम यह सुनते आये हैं कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के भ्रष्ट नौकरशाहों के खिलाफ सबसे सफल मुहिम चलायी थी. लेकिन अब यह जानिए कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलानेवाले विजयशंकर पाण्डेय खुद किस तरह से भ्रष्टाचार के पालक पोषक रहे हैं....हिन्दू धर्म नहीं कलंक है, वेद पिशाचों का सिद्धांत हैं
उत्तर प्रदेश में बहुजन से सर्वजन की ओर जानें का दावा करनें वाली मायावती सरकार के संरक्षण में हिन्दुओं खासकर सवर्णों को बुरी तरह से अपमानित करनें का अभियान सा चल रहा है. इसका प्रत्यक्ष नजारा देखना हो तो ‘अम्बेडकर टुडे’ पत्रिका का मई- 2010 का ताजा अंक देखिए जिसके संरक्षकों में मायावती मंत्रिमण्डल के चार-चार वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों के नाम शामिल हैं। इस पत्रिका के मई-2010 अंक का दावा है कि- ‘हिन्दू धर्म’ मानव मूल्यों पर कलंक है, त्याज्य धर्म है, वेद- जंगली विधान है, पिशाच सिद्धान्त है, हिन्दू धर्म ग्रन्थ- धर्म शास्त्र- धर्म शास्त्र- धार्मिक आतंक है, हिन्दू धर्म व्यवस्था का जेलखाना है, रामायण- धार्मिक चिन्तन की जहरीली पोथी है, और सृष्टिकर्ता (ब्रह्या)- बेटी***(कन्यागामी) हैं तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी- दलितों का दुश्मन नम्बर-1 हैं।...हारे हुए योद्धा के हाथ में कमान
तमाम तरह के अफवाहों-झंझटों से जूझते हुए अंततः भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गड़करी ने उत्तर प्रदेश में सूर्य प्रताप शाही के हाथ में भाजपा की कमान सौंप दी है. लगभग मरणासन्न की स्थिति में पहुंच चुकी पार्टी को पुर्नजीवित करने की अभिलाषा को संजोए संगठन के प्रांतीय सेनापति की कमान जिस सूर्य प्रताप शाही के हाथों में सौंपी गयी है उनकी पहचान एक हारे हुए योद्धा की है....लूट-खसूट और आतंक के तीन साल
यह उत्तर प्रदेश है! यहाँ ”सर्वजन सुखाय-सर्वजन हिताय“ के खोखले नारे के दम पर बनी मायावती सरकार में सूबे की सियासी गली के गुंडे (सांसद, विधायक) हाथी की पूँछ पकड़कर न सिर्फ ग्राम समाज-नजूल की जमीनों, तालाबों, पाखरों, दलितो के आवंटित पट्टों, कब्रिस्तानों, मंदिरों, आम लोगों के भूमिधरों की जमीनों पर बलात् कब्जा करने का महा अभियान चलाये हुए हैं बल्कि सरकारी विभागों को प्रदेश के विकास के लिए आवंटित धनराशि को भी दीमक की तरह से चाट जा रहे हैं जिससे विकास जमीनी स्तर की बजाए सिर्फ कागजों में ही हो रहा है।...दहेज के मुकदमों में बिक रहे हैं थाने
भारतीय दण्ड संहिता (आई.पी.सी.) 1860 की कुल 511 धाराओं में से एक भी धारा ऐसी नहीं है जो किसी निरपराध व्यक्ति को सामाजिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करने या फिर दण्डित करने की पक्षधर हो, बावजूद इसके इन्हीं आपराधिक धाराओं की आड़ में हमारे देश के खाकी वर्दीधारी पुलिसिया रणबांकुरे जवानों ने ऐसे-ऐसे हथकंडों को अपना कर अपने जौहर का प्रदर्शन किया है कि आई.पी.सी. की इन्हीं आपराधिक धाराओं के तहत देश के लाखों निरपराध - बे-कसूर न सिर्फ सामाजिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं, बल्कि लाखों लोग सालों-साल से जेल के सीखचों के भीतर यातना का दंश भी झेल रहे हैं। कारण सिर्फ एक, इसी भारतीय दण्ड संहिता की आपराधिक धारा एवं पुलिसिया जौहर का नापाक प्रदर्शन!...गजगामिनियों के कारण गर्त में गई भाजपा
उत्तर प्रदेश भाजपा वेटिंलेटर पर है. कहा जाता है कि प्रदेश भाजपा के पतन के लिए कल्याण कुसुम रिश्ते बहुत हद तक जिम्मेदार हैं. लेकिन क्या प्रदेश में अकेले कल्याण कुसुम रिश्ता ही पतन के लिए जिम्मेदार है. प्रदेश भाजपा के तीन बड़े नेता कल्याण सिंह, कलराज मिश्र और राजनाथ सिंह के विवादास्पद रिश्ते हैं. अतीत में भाजपा के इन विवादास्पद रिश्तों की वजह से उत्तर प्रदेश भाजपा ऐसे गर्त में चली गयी है जहां से उसका वापस लौट पाना नामुमकिन है. ...बीबी-बच्चों वाले शंकराचार्य
भारत में हिन्दू धर्म व्यवस्था में शंकराचार्य सर्वोच्च स्थान पर होता है. लेकिन इस पद की गरिमा और शक्ति ने इस शंकराचार्य पदवी को पूरी तरह से शक्ति प्रदर्शन के अखाड़ों में बदल दिया है. आदि शंकर द्वारा भले ही चार पीठ स्थापित किये गये हों लेकिन इस समय दर्जनों शंकराचार्य अपनी धर्म की दुकानदारी चला रहे हैं. विस्फोट.कॉम ऐसे शंकरायार्यों की कलई खोलनेवाली एक विशेष श्रृंखला शुरू कर रहा है जिसकी पहली कड़ी में हम माधवाश्रम के बारे में आपको बता रहे हैं जो कि खुद को ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं. ...पुलिस रिकार्ड में बलात्कारी भी हैं कृपालु महाराज
इस कथित धर्म ध्वजावाहक संत कृपालु महाराज की संतई का भांडा पहली बार मई 1991 में उस समय फूट गया जब इस कथित धर्माचार्य को लड़कियों का अपहरण करने का ही आरोप नहीं लगा बल्कि लड़कियों के साथ जबरिया बलात्कार करने के आरोप भी लगा. इस आरोप में जगतगुरु कृपालु जी महाराज के विश्वश्त सहयोगी प्रिया शरण महाराज को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था।...कामदेव के कलियुगी अवतार: कृपालु महाराज
जरा सोचिए, क्या किसी व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति ब्यभिचारी-बलात्कारी मानसिकता के बीच सम्भव है? विशुद्ध रूप से आध्यात्म के रास्ते पर चलकर क्या करोड़ों-अरबों रूपयों की अचल सम्पत्तियों का अम्बार लगा देना संभव है ? अपने मूल नाम के साथ दस उपमाएँ लगाकर आज तक क्या कोई योग्य बन सका है? अपने को श्रीकृष्ण का अवतार बताकर किसी के साथ बलात्कार करना क्या किसी धर्मात्मा का कार्य हो सकता है? पुत्री समान अपनें ही शिष्याओं के साथ बलात्कार करने वाला बहुरूपिया कपटी संत क्या पूजनीय हो सकता है?...Author info
