सलीम अख्तर
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।
बहुत बड़ा दुखारी है बुखारी
हाल में ही लखनऊ में एक पत्रकार को पीटकर अहमद बुखारी एक बार फिर चर्चा में आ गये. अहमद बुखारी ने लखनऊ में जिस पत्रकार को पीटा वह न तो किसी बड़े अखबार से जुड़ा था और न ही कोई बड़ा नाम था. लेकिन उस पत्रकार ने सवाल बड़ा किया था जिससे बौखलाकर बुखारी ने उसकी पिटाई कर दी थी. बुखारी का चरित्र यही रहा है कि वे हमेशा छोटे लोगों पर ही हाथ डालते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं....उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का आतंक
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव चल रहे हैं. इन चुनावों को नजदीक से देखने और जानने की जरूरत है. दो चरण पूरे हो चुके हैं। तीसरा और अन्तिम चरण 20 अक्टूबर को पूरा हो जाएगा. जब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी हुई तो मेरठ के एक पॉश इलाके में बसपा कार्यालय पर बसपा के समर्थन से चुनाव लड़ने वाले इच्छुक लोगों की भीड़ लगी थी। महंगी लग्जरी गाड़ियों का रैला था। गाड़ियों में सवार हष्टपुष्ट आदमी थे। कुर्ता-पायजामा की जगह झक सफेद पेंट-शर्ट के साथ सफेद जूते में दिखनेवाले नेता हमें माफियाओं के आस पास होने का आभास दे रहे थे. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का आंतक के शुरूआत की घोषणा हो चुकी थी. ...आडवाणी जी "कलंकयात्रा'' थी आपकी रथयात्रा
लालकृष्ण आडवाणी का यह कहना कि अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले से उनकी रथ यात्रा सार्थक साबित हुई है, उन हजारों मुसलमानों और हिन्दुओं के जख्मों पर नमक छिड़का है, जो उनकी रथयात्रा के चलते प्रभावित हुए थे। आडवाणी का यह बयान उन मुसलानों को भी आहत करने वाला है, जो यह सोचते हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अंतिम मानकर अब अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो जाना चाहिए। ऐसा चाहने वाले मुसलमानों के दिल में यह बात आ सकती है कि नहीं, सुप्रीम कोर्ट तक लड़ा जाना चाहिए। पता नहीं कैसे आडवाणी अपनी रथयात्रा को सार्थक बता रहे हैं। सच तो यह है कि आडवाणी की वह रथयात्रा इस देश पर एक कलंक और एक तरह से 'खूनी यात्रा' थी।...मुसलमान ने मान ली यह बात, मंदिर मस्जिद हो साथ-साथ
अयोध्या में रामजन्मभूमि बाबरी विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सेन्ट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कर रहा है. लेकिन क्या अब इसका कोई औचित्य है? सलीम सिद्दीकी मानते हैं कि देश का एक बड़ा मुस्लिम वर्ग अब हाईकोर्ट के फैसले को ही अंतिम मानकर इस विवाद का पटाक्षेप चाहता है ताकि भारतीय जनता पार्टी जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को और अधिक राजनीतिक फायदा न मिले. ...एक बार फिर आग लगाने की कोशिश
भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी एक बार फिर राम नाम का सहारा लेकर मैदान में उतर गए हैं। यह अच्छा हुआ कि बाबरी मस्जिद विवाद के मालिकाना हक का फैसला कुछ दिन के लिए टल गया है। अब समझ आ गया है कि भाजपा की चुप्पी दरअसल घात लगाने की मुद्रा भर थी। फैसला आते ही उसकी हरकतें नब्बे के दशक जैसी हो जाती और देश को एक बार फिर साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की नाकाम कोशिश की जाती। अब राममंदिर मुद्दे को दोबारा सड़कों पर लाने की बात करके भाजपा न्यायपालिका को ब्लैकमेल करना चाहती है।...हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए परीक्षा की घड़ी होगी 24 सितंबर
बाबरी मस्जिद बनाम राममंदिर के मालिकाना हक के 24 सितम्बर को आने फैसले को रोकने के लिए रिट याचिकाएं हाईकोर्ट ने रद्द करके सही किया है। अदालत से बाहर इस मसले का निपटारे असम्भव हो चला है। जब फैसला आने में महज एक सप्ताह ही रह गया है तो इस पर यह कहना कि अदालत से बाहर हल निकालने का समय दिया जाना चाहिए, बैमानी ही नहीं बल्कि मसले को लटकाए का रखने का प्रयास भी था। सवाल यह है कि फैसले की तारीख की घोषणा होते ही फैसला रुकवाने की कवायद क्यों की गयी ?...अखबार ही बिगाड़ रहा है शहर की फिजा
'हिन्दुस्तान' के मेरठ संस्करण ने 4 सितंबर को एक खबर बड़ी प्रमुखता से प्रकाशित किया है. 'बिगड़ते-बिगड़ते बची शहर की फिजा, तनाव' शीर्षक से छपी इस खबर में एक छोटी सी झड़प को सांप्रदायिक रंग दे दिया गया है. हालांकि इस खबर को अन्य अखबारों ने इस तरह नहीं छापा है लेकिन मेरठ के अखबारों में महीने में इस तरह की तीन-चार खबरें जरुर छपती हैं।...मुसलमान ही सुलझाएं अयोध्या विवाद
अयोध्या विवाद के संभावित फैसले पर मुझे झटका तब लगा, जब मेरे एक दोस्त की पन्द्रह साल की बेटी का एक एसएमएस मिला। एसएमएस में लिखा था- 'बाबरी मस्जिद का फैसला आने वाला है। दुआ कीजिए कि फैसला मुसलमानों के हक में हो। इस एसएमएस को अपने मुसलिम भाईयों को फॉरवर्ड करें।' इस बात का मतलब यह है कि अयोध्या फैसले की सुरसराहट उन बच्चों में भी हो गयी है, जिन्होंने 1992 के बाद दुनिया देखी है। ...एक खेल इंसानियत के खिलाफ
कॉमन वेल्थ गेम की तैयारियों में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए भावुकता और देशभक्ति का सहारा लिया जा रहा है। कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला कहते हैं कि 'भ्रष्टाचार की बात करने से पहले सबसे ज्यादा जरुरी है कि सब मिल जुल कर खेलों को कामयाब बनाने के लिए जुट जाएं। कॉमन वेल्थ गेम देश की इज्जत का सवाल है। खेल कामयाबी के साथ सम्पन्न हो जाएं तो फिर भ्रष्टाचार की बात भी होगी'।...Author info
