समीर चौगांवकर
उमा की वापसी पर भाजपा में भीषण उठापटक
उमा भले वापस न आयीं हों लेकिन भाजपा में भूचाल आ चुका है. भाजपा मे उमा भारती के वापसी को लेकर जितनी उठापटक, जितने दांवपेच एवं जितनी राजनीति एवं जितनी अनुशासनहिनता चल रही है वह शायद ही किसी भी दल में किसी भी नेता की वापसी को लेकर हुई हो. उमा की वापसी पर भाजपा के अंदर जोड़-तो़ड़ चरम पर है.
नितिन गडकरी को भारी पड़ रहा है महाराष्ट्रवाद
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अपनी टीम मे महाराष्ट्र को उचित प्रतिनिधित्व देने के साथ साथ कई नेताओं के साथ अपना दोस्ताना भी निभाया है। लेकिन अब यही दोस्ताना नितिन गडकरी के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। नितिन गडकरी ने जिन लोगो को महाराष्ट्र से राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए लिया है उनमे से ज्यादातर नेता अब राज्यसभा मे जाने के लिए जुगाड बिठा रहे है। ...संघ की मजबूरी है, भाजपा बहुत जरूरी है
आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि भारतीय जनता पार्टी के िलए संघ सबसे बड़ी मजबूरी है. अगर संघ का साथ छूट जाए तो भाजपा मटियामेट हो जाएगी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब संघ भाजपा की मजबूरी नहीं है बल्कि भाजपा संघ की मजबूरी बन चुका है. संघ नेतृत्व भाजपा के जनाधार को संघ कार्य के लिए इस्तेमाल करना चाहता है इसलिए भारतीय जनता पार्टी पर अपनी पूरी पकड़ चाहता है. समीर चौंगावकर का विश्लेषण-...'छोटे' गांधी बने भाजपा के बड़े संकट
भाजपा के युवा तुर्क वरुण गांधी भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की हड्डी बन गये हैं. दो एक दिनों में भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा होनेवाली है और वरुण गांधी को लेकर भाजपा और संघ में जबर्दस्त उहापोह की स्थिति बनी हुई है. संघ का दबाव है कि उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए लेकिन भाजपा में एक वर्ग ऐसा है जो वरुण गांधी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के सवाल पर विद्रोह के मूड में है....चाचा ठाकरे के करीब आ रहे हैं भतीजे राज
भिवण्डी की इस सीट ने प्रदेश मे एक नए राजनैतिक समीकरण एवं गठबंधन की सम्भावनाओं को जन्म दे दिया है। राज ठाकरे एव बाल ठाकरे दोनो इस बात को समझ गए है कि आपसी लडाई के चलते दोनो कभी भी सत्ता प्राप्त नही कर सकेगे और मनसे और शिवसेना के झगडे में कांग्रेस हमेशा सत्ता की मलाई खाती रहेगी। विश्वस्त सूत्रो की माने तो राज ठाकरे एवं बाल ठाकरे के बीच शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी सेतु का काम कर रहे हैं। इन्ही नेता की सलाह पर राज ठाकरे ने भिवण्डी से अपना उम्मीदवार नही उतारा था।...अनिल अंबानी के करीब पहुंचे प्रभु चावला, छोड़ सकते हैं आज तक
इण्डिया टुडे और आजतक के संपादक प्रभु चावला जल्दी ही आज तक से किनारा करने वाले है। देश के बड़े पत्रकारों में शामिल प्रभु चावला जल्द ही आज तक से नाता तोड़कर अनिल अम्बानी के चैनलों का जिम्मा सम्भालने का मन बना चुके है। प्रभु चावला को आज तक से तोड़कर अनिल अम्बानी के मीडिया हाऊस से जोड़ने का जिम्मा अमर सिंह निभा रहे है।...अब कांग्रेस का आपला मानुस
कॉग्रेस हाईकमान को महाराष्ट्र के दो नेताओं ने परेशानी में डाल दिया है। कॉग्रेस की महाराष्ट्र में सहयोगी राष्ट्रवादी कॉग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार द्वारा चीनी की कीमतों एक दूध के सम्बध में दिए गए व्यक्तव्यों ने केन्द्र सरकार को बुरी तरह परेशानी मे डाल दिया वही दूसरी तरह महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले ने कि मुम्बई मे अब टैक्सी चलाने के लाइसेंस सिर्फ उन्ही लोगो को दिए जाएगे जो मराठी लिखना व पढ़ना जानते है।...अलग विदर्भ का बेवजह संदर्भ
पृथक तेलगाना कि मांग स्वीकार होते ही विदर्भ के सोए हुए नेताओं को अचानक विदर्भ प्रेम जाग गया है। सालों से पृथक विदर्भ की मांग अंतिम सासें ले रही थी, परंतु तेलगांना ने अचानक इसमे उत्साह का संचार कर दिया है यही कारण है कि सालो से विदर्भ की उपेक्षा पर आंख मूदकर बैठने वाले नेता अब सक्रिय हो गए है। और इस मुद्दे पर अब विभिन्न पार्टियों के नेताओं में एक राय भी बनती नजर आ रही है।...गड़करी के सवाल पर संघ में भी गड़गड़ाहट
भाजपा के भावी अध्यक्ष बताए जा रहे नितिन गड़करी को लेकर संघ के भीतर मतभेद उभर आये हैं. संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत जहां गड़करी को अध्यक्ष बनाए जाने पर अडिग हैं वहीं संघ के निचली जमात के नेताओं में कुछ ऐसे भी नेता हैं जो गड़करी की ताजपोशी पसंद नहीं कर रहे हैं. इसमें सबसे प्रमुख नाम सुरेश सोनी का है जो कि संघ के सह सरकार्यवाह हैं और संघ के राजनीतिक मामलों को देखते हैं. खबर है कि सोनी गड़करी को अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नहीं मानते हैं इसलिए वे इस निर्णय का अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं. ...कांग्रेस ने शुरू किया मिशन मुंबई महापौर
राज्य सरकार के गठन के बाद अब कॉंग्रेस मिशन महापौर के लिए कमर कस चुकी है। राज्य सरकार के गठन को लेकर जितनी उठापटक नही हुई उससे ज्यादा उठापठक राजनैतिक दाव पेच इस माह के अन्त मे होने वाले मुम्बई महानगर पालिका के महापौर के चुनाव को लेकर है।...Author info
