संजय स्वदेश
चुंबक से चिपकी जिंदगी
सरकारी विकास और शिक्षा के प्रसार के तमाम दावों के बावजूद देश में कई समाज ऐसे हैं जिन पर आज भी शिक्षा और विकास की छाया की दरकार है। लोग पुश्तैनी पेशे से जुडे हुए हैं। संतरानगरी नागुपर मे भी एक समुदाय ऐसा ही है। हाथ में लकडी का घमेला, लोहे की कांटेनुमा सलाख, झाडू, ब्रश, लोहे का तवा इसी के साथ चार या पांच फुट का एक लोहे का बार जिसमें लगा बडा सा गोल चुंबक।यह सोनझरी समाज है।
एचआईवी एड्स का सच और सवाल
दिसंबर माह में एड्स दिवस धूमधाम से मनाया गया। कई दिनों विशेष प्रचार अभियान हुई। जॉच के लिए विशेष कैंप लगे। अब प्रचार अभियान सामान्य गति से चल रहा है। लेकिन जितना हो हल्ला एड्स को लेकर किया जाता रहा है, ऐसा प्रभावशाली अभियान उन दूसरी बीमारियों के खिलाफ नहीं चलाया गया है जिससे हर साल लाखों लोग मरते हैं। इन बीमारियों से मरने वाले लागों की संया एड्स से मरने वाले लोगों से कई गुना ज्यादा है। टी.वी. कैंसर, हैजा, मलेरिया आदि बीमारियां से आज भी करोड़ों लोग मर रहे है।...Author info
