संजय स्वदेश
हे गांव विकणे आहे
इटारसी से नागपुर रेलमार्ग पर तुमसर नाम का एक छोटा-सा रेलवे स्टेशना है। यह विदर्भ के भंडारा जिले में आता है। विकास की दृष्टि से पिछड़े तुमसर तहसील के एक छोर पर बसे आदिवासी बहुल ग्राम सक्करधरा के नागरिकों में मायूसी है। लोकतंत्र के महापर्व आम चुनाव में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। हर चेहरा मायूस है। कहीं खुशी की लहर नहीं है।
'फ्री सेक्स' के फंदे में फंसा नक्सलवाद
कभी सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ युद्ध के नाम पर शुरू हुआ नक्सली आंदोलन अपने ही संगठन में फ्री सेक्स के भंवर में फंस गया है। सामंतों के महिलाओं पर यौन उत्पीड़न की जो घटनाएं पहले सुनी जाती थी, आज वैसा ही कुछ नक्सली संगठन में शामिल महिलाओं के साथ हो रहा है। वे अपने ही साथियों की हवस का शिकार हो रही है। या यूं कहें तो नक्सली आंदोलन के कार्यकर्ता हवस की आग में जल कर अपने ही महिला साथियों से जबरदस्ती सेक्स की भूख मिटा रहे है। संगठन की महिलाएं मजबूर है, न विरोध कर पाती हैं और न हीं संगठन छोड़ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की हिम्मत जुटा पा रही है। ...राशन की दुकान पर नहीं हुआ 'भारत निर्माण'
देश में उचित दर राशन के दुकानों की कुल संख्या 4,97,715 है. इनमें से पिछले तीन सालों में 76,249 राशन की दुकानों का लाईसेंस या तो निलंबित कर दिया गया या स्थाई रूप से रद्द कर दिया गया. सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री ने पिछले दिनों खुद संसद में इस आशय की जानकारी देते हुए कहा था कि इन तीन सालों में कुल 13,348 लोगों को गिरफ्तार किया गया, मुकदमा चला और दण्डित किया गया. सरकार जनता के सामने अपने काम काज का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन सरकार के अपने आंकड़े ही यह बताते हैं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आज भी किस कदर भ्रष्टाचार मौजूद है और आम आदमी को उचित दर पर राशन भी मुहैया नहीं है. ...Author info
