संजय तिवारी
भारतीय पत्रकारिता के महात्मा गांधी
किसी को महात्मा गांधी कब कहना चाहिए यह जानने से पहले हमें यह जानना चाहिए कि महात्मा गांधी होने का अर्थ क्या है? मेरी समझ में समकालीन भारतीय संदर्भ में महात्मा गांधी का अर्थ वह सागर है जिसमें सभी धाराएं आकर समाहित हो जाती हैं. इसी अर्थ में प्रभाष जोशी हिन्दी पत्रकारिता के महात्मा गांधी हैं.
हिन्दी 'नीचता' बनाम अंग्रेजी 'श्रेष्ठता' की लड़ाई
अभी एक दो दिन पहले ही किसी ने यह सवाल पूछा था कि क्या हिन्दी अखबार सिर्फ इसलिए राष्ट्रीय मान लिए जाएं क्योंकि वे सर्कुलेशन में सबसे अधिक हैं? मुश्किल सवाल है लेकिन एक किला तो हिन्दी पत्रकारिता ने फतेह किया ही है. सर्कुलेशन के लिहाज से हिन्दी के अखबार अब देश ही नहीं दुनिया के सबसे अधिक प्रसारित अखबारों में अव्वल हैं. ...जया से जुदा हुए जार्ज
आजकल समाजवाद नित नयी विडंबनाओं से दो चार हो रहा है. लेकिन इन विडंबनाओं के बीच जार्ज के समर्थकों के लिए अच्छी खबर भी आयी है. आखिरकार जया और जार्ज की जोड़ी बिछुड़ गयी है. जार्ज फर्नांडीज से जया जेटली ने एक दूरी बना ली है और जार्ज भी जया जेटली से दूर हरिद्वार में अपना इलाज करवा रहे हैं. ...हमारा शहर, उनकी परिवहन व्यवस्था
वी शांताराम और बी राजाराम दोनों नाम सुनने में एक दूसरे के सगे संबंधी जैसे लगते हैं. लेकिन ऐसा है नहीं. वी शांताराम जो सपने देखते थे उसे फिल्म की एक पट्टी पर उतार देते थे और फिर उस सपने का पूरा जहां दीदार करता था. बी राजाराम के साथ ऐसा नहीं है. उन्होंने भी एक सपना देखा था लेकिन उससे हम शायद ही कभी दो चार हो पायें....बीस बरस बाद भी हजार कोस दूर
पूरी कश्मीर घाटी में पिछले दो हफ्ते से जमात-ए-इस्लामी द्वारा गठित हिजबुल मुजाहीदीन जमकर कत्लेआम कर रहा है. राज्य सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला पूरी तरह से नकारा साबित हो चुके हैं. ऐसे ही वक्त में 19 जनवरी 1990 को कश्मीर में बतौर राज्यपाल जगमोहन का प्रवेश होता है. ...'मुझे धक्के मारकर भगाओ, तब जाऊंगा'
अमर सिंह अड़ गये हैं. कह रहे हैं कि पार्टी नहीं छोड़ेंगे. रविवार को मुलायम सिंह यादव से बात हुई तो अपनी नाराजगी दिखाई. कहा सैफई नहीं आऊंगा नेताजी. इन्कार से ज्यादा इसमें मनुहार की तमन्ना थी. लेकिन नेताजी ने भी ज्यादा जोर नहीं डाला. उल्टे सोमवार को बयान दे दिया कि अमर सिंह इतिहास हो गये हैं. ...पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले हुआ राजभवन
नई दिल्ली। गणतंत्र होने के साठ साल बाद भी भारत की राजनीति में यह सवाल उलझा ही हो कि राजभवन में राज्यपाल हो न कि राजनीतिज्ञ. कांग्रेस ने इस सवाल का नायाब हल खोज निकाला है. उसने देश के राजभवनों में अपने मनपसंद और चुनिंदा खुफिया अधिकारियों और प्रिय नौकरशाहों को बैठा दिया है. ...गूगल हलाकान, अमेरिका परेशान
दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट बाजार और दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन के बीच खटपट हो गयी है. भले ही खबरें आज आ रही हों लेकिन चीन में गूगल के लिए 2006 से ही संकट शुरू हो गये थे और 2009 की शुरूआत में तो चीन ने उसे ऐसा झटका दिया था जिससे गूगल का रहा सहा सर्च कारोबार भी सिमट गया. ...नेशनल गेम होने का नेशनल शेम
भारतीय मीडिया जगत में आखिरी बार हॉकी का जिक्र तब हुआ था जब भारतीय हॉकी पिछले साल अप्रैल में भंग कर दिया गया था. फेडरेशन के अध्यक्ष पर गुण्डई के इतने आरोप लगे कि भारतीय ओलंपिक संघ ने इस संस्था को ही ध्वस्त कर दिया. इसके बाद न हॉकी का कभी जिक्र हुआ और न उसके खिलाड़ियों का. ...अमर मुलायम का मजबूत जोड़ है, टूटेगा नहीं!
छोटे भैया अमर पर आखिरकार मुलायम की मेहर हो गयी. मुलायम सिंह ने कह दिया कि "हमारा उनका ऐसा रिश्ता है कि अलग होने का सवाल ही नहीं उठता." बड़े भैया जरा देर से बोले लेकिन बोले वही जो अमर सिंह चाहते थे. इस्तीफे के बाद अमर सिंह दुखी थे कि अभी तक नेताजी ने कुछ बोला नहीं है....मुकेश अंबानी और मार्क अमेस
मुकेश अंबानी को आप सब जानते हैं. अब शायद मार्क अमेस को भी जान गये होंगे. अमेरिका की एक वेबसाइट में लिखनेवाले पत्रकार मार्क अमेस ने आज से चार महीना पहले एक ब्लाग पोस्ट लिखा था. ब्लाग पोस्ट में उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की हत्या में अंबानी बंधुओं की ओर शक की सूई घुमाई थी....Author info
