सुरेश चिपलूणकर
हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'
हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है.
कुठियाला पर 'सिंहों' का कुठाराघात
भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विभाग में आजकल हंगामा बरपा है। हंगामा दो ‘सिंहों’ - श्रीकांत सिंह और पुष्पेन्द्रपाल सिंह के कारण है। इसके लिए दोनों ने अपनी अक्ल और शक्ल का भरपूर फायदा उठाया। व्यक्तिगत स्वार्थ को साधने के लिए ‘बेचारे कर्मचारियों’ को बलि का बकरा बनाया गया। अध्यापक और अधिकारियों की लडाई में फंसे कर्मचारी अब तड़फड़ा रहे हैं, क्योंकि कुलपति प्रो. कुठियाला के खिलाफ आग भड़काने वाले पर्दे के पीछे से खेल खेल रहे हैं। अब कर्मचारी इस बात से छला महसूस कर रहे हैं कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है।...लालू की करनी पर नीतीश की भरनी
हाल में ही बिहार की विधानसभा में जो कुछ हुआ उसने लोकतन्त्र को शर्मिन्दा तो किया ही है, लेकिन लोकतन्त्र भी अब ऐसी शर्मिन्दगी बार-बार झेलने को अभिशप्त है, और हम सब इसके आदी हो चुके हैं। बिहार विधानसभा में लालूप्रसाद और कांग्रेस ने जो हंगामा और तोड़फ़ोड़ की उसके पीछे कारण यह दिया गया कि महालेखाकार एवं नियंत्रक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि सन् 2002 से 2007 के बीच शासकीय कोषालय से करोड़ों रुपये निकाले गये और उनका बिल प्रस्तुत नहीं किया गया।...स्विस बैंक में सेंध और भारत की भूमिका
भारत के करोड़ों ईमानदार टैक्सदाताओं और नागरिकों के लिये यह एक खुशखबरी है कि फ़्रांस के HSBC बैंक के दो कर्मचारियों हर्व फ़ेल्सियानी और जॉर्जीना मिखाइल ने दावा किया है कि उनके पास स्विस बैंकों में से एक बैंक में स्थित 180 देशों के कर चोरों की पूरी डीटेल्स मौजूद हैं। 2 साल से इन्होंने लगातार यूरोपीय देशों की सरकारों को ईमेल भेजकर "टैक्स चोरों" को पकड़वाने में मदद की पेशकश कर रखी है। जर्मनी की गुप्तचर सेवा को भेजे अपने ईमेल में इन्होंने कहा था कि ये लोग स्विटज़रलैण्ड स्थित एक निजी बैंक के महत्वपूर्ण डाटा और उस कम्प्यूटर तक पुलिस की पहुँच बना सकते हैं।...महाघोटाले का 'महा'राजा
2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में दिल्ली के एक अखबार और एक पत्रिका में कवर स्टोरी बनने के बाद मीडिया ने लगभग पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है. मीडिया इस भ्रष्टाचार पर जानबूझकर रिपोर्ट नहीं कर रहा है. लेकिन सुरेश चिपलूणकर इस मामले की खोजबीन कर रहे हैं. यहां प्रस्तुत है उनकी खोजबीन का पहला हिस्सा....खदानों में हाथ डालिये, कोड़ाओं और रेड्डियों जैसे खरबपति मिलेंगे
आप एक फावड़ा लीजिए. किसी आदिवासी इलाके में जाइये. वहां की अपेक्षाकृत कठोर धरती पर फावड़ा चलाइये. आपको हर ओर रेड्डियों और कोड़ाओं की अमूल्य धरोहर मिल जाएगी. हो सकता है आपको यह मजाक लगता हो लेकिन इस देश में राजनीति की एक नयी विधा विकसित हो गयी है. खदान की राजनीति. राजनीति के शिखर पर पहुंचने की ललक आम जन के लिए काम करना तो शायद कभी नहीं रहा लेकिन अब ऐसे राजनीतिज्ञों की भरमार होती जा रही है जो निजी प्रतिष्ठा के लिए नहीं बल्कि निजी फायदे के लिए राजनीति के शीर्ष पर पहुंचना चाहते हैं. मधु कोड़ा और जनार्दन रेड्डी इसी बात की नजीर पेश कर रहे हैं....बीएस येदुरप्पा: धराशायी होता जमीन का एक और नेता
दक्षिण में पहली बार भाजपा का खिला हुआ कमल दो भाईयों की लालच, और सत्ता की प्यास की वजह से खतरे में पड़ गया है। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में चल रही राजनैतिक उठापटक में "दक्षिण के मोदी" कहे जा रहे बीएस येद्दियुरप्पा की कुर्सी डांवाडोल हो रही है। इस कुर्सी को हिलाने के पीछे हैं "बेल्लारी के बेताज बादशाह" कहे जाने वाले रेड्डी बन्धु। करुणाकरण रेड्डी सरकार में राजस्व मंत्री हैं, उनके छोटे भाई जनार्दन रेड्डी पर्यटन मंत्री हैं जबकि तीसरे भाई सोमशेखर रेड्डी भी विधायक हैं। कर्नाटक में चल रहे राजनैतिक घटनाक्रम में फ़िलहाल केन्द्रीय नेतृत्व ने भले ही मुख्यमंत्री येद्दियुरप्पा को अपना समर्थन दे दिया हो, लेकिन दोनों रेड्डी बन्धु कभी भी "येद्दि" की पीठ में छुरा घोंप सकते हैं।...मदुरै का कर्मठ महात्मा
मदुराई के एक युवक एन कृष्णन ने वह कर दिखाया जो कई लोग या तो सोच ही नहीं पाते, अथवा सिर्फ़ सोचकर रह जाते हैं। मदुरै का यह कर्मठ महात्मा, पिछले सात साल से रोज़ाना दिन में तीन बार शहर में घूम-घूमकर ऐसे रोगियों, विक्षिप्तों और बेसहारा लोगों को खाना खिलाता है। मात्र 30 वर्ष की उम्र में "अक्षयपात्र" नामक ट्रस्ट के जरिये वे यह सेवाकार्य चलाते हैं।...अफजल खान से अफजल गुरू तक
हाल ही में सम्पन्न गणेश उत्सव के दौरान मुम्बई में "अफ़ज़ल गुरु और कसाब को फ़ाँसी कब दी जायेगी?" का सवाल उठाते हुए, कुछ झाँकियों और नाटकों में इसका प्रदर्शन किया गया। वैसे तो यह सवाल समूचे देश को मथ रहा है, लेकिन मुम्बईवासियों का दर्द ज़ाहिर है कि सर्वाधिक है, इसलिये गणेशोत्सव में इस प्रकार की झाँकियाँ होना एक आम बात थी, इसमें भला किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? लेकिन नहीं साहब, "सेकुलरिज़्म" के झण्डाबरदार और "महारानी की गुलाम" महाराष्ट्र सरकार की वफ़ादार पुलिस ने ठाणे स्थित घनताली लालबाग गणेशोत्सव मण्डल को धारा IPC 149 के तहत एक नोटिस जारी करके पूछा है कि "मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली अफ़ज़ल गुरु की झाँकियाँ क्यों निकाली गईं?"।...स्वाइन फ़्लू के असली सौदागर
जबसे स्वाइन फ़्लू का “सुपर हौवा” मीडिया ने खड़ा किया है और उसके बाद लोगबाग हिसाब किताब लगाने लगे हैं कि आखिर इस “डराने वाले खेल” में कौन कितना कमा रहा है, कोई बता रहा है कि 10 रुपये का मास्क 200 रुपये में बिका, किसी ने बताया कि निजी अस्पताल विभिन्न टेस्ट के नाम पर लूट रहे हैं, डॉक्टरों के यहाँ भीड़ लगी पड़ी है और उन्हें नोट गिनने से ही फ़ुर्सत नहीं है… लेकिन शायद आपको पता नहीं होगा कि इस बीमारी के नाम पर डरा-धमकाकर भारत में जितनी और जैसी भी कमाई हो रही है वह “चिड़िया का चुग्गा” भर है।...Author info
