उमाशंकर मिश्र
गैरसरकारी पर सवाल कितना जरूरी?
महात्मा गांधी ने ग्रामीण विकास में स्वयंसेवी प्रयासों की भूमिका को यह कहकर प्रोत्साहित करने का प्रयास किया था कि ‘राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक दायित्व’ भी आवश्यक है।’ हम भले ही राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल कर चुके हों, लेकिन विडंबना ही कहा जायेगा कि परोपकार का जो काम कभी भारतीय समाज में नैतिक जिम्मेदारी समझ कर किया जाता था आज वह संगठित जरूर है, लेकिन कई किस्म की विकृतियां उसमें घर गई हैं और अब इसमें सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।
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