Vasudha Mehta
हर तरफ इंसान है, तबाही है
इंसान जानवरों के साथ क्या क्या ज्यादतियां नहीं करता..मिसाल के तौर पर शरीर पर लगाये जाने वाले प्रसाधनों के लिए उनको पीड़ित करना या फिर बूचड़खाने में एक जानवर को दूसरे जानवर की आँखों के सामने बेदर्दी से मार देना, उसका चमड़ा निकालना, मुर्गों, सांप-नेवले की जानबूझकर ज़बरदस्ती लडाइयाँ करवाना- ऐसे खेलों पर शर्तें लगा पैसे ऐंठना, बन्दर-सांप-भालू के करतब दिखाना, तेल के लिए जीवित सांडे/छिपकली को उबलते पाने में जीवित डाल देना. इंसान अपने स्वार्थ, मनोरंजन या ज़रुरत के लिए पशुओं का ऐसी ही बेदर्दी और बेशर्मी से उत्पीडन आखिर कब तक करता रहेगा? वसुधा मेहता की अपील-
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